सबसे बड़ी खबर : साहिल वकोड़े को न्याय दिलाने के Vanchit Bahujan Aghadi के नेता आदरणीय डॉ प्रकाश अंबेडकर ने बॉम्बे हाईकोर्ट में खुद याचिका दाखिल की है.
याचिका में उन्होंने ने दो मांग रखी है. साहिल वकोड़े के मामले में पुलिस को जिस तरह से इन्क्वायरी करनी चाहिए उस तरह से नही कर रही है. इन्वेस्टिगेशन टीम से पूछा गया तो उनका जवाब था जब तक ऊपर के अधिकारी नही कहेंगे हम उस लेवल तक जांच नही कर सकते.
याचिका में दूसरी मांग है, साहिल वकोड़े को जबर्दस्ती आत्महत्या के लिए परिस्थिति निर्माण की गई गयी थी.
देश में 50 बड़े बहुजन नेता हैं. मंत्री, MLA और MP हैं. सब सो रहे हैं. डॉ प्रकाश अंबेडकर चाहते तो रामदास आठवले की तरह ड्रॉइंग रूम की राजनीति करते लेकिन वो मैदान में उतरकर लड़ रहे हैं. डॉ प्रकाश अंबेडकर सर का बहुत बहुत आभार व्यक्त करता हूँ.
हिंदुओं का जातिवाद :
वर्तमान की SC/ST/OBC के पूर्वज, इतिहास में जो राजा थे उन्हें आज का ब्राह्मणवादी, क्षत्रिय कहके अपने पिताजी साबित करना चाहता है जो विद्वान थे उन्हें ब्राह्मण कहता है और जो व्यापारी थे उन्हें वैश्य कहके जातिवाद/वर्णकुव्यवस्था को बनाये रखना चाहता है।
यानी जब भी बहुजन संपन्न होते है उन्हें अपनी ब्राह्मणवादी कुव्यवस्था में घोल लेने पर उतारू हो जाता है आज भी यही हो रहा है।
नाम है दीपाली साल्वे. लगातार 25 दिनों से साहिल वकोडे को न्याय दिलाने के लिए आंदोलन कर रही हैं.
दीपाली साल्वे पर सोशल मीडिया पर बिल्कुल कवरेज नही.
दीपाली साल्वे पर मैनस्ट्रीम मीडिया का कैमरा नही, रिपोर्टिंग नही और ना कोई खबर.
दीपाली साल्वे पर किसी भी अखबार के पन्ने पर एक छोटी सी खबर नही.
2016 में JNU से कन्हैया कुमार का भाषण लाइव दिखाने के लिए मैनस्ट्रीम मीडिया ने अपनी पूरी OB वैन और टीम लगा दी थी.
2026 में नोइडा मीडिया और सोशल मीडिया का कैमरा CJP नेताओं की लेक्चरबाजी और नेहा बोरा का स्टंट लाइव दिखाने के लिए हर 500 से ज्यादा पत्रकार आगे पीछे भागते रहते हैं.
दीपाली साल्वे दलित है इसलिए नजरअंदाज किया जा रहा है. उन्हें डर है लाइम लाइट देंगे तो लोकप्रिय हो जाएगी. मीडिया को दीपाली साल्वे नही, कोई दीपाली शर्मा या दीपाली पांडे चाहिए. सरनेम तय करता है आपका कितना आगे जाओगे ?
रवीना टंडन से जब उनकी खूबसूरती और अच्छी सेहत का राज पूछा गया तब उन्होंने कहा वो नाश्ते और खाने में केवल मखाना खाती हैं.
मखाना में ढेर सारे विटामिन और पोषक तत्व होते हैं जैसे BI, B2, B9, कैल्शियम, मैग्नेशियम, प्रोटीन और फाइबर होता है.
मखाना Euryale Ferox नाम का एक जलीय पौधे का बीज है. आज से 3000 हजार साल पहले भारत मे इसकी खेती की मजबूत परंपरा बिहार के मिथिलांचल के क्षेत्र में विकसित हुई.
