भाजपा राज में क्लॉक टावर की सुई इसलिए गायब कर दी गई, जिससे कि बंद पड़ी, ठहरी हुई मिल की ओर लोगों का ध्यान न जाए। लाल इमली कभी कानपुर की ही नहीं देश की शान हुआ करती थी, अब वहाँ से मशीनों की नहीं बल्कि वहाँ के मज़दूरों के कराहने की वीरानी आवाज़ आती है।
भाजपा जाए तो बदलाव आए!
भाजपा बाहर के राज्य के अपराधियों को उप्र में बुलाकर जो वातावरण बिगाड़ रही है वो घोर निंदनीय है। सपा के सांसद श्री राजीव राय के प्रयासों से जन हित में ‘मऊ-आनंद विहार ट्रेन’ चली है लेकिन उसके उद्घाटन के अवसर पर जानबूझकर माहौल तनावपूर्ण बनाया गया। हंगामा करनेवालों के चेहरों की एआई पहचान-पड़ताल करवाकर तुरंत उनके ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज़ हो। ये सब हिस्ट्रीशीटर अपराधी हैं, जो प्रदेश में ‘आमंत्रित अपराधी’ की तरह बेख़ौफ़ घूम रहे हैं।
ये विपक्ष से अधिक उप्र के मुख्यमंत्री जी के लिए चुनौती है कि यूपी ‘इंटर-स्टेट’ माफ़ियाओं के लिए सराय-आरामगाह बन गया है। अगर कोई कार्रवाई नहीं हुई तो मान लिया जाएगा ये सब भाजपा सरकार के इशारे पर हुआ है और ‘भाजपाई ही माफ़ियाई हैं’।
तुरतं कार्रवाई हो!
आज के भाषण में बयान कम, धमकी अधिक क्यों थी?
आज का कार्यक्रम अचानक बना था या जिस दिन SIT बनी थी, उस दिन?
सूत्र ये क्यों कह रहे हैं कि स्थानीय भाजपाई विधायकों और पदाधिकारियों के कहने पर ये कार्यक्रम अचानक तय किया गया, जिससे कि भाजपा की राजनीति ज़मीन बचाई जा सके नहीं तो अयोध्या मंडल ही नहीं, पूरे उप्र में भाजपा का सूपड़ा साफ़ होना तय है।
भौतिक रूप से भ्रमण कर, उस SIT के काम को प्रभावित करने की कोशिश न की जाए, जो पहले से ही विवादास्पद सदस्यों और कलंकित छवि के कारण शंकाओं के घेरे में है।
आज वहाँ चेहरा उतरा हुआ क्यों था?
आवाज़ को तो जानबूझकर ऊँची करने का प्रयास पूरा था लेकिन आत्मविश्वास शून्य क्यों था?
इस बार अपने ख़ास लोगों से मिले क्यों नहीं?
जनता कह रही है ‘दूध का दूध, पानी का पानी’ नहीं ‘सोने का सोना, चाँदी की चाँदी’ करें। चढ़ाए गये पैसों, अनमोल शिलाओं के अलावा बहुमूल्य धातुओं और जेवरों का भी हिसाब देना ही पड़ेगा।
’सुनिए भाजपाई महापाप लोकगाथा’
भाजपाई भ्रष्टाचार के कारण आज देश का ये दुर्भाग्य है कि जहाँ भगवान का ‘स्तुति-गान’ गाँव-गाँव में गूँजता था; आज वहीं भगवान को धोखा देनेवालों की ‘निंदा गाथा’ गाई जा रही है।
भास्कर ने तो सूरज ही डूबो दिया।
भाजपा तो अपनी सहयोगी पार्टियों का ही काला चिट्ठा खुलवा रही है क्योंकि भाजपा को इन दलों के नेताओं से नहीं, उनसे जुड़े जो भी दो-चार हज़ार वोट हैं, बस उनसे मतलब है। जब ये तीनों बदनाम हो जाएंगे तो भाजपा, इनसे जुड़े समाजों से कहेगी कि देखो तुम्हारे नेता कितने भ्रष्ट हैं, ये तुम्हारा ख़्याल नहीं रखेंगे, इसलिए तुम इन्हें नहीं, सीधे हमें वोट दो। सच तो ये है कि भाजपा भी ग़लतफ़हमी में है क्योंकि अब ‘पीडीए समाज’ एकमुश्त रूप से पीडीए की जीत के लिए हमें ही वोट देगा।
भाजपा ने आज फिर साबित कर दिया है कि वो किसी की सगी नहीं है।
जो करते हैं अपने कबीले से दगा
उनका भला और कौन होगा सगा
तीनों की राजनीति ख़त्म, भविष्य भस्म!
14 दिन में छुट्टा पशुओं की समस्या से छुटकारा दिलाने का वादा करनेवालों को जब ये बयान सुनाया जाएगा, तो कहीं चुनाव से पहले ही इनका सफाया न हो जाए। ये अपनी बात का नहीं तो अपनों से बड़ों की बात का तो सम्मान करें। याद रहे दिल्ली की पर्ची सिर्फ़ किसी को बनाने के लिए ही नहीं आती है, वहाँ की पर्ची पर तो पूरी कैबिनेट बदल जाती है।
जब सारी गलती जनता की थी तो फिर समस्या समाधान का जुमला क्यों फेंका था।
अयोध्या महापापियों के लिए कुरुक्षेत्र साबित होगी। यहीं भाजपाई राजनीति का आरंभ हुआ था, यहीं अंत भी होगा।
अयोध्या में ‘चढ़ावे-चंदे-दान-शिला चोरी’ की घटना के बाद से यहाँ आनेवाले दर्शनार्थियों की संख्या पर नकारात्मक असर पड़ा है। लोगों की आस्थाएँ खंडित हुई हैं। इसका सीधा असर अयोध्या के स्थानीय काम-कारोबार और आम आदमी की आमदनी पर पड़ा है। सरकार की गलती का ख़ामियाज़ा जनता क्यों भुगते।
अयोध्या और आस-पास के सभी क्षेत्रों में भयंकर आक्रोश पनप रहा है। इस पावन सनातनी तीर्थ की शुचिता जिन भाजपाइयों और उनके संगी-साथियों की वजह से कलुषित हुई है, वो अपना कारनामा करके सदैव की तरह भूमिगत हो गये हैं। अस्पष्टता के कारण वातावरण और भी शंकापूर्ण व तनावपूर्ण हो गया है। स्थानीय लोग मंदिर जाने से भी घबरा रहे हैं कि कहीं उनको ही जाँच के नाम पर फँसा न दिया जाए। श्रद्धालुओं में एक अज्ञात भय व्याप्त हो गया है। जाँच कहाँ तक पहुँची इसकी डेली ब्रीफिंग होनी चाहिए क्योंकि भाजपा सरकार में हो रहे ‘चतुर्दिक महा-भ्रष्टाचार’ के कारण जनता का SIT तक पर रत्ती भर भी विश्वास नहीं है।
मथुरा से भी आई धांधली की ख़बर बेहद गंभीर है, उसकी भी उच्च स्तरीय विश्वसनीय जाँच हो।
समाजवादियों ने तनी हुई बंदूक के सामने अपने हक़ की लड़ाई लड़ने का सबक श्रद्धेय राम मनोहर लोहिया जी से सीखा, जिन्होंने 18 जून 1946 के दिन गोवा में सविनय अवज्ञा के माध्यम से आज़ादी की अलख बलवती करी।
#18_जून_गोवा_क्रांति_दिवस