Pogga पण्डितो की की कहानी और इतिहास यही रहा है 😊
यह लोग कैसे डराकर आज तक अपनी दुकान चले रहें हैं और लोग डर भी रहे हैं...
आपका डर ही इनके लिए रोजगार का अवसर प्रदान करता है...
भारत के ईंट भट्टा कारखाना बंधुआ मजदूर का केंद्र है, सरकार को संज्ञान लेना चाहिए, पीढी दर पीढ़ी शोषण होता है और इसका शिकार सिर्फ़ बहुजन वर्ग के लोग है,
ग़रीबी के कारण कुछ पैसा ले लेते हैं फिर असली खेल चालू होता है, भट्टा संचालक ब्याज़ पर ब्याज़ बढ़ाता जाता है, उसकी मजदूरी से वह कभी ब्याज छोड़ो मूल भी नहीं भर पाता,
पूरा जीवन शोषण का शिकार होते हैं बच्चे नहीं पढ़ पाते इसीलिए उनको भी मजबूरी में यही कार्य करना पड़ता है, पूरा परिवार ही इसमें लिप्त हो जाता है, दिन रात मेहनत करते हैं फ़िर भी कर्ज उतारने में जीवन बीत जाता है,
बहुत खतरनाक स्थिति है, कहने को आजादी के 80 वर्ष हो गए लेकिन बंधुआ मजदूरी आज भी जारी है,
इस मार्मिक दृश्य से आप आहत नहीं हुए है तो समझिए आप मनुवादी है, शोषण की व्यवस्था मनुवाद की देन हैं ।
Let us see How Hurt People Get Upon Listening Factual Incidents By People Who Live Overseas.
I Hate Raghu’s Political Opinion but that does not mean I have to disagree on everything he says
I Generally Like Shan’s Opinions
Why India & Indians are Getting Hate Globally.
जयपुर
वोट मांगने आए भाजपा कार्यकर्ताओं को उम्मीद नहीं थी कि उनसे इतनी साफ-सुथरी गली में भी कचरा उठवाने की मांग की जाएगी। अब कचरा तो रोज ही होगा और रोज ही उठवाना पड़ेगा भाई।
लेकिन यह बात ठीक है कि कचरा उठवाने का यह अच्छा अवसर है
अंधभक्तों को ये वीडियो जरूर देखना चाहिए जिसमें लाल कृष्ण आडवाणी जिन्होंने राम मंदिर आंदोलन की यात्रा की शुरुआत की वो खुद मान रहे हैं कि बाबरी मस्जिद को ध्वस्त करना उनकी भयानक गलती थी।
आज संजय गांधी की फैमिली प्लानिंग की पॉलिसी को यदि हम अपनाते तो हमारी आबादी 150 करोड़ नहीं 85 करोड़ होती..
संजय गांधी ने कानून बनाया था कि शादी में 125 आदमी से अधिक नहीं होंगे खाने में 21 आइटम होंगे 2 किलोवाट से जायदा बिजली खर्च नहीं होगी पेड़ नहीं काटे जायेंगे।
पहले वस्तुओं पर दाम नहीं लिखे जाते थे संजय गांधी ने MRP लिखने की शुरुआत की.. संजय गांधी बहुत सोशलिस्ट व्यक्ति थे!
Who is this guy ?
Absolutely nailed it !
"I don't need to be a RAM-BHAKT to call out the Corruption in the RAM-MANDIR.."
GenZ has taken BJP to cleaners.
न्यायपालिका के कोलिजियम जजों और वाइस चांसलर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर न तो कोई आरक्षण है और न ही ये पद तथाकथित “मेरिट” के आधार पर भरे जाते हैं। इन महत्वपूर्ण पदों पर देश की लगभग 85% आबादी की भागीदारी लगभग नगण्य है।
आरक्षण केवल प्रतिनिधित्व का सवाल नहीं है। यह जातिवाद, भाई-भतीजावाद और जातीय नेटवर्क के उस नेक्सस को तोड़ने का भी एक जरूरी माध्यम है, जिसने सत्ता और संस्थानों पर कुछ खास समूहों का वर्चस्व बनाए रखा है।
श्यामलाल यादव जी देश के सबसे बड़े पत्रकार हैं,
RTI में उनका सानी दुनिया मानती है,
India Today, इंडियन एक्सप्रेस जैसे बड़े संस्थानों में क़ाम कर चुके हैं,
लेकिन आपने इनको कभी Tv डिबेट्स में नहीं देखा होगा,
वहाँ सिर्फ हर्षवर्धन त्रिपाठी जैसे स्टिंगर्स बुलाए जाते हैं,
श्यामलाल यादव के सामने जिनकी हैसियत इंटर्न जैसी भी नहीं है,
क्योंकि सबको पता है कि
अपने तर्क और तथ्यों से श्यामलाल यादव
कथित मेरिट की सब पोल खोल देंगे
जैसे आज खोल रहे हैं,