हर साल हजारों छात्र मोहाली की प्राइवेट Chandigarh University को चंडीगढ़ की सरकारी Punjab University समझ कर गलती से एडमिशन ले लेते हैं.
सरकार ने कंफ्यूजन दूर करने के बजाय विधानसभा में नाम का कानून पास कर दिया.
अब इस नाम से लखनऊ में भी यूनिवर्सिटी खुल चुकी है. चंडीगड़ यूनिवर्सिटी ने चंडीगढ़ ग्रुप ऑफ कॉलेज का ट्रेडमार्क भी हड़पने की कोशिश की, लेकिन न्यायालय में कामयाबी नही मिली.
छात्रों को कंफ्यूजन ना हो इसके लिए चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी का नाम बदलना चाहिए.
चंद्रशेखर आजाद ने जंतर मंतर पर पहुंचकर सोनम वांगचुक को तीसरे गांधी के रूप में Legitimacy प्रदान कर दी.
सोनम वांगचुक मंच पर Gandhi और Ambedkar दोनों की फ़ोटो रखकर आमरण अनशन कर रहे हैं.
Ambedkarism में आमरण अनशन कोई स्थान नही है. आमरण अनशन एक तरह से जोर जबर्दस्ती और तानाशाही का रूप है. Gandhi ने 6 दिन के आमरण अनशन में Ambedkar को ब्लैकमेल कर झुका दिया.
आमरण अनशन ने दलित समाज से अलग निर्वाचन क्षेत्र और दो मतदान का अधिकार छीन लिया.
जिसको सोनम वांगचुक को अपना बाप बनाना है बनाओ, जब तक पृथ्वी गोल गोल घूम रही है मैं कभी सवर्णों की Cultural Hegemony स्वीकार नही कर सकता.
Why Should I Support Him ?
SC-ST Act : Sonam Wangchuk Silent
CAA-NRC : Sonam Wangchuk Silent
Bhima Koregaon : Sonam Wangchuk Silent
SC-ST Atrocities : Sonam Wangchuk Silent
OBC Caste Census : Sonam Wangchuk Silent
On the NEET issue, There are opposition parties fighting the battle. I don't need Sonam Wangchuk to Validate or Lead it.
Someone who speaks selectively doesn't automatically become the face of opposition ?
भारत में जब मुस्लिम आए तब उन्हें कोई वैदिक धर्म नहीं मिला तो अनलॉगों ने बूत (बुद्ध) को मानने वालो को हिंदू कहना शुरू किया।
जब संविधान बना तब एक भी शंकराचार्य, ब्राह्मण या ब्राह्मणवादी सामने नहीं आया जो कहे की उसके धर्म का नाम वैदिक है सीधी सी बात है भारत में कभी वैदिक धर्म था ही नहीं।
डॉ बाबा साहेब अंबेडकर के सपनों का भारत बनाने की कोई बात नही करेगा.
अभिजीत दीपके बार बार बाबा साहेब अंबेडकर की फ़ोटो को दिखाता है.
मंच पर गांधी और बाबा साहेब की तस्वीर रखी है. सवाल है एक व्यक्ति गांधी और अंबेडकर दोनों को कैसे मानता सकता है.
गांधी के सपनों के भारत में मध्यकालीन ग्रामीण व्यवस्था है, जाति और वर्ण अव्यवस्था है. डॉ बाबा साहेब अंबेडकर का भारत का आधुनिक है, जहां विज्ञान और तकनीक है. समतामूलक समाज की स्थापना है.
कॉकरोच जनता पार्टी और फुनसुख वांगड़ू ने आखिरकार ASP प्रमुख चंद्रशेखर आजाद का इस्तेमाल कर ही लिया.
सुप्रीम कोर्ट ने SC-ST एक्ट को कमजोर कर दिया. यह बात 2018 की है.
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ SC-ST समाज ने 2 अप्रैल 2018 को भारत बंद का एलान किया.
अपने दम पर शांतिपूर्ण आंदोलन को सफल बनाया. इस आंदोलन में पुलिस की गोली से 14 युवा शहीद हुए.
SC-ST समाज के साथ कोई नही आया. लिबरल कुलीन समाज ने भारत बंद का विरोध किया गया. SC-ST समाज ने अपने आंदोलन के दम पर सरकार को झुका दिया. सरकार ने अमेंडमेंट कर सुप्रीम कोर्ट का फैसला पलट दिया.
