अगर वाकई क़ुरआन और सहीह हदीस से मज़ार बनाना, उर्स मनाना, और वहाँ फ़ातिहा करके खुद खाना और लोगों को खिलाना साबित है, तो फिर या तो मैंने क़ुरआन और हदीस को सही तरह से पढ़ा और समझा नहीं, या फिर मैंने दीन उन लोगों से सीखा है जो शिर्क और बिदअत की तरफ़ दावत देते हैं। 🤔
अल्लाह के वली का मज़ार बनाना पूरी तरह जायज़ है। इसमें कोई शक नहीं है। यह हदीस और क़ुरआन से पूरी तरह साबित है। मज़ार पर जाना, वहां फ़ातिहा पढ़ना ये भी जायज़ है, बल्कि सबाब का काम है। सभी को जाना चाहिए। अल्लाह के वली की दरगाह से फैज़ हासिल करना चाहिए। 1/3
#assalamualukum
10 दिनों वाले हुसैनी न बनें, बल्कि 365 दिन वाले हुसैनी बनें
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याद रखिए, हज़रत इमाम हुसैन (रज़ि.) की ज़िंदगी और उनकी शहादत केवल मुहर्रम के दस दिनों तक याद करने के लिए नहीं है, बल्कि उनके बताए हुए रास्ते पर पूरे साल, बल्कि पूरी ज़िंदगी चलने के लिए है। सच्चा हुसैनी वह नहीं जो केवल कुछ दिनों तक जज़्बाती होकर मातम करे, क्योंकि मातम करना हराम है, बल्कि वह है जो हर दिन अपने किरदार, अपने अमल और अपनी इबादतों में हुसैनियत को ज़िंदा रखे।
हुसैनियत ढोल-बाजे बजाने में नहीं है, न ही मातम करने में है। हुसैनियत अपने जिस्म को तकलीफ़ देने, ताज़ियादारी करने, शेर-भालू बनने या आग पर चलने का नाम नहीं है।
ये सभी काम हुसैन (रज़ि.) के मक़सद और उनकी क़ुर्बानी के असली पैग़ाम को नहीं दर्शाते। क्योंकि रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने मातम करने को मना फ़रमाया और ना ही हुसैन रज़ियल्लाहु अन्हु ने मातम का हुक्म दिया।
असल हुसैनियत तो अल्लाह की फ़रमांबरदारी में है।
हुसैनियत पाँचों वक्त की नमाज़ों की पाबंदी करने में है। हुसैनियत नेक अमल, अच्छे अख़लाक़ और लोगों के साथ भलाई का व्यवहार करने में है। हुसैनियत क़ुरआन और सुन्नत को मज़बूती से थामने और उसी के मुताबिक़ अपनी ज़िंदगी गुज़ारने में है।
हुसैनियत गुनाहों से बचने में है, हर उस काम से दूर रहने में है जो अल्लाह को नापसंद हो। हुसैनियत शिर्क से बचने में है, क्योंकि तौहीद ही तमाम अंबिया का पैग़ाम रहा है।
हुसैनियत बिदअत और दीन में नई-नई चीज़ें शामिल करने से बचने में है। हुसैनियत नबी करीम ﷺ की शरीअत की पूरी पाबंदी करने और उनके बताए हुए रास्ते पर चलने में है।
अगर हम हक़ीक़त में इमाम हुसैन (रज़ि.) से मोहब्बत करते हैं, तो हमें अपनी ज़िंदगी को अल्लाह और उसके रसूल ﷺ की इताअत के मुताबिक़ बनाना होगा। यही सच्ची हुसैनियत है, और यही वह रास्ता है जो इंसान को दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी देता है।
इसलिए केवल 10 दिनों के नहीं, बल्कि 365 दिनों के हुसैनी बनिए।
Hello PM @narendramodi, This is your Minority leader doing press conference and openly asking 120 crore Hindus to boycott Indian Muslims in Private Jobs and Govt jobs. Not one News Channel stopped her and called her out for spreading hate. That's how normalised it is to spread hate in India. Not just right wing associations, but BJP is openly giving out a press statement asking Hindus to economically and socially boycott Muslims and the media isn't bothered, instead, they are happy to amplify her.