@AshwiniUpadhyay@HMOIndia@AmitShah@PMOIndia@narendramodi Fake News फैलाने या शेयर करने पर भी त्वरित कारवाही होनी चाहिए। इसके लिए कानून है कि नहीं पता नहीं , अगर है तो बड़ा लचर और एक तरफा होगा और नहीं है तो फिर बनाना चाहिए वह भी बड़े कठोर दंड के साथ।
@AchAnkurArya इनके अलावा सर जी कम से कम 1 लाख महिलाओं के नाम बताइए जिन्होंने ज्ञान के दम पर अपनी पहचान बनाई और शास्त्र के निर्माण किया। और वर्तमान समय में संविधान के बाद आपको एक लक्ष्य महिलाएं मिल जाएगी जिन्होंने हर क्षेत्र में तरक्की की और देश सेवा में । हम अपनी गलतियों को कैसे ठीक करे..विचार
पहले ये देखना है हमारा उद्देश्य क्या है,फिर देखना की उस उद्देश्य की पूर्ति के लिए क्या क्या किया जा सकता है। अगर उद्देश्य गलत है तो संघर्ष तय है। सकारात्मक और भयमुक्त उद्देश्य है तो यह समाज के लिए हितकारी है।
हमने निचले वर्णों को संस्कारवान बनाने का ,स्वच्छ बनाने का ,अपने जैसे बनाने का प्रयास किस मात्रा में किया है ? अगर मन में ये भाव है कि जैसे एक भाई दूसरे को भी अपने जैसा ,अपनी इज्जत से दूसरे को भी ऊपर उठा लेता है। ऐसा प्रयास हम कितना करते है।
जरूरत है कि सभी वर्णों के लोग हिंदुओं के धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन करे, संस्कृत सीखे और फिर उन विषमताओं पर काम करे जो सदियों से एक दूसरे में अहंकार का कारण बनती है। शोषण का कारण बनती हैं । शिक्षा अनिवार्य को ,पढ़ाई को प्रत्साहन और सरल बनाया जाए। शिक्षा ही समानता का सूत्र हो सकती।
आज के वर्तमान युग में नकारात्मकता की बजाय सकारात्मक विषयों पर ध्यान देने की जरूरत है। जरूरत आरक्षण और ugc पर बात करने की बजाय इसकी जड़ पर होनी चाहिए।ये विषय देश की पीढ़ी के अंदर उठाना चाहिए कि हम इस विषमता को समानता में कैसे बदल सकते है।
@AshwiniUpadhyay
@adv_shasha देश में ये बात का मुद्दा क्यों नहीं बनता है कि सामाजिक विषमता को खत्म करके सभी को सम्मान के साथ जीने के लिए , सभी को आर्थिक विषमता को समानता में बदले के लिए हम क्या प्रयास कर सकते है । इन महत्वपूर्ण विषयों पर मेरे ख्याल से बहस करे। जो रूट है विषमता की उसको कैसे खत्म किया जाएं।
@adv_shasha आज जितनी बात आरक्षण हटाने की हो रही हैं,ठीक उतनी ही बात जातिगत विषमता और भेदभाव को लेकर क्यों नहीं होती है। सामाजिक समरसता को लेकर हम कितने ट्वीट करते है ।ज्यादातर बाते रूट की जगह डाली और पत्तों पर की जाती है।
@DChaurasia2312 जो हमारी बात से सहमत न हो उसको गलत ठहराने के हजार तरीके है और जो हमारी सोच से सरोकार रखता हो उसको सही साबित करने के भी हजार तरीके है। बात सत्य और तथ्य पर हो तो उसमें वजन आता है। तर्क से रास्ता निकलता है और कुतर्क से रास्ता ही खत्म हो जाता है।
@DChaurasia2312 गार्गी मैत्रीय जैसी महिलाओं जिनको उंगलियों पर इतिहास में गिना जा सकता है । लेकिन जितने पुरुष विद्वान हुए उतने महिला विद्वान नहीं है। जितने ग्रन्थ पुरुषों ने लिखे महिलाओं ने क्यों नहीं लिखे । ये विषमता दिखाती है महिलाओं को वह अधिकार प्राप्त नहीं थे जो होना चाहिए था ।
@talk2anuradha देखा जाएं तो हर चीज के दो पहलू हैं, फायदा और नुकसान इससे बहुत फायदा भी हुआ है जातिगत टिप्पणियां कम हुई और फर्जी मुकदमे भी बढ़े जो इसका डिसएडवांटेज है।
@rajeev_ashin@dr_ambedkarji फिर सोचने वाली बार है कि Semsester कैसे पास किया होगा ,अगर पढ़ाई नहीं करेगा तो ,UG भी निकलना मुश्किल है। उसके लिए पढ़ना पड़ेगा ।
हर चीज का निर्माण सकारात्मक नजरिया के द्वारा होता है , लेकिन व्यक्तिगत स्वार्थ उस चीज को दुरुपयोग में बदल देता है।चाहे फिर कानून हो ,चाहे फिर दुनिया में कुछ भी हो।
@AshwiniUpadhyay
आपसी प्यार और सद्भाव के लिए हम सबने क्या क्या किया ? कभी इस बात पर विचार किया है। सोशल मीडिया पर नफरत छोड़कर शांति,प्रेम ,सद्भाव , जोड़ना इनसे संबंधित कोई पोस्ट डालते है।अगर संघर्ष खत्म करना है तो ,पहले नफरत भूलकर गले मिले और एक दूसरे का सहयोग करे। अपने आप ही सौहार्द आयेगा।