SC-ST समाज को किसी को नायक बनाने की जरूरत नही है. मेरठ में दलितों के आंदोलन को दंगा कहकर बदनाम किया गया. एक आईपीएस अधिकारी ने पिटाई की, FIR दर्ज कर जेल में बंद कर दिया. इस मामले पर कोई अभिजीत दीपके, सौरव दास या सोनम वांगचुक ने मुंह नही खोला.
धीरेंद्र शास्त्री के भाई शालिग्राम गर्ग पर आरोप है जमीनी विवाद के चलते उसने मोतीलाल कुशवाहा पर गोली चला दी.
मोतीलाल कुशवाहा का आरोप है शालिग्राम उनकी भूमि पर कब्जा करना चाहता है. गोली लगने से मोतीलाल कुशवाहा घायल हो गए, उनका इलाज अस्पताल में चल रहा है.
अगर इसी घटना को रिवर्स कर दो : कथावाचक मोतीलाल कुशवाहा ने गरीब ब्राह्मण शालिग्राम गर्ग की भूमि पर कब्जा करने के लिए उसपर गोली चला दी ?
मनुवादी मीडिया के जनेऊधारी एंकर न्यूज़ रूम में छाती पीटने लगते. छाती पीट पीटकर मातम मनाने लगते. धर्म का चोला ओढ़कर कोई कानून से ऊपर नही हो सकता.
देखते हैं कानून जीतता है या धीरेंद्र शास्त्री. जीत धीरेंद्र शास्त्री की होगी. कारण कानून का डंडा बुलेट ट्रेन की तरह केवल गरीबों पर चलता है. अमीरों के मामले में कानून पैसेंजर ट्रेन की तरह फटर फटर कर चलता है.
Phunsukh Wangdu ने धारा 370 खत्म होने पर डिस्को डांस किया. मोदी जिंदाबाद के नारे लगाए.
Phunsukh Wangdu ने CAA और NRC के खिलाफ शांतिपूर्ण आंदोलन के समर्थन में एक शब्द नही बोला.
Phunsukh Wangdu ने दलित आदिवासी समाज पर होने वाले अत्याचार पर कभी मुंह नही खोला.
Phunsukh Wangdu ने भीमा कोरेगांव मामले में जेल में बंद सामाजिक कार्यकर्ताओं के बारे एक शब्द नही बोला.
Phunsukh Wangdu ने हमेशा प्रधानमंत्री मोदी जी का गुणगान किया. ये आदमी अचानक 2025 में लद्दाख आंदोलन के बाद बदल जाता है.
Phunsukh Wangdu तीसरा गांधी बनना चाहता है. 2011 में महाराष्ट्र से आया एक बुड्डा गांधी बनकर हमलोग को बनाकर कर चला गया. अब ये हम लोगों को बनाने के लिए तीसरा गांधी बन रहा है.
मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के राजनगर थाना क्षेत्र के ग्राम कोड़ा में किसान मोतीलाल कुशवाहा जी पर गोली चलाने की घटना अत्यंत गंभीर और चिंताजनक है।
पीड़ित किसान के अनुसार, कथावाचक धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के भाई शालिग्राम गर्ग और उसके साथियों द्वारा गरीब किसानों की जमीनें हथियाने की शिकायत को लेकर ज्ञापन देने पर उन पर गोली चलाई गई। यह घटना कानून-व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है
मुख्यमंत्री @DrMohanYadav51, शालिग्राम गर्ग का नाम पहले भी विवादों में सामने आ चुका है। कुछ समय पूर्व एक दलित परिवार की शादी में उत्पात मचाने और महिलाओं के साथ अभद्रता की घटना प्रमुख हैं। उस मामले की जांच अभी भी जारी है। यदि उस मामले में समय रहते प्रभावी कार्रवाई की गई होती, तो ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति पर अंकुश लगाया जा सकता था।
हम @MP_MyGov से मांग करते हैं कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और त्वरित जांच कराई जाए। जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाए, उसके विरुद्ध उसकी सामाजिक, धार्मिक या राजनीतिक पहचान से ऊपर उठकर कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
किसी भी किसान को भय, हिंसा या दबाव के बल पर अपनी जमीन छोड़ने के लिए विवश करना अस्वीकार्य है।
हम घायल किसान मोतीलाल कुशवाहा जी के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करते हैं और आशा करते हैं कि उन्हें न्याय अवश्य मिलेगा।
आमरण अनशन के बावजूद भीड़ नही जुट रही है. कॉकरोच जनता पार्टी को जन समर्थन नही मिल रहा है.