यह वही इलाका है जहां बौद्ध सभ्यता विकास हुआ था. बीज को भूनकर पीटने की तकनीक का विकास 900-1200 AD के आसपास हुआ,
बीज को सुखाने, भूनने और पीटने की तकनीक का ज्ञान मिथिला के मल्लाह समुदाय ने विकसित किया और आज भी पीढ़ियों से चला आ रहा है.
मखाना के बीज को पीटने की तकनीक विकसित करने वाले मल्लाह समुदाय को कोटि कोटि प्रणाम करता हूँ.
बौद्ध भूमि का रहने वाला हूँ बौद्ध सभ्यता की बात सुनता हूँ 🙏🏼
आज प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में नेहा बोरा ने चुनाव आयोग के हलफनामे पर गंभीर सवाल उठाया है.
नेहा बोरा ने चुनाव आयोग से केवल 7 सावल पूछा है. चुनाव आयोग के लिए सातों सवाल किसी पहाड़ से कम नही है.
1. SIR का फैसला सबसे पहले किसने लिया
2. फॉर्म-6 में चुनाव आयोग ने बदलाव क्यों किया
3. पश्चिम बंगाल में 16 लाख मामले किसने और किस आधार पर दर्ज किया ?
4. ERO के अधिकार दिल्ली के IT डिवीजन को क्यों दिया गया
5. लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी का सॉफ्टवेयर और प्रक्रिया को सार्वजनिक क्यों नही किया गया है.
6. क्या फॉर्म 7 एक साथ बड़ी संख्या में भरे जा सकते हैं
7. SIR की फाइनल लिस्ट के बाद भी फॉर्म-8 क्यों और कैसे भरे जा रहे हैं ?
नेहा बोरा ने कहा, लोकतंत्र में पारदर्शिता जरूरी है. चुनाव आयोग को इन सवालों का जवाब देना चाहिए.
जापान की महिलायें करवाचौथ का व्रत नहीं रखती, उनकी औसत आयु सबसे अधिक है।
American women usually live to around 81 years and American men 76; but compared to Japan, women live to around 87 years and men to 80 years. There is demographic data that shows Japan is an older and more quickly aging society than United States.
Indian women's average lives 49.5 years.
1990 से 2005 के बीच बॉलीवुड की फिल्मों में खलनायक के किरदारों में यादव सरनेम का इस्तेमाल अक्सर देखने को मिलता था.
2003 में रिलीज़ हुई फ़िल्म Gangajal में खलनायक साधु यादव है, जबकि पुलिस विभाग में भ्रष्ट अधिकारी इंस्पेक्टर मांगनीराम को SC समाज से दिखाया गया है.
जब तक लालू प्रसाद यादव बिहार की राजनीति में बेताज बादशाह थे, प्रकाश झा ने यादव सरनेम को खूब बदनाम किया.
रील की दुनिया को छोड़ दें तो असल दुनिया में आप लोग जानते ही हैं कि 99% बाहुबली किस वर्ग से आते हैं.
मीडिया ने हमारे नेताओं की छवि खराब की. फिल्मों के माध्यम से भी हमारे नेताओं की छवि खराब की गई. यह सब इसलिए मुमकिन होता है कारण मीडिया और बॉलीवुड में सवर्ण जातियों का ओवर रिप्रजेंटेशन है.
इजरायल के चुनाव में किसी भी पार्टी को बहुमत मिलता नही दिख रहा.
इस चुनाव में अरब पार्टियों ने शानदार प्रदर्शन किया किया है, अरब पार्टियों को 19 सीट मिलने जा रही है.
कुछ यहूदी पार्टियां बेंजामिन नेतन्याहू को सत्ता से बाहर रखने के लिए अरब पार्टियों से गठबंधन कर के सरकार बना सकती हैं.
इसी डर से बेंजामिन नेतन्याहू इस चुनाव को नकार रहे हैं. वो यहूदी पार्टियों से अपील कर रहे हैं अरब पार्टियों से गठबंधन ना करें.
उन्होंने अरब पार्टियों के जीत को इजराइल के लोकतंत्र पर हमला बताया. इजरायल का इस्लामीकरण किए जाने का प्लान है. पैसे देकर वोट तक खरीदने का आरोप लगा रहें.
बेंजामिन नेतन्याहू अरब पार्टी Ra'am के नेता अहमद तिबि पर आरोप लगा रहे हैं चुनाव से 4 दिन पहले क़तर की यात्रा पर क्यों गए ?
