कभी ममता बनर्जी की करीबी और TMC की मुखर नेता मानी जाने वाली सायोनी घोष को लेकर अब नए राजनीतिक सवाल उठ रहे हैं। एक समय वह खुलकर पार्टी के समर्थन में प्रचार करती थीं और खुद को TMC के साथ मजबूती से खड़ा बताती थीं।
अब बदले हुए राजनीतिक माहौल में उनके रुख को लेकर चर्चाएं तेज हैं। मीडिया ने जब उनसे उनके पुराने बयानों और मौजूदा स्थिति पर सवाल किया, तो उन्होंने जवाब दिया कि वह मीडिया को नहीं, बल्कि अपने क्षेत्र की जनता को जवाब देंगी।
गौरतलब है कि अपनी बेबाक शैली के लिए पहचानी जाने वाली सायोनी घोष का यह जवाब कई लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। उनके इस रवैये को लेकर अलग-अलग तरह की राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
अभी तक हम लोगों ने सुना था शिक्षक का कोई धर्म नहीं होता।
आज रौशन सर ने साफ़ बता दिया वो सनातनी यादव हैं। अब एक शिक्षक हिंदू मुस्लिम स्टूडेंट देख कर पढ़ायेगा?
जैकी यादव खुद को पत्रकार के रूप में प्रस्तुत करते हैं, लेकिन उनके कई पोस्ट और ट्वीट्स में निष्पक्ष रिपोर्टिंग की बजाय जातीय और पहचान-आधारित विमर्श अधिक प्रमुख दिखाई देता है। कई बार ऐसा प्रतीत होता है कि वे लगभग हर मुद्दे को जाति के नजरिए से देखने की कोशिश करते हैं।
खान सर, रौशन सर और प्रिंस यादव से जुड़े विवाद में भी उन्होंने खुलकर एक पक्ष का समर्थन किया और बार-बार खान सर को उनके नाम "फैसल खान" से संबोधित करते हुए चर्चा का केंद्र शिक्षा से हटाकर धर्म और पहचान की ओर मोड़ दिया।
शिक्षा जैसे गंभीर विषयों को जाति और धर्म के चश्मे से देखने के बजाय तथ्यों और मुद्दों के आधार पर चर्चा होनी चाहिए। सार्वजनिक विमर्श में संतुलन और जिम्मेदारी समाज तथा छात्रों, दोनों के हित में है।
PW वाले ALAKH PANDEY ने KHAN SIR के लिए बड़ी बात कह दी है!
दरअसल ज्ञान बिंदु के रौशन आनंद सर और KGS वाले खान सर के बीच चल रहा विवाद अब एक भयानक रूप ले रहा है.
इसी बीच अलख पाण्डेय ने खान सर का बचाव किया है. उन्होंने कहा है कि
"खान सर ने सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले बच्चों इतनी कम फीस में पढ़ाया, सस्ता इलाज़ के लिए हॉस्पिटल खोला और बदले में उनको क्या मिला??!"
"फैज़ल खान!"
अलख सर ने ये भी कहा कि रौशन आनंद सर के साथ बहुत गलत हुआ है क्योंकि इस सब में उनके भाई प्रिंस यादव की जान चली गई.
उन्होंने इस घटना में पुलिस प्रशासन से जांच की मांग की है और कहा है कि अगर खान सर दोषी हैं तो उन्हें सज़ा भी मिलनी चाहिए.
अब मुद्दा सिर्फ दो शिक्षकों तक सीमित नहीं रह गया है। असली चिंता बिहार, खासकर पटना की छवि और वहां पढ़ने वाले छात्रों की सुरक्षा व माहौल को लेकर होनी चाहिए।
हाल के दिनों में गर्ल्स हॉस्टल और प्रतियोगी परीक्षा की कोचिंग से जुड़े मामलों ने कई सवाल खड़े किए हैं। ऐसे में जिन अभिभावकों के बच्चे पटना में पढ़ रहे हैं या पढ़ने की योजना बना रहे हैं, उनकी चिंता स्वाभाविक है।
इस पूरे विषय पर गंभीर और संतुलित चर्चा की आवश्यकता है, ताकि छात्रों और अभिभावकों का भरोसा बना रहे। #Patna #KhanSir #RoshanAnandSir
करोड़ों की प्रॉपर्टी के लिए दादाजी से शादी को तैयार हुई युवती!
