-40 नंबर लाकर SC/ST वाले डॉक्टर बनते है?
जी नहीं......
SC वाला 75 नंबर ला रहा है।
ST वाला 71 नंबर ला रहा है���
अब EWS वाला मात्र 59 नंबर लाकर डॉक्टर बन रहा है।
अब बताओ गलत जगह सुई कौन लगाएगा। 😂
मैं एक ब्राह्मण लड़की हूं लेकिन खुद को ब्राह्मण नहीं मानती, मैं अंबेडकरवादी हैं।
यह कहते हुए आयुषी पंडीत ने आरक्षण विरोधियों को तगड़ा रेल दिया।
आयुषी पंडीत के instagram पे 1M फॉलोअर है।
SC-ST-OBC वाले जागो!
तुम कावड़ उठा-उठाकर पसीना बहा रहे हो,
और ब्राह्मण-सवर्ण आराम से अपने घरों में बैठे हुए हैं…
उनके बच्चे पढ़-लिखकर डॉक्टर-इंजीनियर बन रहे हैं,
तुम्हारे बच्चे अब भी अशिक्षित रह जाएंगे!
ये कावड़ तुम्हें ज्ञान नहीं देगी, ये सिर्फ तुम्हें और अंधा और गुलाम बनाएगी।
बाबासाहेब अंबेडकर की किताब उठाओ, पढ़ो, शिक्षा अपनाओ… अम्बेडकर की रह पे चलो बुद्ध को पढ़ो ॥
नहीं तो तुम्हारे बच्चे कभी ब्राह्मणों के बच्चों जैसी ऊँचाई नहीं छू पाएंगे! कोई चामर बोलेगा कोई सुद्र बोलेगा ॥
जागो, पढ़ो, आगे बढ़ो… वरना यही हाल रहेगा!
#शिक्षा_ही_मुक्ति
#बाबासाहेब_की_राह
#कावड़_नहीं_किताब
"आधी रोटी खाएँगे,
स्कूल को बचाएँगे!"
ये नारे लगा रहे स्कूली बच्चे ही इस देश का असली स्वर्णिम भविष्य हैं।
जो बच्चे आज अपने स्कूल बचाने के लिए सड़क पर उतर रहे हैं, वही कल इस देश का भविष्य बचाएँगे।
अब चुप रहने का समय बीत चुका है। अपने गाँव, क��्बे और शहर के स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालयों को बचाने के लिए संगठित होकर आवाज़ उठाइए। शिक्षा पर हर हमला पूरे समाज पर हमला है।
देश भर में शिक्षा बचाओ आंदोलन की नई लहर उठ चुकी है। जो भी शिक्षा, विद्यार्थियों और बेहतर भविष्य के लिए संघर्ष कर रहा है, उसके साथ खड़े होइए। क्योंकि अगर आज स्कूल नहीं बचेंगे, तो कल सपने भी नहीं बचेंगे।
जिसकी ख़ुद की डिग्री फर्जी हो, वह युवाओं की डिग्रियों का क्या सम्मान करेगा?
इसलिए हमें अच्छी शिक्षा, अच्छे रोज़गार और बेहतर व्यवस्था के लिए आवाज़ उठानी होगी।
चप्पा-चप्पा इंक़लाब के नारों से गूंज रहा है।
जब युवा अपने भविष्य, शिक्षा और रोज़गार के सवाल पर सड़क पर उतरते हैं, तो वह सिर्फ़ एक आंदोलन नहीं, बल्कि देश के आने वाले कल की आवाज़ बन जाता है।
अब यह आवाज़ किसी एक शहर की नहीं, पूरे देश की बन चुकी है। आ��ए, लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से न्याय, शिक्षा और युवाओं के अधिकारों की इस लड़ाई में एकजुट होकर अपनी भागीदारी निभाएँ। बदलाव की शुरुआत हमेशा जागरूक समाज से होती है।
ज�� मंदिरों के लिए बजट उपलब्ध हो सकता है, तो एससी-एसटी छात्रों की छात्रवृत्ति के लिए पर्याप्त बजट क्यों नहीं? शिक्षा पर निवेश ही देश का भविष्य तय करता है।
बाड़मेर, राजस्थान में गरीब आदिवासी परिवारों की झोपड़ियाँ बुलडोज़रों से तोड़ी जा रही हैं। महिलाएँ, बच्चे खुले आसमान के नीचे आने को मजबूर हैं। यदि प्रशासन इन बस्तियों ��ो अतिक्रमण मानता है, तो सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन परिवारों के पुनर्वास और वैकल्पिक आवास की व्यवस्था कहाँ है?
बीजेपी सरकार द्वारा आदिवासियों का किये जा रहें नरसंहार का एक मार्मिक दृश्य देखिए 👇
टूट जाते है लोग घर बचाने मै और तुम तरस नहीं खाते हो बस्तीयां जलाने मै....!!
वायरल वीडियो बाड़मेर का है जहाँ भजनलाल सरकार द्वारा क्रूरतापूर्ण तरीके से आदिवासियों के घर उझाडे जा रहें है दुःखद 😪