राजस्थान हाईकोर्ट अपडेट
प्रधानाचार्य/उप-प्रधानाचार्य काउंसलिंग प्रक्रिया पूरी करने पर रोक नहीं, लेकिन काउंसलिंग से होने वाली पोस्टिंग/ट्रांसफर पर अगली सुनवाई तक रोक।
अगली तारीख: 27.01.2026 ⚖️
#RajasthanHighCourt#CounsellingUpdate
@BhajanlalBjp जी
@RajCMO@GajendraKhimsar जी
राजस्थान के बड़े राजकीय चिकित्सालयों MBHउदयपुर, SMSजयपुर और AIIMSजोधपुर में भर्ती रोगियों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। कुछ चिकित्सक गरीब रोगियों के परिजनों से अवैध वसूली करते है। नर्सिंग स्टाफ लापरवाह है। कृपया संज्ञान में लीजिए।
साम्प्रदायिक सद्भावना के प्रतीक, जन-जन के आराध्य लोकदेवता श्री बाबा रामदेव जी के प्राकट्य दिवस "भादवा बीज" की हार्दिक शुभकामनाएं।
बाबा रामदेव जी के आशीर्वाद से समाज में शांति, समृद्धि और सौहार्द्र का संचार हो।
जन-जन के आराध्य लोकदेवता बाबा रामदेव जी
के पावन जन्मोत्सव भादवा बीज की हार्दिक शुभकामनाएँ एवं बधाई।
बाबा रामदेव जी का जीवन हमें सत्य, समानता और मानव सेवा का मार्ग दिखाता है।
उनकी कृपा हम सब पर बनी रहे और समाज में प्रेम, भाईचारे और सद्भाव का संचार हो।
जय बाबा री!
पासरोटियां गांव टोंक में पानी में शिक्षक बह गए।
सभी अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता दें, साथ ही जहां पर भी गहरा पानी आ रहा है, वहां पर बाइक चलाने से बचें और अपनी सुरक्षा करें। लापरवाही से बचें, अन्यथा गंभीर परिणाम हो सकते हैं। इस तरह की लापरवाही करने की कोई आवश्यकता नहीं है।
एक तरफ स्कूलों में शिक्षक नहीं है दूसरी ओर 4200 पदोन्नत प्राचार्यों की काउंसलिंग विभाग नहीं कर रहा है वहीं अध्यापक भर्ती 2022 (Reet L2)रिवाइज परिणाम में रिजल्ट आए कुछ माह हो गये लेकिन जिला आवंटन ओरनियुक्ति की प्रक्रिया चालू नहीं कर रहा है।
@RajCMO@BhajanlalBjp@madandilawar
आदरणीय मुख्यमंत्री @BhajanlalBjp जी, इन हादसों के जिम्मेदार लोगों की रीढ़ को तोड़ना होगा, शिक्षक को निलंबित कर देना समस्या का हल नहीं है
घर का मकान बीस साल बाद भी नया रहता है ओर स्कूल का कमरा दो साल बाद टपकता है
दोषी ढूंढे, कमजोर निर्माण को नहीं रोका तो इस समस्या का हल कैसे होगा
हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि शैक्षिक पदों की भूमिका शिक्षा विभाग की रीढ़ है, और सेवा नियमों में इन पदों को सर्वप्रथम स्थान दिया गया है। विद्यालयों में कार्य संचालन, शैक्षणिक अनुशासन, परीक्षा, मूल्यांकन, नवाचार और समन्वय की जिम्मेदारी हमारे व्याख्याताओं और प्रधानाचार्यों के कंधों पर होती है।
अधिकारों और जिम्मेदारियों का निर्धारण योग्यता, अनुभव, कार्यक्षेत्र की प्रकृति और सेवा नियमों के अनुसार होना चाहिए।
RESLA (राजस्थान शिक्षा सेवा प्राध्यापक संघ) का मानना है कि शिक्षा विभाग में कार्य विभाजन में स्पष्टता होनी चाहिए और शैक्षिक पदाधिकारियों की गरिमा और अधिकारों की रक्षा की जानी चाहिए।
हम किसी भी स्थिति में यह नहीं स्वीकार करेंगे कि हमारे अधिकारियों के अधिकार सीमित कर दिए जाएं या वे असंगत आदेशों के कारण असमंजस में रहें।
#शिक्षा_सेवा_का_सम्मान
#DrAshokJat | प्रदेश महामंत्री, RESLA
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प्रशासनिक अनुशासन और कार्य क्षेत्र की मर्यादा: शिक्षा विभाग में संतुलन की आवश्यकता
1. प्रशासनिक अनुशासन केवल आदेश पालन की नहीं, बल्कि कार्य की सीमाओं के स्पष्ट निर्धारण की भी मांग करता है। जब हर पदाधिकारी अपने निर्धारित दायित्वों के अनुरूप कार्य करता है, तभी किसी विभाग की कार्यक्षमता और गरिमा बनी रहती है।
🛞 शिक्षकों और शिक्षा अधिकारियों के निर्णयों में बाबू वर्ग का हस्तक्षेप प्रशासनिक असंतुलन का कारण बनता है।
🛞 पदों की प्रकृति भिन्न होती है— शिक्षा अधिकारी निर्णयात्मक और बौद्धिक दायित्व निभाते हैं, जबकि बाबू वर्ग प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन कराते हैं।
🛞 सीमाएं लांघने से अनुशासनहीनता और द्वंद्व की स्थिति पैदा होती है।
🛞 हर कर्मचारी को उसकी भूमिका की मर्यादा में रहकर कार्य करना चाहिए, जिससे संगठनिक गरिमा बनी रहे।
2. ग्रेड-पे बनाम ग्रेड-सेंस: क्या सिर्फ वेतन तय कर सकता है अधिकार?
