आज छात्रावास कैंपेनिंग दौरान डायमंड जुबली छात्रावास में आह्वान उद्घोष
रेलम रेल पटरा कर दिया जाएगा;आ रहे हैं कल 11 नवम्बर को 11 बजे आयोग पर...पुलिस एवं जिला प्रशासन ज्यादा उत्तेजित न हो और न ही छात्रों को डराए,भड़काए
#UPPCS_ROARO_ONESHIFT#NoNormalisation@CMOfficeUP@DM_PRAYAGRAJ
माना युवक तिलचट्टे हैं बेरोज़गार हैं,
बेवजह इस अर्थव्यवस्था पर भार हैं,
सर्वोच्च न्यायाधीश जी यह भी बताइए,
युवाओं के इस दुर्दशा के कौन ज़िम्मेदार हैं??
✍🏼 कवि उदय प्रताप सिंह
#CJISuryakantRubbishStatement
#NTABan 22 लाख छात्रों के भविष्य की आवाज़ है।
NEET छात्रों की साफ़ माँगें:
✊ NTA भंग करो
✊ शिक्षा मंत्री इस्तीफ़ा दें
✊ सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में CBI जाँच हो
✊ छात्रों को मेंटल हेल्थ सपोर्ट मिले
✊ फ्री लीगल ऐड मिले
✊ आर्थिक मुआवज़ा और वित्तीय सहायता दी जाए
📞 Toll Free: 9268030030
मैं उन विद्यार्थियों, माता-पिता, शिक्षकों और कोचिंग संस्थानों के साथ खड़ा हूँ जिन्होंने वर्षों की मेहनत लगाई है। 23 लाख छात्रों के भविष्य से जुड़े इस मामले में NTA की पूर्ण जवाबदेही तय होनी चाहिए। सरकार निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करे। बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ स्वीकार नहीं!
देश के युवाओं के सामने एक गंभीर बात रखना चाहता हूँ।
एक काम कीजिए - खुद Google कीजिए: “NEET 2024 की भयंकर चोरी के दौरान NTA का DG कौन था, और मोदी सरकार ने उसे आज कहां बैठाया है?”
देखा? समझ आया?
BJP इसी तरह आप जैसे लाखों मेहनती विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को इनाम देती है - उनकी रक्षा करती है, ऊपर से उन्हें तरक्की देती है।
साफ़ है - मोदी जी और भाजपा आपके भविष्य की चोरी में ख़ुद साझेदार हैं।
जिस बाज़ार में आपकी मेहनत, आपके सपने नीलाम हो रहे हैं, उसका एक ही उसूल है - जितनी बड़ी चोरी, उतना बड़ा इनाम।
NEET 2026 के पेपर लीक की खबर सुनी।
परीक्षा नहीं - NEET अब नीलामी है।
कई सवाल परीक्षा से 42 घंटे पहले WhatsApp पर बिक रहे थे।
22 लाख से ज़्यादा बच्चे साल भर रात-रात भर आँखें जलाकर पढ़ते रहे और एक रात में उनका भविष्य बाज़ार में सरेआम नीलाम हो गया। यह पहली बार नहीं है। 10 साल में 89 पेपर लीक - 48 बार दोबारा परीक्षा। हर बार वही वादे, और फिर वही ख़ामोशी।
मोदी जी, जब आप अपनी हर नाकामी का बिल जनता पर डालते हैं, तो ग़रीब के बच्चों का भविष्य भी उसी बिल में आता है।
22 लाख बच्चों का भरोसा टूटा है। और मोदी सरकार से बड़ा ख़तरा भारत के युवाओं के सपनों के लिए कोई नहीं।
मैं भारत के युवा के साथ हूँ। यह वक़्त बेहद मुश्किल है - मैं जानता हूँ। लेकिन यह व्यवस्था ऐसे नहीं रहेगी। हम मिलकर इसे बदलेंगे।
मोदी जी ने कल जनता से त्याग मांगे - सोना मत ख़रीदो, विदेश मत जाओ, पेट्रोल कम जलाओ, खाद और खाने का तेल कम करो, मेट्रो में चलो, घर से काम करो।
ये उपदेश नहीं - ये नाकामी के सबूत हैं।
12 साल में देश को इस मुक़ाम पर ला दिया है कि जनता को बताना पड़ रहा है - क्या ख़रीदे, क्या न ख़रीदे, कहां जाए, कहां न जाए। हर बार ज़िम्मेदारी जनता पर डाल देते हैं ताकि ख़ुद जवाबदेही से बच निकलें।
देश चलाना अब Compromised PM के बस की बात नहीं।
गेरिमैंडरिंग (Gerrymandering) का अर्थ है
👉 चुनावी क्षेत्रों (constituencies) की सीमाओं को इस तरह बदलना कि किसी खास पार्टी या समूह को अनुचित फायदा मिले।
सरल भाषा में
लोकतंत्र में जनता अपने प्रतिनिधि चुनती है,
लेकिन गेरिमैंडरिंग में राजनेता ही अपने वोटर “चुन” लेते हैं।
यह कैसे किया जाता है?