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू हैं. इजरायल के पास मोसाद जैसी खुफिया एजेंसी है. फिर भी चुनाव में वोट खरीदने का आरोप लगा रहे हैं. मोसाद क्या सोया हुआ था ?
साहिल वकोड़े के पिता ने IIT Bombay के HOD और प्रोफेसर दूल्ला पर गंभीर आरोप लगाया है.
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा, एक फ्लोर का CCTV फुटेज है लेकिन जिस फ्लोर पर HOD का ऑफिस है उस फ्लोर का CCTV फुटेज क्यों नही है ?
साहिल वकोड़े के पिता ने कहा, मेरे बेटे को मानसिक रूप से टॉर्चर किया किया. एक फ्लोर का CCTV है तो उस फ्लोर का CCTV क्यों नही है जहां मेरे बेटे को घंटो बिठाकर रखा गया.
यह सवाल साहिल वकोड़े के पिता ने उठाया है. उनका सीधा आरोप है CCTV फुटेज को नष्ट किया गया है.
इस मामले में जांच एजेंसी को निष्पक्ष जांच करनी चाहिए.
हे मेरे बहुजन समाज के लोगों. क्या आप लोग सो रहे हैं या जाग रहे हैं. कुछ कहना चाहता हूँ, सुप्रीम कोर्ट के कोलेजियम की बात बताना चाहता हूँ.
सुप्रीम कोर्ट के कोलेजियम ने 4 हाइकोर्ट में चीफ जस्टिस और 9 जजों की नियुक्ति की सिफारिश की है.
हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के लिए 4 नाम.
1. जस्टिस मनाश रंजन पाठक : गुजरात HC
2. जस्टिस पी सैम कोशी : दिल्ली HC
3. जस्टिस तपब्रत चक्रवर्ती : तेलंगाना HC
4. जस्टिस सुधीर सिंह : उत्तराखंड HC
बॉम्बे हाईकोर्ट में जज बनाने के लिए वकील अजय शर्मा और अधिवक्ता वैभव सुगदरे के नाम की सिफारिश है.
मध्यप्रदेश हाई कोर्ट में इन 7 वकीलों के नाम की सिफारिश कोलेजियम ने है.
1. डॉ विवेक शरण
2. राजेश कुमार शुक्ल
3. कनक लता सिंह
4. भक्ति व्यस
5. श्रेयस पंडित
6. मृणाल मजूमदार
7. अविनाश जरगर
मुझे नही लगता इन नामों में कोई OBC SC ST है, अगर होगा भी तो एक या दो होंगे या नही भी. न्यायालय में सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए.
साल 2000 में कोलेजियम ने सुप्रीम कोर्ट में जज बनाने के लिए नामों की सिफारिश की थी. तत्कालीन राष्ट्रपति केआर नारायण ने यह कहते हुए सिफारिश को वापस कर दिया की इसमें एक भी दलित या आदिवासी जज नही है. तब केजी बालाकृष्णन को जज बनाया गया जो आगे चलकर CJI बने.
महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी को साइन नही करना चाहिए.
लक्ष्मी जैसी धन की देवी है, कुबेर जैसे धन के देवता हैं और धन वर्षा यंत्र जैसी टेक्नोलॉजी भी है । बावजूद इसके भारत "हंगर इंडेक्स" पर 127 देश की सूची में 105 में नंबर पर है।
TATA के समर्थन में राहुल गांधी कूद गए हैं. देश की जनता को भी टाटा के समर्थन में आगे आना होगा.
TATA परिवार अपनी अमीरी का प्रदर्शन नही करता. भारी सुरक्षा में महंगी कार में सड़कों पर शो ऑफ नही करता.
TATA ग्रुप को टाटा संस कंट्रोल करता है. और टाटा संस को टाटा ट्रस्ट कंट्रोल करता है.
TATA ट्रस्ट अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा चैरिटी करता है.
TATA कैंसर अस्पताल में इलाज कराने उत्तरप्रदेश बिहार बंगाल और देश के कोने कोने से से लोग आते हैं.
