Today, Fourth LC Jain Memorial Lecture on " Fighting for Freedom: Supreme Court in 21st Century" Delivered by Justice AP Shah. Lecture Chair by Prof. Romila Thapar. At India International Centre.
फ़रीदा जी की जादू जगाती, रौशनी बिखेरती, महकती आवाज़ में फ़ैज़ साहब की ख़ूबसूरत नज़्म "दिलदार देखना"!
वीडियो, सौजन्य से: पीटीवी, वाया इरफ़ान गबोल
तूफ़ाँ ब-दिल है हर कोई दिलदार देखना
गुल हो न जाए मिशअल-ए-रुख़्सार देखना
आतिश ब-जाँ है हर कोई सरकार देखना
लौ दे उठे न तुर्रा-ए-तर्रार देखना
जज़्ब-ए-मुसाफ़िरान-ए-रह-ए-यार देखना
सर देखना, न संग, न दीवार देखना
कू-ए-जफ़ा में क़हत-ए-ख़रीदार देखना
हम आ गए तो गर्मी-ए-बाज़ार देखना
उस दिल-नवाज़ शहर के अतवार देखना
बे इल्तिफ़ात बोलना, बेज़ार देखना
ख़ाली हैं गरचे मसनद ओ मिम्बर, निगूँ है ख़ल्क़
रोअब-ए-क़बा ओ हैबत-ए-दस्तार देखना
जब तक नसीब था तिरा दीदार देखना
जिस सम्त देखना, गुल-ओ-गुलज़ार देखना
फिर हम तमीज़-ए-रोज़-ओ-मह-ओ-साल कर सकें
ऐ याद-ए-यार फिर इधर इक बार देखना
"इनका यहाँ क्या काम", तो क्या यह देश की सम्मान का बात नहीं होगा?
हमे यह समझना होगा कि लेनिन सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, एक वैश्विक विचार हैं। मूर्तियां तोड़कर विचार नहीं मिटते। आज जो लेनिन की मूर्ति तोड़ रहे हैं, कल मौका मिलने पर वे गांधी और अंबेडकर की प्रतिमाओं के साथ भी यही करेंगे।
बंगाल चुनाव के बाद लेनिन की मूर्ति तोड़ी गई। कुछ लोग पूछ रहे हैं—"भारत में लेनिन का क्या काम?"
सवाल यह है कि मूर्ति तोड़ने वाला क्या साबित करना चाहता हैं? हमे यह समझना होगा कि रूस में लेनिन का वही स्थान है जो भारत में गांधी जी का। +1
#Lenin#Ideology#India#DemocraticValues
लेनिन का विचार किसी एक देश के भीतर तक सीमित नहीं सकता, एक वैश्विक विचार हैं। जिसको दुनिया पढ़ती हैं। जैसे लेनिन की प्रतिमाएं भारत में है वैसे ही दुनिया भर में गांधी जी की प्रतिमाएं हैं; अगर कल को वहां के लोग उन्हें यह कहकर प्रतिमाओं को तोड़े या क्षतिग्रस्त करें कि +2
जीते बग़ैर जीतने वालों के दौर में
कुछ लोग हार जाते हैं हारे बग़ैर भी।
- राजेश रेड्डी
है दिल के लिए मौत मशीनों की हुकूमत
अहसास-ए-मुरौवत को कुचल देते हैं आलात।
- अल्लामा इक़बाल
एक बात समझ में नहीं आ रहा है। सुबह 9 बजे भी बीजेपी को लगभग 44 प्रतिशत वोट मिल रहा था और अभी 1:30 बजे भी बीजेपी को उतना ही वोट शेयर हैं। सुबह 9 बजे तक 1 राउंड की काउंटिंग हुई थी, वही अभी कई जगह 4 से 5 राउंड की काउंटिंग हो चुकी है। ये चुनाव आयोग की वेबसाइट से लिया गया डेटा हैं।
This May Day, @BBCHindi tells the story of a woman daily wager. It doesn’t just show you her life it makes you feel it. A powerful reminder of privilege, dignity, and the lives we often overlook. it feels like a mirror you can’t look away from. It stays with you.
#LabourDay और बिहारी मजदूर।
राजस्थान के भिवाड़ी में पिछले दिनों एक फैक्ट्री में हुए ब्लास्ट में 7 मजदूरों की मौत हो गई थी.इनमें 5 बिहार के थे.किसी भी जगह ऐसी दुर्घटना हो, वहां बिहार के लोग शिकार जरूर होते हैं. पिछले साल 992 मजदूरों की मौत राज्य से बाहर हुई. यानी हर दिन देश के किसी कोने के 3 बिहारी मजदूर दुर्घटना में मारा जाता है.
