वाइस चांसलर – ये दाढ़ी क्यों बढ़ाई है?
ओशो – मैंने नहीं बढ़ाई, यह खुद से बढ़ती है क्योंकि प्राकृतिक है। आपने दाढ़ी कटाई है, प्रश्न आपसे बनता है कि आपने दाढ़ी क्यों कटाई।
@Hindinama2
बहुत उछल - कूद , लंब��� अफरा - तफरी एवं हो - हुल्लड़ के बाद जब ख़ामोशी छा जाती है
तब दुनिया उस ख़ामोशी को देखने का बड़ा आनंद लेती हैं ...
~ Naina Thathiya
आग को खेल पतंगों ने समझ रखा है
सबको अंजाम का डर हो ये ज़रूरी तो नहीं
शैख करता है जो मस्जिद में ख़ुदा को सजदे
इसके सजदों में असर हो ये ज़रूरी तो नहीं
सबकी साकी पर नज़र हो ये ज़रूरी है मगर
सबपे साकी की नज़र हो ये ज़रूरी तो नहीं
उम्र जलवों में बसर हो ये ज़रूरी हो नहीं
हर शबे ग़म की सहर हो ये ज़रूरी तो नहीं
नींद तो दर्द के बिस्तर पे भी आ सकती है
उनके आगोश में सर हो ये ज़रूरी तो नहीं
@Profdilipmandal
सर अब आप @AshwiniVaishnaw
के बारे में भी कुछ लिख दीजिए थोड़ी उनकी अच्छाई
*चेन्नई के पास रेल हादसा, 19 लोग घायल:* झटके के बाद मैसूर-दरभंगा एक्सप्रेस दूसरी लेन में गई, खड़ी मालगाड़ी से टकराई, आग लगी, 13 डिब्बे डिरेल
https://t.co/l7VZb51np3
प्रेमचंद बैरवा के बेटे की पहचान उजागर करना जुवेनाइल जस्टिस एक्ट का उल्लंघन, जिसकी सज़ा छह महीने की जेल भी है
उप मुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा के पुत्र का कथित मामला इस बात को प्रमाणि��� करता है कि भारतीय समाज में किसी दलित नेता या उसके किसी बेटे का नगण्य सा खिलंदड़ापन बड़ी ग़लती की तरह प्रस्तुत किया जाता है और इसमें किसी कानून का भी ख़याल नहीं रखा जाता।
बैरवा के बेटे ने जो किया है, वह सामने ही किया और इन्स्टाग्राम पर एक रील बनाई। इन्स्टाग्राम पर जाने कैसी-कैसी रीलें नेताओं के बेटों ने डाल रखी हैं। इस सबका हिसाब भी नहीं रखा जा सकता।
बैरवा का बेटा एक किशोर छात्र है। उसने न त�� शराब पी, न उसने किसी को वाहन से कुचला, न किसी को गाली दी और न ही किसी तरह की अभद्रता की। उसने किशोर सुलभ एक मज़ा ले लिया एक ख़ास तरह की मोडिफाईड गाड़ी पर।
अक़बर इलाहाबादी के शब्दों में कहें तो हंगामा है क्यूँ बरपा थोड़ी सी जो पी ली है, डाका तो नहीं मारा चोरी तो नहीं की है! उसने किसी क्रिकेट संघ की जिला अध्यक्षी लेकर किसी खिलाड़ी का हक़ नहीं मारा। उसने किसी जगह से टिकट लेकर किसी कार्यकर्ता के सपनों को नहीं कुचला। उसने कोई ऐसा अपराध त�� नहीं किया, जिस पर इतना कुछ हो।
वह एक किशोर है और उसे भारतीय कानून के तहत एक ख़ास संरक्षण हासिल है। इस संरक्षण को भंग करने का मतलब है छह महीने की सज़ा और दो लाख रुपए ज़ुर्माना।
तो ऐसा प्रतीत होता है कि जिन लोगों ने बैरवा के बेटे की पहचान उजागर की, उन्होंने बैरवा के बेटे से अधिक बड़ा अपराध कर डाला है।
पता नहीं, कैसी तो पार्टी है, जो उनसे सफाई मांग रही है और क्या इस इन्सान की ग़लती है। इस पार्टी ने उन नेताओं से तो कुछ पूछा नहीं कि आप क्रिकेट में और दूसरी जगहों पर अपने पुत्रों के लिए क्या गुल खिला रहे हैं!
