ट्रेड टेस्ट खत्म होने के बाद भी RSSB वाहन चालक भर्ती के युवा आज भी बेरोजगार बैठे हैं। भर्ती के सारे चरण पूरे हो चुके हैं, फिर अंतिम परिणाम में देरी क्यों? जल्द से जल्द मेरिट लिस्ट जारी कर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की जाए।
@alokrajRSSB@BhajanlalBjp#Rajasthan_Driver_Result
ट्रेड टेस्ट खत्म होने के बाद भी RSSB वाहन चालक भर्ती के युवा आज भी बेरोजगार बैठे हैं। भर्ती के सारे चरण पूरे हो चुके हैं, फिर अंतिम परिणाम में देरी क्यों? जल्द से जल्द मेरिट लिस्ट जारी कर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की जाए।
@alokrajRSSB@BhajanlalBjp#Rajasthan_Driver_Result@advcrg
आदरणीय @sharatjpr जी, राजस्थान में चल रही चतुर्थ श्रेणी भर्ती मैं 1 साल वेटिंग नियम लागू करवाने हेतु युवाओं की इस मांग को मुख्यमंत्री तक पहुंचाओ l जन्मदिन मुबारक हो l 🙏
🎂 युवाओं के प्रेरणास्रोत और निष्पक्ष पत्रकारिता के सशक्त हस्ताक्षर,
आदरणीय श्री शरत कुमार जी (@sharatjpr) को जन्मदिवस की अनंत शुभकामनाएँ!
💪 चतुर्थ श्रेणी भर्ती में 'One Year Waiting Rule' के लिए
आपके द्वारा किए गए शानदार प्रयास के लिए युवा वर्ग सदैव आभारी रहेगा
#OneYearWaiting
आदरणीय @sharatjpr जी, राजस्थान में चल रही चतुर्थ श्रेणी भर्ती मैं 1 साल वेटिंग नियम लागू करवाने हेतु युवाओं की इस मांग को मुख्यमंत्री तक पहुंचाओ , हमें पूरा भरोसा है है कि आपके द्वारा किया गया प्रयास एक दिन जरूर रंग लायेगा , आपको आपका जन्मदिन मुबारक हो l 🙏🙏🎉
निकाय चुनाव में सरकार की मदद नहीं करने वाले दर्जनों अधिकारियों पर गिरी गाज।
सरकार ने संगठन और प्रशासन से रिपोर्ट लेकर कई पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को निपटाया।
एक ईमानदार पुलिस अधिकारी…
डिप्टी SP… बुद्धाराम बिश्नोई…
बाड़मेर के निकाय चुनावों का समय चल रहा था…
नामांकन वापसी का दिन था…
पावर सेंटर स्वरूप सिंह ने SDM ऑफिस में घुसने का प्रयास किया…
लेकिन बुद्धाराम जी ने रोक लिया…
समय समाप्त हो चुका है, आप ना तो प्रत्याशी हैं और ना अधिकारी…
मैं आपको अंदर नहीं जाने दे सकता…
दोनों के बीच heated argument हुआ…
और कल बुद्धाराम जी का बाड़मेर से तबादला हो गया…
इससे पहले बुद्धाराम जी पोकरण थाने में कार्यरत थे…
वहाँ भी नेताओं की अनैतिक माँगे ना मानने की वजह से…
महीने भर में ट्रांसफ़र हो गया…
पिछले तीन सालों में दर्जन भर ट्रांसफ़र झेल चुके हैं…
लेकिन नियमों से इतर जाकर कोई काम नहीं किया…
आज से पन्द्रह साल पहले इसी बाड़मेर थाने में एक हिस्ट्रीशीटर को गिरफ़्तार किया था…
तब भी लाखों करोड़ों के ऑफ़र मिले थे…
नेताओं से अधिकारियों तक के फ़ोन आए थे…
लेकिन नियमों से समझौता नहीं किया…
तब सब ने मिलकर झूठे मुक़दमे में फँसाकर सस्पेंड तक करवा दिया था…
कोर्ट में लड़ाई लड़ी… बहाल हुए.. और फिर से ईमानदारी से नौकरी करनी शुरू की…
लेकिन इस ईमानदारी ने इन्हें क्या दिया…??
हर महीने दो महीने में ट्रांसफ़र और नेताओं अधिकारियों से दुश्मनी…
आजकल ईमानदारी को कोई नहीं सराहता…
यही अगर भ्रष्ट बनकर अथाह संपत्ति जमा कर लेते…
और मौज की ज़िंदगी जी रहे होते… तो इन्हें कोई नहीं छेड़ता…
यही हमारा सिस्टम है और यही हमारी हक़ीक़त…
यहाँ कुछ नहीं बदलने वाला…
बदलाव की उम्मीद करने वाले ही बेवक़ूफ़ हैं…!!!