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गाँव बिहटा तहसील सियाना जिला बुलंदशहर में ब्लॉक में सूचना दिए जाने के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है । कुछ ना कुछ बहाना बनाकर काम को टाला जा रहा है ऐसे में कैसे गाँव के बच्चे स्कूल पहुँच सकेंगे ।
आरक्षण के संबंध में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई का इतिहासिक भाषण सुनिए, बता रहे हैं कि संविधान निर्माताओं ने केवल दलितों के लिए आरक्षण था।
अगर आर्थिक आधार पर आरक्षण हो सवर्णों के लिए भी हो गरीब ब्राह्मणों ने क्या बिगाड़ा है?
बंधुओ अभी ये राजस्थान में जल उठी माशालें, उठी UGC विरोध की गूंज, मकराना की यात्रा को मिल रहा व्यापक समर्थन
यूजीसी नियमों के विरोध में श्री राजपूत करणी सेवा के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना की जनजागरण यात्रा लगातार आगे बढ़ रही है।
यात्रा में बड़ी संख्या में समाज के लोग शामिल हो रहे हैं और कारों का लंबा काफिला समर्थन का संदेश दे रहा है।
आंदोलन के माध्यम से यूजीसी नियमों को लेकर अपनी आवाज़ बुलंद की जा रही है। देखिए ग्राउंड रिपोर्ट।
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आज जंतर-मंतर से सैकड़ों छात्रों को हिरासत में लिया गया, जिनमें से लगभग 80 छात्रों को दिल्ली पुलिस छत्रसाल स्टेडियम लेकर गई। उन्हें वहाँ रात लगभग 9 से 9:30 बजे तक रखा गया और उसके बाद अलग-अलग पुलिस वाहनों में बैठाकर विभिन्न पुलिस स्टेशनों में ले जाया गया।
रात लगभग 12:30 बजे से 1 बजे के बीच हमें कुछ छात्रों के परिवारजनों का फोन आया। उन्होंने बताया कि लगभग 6–7 छात्रों को मुखर्जी नगर थाने लाया गया है। परिवार वालों का आरोप था कि उन्हें अपने बच्चों से मिलने नहीं दिया जा रहा, कई छात्रों के फोन तोड़ दिए गए हैं और पुलिस अधिकारी यह तक बताने को तैयार नहीं हैं कि उन्हें केवल हिरासत में लिया गया है या गिरफ्तार किया गया है, अथवा उनके विरुद्ध कोई FIR दर्ज की गई है। यहाँ तक कि वकीलों को भी उनसे मिलने की अनुमति नहीं दी जा रही थी।
रात लगभग 2 बजे हम मुखर्जी नगर थाने पहुँचे। वहाँ जो हुआ, उसे देखकर यकीन करना मुश्किल था कि जिस पुलिस को हम कानून का रक्षक मानते हैं, वह कभी-कभी नागरिकों के अधिकारों के प्रति इतना असंवेदनशील व्यवहार भी कर सकती है।
हमने पहले बिना कैमरा चालू किए लगभग 15 मिनट तक अधिकारियों से बातचीत करने और जानकारी लेने की कोशिश की। लेकिन किसी भी अधिकारी ने कोई उत्तर देने से इनकार कर दिया। मजबूर होकर हमें कैमरा चालू करना पड़ा।
हमने देखा कि छात्रों को अलग-अलग पुलिस वाहनों में बैठाया जा रहा था और उन्हें किसी अन्य स्थान पर ले जाने की तैयारी हो रही थी। जब पूछा गया कि उन्हें कहाँ और क्यों ले जाया जा रहा है, तो कोई स्पष्ट उत्तर नहीं मिला। कई पुलिस अधिकारी कैमरे से अपना चेहरा छिपाते दिखाई दिए। हमने थाना प्रभारी से मिलने की भी कोशिश की, लेकिन उन्होंने भी मिलने से मना कर दिया।
इसी पुलिस स्टेशन में महात्मा गांधी की तस्वीर लगी हुई है और डी.के. बसु (D.K. Basu) दिशानिर्देशों का उल्लेख भी किया गया है। कानून स्पष्ट है—किसी व्यक्ति को हिरासत में लेने पर उसके परिवार को सूचित किया जाना चाहिए और उसे अपनी पसंद के वकील से मिलने तथा कानूनी सलाह लेने का अवसर दिया जाना चाहिए।
पुलिस का कहना था कि छात्रों को मेडिकल परीक्षण के लिए ले जाया जा रहा है। लेकिन यदि उन्हें कई घंटे पहले ही हिरासत में लिया गया था, तो रात 2 बजे अचानक मेडिकल कराने की आवश्यकता क्यों पड़ी? इस प्रश्न का भी किसी के पास कोई उत्तर नहीं था।
यह वीडियो लगभग 17 मिनट का है, लेकिन यदि आप इसे पूरा देखेंगे तो समझ पाएँगे कि किस प्रकार जवाबदेही की जगह केवल “ऊपर से आदेश है” कहकर संवैधानिक और कानूनी दायित्वों से बचने की कोशिश की जाती है।
कई छात्रों ने आशंका व्यक्त की है कि जंतर-मंतर से हिरासत में लिए गए छात्रों के विरुद्ध झूठे या अनुचित FIR दर्ज किए जा रहे हैं। परिवारजनों ने हमें यह भी बताया कि जब उन्होंने पुलिस अधिकारियों से जानकारी माँगी तो उन्हें कहा गया कि “घर चले जाइए, नहीं तो आपके ऊपर भी FIR दर्ज कर दी जाएगी।”
यदि कोई सामान्य नागरिक अपने हिरासत में लिए गए बेटे, बेटी, भाई या बहन से मिलने की भी कोशिश न कर सके और पुलिस का रवैया ऐसा हो, तो सोचिए उन परिवारों पर क्या बीतती होगी।
यदि इस देश के युवा शांतिपूर्ण ढंग से अपने अधिकारों की माँग कर रहे हैं, तो क्या उनके साथ लाठीचार्ज करना और आधी रात को इस प्रकार का व्यवहार करना उचित है? क्या पुलिस की भी कोई जवाबदेही नहीं है?