वजह सुनकर परिवार के उड़े होश" 😱💰
हाईवे किनारे जमीन, शानदार बंगला, लग्जरी गाड़ियां और करोड़ों की संपत्ति के मालिक एक बुजुर्ग शख्स की कहानी इन दिनों चर्चा में है। हैरानी की बात यह थी कि उनके पास न कोई सरकारी नौकरी थी और न ही कोई बड़ा बिजनेस, फिर भी संपत्ति की कोई कमी नहीं थी।
मामले ने तब नया मोड़ लिया जब उनकी बेटी ने पिता से सारी संपत्ति अपने नाम करने की बात कही। बुजुर्ग ने जवाब दिया कि पहले उनकी शादी करा दी जाए, फिर वह इस बारे में सोचेंगे।
परिवार ने एक युवती से बात की और वह शादी के लिए राजी भी हो गई। लेकिन जब उससे शादी की वजह पूछी गई तो उसका जवाब सुनकर सभी चौंक गए। युवती ने कथित तौर पर कहा कि बुजुर्ग ज्यादा समय तक नहीं जिएंगे और बाद में सारी संपत्ति उसे मिल जाएगी।
इस खुलासे के बाद परिवार में हड़कंप मच गया। अब सोशल मीडिया पर लोग इस कहानी को लालच, रिश्तों और संपत्ति के नजरिए से देख रहे हैं। कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या आज के दौर में कुछ रिश्ते भी केवल संपत्ति और पैसे के आधार पर तय होने लगे हैं?
अगर आपको पता चले कि कोई व्यक्ति सिर्फ संपत्ति के लिए शादी करना चाहता है, तो क्या ऐसी शादी होनी चाहिए?
वैभव सूर्यवंशी प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सिर्फ प्रतिभा ही नहीं, धैर्य, अनुशासन और दबाव को संभालने की क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।
श्रीलंका के खिलाफ सुपर ओवर में मिली हार के बाद उनकी प्रतिक्रिया ने कई लोगों को निराश किया। दूसरी ओर, सचिन तेंदुलकर ने कम उम्र में मिली अपार सफलता के बावजूद हमेशा संयम और विनम्रता का परिचय दिया।
रिकॉर्ड तोड़े जा सकते हैं, लेकिन सचिन जैसी निरंतरता, धैर्य और खेल भावना हासिल करना कहीं अधिक कठिन है। लंबा करियर उन्हीं खिलाड़ियों का बनता है जो सफलता और असफलता दोनों को संतुलित तरीके से संभालना जानते हैं।
खान सर का बहिष्कार करो....
जाति देखकर सारे यदुमुल्ले एक जुट हो गए !
इस छपरी टीचर को मुखिया बनाने में #KhanSir का योगदान था न कि रोशन यादव का !
आज खान सर को वजह से रोजी रोटी का जुगाड़ करने वाले, अपनी अपनी जाति देखकर विरोध पर उतर गए!
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वैभव सूर्यवंशी प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सिर्फ प्रतिभा ही नहीं, धैर्य, अनुशासन और दबाव को संभालने की क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।
श्रीलंका के खिलाफ सुपर ओवर में मिली हार के बाद उनकी प्रतिक्रिया ने कई लोगों को निराश किया। दूसरी ओर, सचिन तेंदुलकर ने कम उम्र में मिली अपार सफलता के बावजूद हमेशा संयम और विनम्रता का परिचय दिया।
रिकॉर्ड तोड़े जा सकते हैं, लेकिन सचिन जैसी निरंतरता, धैर्य और खेल भावना हासिल करना कहीं अधिक कठिन है। लंबा करियर उन्हीं खिलाड़ियों का बनता है जो सफलता और असफलता दोनों को संतुलित तरीके से संभालना जानते हैं।
रौशन आनंद-खान सर विवाद में शुरुआत से ही लोगों ने अपनी-अपनी राय बना ली थी। कई लोगों को लगा कि बिना पूरी जांच के आरोपों के आधार पर कार्रवाई की गई। लेकिन प्रिंस यादव की दुखद मौत के बाद पूरा विमर्श एक अलग दिशा में चला गया।
रौशन आनंद के बयान, "हम सनातनी हिंदू हैं, हमारे धर्म में सत्य सिखाया जाता है, किसी को मारना नहीं", पर भी बहस छिड़ गई। सवाल यह है कि क्या मूल मुद्दा न्याय और जांच का था या फिर उसे जाति और धर्म के चश्मे से देखा जाने लगा?
