राजस्थान की इस धरती ने जब भी मुझे पुकारा है, मैंने न दूरी की परवाह की, न परिस्थितियों की कठिनाइयों से पीछे हटना स्वीकार किया। हर बार आपकी पुकार पर हाज़िर हुआ हूं, क्योंकि मेरा संबंध आपसे किसी पद या राजनीति का नहीं, बल्कि विश्वास और संघर्ष की साझेदारी का है। जब-जब आपने अन्याय के विरुद्ध आवाज़ उठाई, मैं आपके साथ खड़ा रहा—चाहे सड़कों पर हो या संसद के भीतर, खेतों की मेड़ पर हो या किसी जनमंच पर। मैंने कभी सत्ता की सुविधा को तरजीह नहीं दी, न ही कुर्सी की चिंता की—मेरे लिए सबसे बड़ा कर्तव्य रहा है आपके साथ खड़े रहना, क्योंकि आप मेरे अपने हैं।
अब समय आ गया है जब आपकी यही आवाज़ एक नई चेतना बने, जो इस संवेदनहीन और निष्क्रिय सरकार को झकझोर दे। नागौर में कल होने वाली जन आक्रोश रैली कोई साधारण आयोजन नहीं है—यह उन सभी परिवारों की वेदना है, जिन्हें इस व्यवस्था ने अनसुना किया, उपेक्षित किया। यह दिन किसी एक व्यक्ति का नहीं, हम सबका है—हमारे अधिकारों का, हमारी भावी पीढ़ियों के सुरक्षित और सम्मानजनक भविष्य का दिन है।
इतिहास हमेशा उन लोगों की हिम्मत से बनता है जो अन्याय के सामने झुकते नहीं, बल्कि डटकर खड़े होते हैं। कल नागौर में उठाया गया आपका हर कदम एक नई इबारत रचेगा—बदलाव की, हक की, और आत्मसम्मान की।
कल नागौर में सिर्फ एक रैली नहीं, एक इंकलाब खड़ा होगा। आइए, उस इंकलाब का हिस्सा बनिए, ताकि हम मिलकर ये दिखा सकें कि राजस्थान की जनता झुकती नहीं, लड़ती है — और जब लड़ती है, तो जीतती है।
#जन_आक्रोश_रैली_नागौर