हर अधिकारी का केवल एक ही उत्तर था - “ऊपर से आदेश है।” लेकिन यह “ऊपर” कौन है? आदेश किसने दिए? और क्या कोई भी आदेश संविधान और कानून से ऊपर हो सकता है?
यह वीडियो लंबा है, लेकिन यदि संभव हो तो इसे पूरा अवश्य देखिए। विशेष रूप से मेरे सभी अधिवक्ता साथियों और कानूनी समुदाय से मेरा आग्रह है कि इस पर अपनी आवाज़ उठाएँ। कानून-व्यवस्था की पहली सीढ़ी एक पुलिस थाना होता है। यदि राजधानी दिल्ली में, हर विरोध प्रदर्शन के दौरान, पुलिस मानवाधिकारों और कानूनी दिशानिर्देशों की अनदेखी करती रहे, तो यह केवल प्रदर्शनकारियों का नहीं बल्कि पूरे विधि-तंत्र का प्रश्न बन जाता है।
यदि देश की राजधानी में यह स्थिति है, तो देश के दूर-दराज़ इलाकों में नागरिकों के साथ क्या हो रहा होगा, इसकी कल्पना की जा सकती है।
सवाल बड़े हैं। लड़ाई लंबी है। लेकिन जहाँ भी नागरिकों के अधिकारों की रक्षा की आवश्यकता होगी, हम अपने साथियों के साथ खड़े रहेंगे।
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🚨 आदलणीय बंधुओ 77 दिन का मौन चीत्कार और भीड़तंत्र का बहरापन!
रवींद्र जठेड़ी जी पिछले 77 दिनों से भेदभावपूर्ण SC/ST एक्ट और आरक्षण व्यवस्था के खिलाफ आमरण अनशन पर हैं।
उनकी हालत दिन प्रतिदिन नाजुक होती जा रही है। लेकिन सबसे बड़ा और कड़वा सच यह है कि वह आज भी उतने ही अकेले हैं, जितने पहले दिन थे।
रवींद्र जी, आपको एक बहुत ही कठोर वास्तविकता समझनी होगी।
आप CJP के कोई 'दिपके' नहीं हैं। आपके पीछे कोई विदेशी फंडिंग, पीआर एजेंसी या मोमबत्ती लेकर घूमने वाला इकोसिस्टम नहीं है जो आपके लिए रातों रात नेशनल मीडिया को इकट्ठा कर ले।
और जिन कथित सवर्ण (GC) राजनीतिक संगठनों से आप उम्मीद लगाए बैठे हैं, वह भी कभी आपके समर्थन में नहीं आएंगे।
मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियों की तरह ही, इन संगठनों को भी इस मुद्दे से सिर्फ अपना राजनीतिक स्वार्थ साधना है।
वह चाहते हैं कि यह मुद्दा सुलगता रहे ताकि उनकी दुकान चलती रहे।
जब कोई व्यक्ति सच में इस लड़ाई के लिए अपने प्राण दांव पर लगाता है, तो ये संगठन सबसे पहले गायब हो जाते हैं।
यह देश केवल भीड़तंत्र और शक्ति प्रदर्शन की भाषा समझता है।
जहां पीछे उग्र भीड़ नहीं होती, वहां सत्ता के कान पर जूं तक नहीं रेंगती।
आपसे हाथ जोड़कर विनती है कि कृपया अपना यह अनशन तुरंत समाप्त करें।
यह संवेदनहीन सिस्टम आपके इस बलिदान के लायक बिल्कुल नहीं है।
कृपया अपनी सेहत पर ध्यान दें, आपके प्राण आपके परिवार के लिए बहुत कीमती हैं। 🙏🚩
#RavindraJatheri #SystemFailure #RealityCheck #ReservationSystem
"गोली मत चलाइये - गोली मत चलाइये "
वीर - भरत तिवारी के लिए लोग प्रदर्शन कर रहे थे
तो तानाशाह सरकार की पुलिस - एक इनकाउंटर करने के बाद अब ग्रामीणों को बंदूक दिखा रही
वाह ब्राह्मणों वाह - इसलिए करते हो न इनकी अंधभक्ति -
जिसदिन बात खुद के घर पर आएगी तब समझ आयेगा
#Justice4BharatBhushanTiwari
ये भरत तिवारी का वीडियो है जिसमें वह जवानियां गांव के लोगों के लिए आवाज उठा रहा है। बिहार पुलिस ये बताए कि ये कहा से पागल दिख रहा है? पहनावे से पागल दिख रहा है या बोलने की शैली से पागल दिख रहा है?
