#NoTetBeforeRteAct
जो व्यवस्था देश के किसी कर्मचारी,अधिकारी या न्यायाधीश पर लागू नहीं है वो देश के बेसिक शिक्षकों पर लागू करना देश के 25 लाख शिक्षकों एवं उनके करोड़ों परिजनों के साथ अन्याय है ।
#NoTETbeforeRTEact
*IAS, IPS, IFS ,IRS,IES की exam यूपीएससी के माध्यम से भारत में आयोजित होती है। तो IMS (Indian Medical Services) के साथ-साथ IJS (Indian Judiciary Services) या IAS(J) की परीक्षा भी होनी चाहिए। जिससे सभी को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ एक समान न्याय भी मिलें। और जो पूर्व से नियुक्त अधिकारीगण/ न्यायधीश इन परीक्षाओं को पास किए बिना नियुक्त हैं। उन्हें भी 2 वर्ष के भीतर इस परीक्षाओं को पास करना चाहिए। अन्यथा उन्हें भी शिक्षकों की भाँति अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जाएगी क्या?
@narendramodi@AmitShah@rajnathsingh@dpradhanbjp@myogiadityanath@RahulGandhi@yadavakhilesh@priyankagandhi@Aamitabh2@bstvlive
#इति_सिद्धम
वे अपने लिये संसद के बनाये क़ानून को भी नहीं मानेंगे ,क्योंकि उनको न्यायिक स्वतन्त्रता चाहिये ।
बिना किसी परीक्षा में सम्मिलित हुए केवल अनुभव और सिफारिश के आधार पर नियुक्ति और प्रमोशन लेते रहेंगे ।
आप पर वे नियम थोपे जाएँगे जो संसद ने आपके लिए बनाए ही नहीं हैं
2017 के संशोधन सहित आरटीई में कहीं टेट का उल्लेख नहीं है आरटीई के 23(1) के द्वारा प्रदत्त शक्ति से एनसीटीई ने 23 August 2010 को minimum qualification परिभाषित की है जोकि नियुक्ति वर्षों के अनुसार with tet और without tet है लेकिन माननीय जी ने minimum qualification को TET लिख दिया तो लिख दिया ।
आपको नियुक्ति हेतु निर्धारित परीक्षा उत्तीर्ण करने के नियुक्त होने के 20-25 वर्षों बाद भी परीक्षा में बैठायेंगे ।
अनुभव के आधार पर पदोन्नति तो दूर नौकरी (उस नौकरी में जिसमें नियुक्ति की प्रक्रिया में कोई दोष या आपत्ति नहीं है)में भी आप नहीं रहेंगे ।20-25 lakhलाख शिक्षकों की नौकरी जाये तो जाये उन पर कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता।
हमने सदैव कहा कि रास्ता संसद से निकलेगा ।इसलिए अब minimum qualification को parliament से define कराने हेतु आगे बढ़ेंगे ।
@narendramodi@AmitShah@dpradhanbjp@myogiadityanath
#इति_सिद्धम
वे अपने लिये संसद के बनाये क़ानून को भी नहीं मानेंगे ,क्योंकि उनको न्यायिक स्वतन्त्रता चाहिये ।
बिना किसी परीक्षा में सम्मिलित हुए केवल अनुभव और सिफारिश के आधार पर नियुक्ति और प्रमोशन लेते रहेंगे ।
आप पर वे नियम थोपे जाएँगे जो संसद ने आपके लिए बनाए ही नहीं हैं
2017 के संशोधन सहित आरटीई में कहीं टेट का उल्लेख नहीं है आरटीई के 23(1) के द्वारा प्रदत्त शक्ति से एनसीटीई ने 23 August 2010 को minimum qualification परिभाषित की है जोकि नियुक्ति वर्षों के अनुसार with tet और without tet है लेकिन माननीय जी ने minimum qualification को TET लिख दिया तो लिख दिया ।
आपको नियुक्ति हेतु निर्धारित परीक्षा उत्तीर्ण करने के नियुक्त होने के 20-25 वर्षों बाद भी परीक्षा में बैठायेंगे ।
अनुभव के आधार पर पदोन्नति तो दूर नौकरी (उस नौकरी में जिसमें नियुक्ति की प्रक्रिया में कोई दोष या आपत्ति नहीं है)में भी आप नहीं रहेंगे ।20-25 lakhलाख शिक्षकों की नौकरी जाये तो जाये उन पर कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता।
