"DRDO के साथी बताते हैं कि हम जो भी टेक्नोलॉजी डेवलप करते हैं, बाहर वाले आकर उसे तहस-नहस करवा देते हैं। हमारी लीडरशिप इतनी भ्रष्ट और बिकाऊ है कि वह सिर्फ अपने बारे में सोचती है। टेक्नोलॉजी विकसित करनी है तो उच्च शिक्षा चाहिए जिसे ये नष्ट कर रहे हैं। ये सवाल उठाने की इजाजत नहीं देते और सवाल उठाने बिना नये आविष्कार नहीं होते। हमारे लिए सबसे जरूरी है शिक्षा जिसे ये बर्बाद कर रहे हैं।"
~ प्रो. अरुण कुमार, अर्थशास्त्री
चीटिंग क्या होती है समझना है तो समझिए AIIMS के इस केस से, जब सालों साल तक चुन चुनकर दलित छात्र-छात्राओं को फेल किया जा रहा था।
मुंगेरकर कमेटी बैठी,जांच हुई तो पता चला जाति के हिसाब से फेल किया गया और कोर्ट ने न सिर्फ पास किया सबको 10 लाख कंपनसेशन दिलवाया।
एक इंजेक्शन सेट जिसकी ट्रेड प्राइस मात्र ₹11 है उसपर ₹325 की MRP छपी होती है और जनता को इतने में ही मिलती है।
इसका मतलब अस्पताल IV सेट के लिए मात्र ₹11 का भुगतान करते हैं लेकिन जनता से ₹325 वसूलते हैं।
~ तुकाराम मुंडे, FDA चीफ महाराष्ट्र 🤔🤔🤔
पुलिस जितना क्रूर इस देश में कोई नहीं रहा है..
वीडियो में कथित तौर पर शुक्रवार रात हाफ़िज़पेट रेलवे स्टेशन के बाहर एक RPF कॉन्स्टेबल एक महिला को पीटते और उसके बाल पकड़कर घसीटते हुए दिख रहा है।
सीबीआई ने एलआईसी को कथित 2,684.5 करोड़ रुपये के नुकसान के मामले में अनिल अंबानी, रिलायंस कैपिटल और अन्य के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज की है.
पूरी ख़बर: https://t.co/smMXdsj4jQ
बीजेपी राज मे भ्रष्टाचार इतना है की भ्रष्टाचार को ही अमृतकाल कहाँ जाता है।
जितना अंग्रेजो ने 200 साल मे लूटा उतना बीजेपी ने 12 साल मे ही लूट लिया भरोसा ना हो तो देख लीजिये 👇
एक व्यक्ति कैमरे में पकड़े जाने के बावजूद कुछ ही दिनों में ज़मानत पा जाता है।
वहीं दूसरा व्यक्ति बिना किसी ट्रायल या सुनवाई के छह साल तक जेल में पड़ा रहता है
: अभिजीत दीपके, CJP फाउंडर
दिल्ली पुलिस के अफसर आज डरे सहमे नहीं होंगे, बल्कि शर्मिंदा होंगे कि इसी दिन के लिए वर्दी पहनी थी कि हत्या के प्रयास के आरोपी को एक फोन पर छोड़ देंगे?
: रवीश कुमार, वरिष्ठ पत्रकार
नफ़रती अरुण पुरी का चैनल इस गुंडे को सेल्फ डिफेंस करने का प्लेटफॉर्म दे रहा है. इसी के चैनल के स्टूडियो में ये गुंडा स्वतंत्र भारद्वाज दिखाई देता था.
दिल्ली पुलिस ने इसे गिरफ़्तार नहीं किया है सिर्फ डीटेन किया है.
मजबूरी में गिरफ़्तार कर भी लिया तो जज साहब मिनट में ज़मानत देंगे.
अगर दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो प्रोटेस्ट करेंगे: मुस्लिम पत्रकारों के समर्थन में उतरी AISA अध्यक्ष नेहा.
#DelhiPolice#Muslim#Women#Neha
अगर यही बात कोई दलित आदिवासी या मुस्लिम कहता तो उसके घर पर अब तक बोल्डोजर चल गया होता, ऑपरेशन लंगड़ा भी हो गया होता और गोदी मीडिया उसको आतंकवादी घोषित कर चुका होता
जंतर मंतर प्रदर्शन में गंभीर जुर्मों के 25 आरोपी जेल से वहाँ कैसे पहुंच गए?
क्या चेहरा पहचानने वाला दिल्ली पुलिस का software गड़बड़ है, जबकि उसका इस्तेमाल हर जगह हो रहा है?
या जघन्य अपराधियों और गुंडों को जानबूझकर प्रदर्शन स्थल पर अराजकता और हिंसा फैलाने के लिए लाया गया?
दिल्ली पुलिस की सारी बहादुरी छात्रों और महिला पत्रकारों पर लाठी चलाने के लिए है.
कहाँ हैं मोदीजी? अपने ये कबूलनामा सुना या नहीं? योगीजी! आपने सुना?
@narendramodi@myogiadityanath
पिछले साल पहलगाम में आतंकवादियों ने धर्म पूछकर लोगों को मारा था और पूरे देश ने उस नफ़रत की निंदा की थी। अब दिल्ली में 4PM की पत्रकार शाहीन खान और नफीसा खान का आरोप है कि पुलिस ने उनके साथ मारपीट की और मुस्लिम होने तथा ‘खान’ सरनेम का पता चलते ही हिंसा और बढ़ गई।
आतंकवादी धर्म पूछकर मारें तो आतंक है, लेकिन सुरक्षा देने वाली पुलिस पर धर्म देखकर पीटने का आरोप लगे तो इसे क्या कहेंगे?
भाजपा बताए - क्या सांप्रदायिक नफ़रत का ज़हर अब वर्दी और व्यवस्था तक पहुँच चुका है?
दिल्ली पुलिस के अफसर आज डरे सहमे नहीं होंगे, बल्कि शर्मिंदा होंगे कि इसी दिन के लिए वर्दी पहनी थी कि हत्या के प्रयास के आरोपी को एक फोन पर छोड़ देंगे? ऐसा भी क्या है दिल्ली में? जिस शहर में घंटों जाम में रहना पड़ता है, उस शहर में अफसरी करने का यही सुख रह गया है कि कोई सर फोड़ने की बात कैमरे पर कर रहा है, पुलिस FIR और गिरफ़्तारी तक नहीं कर पा रही है। दिल्ली पुलिस के बड़े अफ़सरों को ख़राब लग रहा होगा? अगर शर्मिंदगी भी महसूस हो रही है तो वह भी बड़ी बात है। बाकी किसी कमज़ोर को पकड़ कर, किसी को उठाकर थाने में बंद करने के लिए IPS होने की ज़रूरत नहीं है। वह काम तो स्वतंत्र भारद्वाज बिना UPSC की परीक्षा में बैठे ही कर रहा है।