बिहार पुलिस को बिना कोई साक्ष्य के किसी को पागल घोषित करके **काउंटर करने का अधिकार किसने दिया? कब तक निर्दोष लोग इन बेरहम पुलिस से मारे जाते रहेंगे?
बुलंदशहर में पुलिस OYO होटल पर छापेमारी कर रही है। कोई बताएगा कि किस कानून के तहत ये लोग उन व्यक्तियों की वीडियो बनाते हैं, जो होटल में नियमानुसार कमरा लेकर ठहरे हुए हैं?
क्या किसी अतिथि की पहचान को सार्वजनिक करने का अधिकार पुलिस को है? यदि नहीं, तो ऐसी वीडियो रिकॉर्डिंग और उसका प्रसार किस कानूनी आधार पर किया जाता है?
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मेडिकल अपोलो फार्मेसी सुपर टेक एकोसिटी सेक्टर 137 नोएडा से कोई भी व्यक्ति सामान न ले क्योंकि 5 हजार का सामान लेने के बाद कुछ रिटर्न करने गए अगले दिन तो समान के बदले समान भी नहीं दे रहे है
बोल रहे है कि प्वाइंट होने जरूरी है
#Greater_Noida: सपा प्रवक्ता राजकुमार भाटी द्वारा ब्राह्मण समाज के खिलाफ की गई टिप्पणी से नाराज होकर जनपद दीवानी एवं फौजदारी बार एसोसियन के अध्यक्ष मनोज भाटी, सचिन शोभाराम चंदीला सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं ने समाजवादी पार्टी से दिया इस्तीफा @yadavakhilesh@rajkumarbhatisp
अयोध्या के बेनीपुर ग्राम में 85 वर्षीय ब्राह्मण बुजुर्ग सहित 10 सदस्यों पर दर्ज SC/ST मुकदमे में पीड़ित ब्राह्मण परिवार के समर्थन में अब करणी सेना सामने आई है..!!
नोएडा प्राधिकरण में ‘सेटिंग’ का खेल! नियमों को दरकिनार कर विवादित AGM की वापसी
🟥 नोएडा प्राधिकरण में पोस्टिंग को लेकर बड़ा खेल उजागर
🟥 AGM संजीव बेदी की दोबारा नियुक्ति पर उठे सवाल
🟥 शिकायतों के बाद एक माह पहले हटाए गए थे बेदी
🟥 प्रॉपर्टी डीलरों से नजदीकी और फाइलें रोकने के आरोप
🟥 महिला कर्मियों से अभद्रता की शिकायत भी आई सामने
🟥 तय समय के बाद भी महिला कर्मचारियों से काम कराने का आरोप
🟥 तीन साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद भी हाउसिंग में वापसी
🟥 ट्रांसफर पॉलिसी के बावजूद मनमानी पोस्टिंग की चर्चा
🟥 पूर्व CEO ऋतु माहेश्वरी के आदेशों की अनदेखी के आरोप
🟥 ‘सेटिंग’ के दम पर वापसी, जीरो टॉलरेंस नीति पर सवाल
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जब गिरफ्तारी नहीं होती तब तक रीपोस्ट नहीं रुकना चाहिए ✋🚨
बुलंदशहर काला आम चौराहे पर AL BAIR होटल में कुछ हिंदू युवक खाना खाने गए शाकाहारी भोजन में हड्डी निकल आई अब हड्डी किस जानवर की है पता नहीं
@bulandshahrpol कृपया मामले को गंभीरता पूर्वक संज्ञान में लें और गहनता से जांच कराए अगर ये सत्य घटना है तो होटल सीज होना चाहिए और मालिक पर गंभीर धाराओं में मुक़दमा पंजीकृत होना चाहिये
और हिंदुओं से भी अपील करती हूँ जब आप शुद्ध शाकाहारी भोजन ही करते हो तो वहाँ मत खाओ जहाँ वेज और नॉनवेज दोनों मिलते हैं
@GaurBulandshahr@Uppolice@digrangemeerut@dmbulandshahr look in this please 🙏