THE INDIAN ECONOMY IS DEAD.
Modi killed it.
1. Adani-Modi partnership
2. Demonetisation and a flawed GST
3. Failed “Assemble in India”
4. MSMEs wiped out
5. Farmers crushed
Modi has destroyed the future of India’s youth because there are no jobs.
“Whenever we face any problem, we remember our mother and father
Similarly whenever Modi feels that he is in trouble, he starts chanting Musalman, Pakistan, etc
I think he is the biggest Muslim” 🤣
People of Varanasi are not hesitating anymore 😭😭😭
So many heros, heroines, rockstars in the 20 renegades- some claim to have birthed even Mamatadi. Why seek an extension? You’ve been jumping for 2 months about how you’re absolutely right, legally & morally. So why the delay, traitors?
सुभाष चंद्रा के लिए राहत चार दिन की चांदनी रही।
आमजन के आक्रोश के बाद उनके 22 हज़ार करोड़ की कर्जमाफी के आदेश को पलटा।
अब सुभाष चंद्रा ने फ़ैसला बहाल रखने के लिए गुहार लगाते हुए याचिका दी है।
यही बदला है समय। अगर कुछ साल पहले यह फ़ैसला आया होता तो न सिर्फ़ यह बरकरार रहता बल्कि जो भी सवाल करता उसे बुली कर चुप करा दिया जाता!
The day I saw a ₹2 troll like Bagree sitting in the Finance Ministry and with no less than the Finance Minister herself was the day I knew this country is doomed and that no official economic data can be trusted anymore.
7. 5% ग्रोथ की घनघोर प्रशंसा करता हूं। वस्तुतः यह सरकार द्वारा आर्थिक संयम बरतने का एक शानदार उदाहरण है।
वरना तो वो 21% ग्रोथ भी घोषित कर दे, तो आप क्या ही बिगाड़ लोगे ?
MASSIVE EXPOSE 🤯
Economist & Former Finance Secy Subhash Chandra Garg revealed that actual GDP growth rate is 2.6%, NOT 7.8%
He exposed Modi Govt based on its own data, not speculations.
Watch how shamelessly NDTV anchor tried to shut him down, but he didn’t stop.
बाबर उजबेकिस्तानी था।
वहाँ बाबर की मूर्तियों के हाथ मे किताब होती है। वह अपने हर दिन का हिसाब रखता था, डायरी लिखता था। उसने अपनी आत्मकथा, अपनी मातृभाषा चगताई तुर्की लिखी।
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दरअसल उसे तुर्की भाषा के सबसे प्रसिद्ध और कुशल लेखकों में गिना जाता है। उन्होंने ग़ज़लों का एक बड़ा संग्रह तैयार किया। मुबैयान नाम से एक मसनवी- याने काव्य संग्रह लिखा है। कुछ किताबों का अनुवाद भी किया है।
बाबरनामा मे वह जहाँ का दौरा करता है, वहाँ की वनस्पतियों, पशु-पक्षियों, लोगों के रहन-सहन, जलवायु और भूगोल का वर्णन करता है। बाबर ने इसमें अपनी कमियों, असफलताओं, निर्वासन के दर्द और अपनी व्यक्तिगत आदतों को बिना छुपाए खुलकर लिखा है।
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औऱ शत्रुओ को खूब गालियां भी देता है।
समरकंद अभियान मे उसे धोखा देने वाले एक साथी सिपहसालार के लिए, बाबरनामा वह एक सांस मे 18 गालियां लिखता है, जो एक पूरे पैराग्राफ मे फैली हैं।
काबुल उसका पसंदीदा शहर था। अपनी मौत के बाद उसने वहीं दफनाये जाने की ख्वाहिश की थी। वह अकेला मुग़ल है, जो भारत के बाहर दफन हुआ। हालांकि दूसरा बहादुरशाह है, जो रंगून निर्वासन मे दफन हुए, पर वो अलग मसला है।
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हमारे राजाओ की छवियां - शेर के दाँत गिनते, तीर धनुष सम्हालते, संधान करते, देवपूजन या पूजा पाठ रिचूअल करते, घोड़े, हाथी या सिंहासन पर शान से बैठे बनाई जाती है।
इतिहास का कोई भारतीय राजा किताब पढ़ते अपनी छवि सिक्कों, मूरतों या तस्वीर मे गढ़वाते नहीं दिखा।
चौथी पास राजा चुनने वाले, हम हिंदुस्तानियों को, इस बात पर बेझिझक उजबेको से ईर्ष्या करनी चाहिए।
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बाबर मे लिखने पढ़ने की आदत का सबसे खूबसूरत नतीजा क्या था - जानते हैं??
