Compromised PM के राज में एक भारतीय होने का मतलब दुर्गति है।
विदेशी ताकत हमारे नागरिकों को मारती है। हमारी सरकार एक आज्ञाकारी नौकर की तरह चुप-चाप आदेश मान लेती है - और हमारे नागरिक सड़ने के लिए छोड़ दिए जाते हैं।
इस भारतीय को घर लाइए। अभी।
Deeply shocking to read this official US statement, which contains absolutely no expression of regret or condolence for the loss of innocent Indian lives. How can a “friend” and strategic partner be so deeply insensitive?
Why couldn’t a non-compliant commercial vessel have been stopped using other, non-lethal means? Is it not possible to disable a ship's propulsion or steering without firing missiles targeted to kill civilian crew members?
Practically every merchant ship navigating these crucial waters has Indian crew on board. Are they all considered fair game for US missiles now?
This approach is unacceptable and I hope @DrSJaishankar had said so to @marcorubio.
The US military attacked Indian oil tankers near the Strait of Hormuz, killing three Indians.
The Indian Prime Minister did not even issue a single condemnation..
India should ask US Ambassador in New Delhi to go back to Washington and remain there unless US expresses regret for the reckless killing of our citizens on sea. But Modi is a pussy cat before Donald. He shivers before him.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में सबसे लंबे समय तक देश की सेवा करने का रिकॉर्ड तोड़ दिया है।
पंडित नेहरू 13 मई 1952 से 27 मई 1964 तक, यानी करीब 12 साल और 14 दिनों तक निर्वाचित प्रधानमंत्री रहे थे। अब नरेंद्र मोदी इस रिकॉर्ड को पार कर चुके हैं।
ऐसे समय में, जब गठबंधन से लेकर तमाम तरह की राजनीतिक जटिलताएं पहले से कहीं ज्यादा हैं, यह अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।
आज इस मौके पर उनके समर्थकों के साथ-साथ उनके आलोचकों और राजनीतिक विरोधियों के मन में भी यह सवाल जरूर होगा कि क्या पीएम मोदी पंडित नेहरू के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बने रहने का रिकॉर्ड भी तोड़ पाएंगे।
ऐसा करने के लिए उन्हें अपना मौजूदा कार्यकाल पूरा करना होगा, जिसमें अभी लगभग 3 साल बाकी हैं। और अगर 2029 के चुनावों में जीतकर वह दोबारा प्रधानमंत्री बनते हैं, और कम-से-कम मार्च-अप्रैल 2031 तक इस पद पर बने रहते हैं, तब वह उस रिकॉर्ड को भी पार कर सकते हैं।
जिसने वर्षों तक पत्रकारिता को TRP, प्रोपेगेंडा और सत्ता के पक्ष-विपक्ष की लड़ाई में बदल दिया हो, उसे शिक्षकों को 'धंधेबाज' कहने से पहले आत्ममंथन करना चाहिए।
शिक्षा में गलत लोग भी हैं।
लेकिन पत्रकारिता में भी हैं।
राजनीति में भी हैं।
व्यापार में भी हैं।
तो क्या कुछ गलत लोगों के कारण पूरे शिक्षक समाज को "दो कौड़ी का" कह दिया जाएगा?
anjana शिक्षक का सम्मान कमाने में वर्षों लगते हैं।
भर्तियाँ अटक रही थीं,
लाखों युवाओं की उम्र निकल रही थी,
तब आपके स्टूडियो की आवाज़ कहाँ थी?
शिक्षकों ने पैसे लेकर शिक्षा दी है।
लेकिन पैसे लेकर किसी राजनीतिक दल का प्रवक्ता बन जाना,
व्यवस्था की हर गलती पर पर्दा डालना,
और जनता के असली मुद्दों से ध्यान भटकाना...
यह सिर्फ पत्रकारिता का पतन नहीं,
बल्कि अपने पेशे के साथ गद्दारी है।
शिक्षक फीस लेकर ज्ञान देता है,
मेहनत करवाता है,
बच्चे का भविष्य बनाता है
शिक्षकों ने पैसे लेकर पढ़ाया है,
देश के लाखों युवाओं को रोजगार तक पहुँचाया है।
लेकिन गलत को सही और सही को गलत साबित करने की कीमत लेकर काम करना,
समाज और लोकतंत्र दोनों के साथ विश्वासघात किसने किया ?
NEET। CBSE। SSC। और आज CUET।
चार परीक्षाएँ। एक करोड़ बच्चे। एक भी ईमानदारी से नहीं हो पाई।
दावे "विश्वगुरु" के, मगर देश में एक परीक्षा नहीं करवा सकते - मोदी जी ने पूरी शिक्षा व्यवस्था तबाह कर दी है।
जिस पीढ़ी का भविष्य आप बर्बाद कर रहे हैं - वही पीढ़ी आपका हिसाब करेगी।
NEET छात्रों से मुलाक़ात में एक बात बिल्कुल साफ़ हो गई - भारत का युवा नरेंद्र मोदी पर भरोसा नहीं करता।
उन्होंने मुझे बताया - पेपर WhatsApp और Telegram पर खुलेआम बिक रहे हैं। किस कीमत पर बिक रहे हैं, कौन ख़रीद रहा है, माफ़िया कैसे काम कर रहे हैं - यह सब इन बच्चों को पता है।
उनका एक ही सवाल था - जो हमें पता है, वो सरकार और संस्थाओं को क्यों नहीं? सच यह है ये बच्चे सरकार से बेहतर जानते हैं कि इस सड़ी हुई व्यवस्था को कैसे ठीक किया जा सकता है।
और दूसरी ओर कितनी शर्मनाक बात है कि जिस सेना का काम दुश्मनों से देश की रक्षा करना है, आज उसे मोदी सरकार के अपने भ्रष्टाचार से बच्चों के पेपर बचाने भेजा जा रहा है।
टुकड़ों के सुधार से अब काम नहीं चलेगा। छात्रों, शिक्षकों और Experts के साथ मिलकर पूरी परीक्षा व्यवस्था नए सिरे से बनानी होगी।
हम और बच्चे नहीं खो सकते। और एक भी पीढ़ी का भविष्य इस भ्रष्ट तंत्र के हवाले नहीं कर सकते।
हम परीक्षा के लिए सुबह 4:30 बजे से निकले हैं, बहुत प्रेशर है, लेकिन इन लोगों को कोई मतलब नहीं है।'
- SSC GD की परीक्षा कैंसिल होने की खबर सुनते ही एक छात्रा फूट-फूटकर रोने लगी।
छात्रों का कहना है कि पेपर लीक के कारण परीक्षा रद्द हुई है। एग्जाम सेंटर पर पहुंचने के बाद कहा गया- घर लौट जाओ, परीक्षा नहीं होगी।
BJP सरकार एक परीक्षा ठीक से नहीं करवा सकती। पहले NEET में छात्रों का भविष्य तबाह किया गया और अब SSC GD में धांधली की खबरें आ रही हैं।
छात्र दिन-रात पढ़ाई करते हैं, मां-बाप पेट काटकर उनकी फीस भरते हैं, परीक्षा में आने-जाने का खर्च मैनेज करते हैं और आखिर में पेपर लीक हो जाता है।
ये पाप है- जिसकी कोई माफी नहीं है
पेपर लीक की साझेदार - मोदी सरकार