विकसित देशों में शिक्षकों को लंबी छुट्टियां दी जाती हैं शिक्षण एक अत्यधिक मानसिक श्रम वाला कार्य है.!
35 दिन की छुट्टी को भी ज्यादा बताने वाले लोग दरअसल शिक्षा की गुणवत्ता के दुश्मन है
एक थका हुआ और मानसिक रूप से प्रताड़ित शिक्षक बेहतर भविष्य कैसे गढ़ेगा.?
@RajCMO@madandilawar
आदरणीय मुख्यमंत्री @BhajanlalBjp जी
राजकीय महाविद्यालयों में ग्रीष्मावकाश 1 मई से 30 जून तक रहेगा।
और स्कूलों में
17.05 से 20.06 तक
क्या छोटे बच्चों पर गर्मी और लू का असर कम होता है?
ऐसे निर्णय आपके शासन में क्या उचित है?
पुर्नविचार करें।
@madandilawar@RajCMO@GovindDotasra
शिक्षकों की अवकाश कटौती वापस लेने की मांग पर राजस्थान के सभी जिला स्तर पर रेसला द्वारा विरोध प्रदर्शन ओर ज्ञापन।
मीडिया न्यूज
@BhajanlalBjp @RajCMORajasthan @AvinashGehlot_@madandilawar
शिक्षक संघों के साथ श्रीमान शिक्षा सचिव महोदय की अध्यक्षता व शिक्षा निदेशक महोदय की उपस्थिति में बैठक का आयोजन हुआ उसमें अवकाशों में कटौती नहीं करने का भरोसा दिया गया था लेकिन शिविरा के अवलोकन से पता चला है कि शिक्षकों से वादाखिलाफ़ी हुई है जिससे शिक्षकों में आक्रोश है।
माननीय मुख्यमंत्री महोदय @BhajanlalBjp जी , माननीय शिक्षामंत्री @madandilawar जी , श्रीमान मुख्य सचिव महोदय @svoruganti1466 जी , श्रीमान अतिरिक्त मुख्य सचिव महोदय शिक्षा से निवेदन है इस पर पुनर्विचार करें अन्यथा शिक्षक संगठन विरोध करेंगे।
शिक्षक संगठनों की जयपुर बैठक में सभी संगठनों ने विभाग के हर निर्णय का साथ देने का भरोसा दिया था
संघों ने पक्ष रखा कि अवकाश कटौती नहीं किए जाने चाहिए इस पर शिक्षा सचिव, शिक्षा निदेशक द्वारा वादा किया गया था कुल अवकाश कम नहीं होंगे, अब 11 अवकाश कम कर दिए जिसका संगठन विरोध करता है।
विभाग द्वारा जारी शिविरा पंचांग 2026–27 का गहन अवलोकन करने पर यह तथ्य स्पष्ट रूप से सामने आया है कि ग्रीष्मकालीन अवकाश में 10 दिवस की कटौती की गई है तथा संस्थाप्रधान अधिकृत अवकाश को 2 दिवस से घटाकर मात्र 1 दिवस कर दिया गया है। इस प्रकार कुल मिलाकर 11 अवकाशों में कमी की गई है, जो न केवल शिक्षक हितों के विपरीत है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की कार्यक्षमता एवं शिक्षक समुदाय के मनोबल पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला निर्णय है।
यह निर्णय विशेष रूप से इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि जयपुर में शिक्षक संगठनों के साथ आयोजित बैठक में माननीय शिक्षा सचिव महोदय एवं निदेशक महोदय द्वारा स्पष्ट आश्वासन दिया गया था कि अवकाशों में किसी प्रकार की कटौती नहीं की जाएगी। वर्तमान निर्णय उस आश्वासन के प्रतिकूल है और इसे प्रशासनिक स्तर पर विश्वास की अवहेलना एवं वादाखिलाफी के रूप में देखा जा रहा है।
शिक्षक केवल शैक्षणिक कार्य ही नहीं करते, बल्कि विभिन्न प्रशासनिक , सर्वेक्षण , जनगणना , चुनाव , विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम , जनकल्याणकारी योजनाओं सहित अनेक अतिरिक्त दायित्वों का निर्वहन भी करते हैं। ऐसी स्थिति में अवकाशों में कटौती करना न केवल अव्यावहारिक है, बल्कि शिक्षकों के कार्य-जीवन संतुलन को भी गंभीर रूप से प्रभावित करता है। इसके अतिरिक्त, राजस्थान की भौगोलिक एवं जलवायु परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए ग्रीष्मकालीन अवकाश का विशेष महत्व है, जिसे नजरअंदाज करना पूर्णतः अनुचित है।
अतः यह अपेक्षित है कि इस निर्णय पर पुनर्विचार किया जाए एवं पूर्व में दिए गए आश्वासन के अनुरूप अवकाश व्यवस्था को यथावत रखा जाए। अन्यथा, यह निर्णय शिक्षक समुदाय में व्यापक असंतोष एवं आक्रोश को जन्म देगा, जिसके परिणामस्वरूप समस्त शिक्षक संगठन लोकतांत्रिक एवं वैधानिक तरीके से अपने अधिकारों की रक्षा हेतु एकजुट होकर विरोध के लिए बाध्य होंगे।
में माननीय मुख्यमंत्री महोदय @BhajanlalBjp जी , माननीय शिक्षामंत्री @madandilawar जी , श्रीमान मुख्य सचिव महोदय @svoruganti1466 जी , श्रीमान
अतिरिक्त मुख्य सचिव महोदय शिक्षा से निवेदन करता हूं कि शिक्षकों के अवकाश कटौती पर पुनर्विचार करें , अन्यथा मजबूरन समस्त शिक्षकों व शिक्षक संघों को विरोध का रास्ता अपनाना पड़ेगा जो कि राज्य हित व शिक्षा के हित में नहीं है। इस समय प्रवेशोत्सव व नामांकन वृद्धि हेतु शिक्षक समर्पित भाव से कार्य कर रहे हैं , अतः उन्हें आक्रोशित नहीं किया जाये।
@DrSatishPoonia@DainikBhaskar@rpbreakingnews@Bhajanlalofc@RajCMO@RajGovOfficial@rajeduofficial@artizzzz@AshishModiIAS@IASNJ@kana_ias@Nathmal70602774
प्राचार्य काउंसलिंग कार्यक्रम पहले संशोधित अब विधिक कारणों का हवाला देकर स्थगित।
जबकि पिछली दो बार जारी हुए काउंसलिंग के बाद किसी भी प्रकार का विधिक कारण नही बना,
यदि पहले विधिक कारण था तो जारी ही क्यों किया गया था।
आदरणीय मुख्यमंत्री @BhajanlalBjp जी गौर करें।
@RajCMO
प्राचार्य काउंसलिंग पहले संशोधित अब विधिक कारणों का हवाला देकर स्थगित।
जबकि पिछली दो बार जारी हुए काउंसलिंग के बाद किसी भी प्रकार का विधिक कारण नही बना,
यदि पहले विधिक कारण था तो जारी ही क्यों किया गया था
आग्रह है जल्द काउंसलिंग करवाएं
@BhajanlalBjp@RajCMO@madandilawar