हमने सदैव कहा कि रास्ता संसद से निकलेगा ।इसलिए अब minimum qualification को parliament से define कराने हेतु आगे बढ़ेंगे ।
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गत 10 वर्षों से कतिपय ऐसे लोग जो कोर्ट में टेट और नॉन टेट के मुक़दमे करके पदोन्नति फँसाये हुए हैं वे लोग 1 सितम्बर 2025 को सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद से ही अपने मनसूबे पूरे होते देख रहे हैं ।रिव्यू स्वीकार होने पर यही लोग कह रहे थे कि सेवा में बने रहने के लिए टेट से छूट मिलेगी लेकिन पदोन्नति में नहीं मिलेगी,13 की सुनवाई के बाद इनके सुर बदल गए और अब व्याख्या कर रहे हैं कि सेवा में बने रहने के लिए टेट करना होगा ।
राइट टू एजुकेशन एक्ट, 2009 बनने के बाद से लेकर आज तक मूल अधिनियम हो या उसके बाद के संशोधन — कहीं भी “Teacher Eligibility Test (TET)” शब्द का प्रयोग नहीं किया गया है। हर जगह केवल “Minimum Qualification / न्यूनतम अर्हता” शब्द का प्रयोग हुआ है।
RTE Act की धारा 23(1) के अंतर्गत केंद्र सरकार ने NCTE को Academic Authority बनाया। इसके बाद NCTE ने 23 अगस्त 2010 की अधिसूचना द्वारा पहली बार TET को “Minimum Qualification” का हिस्सा बनाया।
NCTE ने अपने राजपत्र में स्पष्ट किया कि—
• 23 अगस्त 2010 के बाद होने वाली नियुक्तियों की न्यूनतम अर्हता “with TET” होगी।
• 23 अगस्त 2010 से पूर्व नियुक्त/कार्यरत शिक्षकों की न्यूनतम अर्हता “without TET” मानी जाएगी।
बाद में 2017 के संशोधन में यह कहा गया कि 31 मार्च 2015 तक नियुक्त या कार्यरत शिक्षकों को Section 23(1) के अंतर्गत निर्धारित न्यूनतम अर्हता प्राप्त करनी होगी। अब यदि कोई शिक्षक 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त है, तो उसकी निर्धारित न्यूनतम अर्हता वही होगी जो उस समय लागू थी, अर्थात without TET।
जिस एनसीटीई को TET लागू करने की शक्ति है तो क्या उसे परिस्थितियों के अनुसार relaxation देने की शक्ति नहीं है? यह विषय अभी भी न्यायिक व्याख्या के अधीन है और आवश्यकता पड़ने पर पुनः न्यायालय के समक्ष रखा जाएगा।
यदि आरटीई में कहीं टेट प्रयोग हुआ है तो उपलब्ध करायें ।चाहे सुप्रीम कोर्ट से हो या संसद से एनसीटीई के राजपत्र 23अगस्त 2010 से टेट आया है उसी के आधार पर mimimum qualification decide होगी ।
अण्डमान निकोबार से दिल्ली चलकर पहुँचे अण्डमान निकोबार शिक्षक संघ के अध्यक्ष श्री प्रेम कुमार साधु एवं महासचिव श्री विकास मंडल से मिलने पर सुप्रीम कोर्ट के टेट के संबंध में आये आदेश के बाद अंडमान निकोबार के शिक्षक साथियों की दुख भरी व्यथा को सुनकर मन बहुत व्यथित हुआ और सोचने पर मजबूर हूँ कि इस प्रकार के आदेश आने के बाद सरकार किस अनहोनी का इंतज़ार कर रही है ।
दोनों शिक्षक नेताओं ने बताया कि 25 मार्च को अण्डमान निकोबार में टेट पास करने की अनिवार्यता के सम्बन्ध में पत्र निर्गत होने के बाद शिक्षक अवसाद से जूझ रहे हैं किसी भी शिक्षक को विश्वास नहीं हो रहा है कि आरटीई से पूर्व में नियुक्त एवं २०-२५ वर्षों से शिक्षण कर रहे शिक्षकों पर इस आदेश को कैसे थोपा जा सकता है ।
संघ के महासचिव श्री विकास मंडल जोकि आरएसएस के विभाग बौद्धिक प्रमुख भी हैं उनका कहना कि पोर्ट ब्लेयर में इस आदेश के बाद शिक्षकों में भारी तनाव व्याप्त है उन्होंने बताया कि बहाँ पर एक मात्र सांसद को छोड़कर कोई भी अन्य जनप्रतिनिधि नहीं है ।बहाँ का शासन पूर्णतया नौकरशाह चला रहे है ऐसे बिना किसी जनप्रतिनिधि के अपनी बात नौकर शाह को समझाना मुश्किल है