TATA ग्रुप के शेयर्स पर एक उद्योगपति की नजर है वो टाटा समूह में घुसकर टाटा ग्रुप पर आधिपत्य जमाना चाहता है.
कैपिटलिज्म में कमाया पैसा उद्योगपतियों का नही होता है. पैसा बिजनेस का होता है, कमाया पैसा बिजनेस वापस लगाया जाता है. और 150 सालों से TATA यही करते आ रहा है.
हिन्दी सिनेमा में एंग्री यंग अमिताभ बच्चन को कहा जाता था. लेकिन असली एंग्री यंग मैन तो नसीरुद्दीन शाह थे.
अमिताभ बच्चन की जंजीर, दीवार और मर्द जैसी फिल्मों में गुस्सा अपनी लड़ाई, अपने हक़ और अपनी महत्वकांक्षा के लिए था.
अमिताभ बच्चन का किरदार अन्याय से लड़ता था लेकिन उनका मकसद अपनी जिंदगी का हिसाब बराबर करना था, ना कि व्यवस्था बदलना.
दूसरी तरफ नसीरुद्दीन शाह की अल्बर्ट पिंटो को गुस्सा क्यों आता है जैसी फिल्मों में गुस्सा सिर्फ व्यक्तिगत नही था. उसमें समाज की असमानता, भ्रष्ट व्यवस्था और आम आदमी के साथ होने वाले अन्याय की चिंता भी थी.
उनका गुस्सा व्यवस्था पर सवाल उठाता था और उसे बदलने की जरूरत महसूस कराता था.
आज भी एंग्री ओल्ड मैन अमिताभ बच्चन नही, नसीरुद्दीन शाह हैं. अमिताभ बच्चन खुश हैं, शांत है, मस्त हैं. वहीं नसीरुद्दीन शाह आज भी सरकार से सवाल कर रहे हैं और देश के हलत पर अपनी चिंता जाहिर कर रहे हैं.
उम्र दोनों की बढ़ी है, लेकिन सत्ता से सवाल पूछने का गुस्सा आज भी नसीरुद्दीन शाह में नजर आता है.
तुमको वेद पढ़ने का हक नहीं. तुम मंदिर के गर्भगृह में नहीं घुस सकते. देवी-देवता का श्रंगार नहीं कर सकते. भोग नहीं लगा सकते. दान-दक्षिणा पर तुम्हारा हक नहीं.
तुम काहे के हिंदू हो बे ?
Elon Musk is worth $919 billion, about 11 times Mukesh Ambani.
Jeff Bezos is worth $359 billion, Mark Zuckerberg $228 billion. Ambani is worth $79 billion, 23rd in the world.
Musk's Starlink works in over 100 countries. Amazon sells across continents. Meta's apps are used by over 3 billion people. Reliance mostly does business in India.
Bigger fortunes, bigger global footprint, bigger threats. Yet none of them gets government security for being rich. They hire their own guards.
In India, Ambani gets Z+ security from the state, in India and abroad.
मैकाले का मैं दो कारणों से प्रशंसक हूं.
सबसे बड़ी बात कि उन्होंने भारत में पहली बार इंडियन पीनल कोड (IPC) बनाया, जिससे तमाम जातियों और समुदायों (ब्रिटिश लोग भी) के लिए समान अपराध के लिए समान दंड का प्रावधान किया. इस वजह से न तो वे ब्रिटिशर्स में लोकप्रिय हुए, न उन जातियों के बीच, जिनके लिए IPC से पहले लागू दंड विधान अपेक्षाकृत नर्म थे. समान अपराध के लिए अलग अलग जातियों को अलग अलग दंड दिए जाने का मैकाले ने अंत कर दिया.
दूसरी बात यह कि उन्होंने गुरुकुल सिस्टम और मदरसा सिस्टम को तर्कों के आधार पर परास्त कर आधुनिक शिक्षा के लिए सरकारी बजट का प्रावधान किया. इस शिक्षा का माध्यम संस्कृत या फारसी की जगह इंग्लिश था.
वैसे मेरा निजी अनुभव है कि जो लोग मैकाले के विरोधी हैं, उनमें से कोई भी अपने बच्चे को गुरुकुल या मदरसे में पढ़ने भेजने के लिए तैयार नहीं है. आपका निजी अनुभव क्या है?