माननीय महमूदाबाद विधायक श्री नरेन्द्र सिंह वर्मा जी के कर्मचारियों के ह���त के लिए किए गए क्रन्तिकारी पहल स्वागत योग्य।सभी माननीयो को ऐसा निर्णय नैतिकता के आधार पर लेना चाहिए ।
अटेवा/nmops के पेंशन आन्दोलन का असर जनप्रतिनिधियो पर भी पड़ रहा है। मा० नारेन्द्र वर्मा विधायक के क्रांतिकारी और तर्कसंगत सवाल का हम स्वागत करते है।
साथियो आगे बढ़ते रहो अपने मुद्दे पर डटो रहो। अटेवा/nmops का साथ देते रहो क्योकि संघर्ष कभी बेकार नही जाता ।
@nsvermamla@Anubhawp@PMOIndia@narendramodi महोदय,
यह ��ेवल चुनावी बयानबाजी बनकर न रह जाय क्योंकि यह मानवतावादी दृष्टिकोण तभी जाग्रत होता है जब कोई सरकार में नहीं होता है।
आपकी ही सरकार ने प्रदेश में NPS लागू किया और 5 वर्ष माननीय अखिलेश यादव जी की सरकार में लगातार कर्मचारियों की मांग को अनसुना किया गया।
यदि कर्मचारियों को पेंशन का अधिकार नही है, तो जनप्रतिनिधियों व मा0 न्यायमूर्तियों को भी पेंशन लेने का कोई नैतिक अधिकार नही है।
सरकार से मांग है या तो कर्मचारियों की पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल की जाए या फिर जनप्रतिनिधियों / न्यायधीशों को नई पेंशन व्यवस्था की परिधि लाया जाए। 2/2
सत्ता के द्वारा किया गया निष्पक्ष न्याय आम जनता को भी दिखना चाहिए। सरकारी कर्मचारियों की पेंशन व्यवस्था 1 अप्रैल 2004 से समाप्त कर दी गयी थी। कर्मचारियों द्वारा ��िगत कई वर्षों से पुरानी पेंशन बहाल करने की लगातार मांग की जा रही है। ....1/2
@PMOIndia @narendramodi
आज ऐसी इच्छाशक्ति वाले नेताओं की जरूरत है
जो कर्मचारियों के मुद्दे पर रुख स्पष्ट कर सके और उचित न्याय कर सकें
समय है वोट सिर्फ उसे दिया जाए जो कर्मचारियों के न्यायोचित मांग को पूरा करे भ्रष्ट लोभी और झूठे नेताओं को अस्वीकार कर देना चाहिए
एक देश एक विधान
एक समान पेंशन व्यवस्था
आज ऐसी इच्छाशक्ति वाले नेताओं की जरूरत है
जो कर्मचारियों के मुद्दे पर रुख स्पष्ट कर सके और उचित न्याय कर सकें
समय है वोट सिर्फ उसे दिया जाए जो कर्मचारियों के न्यायोचित मांग को पूरा करे भ्रष्ट लोभी और झूठे नेताओं को अस्वीकार कर देना चाहिए
एक देश एक विधान
एक समान पेंशन व्यवस्था