1. पैकिंग (Packing)
विपक्ष के वोटरों को कुछ ही सीटों में इकट्ठा कर देना, ताकि वे सिर्फ उन्हीं सीटों पर जीतें।
2. क्रैकिंग (Cracking)
विपक्ष के वोटरों को कई सीटों में बाँट देना, ताकि वे हर जगह हार जाएँ।
आसान उदाहरण
मान लीजिए 100 वोटर हैं:
60 लोग पार्टी A के समर्थक
40 लोग पार्टी B के समर्थक
सामान्य स्थिति में पार्टी A को ज्यादा सीटें मिलनी चाहिए।
लेकिन अगर सीमाएँ चालाकी से बदली जाएँ:
या तो A के वोटरों को एक जगह “पैक” कर दिया जाए
या B के वोटरों को अलग-अलग सीटों में “तोड़” दिया जाए
👉 तो कम वोट होने के बावजूद भी पार्टी B ज्यादा सीटें जीत सकती है।
इसका असर
लोकतंत्र की निष्पक्षता पर चोट
सही प्रतिनिधित्व कमज़ोर
जनता की असली आवाज दब जाती है
भारत के संदर्भ में
भारत में सीमाओं का निर्धारण भारत का परिसीमन आयोग करता है, जो एक स्वतंत्र संस्था है।
फिर भी परिसीमन (Delimitation) और प्रतिनिधित्व को लेकर समय-समय पर बहस होती रहती है कि सभी वर्गों को न्यायपूर्ण हिस्सेदारी मिले।
एक लाइन में समझें
👉 गेरिमैंडरिंग = चुनावी सीमाओं को राजनीतिक लाभ के लिए तोड़-मरोड़ कर बनाना।
One of the BJP's dangerous plans is to “gerrymander” all Lok Sabha seats to its advantage for the 2029 elections
The proposed Bills remove all Constitutional safeguards on delimitation, giving full power to the Delimitation Commission which the govt itself will appoint and direct.
We have seen how BJP does this - it hijacked delimitation in Assam and Jammu and Kashmir, where it split up anti-BJP regions and communities for electoral advantage. As a result,
- some seats have 25 lakh voters, while some have only 8 lakh
- some seats have 12 Vidhan Sabha segments, while some have only 6
- some seats are broken into pieces without connection, sometimes divided by rivers or mountains
Having captured the Election Commission, PM Modi is confident that he can capture the Delimitation Commission too. The Congress will not allow this to happen.
Delimitation should be based on a transparent policy framework, developed after wide consultations with a consensus. Indians of all communities and States should feel confident that they will be represented and their voices will be heard.
This is the only way forward to protect and strengthen our democracy.
