#628th_GodKabirPrakatDiwas
नहीं बाप ना माता जाए, अविगत से हम चल आए । कलियुग मे काशी चलि आए। जब हमरे तुम दर्शन पाये ।।
आज से करीब 600 वर्ष पहले कबीर साहेब, काशी के लहरतारा तालाब में कमल के फूल पर सशरीर प्रकट हुए थे, उनका जन्म माँ से नहीं हुआ था।
#GodNightTuesday
#परमात्माकबीर_जननी_जना_न_माय
Kabir Sahib Ji appeared on earth with his real name on the full moon day of Jyeshtha month in 1398 AD (Vikrami Samvat 1455), during Bhakti Yug i.e. Kalyug.
Kabir Sahib Prakat Diwas
#परमात्माकबीर_जननी_जना_न_माय
��ग्वेद मण्डल 10 सूक्त 4 मंत्र 3 में कहा गया है कि परमात्मा का जन्म नहीं होता, वह परमेश्वर कबीर जी हैं। जिनका जन्म नहीं हुआ, सशरीर प्रकट हुए थे। इसलिए परमेश्वर Kabir Sahib Prakat Diwas मनाया जाता है।
#परमात्माकबीर_जननी_जना_न_माय
गरीब, साहिब पुरुष कबीर कूँ, जन्म लिया नहीं कोय । शब्द स्वरूपी रूप है, घट घट बोल��� सोय ।।
कबीर परमात्मा अपने सतलोक से चलकर आते हैं और अपनी प्यारी आत्माओं को ज्ञान बताते हैं। मां के गर्भ से जन्म नहीं लेते
Kabir Sahib Prakat Diwas
#परमात्माकबीर_जननी_जना_न_माय
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🌹ना मेरा जन्म न गर्भ बसेरा, बालक ह्नै दिखलाया।
काशी नगर जल कमल पर डेरा, तहाँ जुलाहे ने पाया।।🌹
Kabir Sahib Prakat Diwas
#परमात्माकबीर_जननी_जना_न_माय
ऋग्वेद मण्डल 10 सूक्त 4 मंत्र 3 में कहा गया है कि परमात्मा का जन्म नहीं होता, वह परमेश्वर कबीर जी हैं। जिनका जन्म नहीं हुआ, सशरीर प्रकट हुए थे। इसलिए परमेश्वर Kabir Sahib Prakat Diwas मनाया जाता है।
#परमात्माकबीर_जननी_जना_न_माय
नहीं बा��� ना माता जाए, अविगत से हम चल आए।
कलियुग में काशी चलि आए। जब हमरे तुम दर्शन पाये।।
आज से करीब 600 वर्ष पहले कबीर साहेब, काशी के लहरतारा तालाब में कमल के फूल पर सशरीर प्रकट हुए थे, उनका जन्म माँ से नहीं हुआ था।
Kabir Sahib Prakat Diwas
#परमात्माकबीर_जननी_जना_न_माय
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Kabir Sahib Prakat Diwas
ऋग्वेद मण्डल 10 सूक्त 4 मंत्र 3 में कहा ��या है कि परमात्मा का जन्म नहीं होता, वह परमेश्वर कबीर जी हैं। जिनका जन्म नहीं हुआ, सशरीर प्रकट हुए थे। इसलिए उनका प्रकट दिवस मनाया जाता है।
#परमात्माकबीर_जननी_जना_न_माय
कबीर साहेब का शिशुरूप में अवतरण आज से लगभग 600साल पहले भारत की पवित्र भूमि काशी के लहरतारा तालाब में एक विकसित कमल के फूल पर सन् 1398, विक्रमी संवत 1455, ज्येष्ठ मास की पूर्णमासी को हुआ था।
Kabir Sahib Prakat Diwas
#परमात्माकबीर_जननी_जना_न_माय
भग की राह हम नहीं आए, जन्म मरण में नहीं समाए।
आध्यात्मिक शिक्षा का केंद्र माने जाने वाले काशी के लहरतारा तालाब में कमल के फूल पर सन् 1398 विक्रमी संवत 1455ज्येष्ठ मास की पूर्णमासी को कबीर साहेब, शिशु रूप में सशरीर प्रकट हुए थे
Kabir Sahib Prakat Diwas
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कबीर साहेब का शिशु रूप में अवतरण आज से लगभग 600 साल पहले भारत की पवित्र भूमि काशी के लहरतारा तालाब में एक विकसित कमल के फूल पर सन् 1398, विक्रमी संवत 1455, ज्येष्ठ मास की पूर्णमासी को हुआ था।
1Day Left Kabir Prakat Diwas
#628th_GodKabirPrakatDiwas
कबीर साहेब का शिशु रूप में अवतरण आज से लगभग 600 साल पहले भारत की पवित्र भूमि काशी के लहरतारा तालाब में एक विकसित कमल के फूल पर सन् 1398, विक्रमी संवत 1455, ज्येष्ठ मास की पूर्णमासी को हुआ था.
#परमात्माकबीर_जननी_जना_न_माय
नहीं बाप ना माता जाए, अविगत से हम चल आए।
कलियुग में काशी चलि आए। जब हमरे तुम दर्शन पाये।।
आज से करीब 600 वर्ष पहले कबीर साहेब, काशी के लहरतारा तालाब में ��मल के फूल पर सशरीर प्रकट हुए थे, उनका जन्म माँ से नहीं हुआ था।
Kabir Sahib Prakat Diwas
#परमात्माकबीर_जननी_जना_न_माय
भग की राह हम नहीं आए,जन्म मरण में नहीं समाए।
आध्यात्मिक शिक्षा का केंद्र माने जाने वाले काशी के लहरतारा तालाब में कमल के फूल पर सन् 1398,विक��रमी संवत 1455,ज्येष्ठ मास की पूर्णमासी को कबीर साहेब, शिशु रूप में सशरीर प्रकट हुए थे
Kabir Sahib Prakat Diwas
#परमात्माकबीर_जननी_जना_न_माय
नहीं बाप ना माता जाए, अविगत से हम चल आए ।
कल���युग में काशी चलि आए । जब हमरे तुम दर्शन पाये ।।
कबीर परमात्मा अपने सतलोक से चलकर आते हैं और अपनी प्यारी आत्माओं को ज्ञान बताते हैं। मां के गर्भ से जन्म नहीं लेते।
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