दूसरी ओर उन्होंने बताया कि दिल्ली आकर न्याय की गुहार लगाना भी बहुत मंहगा है
पोर्ट ब्लेयर से दिल्ली हवाई जहाज से आने पर एक तरफ़ से दोनों साथियों का टिकट 61000 रुपये का मिला है और यदि हवाई जहाज़ से न आकर दूसरा रास्ता अपनाये ,तो पानी के जहाज़ से कलकत्ता या चेन्नई तक पहुँचने में 3-4 दिन लगते हैं तथा किराया 18 हज़ार उसके बाद ट्रेन से दिल्ली तक का किराया एवं दो दिन का सफ़र ।इस प्रकार सुप्रीम कोर्ट में बहुत महंगी पैरवी एवं राज्य में चुने हुए विधायक या एमएलसी न होने पर जब इस प्रकार का पत्र आया तो शिक्षक अवसाद में आ गये ।
उन्होंने बताया कि बहुत कठिन परिस्थिति में अंडमान निकोबार द्वीप समूह में शिक्षा का अलख जगा रहे हैं उन्होंने बताया कि पोर्ट ब्लेयर के पास अन्य द्वीप पर विद्यालय संचालित है बहाँ आने जाने का एक मात्र साधन छोटी नाव है कई बार ऐसा होता है विद्यालय पहुँचने के बाद मौसम ख़राब होता है तो लौटने हेतु नाव नहीं मिल पाती है और दो तीन दिन विद्यालय वाले द्वीप पर ही रहना पड़ता है ।
उनका कहना है कि नौकरी जाने पर बहाँ कोई फैक्टरी या उद्योग भी नहीं है जहाँ प्राइवेट नौकरी की जा सके ।
अंडमान निकोबार में शिक्षक साथियों ने 4 अप्रैल को रामलीला मैदान की रैली के फोटो और वीडियो देखे तो उन्हें आशा की किरण दिखाई दी और उन्होंने टीएफआई से संपर्क का मन बनाया ।
17 अप्रैल को दोनों शिक्षक नेता अपने क्षेत्र के भाजपा सांसद श्री विष्णु पद रे के दिल्ली आवास पर पहुँचें और उनके साथ मा सांसद श्री जगदंबिका पाल जी से मुलाक़ात की ।मा पाल साहब ने हमें इन साथियों से मुलाकात करवाई ।
दोनों साथी पूरे दिन हमारे एवं श्री राधे रमण त्रिपाठी जी के साथ रहे और हमने आश्वस्त किया कि आप अकेले नहीं हैं टीएफआई आपके साथ है
अब टीएफआई का नारा “कश्मीर से कन्याकुमारी तक “न होकर
“कश्मीर से अंडमान निकोबार द्वीप समूह तक “होगा ।
दोनों साथियों को आश्वस्त किया कि शीघ्र ही अगली बैठक पोर्ट ब्लेयर में होगी ।
विद्यालय की साफ़ सफ़ाई के सम्बन्ध में @DmSambhal के स्पष्ट एवं सराहनीय निर्देश ।शिक्षकों के साथ यह कार्य हम सबने विद्यार्थी जीवन में किया है जोकि शिक्षा का ही एक हिस्सा है परंतु वर्तमान में छात्रों द्वारा अपने स्वयं के भोजन किए वर्तन धोने या अपने कक्षा कक्ष में कोई सफाई करने जैसी खबरों पर अनेक शिक्षकों पर कार्रवाई की गई है ।अब इससे राहत मिलेगी ।जिलाधिकारी महोदय को धन्यवाद 🙏
#NoTetBeforRteAct
महाराष्ट्र के दो दो शिक्षक संघ भी आये @TFI4India के साथ
श्री श्रीकांत देशपांडे जी पूर्व एमएलसी एवं संस्थापक अध्यक्ष शिक्षक अघाड़ी विदर्भ प्रदेश
तथा
श्री दत्तात्रेय सावंत पूर्व एमएलसी एवं महासचिव महाराष्ट्र शाला क्रुती समिति महाराष्ट्र से कल दिल्ली स्थित महाराष्ट्र सदन में टेट की अनिवार्यता को समाप्त करने के आंदोलन पर विस्तार से चर्चा हुई,दोनों ही नेताओं ने टीएफआई के प्रयास की सराहना की एवं टीएफआई से संबद्ध होने की इच्छा व्यक्त की ।महाराष्ट्र के दोनों संगठन शीघ्र ही टीएफआई के सदस्य होंगे ।
टीईटी अनिवार्यता के विरोध में रामलीला मैदान नई दिल्ली में शिक्षकों की महारैली।
सरकार से अनुरोध है कि अध्यादेश लाकर शिक्षकों को टीईटी अनिवार्यता से तत्काल मुक्त करें।
पीएफआई जिन्दाबाद
डाॅ दिनेश चन्द्र शर्मा जी जिन्दाबाद
