@Me_PrinceRaj
पंडित जी, कारसेवकों पे गोलिया तत्कालीन प्रिंसिपल सिक्रेटरी पंडित नृपेंद्र मिश्रा ने चलवाई थी जो कि वर्तमान में राम मंदिर ट्रस्ट का अध्यक्ष है।..गोली चलवाए पंडित और बदनाम होवे यादव..चंदा चोरी करे पंडित और सवाल यादव से हो?सवाल राजपूत आदित्य सिंह बिष्ट से पूछ।
@bstvlive@Manojpandeyweb और जो रामभक्तो पर गोली चलवाए उनको इनके अब्बाजान ने पद्म विभूषण दिलवाया और उनके मुख्य सलाहकार को 5 साल अपना राइट हैंड बनाकर रखा। चोर हैं ये सारे नेता mc।
@IranArmySpoofX
Will Iran allow their previous Zoroastrian religion to come back, propagate and spread?...if you claim that that Iran is thousands of year old civilization.
@IRAN_GHANA
But you destroyed your ancient persian religion of your country..you yourself are destroyer of very ancient civilization and religion in the name of Islam. Will you allow people to openly pratice their ancient persian religion in Iran??
यादव न्यूट्रल रह ही नहीं सकता है, भगवान कृष्ण भी नहीं हुए थे। महाभारत का युद्ध कुरु वंश के आपसी मामलों का था। बहू का चीरहरण हुआ हो या फिर "अंधे का पुत्र अंधा" कहकर अपमान किया गया हो, दोनों ही मामले कुरु वंश के थे। भगवान कृष्ण नैतिक मूल्यों की स्थापना के लिए उसमें कूदे और अंततः कुरु वंश का सर्वनाश हुआ।
इन तमाम मामलों में यादवों का कुछ नहीं था। यादव उस समय की सबसे शक्तिशाली सेनाओं में से एक थे। द्वारका के यादवों से लड़ना मृत्यु को आमंत्रण देने के बराबर था। द्वारका की नारायणी सेना को पराजित करना बहुत मुश्किल था। कृतवर्मा, जो नारायणी सेना के मुख्य सेनापति थे, महानतम योद्धाओं में गिने जाते थे।
फिर भी क्या हुआ परिणाम? बलराम के न्यूट्रल रहने के बावजूद श्रीकृष्ण यादवों को महाभारत के युद्ध में झोंक दिए। यादवों की एक बड़ी शाखा महाभारत युद्ध में कौरवों की ओर से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुई, जबकि स्वयं कृष्ण ने पांडवों का साथ चुना था।
यादवों को श्रीकृष्ण यह विरासत देकर गए हैं कि वे न्याय के लिए लड़ेंगे, चाहे परिणाम वीरगति ही क्यों न हो। यादव किसी भी मामले में न्यूट्रल रह ही नहीं सकता है।
आज भी देश में यही परंपरा दिखाई देती है। देश में कोई भी मामला हो, यादव अक्सर उस पक्ष के साथ खड़ा दिखाई देता है जो कमजोर हो, जिस पर अन्याय हो रहा हो या जिसे इंसाफ की जरूरत हो। वह यह नहीं देखता कि सामने कौन है, कितना शक्तिशाली है या उसका कितना प्रभाव है। उसके लिए न्याय और अन्याय का प्रश्न अधिक महत्वपूर्ण होता है।
शायद यही कारण है कि यादवों की पहचान केवल एक जाति के रूप में नहीं, बल्कि अन्याय के विरुद्ध आवाज़ उठाने वाली परंपरा के रूप में भी देखी जाती है।🙏🔥
"बड़े लड़ाईया महोबा वाले, खनक खनक बाजे तलवार।
रण के डंका बाजन लागे, सज गए अहिरन के सरदार।।"
अपने जीवन में लड़े सभी 52 युद्धों में विजय रहने वाले, वीरता और पराक्रम के प्रतीक यदुवंशी क्षत्रिय वीर अहीर आल्हा जी की जयंती पर उन्हें सादर नमन।
#veerahiralha
वीर अहीर आल्हा पर पहली पोस्ट सुबह 11 बजे की थी,
फिर उसके बाद कई पोस्ट की,
जिसके बाद आल्हा जयंती की सुनामी आ गई,
और वीर अहीर आल्हा आज का सबसे बड़ा ट्रेंड हो गए X पर,
हर तरफ से आल्हा जी पर ट्वीट आने लगे
उन्हें अहीर लिखकर,
मकसद यही था कि इतिहास चोर आल्हा को चुराने में कामयाब ना हो पाएं,
आखिर आज भी नहीं हो पाए,
मैं कोई भी अभियान हवा में नहीं छेड़ता,
उसका मकसद होता है,
मध्यकाल में जितने राजपूत राजा थे या उनके स्वजातीय सेनापति थे सबका रोटी बेटी का संबंध या मुगलों से था या अपनी जाति में था।
सिर्फ आल्हा ऊदल के पिता जी की शादी ग्वालियर के अहीर राजा की बेटी से हुआ था।
अब समझने वाली बात ये है कि अगर आल्हा ऊदल के पिता जी बनाफर राजपूत होते तो क्या दूसरी जाति में उनको शादी करने दी जाती ?
जाहिर सी बात है वो बक्सर से आए हुए बनाफर अहीर थे इसलिए उनकी शादी राजा दलपत अहीर की पुत्री से हुई।
आल्हा योद्धा थे इसलिए महोबा की रक्षा में तैनात थे नकी जाति के कारण पूरे बुंदेलखंड में हजारों अहीर सेनापति महोबा कालपी कालिंजर ओरछा झांसी किलों में सेनापति थे।😎
#VeerAhirAlha
धरती के सबसे बड़े वीर
अहीर सम्राट आल्हा महाराज जी की जयंती पर नमन,
आल्हा समर सुजान है, चमके रण में धार।
मातृभूमि के मान हित, कटि बाँधे तलवार।।
@AnilYadavmedia1@JaikyYadav16
सोशल मीडिया पर बैठकर वो आल्हा को राजपूत बता रहे हैं उधर अहीरों ने आल्हा जयंती पर पूरी मैनपुरी जाम कर दी।
क्योंकि उनको पता है सोशल मीडिया पर कुछ भी लिख देंगे जमीन पर निकले तो पेले जाएंगे।😂
वीर अहीर योद्धा आल्हा की जयंती पर श्रद्धांजलि दे दी तो जाति विशेष के लोगों के अंग विशेष में आग लगी हुई है,
ये वही लोग हैँ, जो हर जाति के महान लोगों को अपने जाति के बताने के लिए सब जाति के लोगों से झगड़ा करता हैँ,
कभी उन भगवान श्री कृष्ण को अपनी जाति का बताएंगे, जो पग पग पर खुद को अहीर बताते रहे हैँ,
कभी सम्राट मिहिर भोज के लिए गुर्जरों से लड़ते हैँ,
कभी महाराजा सुहेलदेव के लिए पासी समाज से झगड़ते हैँ,
ऐसे वक़्त पर मुझे भगवान परशुराम याद आते हैँ,
बड़े लड़ैया महोबा बारे, इनकी मार सही ने जाए।
एक को मारे दुई मर जाए, तीज़ा ख़ौफ़ खाए मर जाए॥
यदुवंश कुल केसरी ‘महावीर आल्हा जी’ के जन्मोत्सव की देशभर के समस्त यदुवंशियों को हार्दिक बधाई।
#VeerAhirAlha#वीर_अहीर_आल्हा