इस विवाद से पहले अधिकांश लोग रौशन आनंद, खान सर या विवेक सर को उनकी जाति या धर्म से नहीं, बल्कि उनके काम से जानते थे। लेकिन अब चर्चा का केंद्र पहचान की राजनीति बनती जा रही है।
जरूरत इस बात की है कि निष्पक्ष जांच हो, दोषी को सजा मिले और समाज को बांटने वाली बहसों से बचा जाए।
ज्ञान बिंदु कोचिंग के डायरेक्टर रौशन आनंद के भाई प्रिंस यादव की मौत के बाद तेजस्वी यादव ने बड़ी मांग कर दी है
रौशन आनंद के भाई प्रिंस यादव की नेपाल के विराटनगर स्थित एक होटल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी
इसके बाद परिजनों ने हत्या के आरोप लगाए थे
इसी मामले पर तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को लिखा पत्र,रौशन आनंद के भाई प्रिंस की मौत की जांच CBI से कराने की मांग की है।
क्योंकि जब बड़ी जांच होगी तभी दूध का दूध और पानी का पानी होगा।
ऐसा प्रतीत होता है कि इज़राइल, अमेरिका और ईरान के बीच किसी संभावित समझौते या कूटनीतिक समाधान की दिशा में बढ़ रही प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है। कई विश्लेषकों का मानना है कि इज़राइल युद्ध की समाप्ति को लेकर उतना उत्साहित नहीं दिखता, जबकि इस बार अमेरिका और विशेष रूप से ट्रंप प्रशासन भी क्षेत्रीय समीकरणों को पहले की तुलना में अलग नज़रिए से देख रहा है।
दिलचस्प बात यह है कि हमारे देश के एक चर्चित न्यूज़ एंकर ने भी सोशल मीडिया पर इज़राइल की इस रणनीति की सराहना की है और युद्ध जारी रहने की वकालत की है। जबकि यह सर्वविदित है कि पश्चिम एशिया में लंबे समय तक जारी संघर्ष का आर्थिक और सामरिक प्रभाव भारत सहित कई देशों पर पड़ता है।
विडंबना यह है कि जो लोग रोज़ाना टीवी स्टूडियो में बैठकर देशहित का पाठ पढ़ाते हैं, वे ही कभी-कभी ऐसे रुख़ का समर्थन करते दिखाई देते हैं, जिसके व्यापक परिणामों पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए।
सुशांत सिंह राजपूत की मौत के 6 साल बाद संचिता उगले ने 22 साल की उम्र में आत्महत्या कर लिया हैं !
संचिता कुमकुम भाग्य , साजन घर और दिलवाले दुल्हनियां ले जाएंगे जैसे शो में काम कर चुकी हैं !
संचिता के भाई ने आरोप लगाया कि मेरी बहन ने भी सुशांत सिंह की मौत में कनेक्शन होने का दावा किया हैं,
भाई ने आरोप लगाया कि सुशांत और मेरी बहन दोनों ने इंडस्ट्री के दवाब के कारण आत्महत्या की है !
संचिता ने 14 जून को सोशल मीडिया पर पोस्ट भी डाला था कि आ गया फिर 14 जून ,
2020 में 14 जून को ही सुशांत सिंह राजपूत ने सुसाइड किया था !
परिवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इंसाफ की गुहार लगाई हैं !
बिहार में रोशन यादव के समर्थन के चक्कर में वहां के यादव भाई लोग जिस तरह खान सर को बदनाम कर रहे है
यादव vs मुस्लिम कर रहे है अगले चुनाव में तेजस्वी जी 00 सीट जीतेंगे
खान सर देश के एक महान शिक्षक है उनका सम्मान होना चाहिए राष्ट्रपति से सम्मानित हो चुके है!
काम निकल जाने के बाद लोग अक्सर अपने शुभचिंतकों को भूल जाते हैं। ऐसे में खान सर भी आलोचनाओं से अछूते नहीं हैं।
जिस व्यक्ति ने कम फीस में लाखों छात्रों तक शिक्षा पहुंचाई, गरीब और मध्यम वर्ग के युवाओं को आगे बढ़ने का मौका दिया और बिहार को राष्ट्रीय पहचान दिलाने में योगदान दिया, आज उसी पर बिना पूरी सच्चाई सामने आए आरोप लगाए जा रहे हैं।
किसी को दोषी ठहरा देना आसान है, लेकिन न्याय भावनाओं या अफवाहों से नहीं, बल्कि तथ्यों और सबूतों के आधार पर होता है।
प्रिंस यादव के साथ जो हुआ, वह बेहद दुखद है। इस मामले में निष्पक्ष, पारदर्शी और तेज़ जांच होनी चाहिए। जो भी दोषी साबित हो, उसे कानून के अनुसार कड़ी से कड़ी सजा मिले। #JusticeForAll #FairInvestigation