🛞 ग्रेड-पे केवल एक वित्तीय मापदंड है, न कि अधिकार और नेतृत्व की पहचान। अधिकारों का निर्धारण कार्य की प्रकृति, जिम्मेदारी और निर्णय क्षमता पर आधारित होना चाहिए।
🛞 शिक्षक और शिक्षा अधिकारी का कार्य अकादमिक गुणवत्ता, नीति कार्यान्वयन और नेतृत्व से जुड़ा होता है।
🛞 लिपिक वर्ग का कार्य प्रक्रिया-संचालन, लेखा और पत्राचार से संबंधित होता है।
🛞 जब ग्रेड-पे को ही आधार बनाया जाता है, तो योग्यता और अनुभव उपेक्षित हो जाते हैं।
🛞 'ग्रेड-सेंस' यानी कि पद की समझ और जिम्मेदारी का आकलन 'ग्रेड-पे' से अधिक महत्वपूर्ण है।
3. शिक्षा विभाग में कार्य विभाजन की वैज्ञानिकता: अधिकार और दायित्व का संतुलन
🛞 शिक्षा विभाग एक विशेषीकृत क्षेत्र है, जहां कार्य विभाजन का वैज्ञानिक और न्यायसंगत होना अत्यंत आवश्यक है।
🛞 निर्णयात्मक कार्यों में उन्हीं को अधिकार मिलना चाहिए जो शिक्षण, प्रशिक्षण और पाठ्यक्रम की समझ रखते हों।
🛞 लिपिकीय वर्ग को अपनी विशेषज्ञता के अनुसार सीमित अधिकार दिए जाने चाहिए।
🛞 अधिकारियों को प्रशिक्षण, बजट प्रबंधन, अकादमिक अनुश्रवण जैसे विषयों में निर्णय लेने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए।
🛞 कार्य का समुचित विभाजन न केवल गुणवत्ता बढ़ाता है, बल्कि जवाबदेही भी सुनिश्चित करता है।
4. मनोबल और नेतृत्व: शिक्षा अधिकारियों को अधिकार देना क्यों जरूरी है?
🛞 यदि शिक्षा अधिकारियों को उनके पद के अनुरूप अधिकार नहीं दिए जाते, तो उनका मनोबल टूटता है और नेतृत्व क्षमता प्रभावित होती है।
🛞 जब योग्य अधिकारियों को निर्णय लेने से रोका जाता है, तो वे केवल प्रतीकात्मक बनकर रह जाते हैं।
🛞 इससे नवाचार, योजना निर्माण और नीति क्रियान्वयन प्रभावित होता है।
🛞 शैक्षणिक संस्थानों में नेतृत्व की आवश्यकता होती है, जो केवल शिक्षकीय पृष्ठभूमि से आए अधिकारी ही दे सकते हैं।
🛞 यदि नेतृत्व क्षमता को प्रोत्साहित करना है, तो शिक्षा अधिकारियों को स्वतंत्रता और अधिकार दोनों देना आवश्यक है।
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आदरणीय शिक्षामंत्री @madandilawar जी, स्कूलों के ये हालात हैं ओर विभाग सवा माह पहले पदोन्नत हुए चार हजार प्राचार्यों का काउंसलिंग करवाकर पदस्थापन नहीं कर रहा है।
कैसे होंगे नामांकन, कैसे सफल होगा प्रवेशोत्सव।
@BhajanlalBjp@DIPRRajasthan @SumitGodara_BJP @AshishModiIAS
मुख्यमंत्री @BhajanlalBjp जी,
शिक्षामंत्री @madandilawar जी, स्कूलों के ये हालात हैं,स्कूलों में व्याख्याता ही नहीं है।
विभाग 1 माह पहले पदोन्नत हुए 4224 प्राचार्यों का काउंसलिंग नहीं कर रहा है।
कैसे होंगे नामांकन, कैसे सफल होगा प्रवेशोत्सव
@DIPRRajasthan@KumariDiya
आदरणीय शिक्षा मंत्री @madandilawar
जी पदोन्नत प्राचार्यों की काउंसलिंग कर स्कूलों में पदस्थापन करें ताकि प्रवेशोत्सव व स्कूलो की सही मॉनिटरिंग की जा सकें।
काउंसलिंग में देरी विभाग के लिए उचित नहीं है।
@BhajanlalBjp@RajCMO@DIPRRajasthan@IASassociation
विभाग का मुखिया ही विभाग की दशा और दिशा तय करता है पहले 19000 का समायोजन ,फिर 35000 डीपीसी ,और अब 11576 का महात्मा गांधी स्कूलों में पदस्थापन आपके कुशल नेतृत्व को दिखाता है माननीय शिक्षा मंत्री का बहुत बहुत आभार @madandilawar@RajCMO@BhajanlalBjp@DIPRRajasthan