@NekadiGanesh नुक़सान दोनों साईड के ही भ्रमित युवा कर रहे है। ये राजनीति हमेशा किसी के कंधे पर बंदूक रख के ही की जा रही है और फायदा कोई दूसरा ले जाता है, 1998 जाटों को देख लो, 2008 सवर्णों को देख लो, 2018 गुजरो को देख लो, मलाई कोई ओर खा गया, इस बार मीणा ओर गुर्जर दोनों समाज के ऊपर बंदूक रख दी।
@AnilYadavmedia1@surya_14kumar तेरे सूर्या सबसे पहले एशिया कप में tatti किया था वहा से तो दो बार अभिषेक ओर एक बार तिलक ने बचा लिया फिर इस ने वर्ड कप में कितना tatti किया सब की पता है, माईकल क्लार्क भी Aus के लिए वर्ड कप जीतने के बाद कभी कोई मैच नहीं खेल पाया था पता कर के देख लो।
@ms__patel आरे भाई पॉजिटिव बातें करो बाकी समाज कहा से कहा पहुंच गए और ये दोनों समाज जो कि राजस्थान की मुख्य कृषि अर्थव्यवस्था को कंधे पर ले के चल रहे है , आज भी लड़ के एक दूसरे का नुक़सान करने पर उतारू हैं, बाकी आप की सोच।
@tribalvoice99 ट्रंप इस की हालत गांव के उस बड़े जमींदार जैसी हो रखी है कि जिस के बस में एक 2 एकड़ वाला किसान नहीं आ रहा क्यों कि किसान के पास उस के 4 नौजवान लठैत बेटे है जो जमींदार की ईट से ईट बजा देंगे, अब जमींदार बस खुद की जमीन का फायदा उठा के उन को रस्ते बंद करने की धमकी दे रहा है।
@tribalvoice99 इंजीनियरिंग में सब को अच्छे से काम आता है, एक प्रोजेक्ट फेल होने पर अप्रूवल देने वाले से लेकर लास्ट पर्सन तक जिम्मेदार होते है और सब पर कार्रवाई होती है, जब की एक डॉक्टर किसी मरीज को खुद की लापरवाई से मार भी दे तो किसी की कोई जिम्मेदारी नहीं, बस ये ही बेसिक सा फर्क है दोनों में।
@tribalvoice99 किसी अच्छे प्राइवेट स्कूल में बच्चे को पढ़ाओगे तो स्कूल वाले ही डिसाइड करते है कि आप को अपने बच्चे के टिफिन का क्या भेजना है ओर क्या नहीं, यदि एक बार भी गलती से कुछ अलग भेज दिया तो सीधा पेरेंट्स को डाट देते है। अब ये आप के ऊपर है कि आप को अपने बच्चे उधर पढ़ाने है या नहीं।
भाई इतनी बड़ी बड़ी डिंग मत हाक , जब में दिल्ली में IES की कोचिंग कर रहा था तब ये बंदा राकेश मीणा की गाड़ी में बैठ के दिल्ली के चक्कर लगता था , वो तो आप लिखना ही भूल गए , मुझे इसे लिए पता है कि उस टाइम राकेश मीणा का भाई मेरा रूम मेट था दिल्ली में ओर ये सब पहाड़गंज sty करते थे।
राजनीति के मैदान में विधायक मुकेश भाकर को हराना इतना आसान नहीं है जितना पत्रकार समझा रहे...?
मुकेश भाकर 2010 में राजस्थान यूनिवर्सिटी RUSU में निर्दलीय अध्यक्ष पद चुनाव लड़े....।
2010 मुकेश भाकर अपने जीवन में पहली बार चुनाव हारे उसके बाद फिर कभी चुनाव नहीं हारे....।
2011 में अपनी हार का बदला प्रभा चौधरी को राजस्थान यूनिवर्सिटी RUSU निर्दलीय जिताया था..।
2013 में पहली बार राजस्थान में NSUI के मुकेश भाकर इलेक्टेड प्रदेश अध्यक्ष निर्वाचित हुए..।
2014 में उनके प्रदेश अध्यक्ष के कार्यकाल में राजस्थान यूनिवर्सिटी RUSU 10 साल NSUI को अनिल चोपड़ा के रूप अध्यक्ष निर्वाचित हुए..।
2016 से 2018 तक में मुकेश भाकर को राजस्थान यूथ कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया..।
2018 में पहली बार नागौर की लाडनूं सीट विधानसभा चुनाव लड़े और बीजेपी के मनोहर सिंह को 12900 वोट हराकर विधायक बने..।
2020 में यूथ कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष चुनाव में अमरदीन को 12000 मतों से हराकर यूथ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष निर्वाचित हुए थे..।
2023 के विधानसभा चुनाव में एक बार पुनः लाडनूं से बीजेपी के करणी सिंह 15900 वोटो से हराकर दूसरी बार विधायक चुने गए थे...।
2022 में राजस्थान यूनिवर्सिटी RUSU में निर्दलीय निर्मल चौधरी को मौजूदा मंत्री मुरारी लाल मीणा की बेटी निहारिका जोरवाल के खिलाफ चुनाव जीता दिया..।
मुकेश भाकर अपने 38 की उम्र NSUI प्रदेश अध्यक्ष, NSUI राष्ट्रीय सचिव, यूथ कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष, दो बार विधायक रहे चुके हैं...।
अपने जीवन में मुकेश भाकर केवल 2010 में राजस्थान यूनिवर्सिटी RUSU 171 वोटो से चुनाव हारे..।
मतलब जिसके साथ विधायक मुकेश भाकर है उसकी 100% जीत की गारंटी मिलती है.....।
@tribalvoice99@sandeep_PT बिल्कुल सही बात है, जितना फ्रुट्स हमे महीने में कभी कभार किसी रिश्तेदार के आने पर मिलता था जो कि रिश्तेदार खुद साथ में ले कर आता था, उतना तो मेरा बेटा रोज स्कूल टिफिन में ले कर चला जाता है।