पिछले 5 साल में 3500 से ज्यादा मजदूरों की दुर्घटनाओं में मौत हो चुकी है. 2024-25 में 1658 मजदूरों की जान हादसों में गई. 14 मजदूर पूर्णतः दिव्यांग हो गये और 37 आंशिक रूप से दिव्यांग हुए.54 मजदूरों को लाइलाज बीमारी ने घेर लिया.
आज एक मई है, मजदूर दिवस है. शुभकामनाएं दी जाए.
सौ में सत्तर आदमी फ़िलहाल जब नाशाद है
दिल पे रख के हाथ कहिए देश क्या आज़ाद है
कोठियों से मुल्क के मेआर को मत आंकिए
असली हिंदुस्तान तो फुटपाथ पे आबाद है
जिस शहर में मुंतजिम अंधे हो जल्वागाह के
उस शहर में रोशनी की बात बेबुनियाद है
अदम गोंडवी
मज़दूर दिवस ✊
हम मेहनतकश जग वालों से जब अपना हिस्सा माँगेंगे,
इक खेत नहीं, इक देश नहीं, हम सारी दुनिया माँगेंगे।
याँ पर्वत-पर्वत हीरे हैं, यां सागर-सागर मोती हैं,
ये सारा माल हमारा है, हम सारा खजाना मांगेंगे।
वो सेठ व्यापारी रजवारे, दस लाख तो हम हैं दस करोड़,
ये कब तक अमरीका से, जीने का सहारा माँगेंगे।
जो खून बहे जो बाग उजडे जो गीत दिलों में कत्ल हुए,
हर कतरे का हर गुंचे का, हर गीत का बदला माँगेंगे।
जब सब सीधा हो जाएगा, जब सब झगडे मिट जाएँगे,
हम मेहनत से उपजाएँगे, बस बाँट बराबर खाएँगे।
हम मेहनतकश जग वालों से जब अपना हिस्सा माँगेंगे,
इक खेत नहीं, इक देश नहीं, हम सारी दुनिया माँगेंगे।
#labourday #mayday
मजदूर दिवस पर सरकार ने मजदूरों के देश निर्माण में भागेदारी को थोड़ा और बढ़ा दिया है।ये योगदान गैस से दिया जाएगा। छोटे सिलेंडरों पर ₹261, ज्यादा नहीं मामूली सी बढ़ोतरी की हैं। छोटे सिलेंडर मजदूर वर्ग खरीदते हैं। इसे मजदूरों के लिए लाया गया था, छोटू सिलेंडर 5kg का होता हैं #मजदूर
मई की पहली तारीख सिर्फ एक तारीख नहीं बल्कि एक निरंतर स्मरण रखने वाला दिन है। Haymarket Affair की गूंज से लेकर भारत के अपने श्रमिक आंदोलनों तक, वे सारे अधिकार जिन्हें हम आज सामान्य मान लेते हैं, संघर्ष करके और लड़कर हासिल किए गए थे। भारत में मई दिवस की शुरुआत 1923 में चेन्नई(तब के मद्रास) में हुई, जब इसे श्रमिकों की गरिमा/अधिकारों के लिए पहली बार मनाया गया। #MayDay पर हमें सिर्फ काम/कामगारों का जश्न नहीं मनाना चाहिए, बल्कि संकल्प लेना चाहिए कि एक न्यायपूर्ण समाज महज नारे से नहीं, बल्कि अपने श्रमिकों के प्रति सम्मान से शुरू होता है।
जय हिन्द
जो जीवन की धूल चाट कर बड़ा हुआ है
तूफ़ानों से लड़ा और फिर खड़ा हुआ है
जिसने सोने को खोदा लोहा मोड़ा है
जो रवि के रथ का घोड़ा है
वह जन मारे नहीं मरेगा
नहीं मरेगा
जो जीवन की आग जला कर आग बना है
फ़ौलादी पंजे फैलाए नाग बना है
जिसने शोषण को तोड़ा शासन मोड़ा है
जो युग के रथ का घोड़ा है
वह जन मारे नहीं मरेगा
नहीं मरेगा
#केदारनाथ_अग्रवाल
@hindwiOfficial
#मज़दूर_दिवस
@ANI अरे कोई नहीं, इलेक्शन का कुछ तो फ़ायदा मिला लोगों, परंतु हवा में मिला। आने वाला समय आम नागरिकों के लिए बहुत कठिन होने वाला हैं। पेट्रोल, डीज़ल, गैस इन सभी पर लोगों की निर्भरता इतनी बढ़ गई है कि इसके बिना रहना मुश्किल होता और अब इसी चीज़ का फायदा कंपनी उठाएगी।
#LPG