जाने कितने ही नेताओं के बेटे इस समय क्या-क्या कारगुजारियां कर रहे हैं और वे कैसी कैसी गतिविधियों में लिप्त हैं। यह सिर्फ़ भाजपा में ही हो रहा हो, ऐसा भी नहीं है।
बहुत से ऐसे लोगों को भी उन पुत्रों के माहात्म्य की संपूर्ण जानकारी है, जो बैरवा के बेटे का मामला उठा रहे हैं। और जो पार्टी नेता उनसे जवाब मांग रहे हैं, उन्हें भी बहुत कुछ मालूम है।
भारत में एक कानून है : The Juvenile Justice (Care and Protection of Children) Act, 2015 यानी जिसे हिन्दी में किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण)अधिनियम, 2015 कहा जाता है। इसका एक सेक्शन है 74, जो बैरवा के किशोर पुत्र को संरक्षण प्रदान करता है।
इस कानून में जिक्र है कि किसी भी बाल अपचारी का नाम लिखना, उसके स्कूल या कॉलेज का नाम लिखना, पिता या माता का नाम लिखना और उसकी किसी भी प्रकार से पहचान उजागर करना पूरी तरह गैरकानूनी है। इस तरह बैरवा के बेटे का विडियो वायरल करना एक अपराध की श्रेणी में आता है।
यह कानूनी प्रावधान इस प्रकार है :
Section 74. Prohibition on disclosure of identity of children.
(1) No report in any newspaper, magazine, news-sheet or audio-visual media or other forms of ommunication regarding any inquiry or investigation or judicial procedure, shall disclose the name, address or school or any other particular, which may lead to the identification of a child in conflict with law or a child in need of care and protection or a child victim or witness of a crime, involved in such matter, under any other law for the time being in force, nor shall the picture of any such child be published :
Provided that for reasons to be recorded in writing, the Board or Committee, as the case may be, holding the inquiry may permit such disclosure, if in its opinion such disclosure is in the best interest of the child.
(2) The Police shall not disclose any record of the child for the purpose of character certificate or otherwise 1[in the pending case or in the case which] has been closed or disposed of.
(3) Any person contravening the provisions of sub-section (1) shall be punishable with imprisonment for a term which may extend to six months or fine which may extend to two lakh rupees or both.
सच तो यह है कि किसी भी दलित नेता को निशाना बनाना बहुत ही आसान है और दलित या वंचित नेता को निशाना बनाते हुए सफाई देना भी बुरा नहीं लगता; क्योंकि हमने समाज में यही स्थिति कर दी है। ऐसे मामलों में उच्च जातियों का तो स्वाभिमान जाग उठता है, लेकिन दलित पृष्ठभूमि से आया नेता सफाई ही देता रहता है। निरीहता ही व्यक्त करता रहता है।
कभी इस प्रदेश में जगन्नाथ पहाड़िया मुख्यमंत्री बने थे तो उन्होंने एक बहुत ही सही बात कही थी कि महादवी वर्मा की कविताएं किसी क��� समझ ही नहीं आतीं। उनकी बात सौ प्रतिशत सही थी। महादेवी वर्मा की कविताएं वाक़ई में समझना आसान नहीं हैं। बड़े-बड़े समालोचक चक्कर खा जाते हैं। लेकिन पहाड़ियो को उनके दलित होने की सज़ा मिली और दलित विरोधी कांग्रेस नेताओं ने उन्हें हटाकर ही दम लिया।
इस राजधानी में सुप्रसिद्ध समाजशास्त्री आशीष नंदी सीना ठोककर कहकर गया तो दलित सबसे भ्रष्ट होते हैं। किसी ने उनका बाल भी बांका किया हो तो कोई बताए! इस प्रदेश के दलित मंत्रियों, दलित आईएएस या दलित आईपीएस में से किसी का स्वाभिमान भी जागा हो तो बताए!
@DrPremBairwa #PremChandBairwa #PremchandBairwaSon
*सब्बे सत्ता सुखी होन्तु, सब्बे होन्तु च खेमिनो!*
*सब्बे भद्राणि पस्सन्तु, माँ किंचित दुख्मागमा!!*
"दुनिया के सभी प्राणी सुखी हो,सबका कल्याण हो, सबको कल्याण क�� मार्ग मिले, किसी को कोई दुःख ना हो !"
भवतु सब्ब मङ्गलं