पढ़ने का वही शौक उसके बेटे मे भी आया।
शायद आपने नोटिस किया हो कि बाबर का बेटा हुमायूं, आख़िरी वक़्त अपनी लाइब्रेरी मे ही था। जिसकी सीढ़ियों से गिर कर मरा था।।
😊
संदीप और कुलदीप नाम के दरिंदो ने चलती बस में एक नाबालिक लड़की का गैंग रेप किया,
तमाम मीडिया चैनल अपराधियों का सरनेम छुपा रहे हैं, मतलब समझ लो कौन लोग हैं,
मनु मीडिया ख़तरनाक है 🔥
रवि किशन ने कहा अगर गोरखपुर में पानी भरा तो वो अपना नाम बदल देंगे ,
थोड़ी बारिश में ही गोरखपुर की सड़के तैरने लगी छोटी बच्ची ने वीडियो बनाकर रवि किशन से नाम बदलने के लिए बोला ,
रवि किशन ने अपना नाम तो नहीं बदला बल्कि गोरखपुर का नाम बदलकर स्पेन कर दिया।
• अडानी के साथ जिस Welspun group का नाम सामने आया है, उसने इलेक्टोरल बॉन्ड में BJP को 10 करोड़ का चंदा दिया था
• महाराष्ट्र में चुनाव के वक्त भी 6,600 MW का टेंडर सीधे अडानी को मिला था और ये सिंगल टेंडर था
• मध्य प्रदेश के सिंगरौली में अडानी को कोल माइनिंग के ब्लॉक दिए गए, जिसमें पर्यावरण, टाइगर रिजर्व और हाथियों के कॉरिडोर से जुड़े मुद्दे उठे लेकिन सारी बातों को नजरअंदाज कर दिया गया
• लोकसभा में जब इस बारे में सवाल पूछा गया तो जवाब मिला कि ग्राम सभा से प्रस्ताव पास कराना अनिवार्य है, लेकिन अडानी से जुड़े कोल ब्लॉक के मामले में ऐसा कुछ नहीं हुआ
: @shaktisinhgohil जी
राहुल जी के खिलाफ FIR को मुद्दा बनाना छोड़िए।
जिस व्यक्ति के ख़िलाफ़ बीजेपी ने देश भर में 40-50 केस करा दिए हैं, उनके ख़िलाफ़ एक और FIR हो भी गई तो कौनसा आसमान सर पर टूट पड़ा?
असली मुद्दा राहुल जी के ख़िलाफ़ हुआ FIR नहीं है। असली मुद्दा ‘शुद्धिकरण’ का है।
बीजेपी और उत्तराखंड सरकार की नीयत देखिए।
जिस व्यक्ति ने शुद्धिकरण के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई, उनके खिलाफ तो तुरंत FIR कर दी।
लेकिन जिन लोगों ने शुद्धिकरण किया और करवाया, उनके ख़िलाफ़ अब तक एक FIR तक नहीं हुई।
श्री @kharge जी ने संसद में खड़े होकर कहा कि शुद्धिकरण हुआ है। उत्तराखंड सरकार की जिम्मेदारी है कि FIR करे। बाकी क्या हुआ, किसने किया, क्यों किया – वो investigation में सामने आ ही जाएगा।
फिर FIR दर्ज करने से इतना डर क्यों?
आखिर बीजेपी और उत्तराखंड सरकार शुद्धिकरण के ख़िलाफ़ FIR से कतरा क्यों रही है?
क्या उनकी दलित गरिमा और न्याय सुनिश्चित करने की कोई मंशा ही नहीं है?