उम्मीद के मुताबिक़ संविधान संशोधन विधेयक गिर गया।क्योंकि सरकार के पास संख्या बल नहीं था।दरअसल सरकार महिला आरक्षण की आड़ में जनगणना के बग़ैर परिसीमन लागू करना चाहती थी।अब मोदी जी अपने भाषण में कहेंगे,हम तो महिलाओं को आरक्षण देना चाहते थे लेकिन विपक्ष ने समर्थन नहीं किया।
यह महिला आरक्षण बिल नहीं है - इसका महिलाओं से कोई संबंध नहीं।
यह बिल OBC विरोधी है,
यह बिल SC-ST विरोधी है,
यह बिल Anti National है - दक्षिण, उत्तर-पूर्व, उत्तर-पश्चिम और छोटे राज्यों के खिलाफ है।
हम भारत जोड़ने वाले न किसी का हक़ छिनने देंगे, न देश को बंटने देंगे।
कल नोएडा की सड़कों पर जो हुआ, वो इस देश के श्रमिकों की आख़िरी चीख़ थी - जिसकी हर आवाज़ को अनसुना किया गया, जो मांगते-मांगते थक गया।
नोएडा में काम करने वाले एक मज़दूर की ₹12,000 महीने की तनख्वाह,₹4,000-7,000 किराया। जब तक ₹300 की सालाना बढ़ोतरी मिलती है, मकान मालिक ₹500 सालाना किराया बढ़ा देता है।
तनख्वाह बढ़ने तक ये बेलगाम महंगाई ज़िंदगी का गला घोंट देती है, कर्ज़ की गहराई में डुबा देती है - यही है “विकसित भारत” का सच।
एक महिला मज़दूर ने कहा - “गैस के दाम बढ़ते हैं, पर हमारी तनख्वाह नहीं।” इन लोगों ने शायद इस गैस संकट के दौरान अपने घर का चूल्हा जलाने के लिए ₹5000 का भी सिलेंडर खरीदा होगा।
यह सिर्फ़ नोएडा की बात नहीं है। और यह सिर्फ़ भारत की भी बात नहीं है। दुनियाभर में ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं - पश्चिम एशिया में युद्ध की वजह से सप्लाई चेन टूट गई है।
मगर, अमेरिका के टैरिफ़ वॉर, वैश्विक महंगाई, टूटती सप्लाई चेन - इसका बोझ Modi जी के “मित्र” उद्योगपतियों पर नहीं पड़ा। इसकी सबसे बड़ी मार पड़ी है उस मज़दूर पर जो दिहाड़ी कमाता है, तभी रोज़ खाता है।
वो मज़दूर, जो किसी युद्ध का हिस्सा नहीं, जिसने कोई नीति नहीं बनाई - जिसने बस काम किया। चुपचाप। बिना शिकायत। और उसके बदले अपना हक मांगने पर उन्हें मिलता क्या है? दबाव और अत्याचार।
एक और ज़रूरी मुद्दा - मोदी सरकार ने 4 लेबर कोड जल्दबाज़ी में बिना संवाद नवंबर, 2025 से लागू कर, काम का समय 12 घंटे तक बढ़ा दिया।
जो मज़दूर हर रोज़ 12-12 घंटे खड़े होकर काम करता है फिर भी बच्चों की स्कूल फ़ीस क़र्ज़ लेकर भरता है - क्या उसकी मांग ग़ैरवाजिब है? और जो उसका हक़ हर रोज़ मार रहा है - वो “विकास” कर रहा है?
नोएडा का मज़दूर ₹20,000 माँग रहा है। यह कोई लालच नहीं - यह उसका अधिकार, उसकी जिंदगी का एकमात्र आधार है।
मैं हर उस मज़दूर के साथ हूं - जो इस देश की रीढ़ है और जिसे इस सरकार ने बोझ समझ लिया है।
इलेक्शन कमीशन ऑफ़ इंडिया की इस हिम्मत पर 14 कट्टों की सलामी और उनकी इस हिमाकत पर ढेरों लानत
भारत देश के सजग नागरिक गणों! इस प्रकरण की गंभीरता को समझिए और इस पर अपनी भौंहें टेढ़ी कीजिए
अन्यथा की स्थिति लोकतान्त्रिक व्यवस्था के बेहतर संचालन हेतु बेहद भयावह है
#CorruptECI#BJP_ECI
𝐀 𝐁𝐉𝐏 𝐬𝐞𝐚𝐥 𝐨𝐧 𝐚𝐧 𝐄𝐥𝐞𝐜𝐭𝐢𝐨𝐧 𝐂𝐨𝐦𝐦𝐢𝐬𝐬𝐢𝐨𝐧 𝐥𝐞𝐭𝐭𝐞𝐫!
A letter sent by the Election Commission to political parties carried the seal of the BJP Kerala unit instead of the Election Commission’s seal.
Let that sink in.
Not a mistake, but a serious red flag.
A constitutional body carrying the BJP’s mark raises serious questions about its neutrality and credibility.
What does this say about the independence of our institutions?
Questions that demand answers:
❓ Why is the Election Commission behaving like a BJP stooge?
❓How did a political party’s seal appear on an official EC communication?
❓Who is accountable?
❓Can the Election Commission explain this to the people of India?
When institutions meant to safeguard democracy appear compromised, silence is not an option.
👉India deserves transparency.
👉India deserves answers.