भाजपा और उनके संगी-साथी ‘आस्था के साथ विश्वासघात के महापाप और अपराध’ के दोषी हैं!
देश की आस्थावान जनता का मानना है कि भाजपा और उनके संगी-साथियों ने ‘श्रद्धा में सेंधमारी’ करते हुए जिस तरह :
- ‘दान-पात्र’ से चढ़ावा-चंदा चोरी की है
- गुप्त दान में महा-घपले किये हैं
- दान की रसीद दी ही नहीं है या दान के बदले नक़ली रसीद छपवाकर दी है
- अपने लोगों को कौड़ियों के दाम में अयोध्या की ज़मीनें ख़रीदवाकर, फिर उसे बीसों गुना दाम में करोड़ों में मंदिर को बेचकर ट्रस्ट के ‘धर्म-खाते’ को लूटा है
- ज़मीन के सौदे के अशुभ लाभ को आपस में बाँटा है
- ईमानदार लोगों द्वारा आपत्ति किये जाने पर उन्हें हटाया है
- हर जगह अपने भ्रष्ट लोग सेट किये हैं
- चोरी की राशि की बरामदगी को दर्ज़ नहीं कराया है
- जाँच में कुछ भी ‘उल्लेखनीय’ नहीं है, ये कहकर गुमराह किया है
- सीसीटीवी की रिकॉर्डिंग और अन्य सबूत मिटाए हैं
- जिनकी ख़ुद की जाँच चल रही है, उनसे जाँच करवाई है
- बिना किसी की ज़िम्मेदारी तय किये, ट्रस्ट के उच्चस्थ पदाधिकारियों को क्लीन चिट दे दी गई है
- मंदिर का धन और बहुमूल्य धातुओं को बोरों में भरकर कहीं और पहुँचाया है…
ये अक्षम्य ‘महापाप’ है।
इसीलिए ‘लोकधन की लूट’ का मुद्दा लोक-संसद तक पहुँचाना और उठाना, हम सब का धर्म सम्मत कर्तव्य है।
जो भाजपा का साथी, वो रामघाती-महापापी
This is outrageous. Adult men gathering in packs to literally hunt down a young girl. The anger of the entire ecosystem is directed at women who dared to dissent. It has now reached a point where the safety of this girl is under threat.
इबादत
सादिक
अब्दुल्ला
साहेब
फैजल
आजम
शब्बीर
इमरान
मुश्ताक और राजिक .
इनका नाम ही इनकी पहचान है और इनकी पहचान ही आज के दौर में इनकी सबसे बड़ी मुसीबत है . इस सबको एमपी पुलिस ने दंगा , आगजनी , मारपीट , घर में जबरन घुसने और विस्फोटक रखने के आरोप में गिरफ्तार किया था , मध्यप्रदेश पुलिस के मुताबिक ये सारे दंगाई थे लेकिन मध्यप्रदेश की ही अदालत ने इन्हें हिंसा और दंगा के आरोपों से बरी कर दिया है . अदालत ने अपने फैसले में ये भी पूछा है कि पुलिस ने आखिर इन 11 लोगों को किस आधार पर दंगे का आरोपी बनाया ? आज इंडियन एक्सप्रेस ने विस्तार से पूरी रिपोर्ट छापी है .
कोर्ट का ये फैसला एमपी सरकार के मुंह पर तो तमाचा है ही इस बात का भी सबूत है कि कैसे इस देश में मुसलमानों को दंगाई घोषित करके सलाखों के पीछे डाल दिया जाता है .
पूरा वीडियो मेरे यूट्यूब चैनल पर
fact
1- एडविना माउंटबेटन ने कोई किताब नहीं लिखी है।
2- भ्रष्टाचार के आरोप में भगाए गए मथाई की कोई विश्वसनीयता नहीं है।
3- एडविना की बेटी ने अपनी किताब 'डॉटर ऑफ द एम्पायर' में ऐसे घटिया आरोपों को झूठा बताया है।
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और नेहरू किसके साथ सोते थे यह जानने से पेपर लीक और भ्रष्टाचार नहीं रुक जाएगा।
और गृह मंत्री का किसी भी मुद्दे पर जवाबदेह नहीं बनना? क्या आपने या आपके चैनल ने गृह मंत्री को दिल्ली दंगों- मणिपुर- पहलगाम या अब जंतर-मंतर प्रोटेस्ट में हिंसा- किसी मुद्दे पर भी सवाल किए हैं रजत जी? ये कैसी पत्रकारिता है जो सत्ता में बैठे- सवालों से भागते PM और मंत्रियों को जवाबदेह नहीं बनाता?
During Mumbai Student Protests, a Young Man observed that the Police were arresting Every Youth Criticizing Modi on Camera.
We are living under a Dictator.