தமிழ்நாடு ஆளுநரின் அநியாயமான செயல்
நடிகர் விஜய் தலைமையிலான T.V.K கட்சி தமிழ்நாடு சட்டமன்றத்தில் மிகப்பெரிய கட்சியாக உள்ளது, ஆனால் அவர்களை அரசு அமைக்க தமிழ்நாடு ஆளுநர் அழைக்கவில்லை. இது அரசியலமைப்புக்கு முரணான செயல்.
1996ஆம் ஆண்டு, பாஜக 165 இடங்களுடன் லோக்சபாவில் மிகப்பெரிய
கட்சியாக இருந்தது, பெரும்பான்மை இல்லை என்றாலும். இருந்தபோதிலும், குடியரசுத் தலைவர் அட்டல் ஜி அவர்களை அரசு அமைக்க அழைத்தார். அரசியலமைப்பிலும் இதற்கான ஏற்பாடு உள்ளது.
ஆனால், தமிழ்நாடு ஆளுநர் மிகப்பெரிய கட்சிக்கு அரசு அமைக்க அழைப்பு வழங்காமல் அரசியலமைப்புக்கு முரணான செயலில்
Improper Action by the Governor of Tamil Nadu
The party of actor Vijay Thalapathy, T.V.K, is the largest party in the Tamil Nadu Legislative Assembly, yet the Governor of Tamil Nadu has not invited them to form the government. This is an unconstitutional act.
In 1996, BJP had
165 seats in the Lok Sabha and was the largest party, though it did not have a majority. Still, the President invited Atal Ji to form the government. The Constitution provides for this arrangement as well.
However, the Honorable Governor of Tamil Nadu, by not inviting the
*तमिलनाडु के राज्यपाल का अनाैतिक कार्य*
T.V.K के नेता अभिनेता विजय थालापथी की पार्टी तमिलनाडु विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी है लेकिन उनको सरकार बनाने का निमंत्रण तमिलनाडु के राज्यपाल ने नहीं दिया है जो कि असवैधानिक कार्य है 1996 में भाजपा को लोकसभा में 165 सीट लेकर सबसे बड़ी
पार्टी थी बहुमत नहीं था लेकिन राष्ट्रपति ने अटल जी को सरकार बनाने का निमंत्रण दिया था संविधान में भी यही व्यवस्था है परंतु तमिलनाडु के महामहिम राज्यपाल सरकार बनने का निमंत्रण न देकर आसनवैधानिक कार्य कर रहे हैं l
नरेंद्र देव पांडे
पूर्व अध्यक्ष जिला अधिवक्ता संघ
लोकतंत्र सेनानी
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सेवा, समर्पण और मानवता की भावना के साथ तुलसी देवी श्रीनाथ पाण्डेय स्मारक ट्रस्ट द्वारा प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी 25 दिसम्बर को सेवा कार्य संपन्न किया गया।
, आज़ाद का बलिदान,
लोकतंत्र में अटल जी की ईमानदारी का उज्ज्वल प्रमाण।
भारत की हर महान उपलब्धि — त्याग, ज्ञान और राष्ट्रप्रेम का फल है।जो इतिहास जानते हैं — संस्कृति पर गर्व करना सीख जाते हैं।
सनातन की रक्षा, ज्ञान की परंपरा, त्याग और तपस्या —
इन्हीं मूल्यों पर भारत की नींव टिकी है।
महर्षि दधीचि ने विश्वकल्याण हेतु अपना शरीर न्यौछावर किया,
भगवान परशुराम ने पूरी शक्ति प्रभु श्रीराम को समर्पित की।
चाणक्य ने एक साधारण युवक को चंद्रगुप्त सम्राट बनाया,
स्वराज के लिए तिलक
, विद्यासागर जैसे महानायक खड़े रहे।
आदि शंकराचार्य ने चारों दिशाओं को एक सूत्र में बाँधा,
विवेकानंद ने विश्व में भारत की पहचान का परचम लहराया।
संस्कृति में तानसेन का संगीत, वाल्मीकि–तुलसी का शब्द,
विज्ञान में आर्यभट्ट, रामानुजन और रमन की प्रतिभा।
स्वतंत्रता में सावरकर, बिस्मिल
गर्व से कहो — हम हिंदू हैं और ब्राह्मण हैं।
महर्षि दधीचि — ब्राह्मण ने विश्व कल्याण के लिए अपनी हड्डी देने में एक क्षण भी नहीं लगाया। भगवान परशुराम ने अपनी अर्जित सभी शक्तियाँ प्रभु श्रीराम को प्रदान कर दीं। महान कूटनीतिज्ञ चाणक्य ने एक वनवासी, पिछड़े वर्ग के नौजवान को सम्राट
देखकर बताना।
दो इंच की ज़ुबान से गाली देना बहुत आसान है, पर राष्ट्र के लिए त्याग, तपस्या और उच्च आदर्श स्थापित करना अत्यंत कठिन है। ब्राह्मण कुछ नहीं लेता — हमेशा देता है: आशीर्वाद, सद्विचार, सनातनी संस्कृति तथा सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा। मैं जातिवादी नहीं हूँ;