नासिक, महाराष्ट्र में आज आदिवासी छात्र-छात्राओं के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की, जिसमें अपनी मांगों को लेकर भूख हड़ताल कर रहे छात्र भी शामिल थे।
उनकी समस्याएं और मांगें ध्यान से सुनीं।
हर छात्र को पढ़ाई के लिए एक सम्मानजनक, सुरक्षित और अनुकूल माहौल मिलना उसका हक़ है। वंचित समुदायों से आने वाले छात्रों को सिस्टम की अनदेखी नहीं, उसके सहयोग और हर संभव मदद की जरूरत है।
शिक्षा कोई विशेषाधिकार नहीं - यह भारत के हर छात्र का अधिकार है।
#ChhatronKiGoonj
इस 15 साल की बच्ची का मोदी की ट्रोल आर्मी ने जीना हराम कर दिया है।
दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के प्रधानमंत्री 15 साल की बच्ची से लड़ रहे हैं।
ग़ज़ब हाल है।
देश के हर दलित व्यक्ति का जन्म से मृत्यु तक, हर जगह, हर कदम अपमान किया जाता है।
उनकी जितनी बुलंद आवाज़ होती है, उनपर उतना तेज़ हमला होता है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे जी के साथ हल्द्वानी में जो भी हुआ वो "शुद्धिकरण" का नाम दे कर उनके खिलाफ़ छुआछूत है - और छुआछूत भारत के संविधान के अनुसार दंडनीय अपराध है।
इस बात को 20 दिन हो गए - मगर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई, कोई FIR दर्ज नहीं हुई।
नरेंद्र मोदी जी, देश के हर दलित व्यक्ति को आपकी यह दलित विरोधी विचारधारा साफ़ दिखाई दे रही है।
अब गेंद BJP के पाले में है - जल्द से जल्द SC-ST क़ानून के तहत FIR दर्ज हो, कार्रवाई हो और न्याय हो - वरना कांग्रेस पार्टी न्याय हासिल करना अच्छे से जानती है।
आंदोलनकारियों से ज्यादतियां करने वाली पुलिस का पिटना भी शुरू हो गया है। पटना में छात्रों ने पुलिसकर्मियों को घेर घेरकर मारा।
अगर जनता इस तरह से विद्रोह पर उतारू हो जाए तो क्या होगा। कानून व्यवस्था ख़त्म हो जाएगी। क्या सरकार यही चाहती है? अगर नहीं चाहती तो लाठी गोली की भाषा छोड़े और छात्रों की समस्याओं का समाधान करें।
Guys, stop engaging with these Poonawalla chaps. Simply block or mute both of them. They just want attention, once you stop engaging they will fade away.
@ssrajputINC Dont show any respect to this ajay ……he should be called what the other congress spokesperson named him then only he will leave calling rahul with bad surname
साहिल की FIR दर्ज हुई। यह न्याय की तरफ़ पहला क़दम है।
पर सोचिए - एक FIR लिखने की इजाज़त तक गृह मंत्रालय से आनी पड़ी। अब समझ आया कि न्याय पर लगाम किसने लगा रखी है।
आज साहिल लोचब के साथ, उनके साथ हुई पुलिस बर्बरता के खिलाफ FIR दर्ज कराने संसद मार्ग के DCP कार्यालय पहुँचा।
20 जुलाई को जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे साहिल पर पुलिस ने पैलेट गन से हमला किया। छर्रों से बुरी तरह घायल साहिल की एक आँख की रौशनी खतरे में है।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन के खिलाफ ऐसी बर्बरता कोई कानूनी कार्रवाई नहीं, एक गंभीर अपराध है। इस क्रूरता के लिए न गृह मंत्री अमित शाह ने छात्रों को कोई सफाई दी, न प्रधानमंत्री ने उनसे माफ़ी मांगी।
अब जब साहिल न्याय के लिए FIR दर्ज कराना चाहता है तो वो भी नहीं करने दिया जा रहा। इस तरह संविधान और संवैधानिक अधिकारों को कुचला जा रहा है।
@AmitShah जी, न्याय से इतना क्यों घबरा रहे हैं? ये डर दिखा रहा है कि आप अपना अपराध कबूल कर रहे हैं।
FIR होगी। न्यायिक जाँच होगी। और ऊपर से नीचे तक जो भी इस बर्बरता के दोषी हैं, उन सभी पर कार्रवाई होगी।
साहिल और उसके जैसे पीड़ित हर छात्र को न्याय दिलाकर रहेंगे।