Teachers Federation of India के बैनर तले देश के कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक के लाखों शिक्षकों ने रामलीला मैदान दिल्ली पहुँच कर बता दिया कि शिक्षकों के साथ अन्याय को बर्दास्त नहीं किया जायेगा ।रैली में उपस्थित सभी शिक्षकों ने साफ़ कहा कि भर्ती के समय सरकार द्वारा जो भी नियम और योग्यता निर्धारित की उसे अर्जित करने के बाद ही सभी शिक्षक नियुक्ति पाये है ।सुप्रीम कोर्ट द्वारा आरटीई से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर टेट की अनिवार्यता थोपा जाना किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा ।शिक्षकों ने कहा कि उनकी नियुक्ति सरकार द्वारा की गई इसलिए उसकी सेवा शर्तों की सुरक्षा का दायित्व भी सरकार का है ।फेडरेशन ने माँग की कि भारत सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश के retrospective effect को समाप्त करने के लिये क़ानून बनाए ।
रैली के मुख्य अतिथि मा सांसद श्री जगदंबिका पाल ने रैली को संबोधित करते हुए कहा हम देश के शिक्षकों की आबाज को देश यशस्वी प्रधानमंत्री जी तक पहुँचाएँगे और शिक्षकों का अहित नहीं होने दिया जायेगा ।
हम देश भर से आये सभी साथियों का हार्दिक आभार व्यक्त करते हैं ।
#NoTetBeforeRteAct
@narendramodi@jagdambikapalmp@dpradhanbjp@AmitShah@PMOIndia
#04_April_MarchToDelhi#NoTetBeforeRteAct
आगामी 04 अप्रैल को रामलीला मैदान में होने वाली महा रैली की तैयारियों को दृष्टिगत रखते उत्तर प्रदेश के संगठन उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ की बैठक संपन्न हुई जिसमें उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों के सभी जिला अध्यक्ष और मंत्रियों ने भाग लिया ।सभी ने अन्याय के विरुद्ध एकजुट होकर आंदोलन में शामिल होने का संकल्प लिया ।
#04_अप्रैल_दिल्ली_चलो#NoTetBeforeRteAct
सम्मानित साथियों हमारी भारत सरकार से माँग है कि आरटीई से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर टेट की अनिवार्यता को समाप्त करने हेतु क़ानून बनाया जाये ।इस संबंध में टीएफआई के प्रतिनिधि मंडल ने 19 दिसंबर को केंद्रीय शिक्षा मंत्री जी से वार्ता करके ज्ञापन सौंपा था और हमें आशा थी कि बज़ट सत्र में सरकार इस विषय पर विधेयक लाएगी परन्तु अभी तक ऐसा नहीं हुआ जिससे शिक्षकों में असंतोष व्याप्त है ।अभी तक आप दो दो बार आपने जिलाधिकारी के माध्यम से मा प्रधानमन्त्री जी को ज्ञापन प्रेषित किया गया साथ ही मा सांसदों को ज्ञापन सौंपा गया ।अनेक सांसदों द्वारा संसद में विषय को उठाया गया गया लेकिन भारत सरकार का शिक्षा मंत्रालय देश के 20 lakhलाख शिक्षक व उनके परिवार के प्रति संवेदनशील नहीं है ।
इसलिए आप सभी से अनुरोध है कि 4 अप्रैल को दिल्ली के रामलीला मैदान पहुंचकर अपनी सेवा को सुरक्षित करें ।
प्रश्न: कुछ शिक्षक संगठन विभागीय टीईटी की मांग राज्य सरकारों से कर रहे हैं इस पर TFI का क्या रुख है?
राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ दिनेश चंद्र शर्मा: जो शिक्षक संगठन ऐसी मांग कर रहे हैं उनके शिक्षक हितैषी संगठन होने पर संदेह है।
जब तत्कालीन पात्रता अर्जित करके सरकार ने शिक्षक पद पर नियुक्त प्रदान की है तो बार बार नियम बदल कर परीक्षा क्यों दी जाए।
"अपने जीवन की अंतिम सांस तक इस अंधे कानून के ख़िलाफ़ लड़ा जाएगा।"
@DrDCSHARMAUPPSS
@TFI_2025 @vipinUPPSS