अभिजीत दीपके चाहता है ASP नेता चंद्रशेखर आजाद उनके आंदोलन में आकर जान फूंक दें.
मित्रों, आमरण अनशन लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है. आमरण अनशन एक तरह की ब्लैकमेलिंग पद्धति है, इस ब्लैकमेलिंग पद्धति से ही 1932 में SC-ST से कम्युनल अवार्ड छीन लिया गया.
मान्यवर कांशीराम ने हमें लोकतांत्रिक व्यवस्था में ब्लैकमेलिंग करना नही सिखाया है. उन्हें साईकल चलाकर ही बहुजन समाज को संगठित किया,
BAMCEF, DS-4 और BSP के माध्यम से राजनीतिक आंदोलन चलाया. रैलियां, यात्राएं और धरना प्रदर्शन कर BSP को देश की राष्ट्रीय बना दिया. यह सब बिना आमरण अनशन के हासिल किया.
बहुजन समाज को कॉकरोच जनता पार्टी से 100 किलोमीटर दूर रहना चाहिए.
आमिर खान ने लव जिहाद का आरोप लगाने वालों को जबरदस्त रेलाई की है.
डेक्कन क्रॉनिकल के मुताबिक आमिर खान ने कहा, उनकी तीसरी पत्नी हिन्दू नही, ईसाई है.
आमिर खान ने आगे कहा, उनका परिवार सभी को साथ लेकर चलता है. हमारे परिवार या घर में धर्म या जात पर भेदभाव नही होता है.
बिना सच जाने हिंदूवादी संगठनों के नेताओं ने आमिर खान को लव जिहाद का ब्रैंड अम्बेडकर घोषित कर दिया था. आमिर खान के जवाब के बाद तो इन नेताओं का Moye Moye हो गया होगा.
सोनम वांगचुक क्या राहुल गांधी और अखिलेश यादव से पूछकर आमरण अनशन पर बैठे थे.
सोनम वांगचुक को कांग्रेस पार्टी और अन्य विपक्षी दलों पर टीका टिप्पणी नही करनी चाहिए.
विपक्षी पार्टियां किसी की गुलाम नही हैं कि जो भी बीजेपी के खिलाफ आंदोलन करे उसे आंख बंदकर समर्थन दे दें.
वैसे भी सोनम वांगचुक का आंदोलन BJP या MODI जी के खिलाफ नही है, यह आदमी केवल धर्मेंद्र प्रधान के पीछे पड़ा है.
राहुल गांधी ने भारत जोड़ो यात्रा में अकेले पूरा भारत नाप दिया, तब ये सोनम वांगचुक कहां था. इसके लद्दाख का CM बनना है. वैसे भी भूख हड़ताल कर के ये आदमी मूर्ख लोगों का नेता बन चुका है.
अनाथालय से ऑस्ट्रेलिया टीम के कैप्टन तक की यात्रा!
"जन्म देने के बाद लड़की को फेंकने वाले माता-पिता अंदर ही अंदर रो रहे होंगे क्योंकि वे अपनी पैदा हुई बेटी से भी नहीं मिल सकते"
महाराष्ट्र के पुणे शहर में एक अनाथालय है, जिसे 'श्रीवास्तव अनाथालय' कहा जाता है। 13 अगस्त 1979 को शहर के एक अनजान कोने में एक लड़की का जन्म हुआ, माता-पिता को नहीं पता था कि यह एक मजबूरी है, कि उन्होंने सुबह-सुबह इस अनाथालय के पालने में अपने जिगर का एक टुकड़ा फेंक दिया, प्रबंधक अनाथालय की प्यारी सी बच्ची का नाम 'लैला' रखा गया।
उन दिनों हरेन और सू नाम का एक अमेरिकी जोड़ा भारत घूमने आया था। उनके परिवार में पहले से ही एक लड़की थी, भारत आने का उनका मकसद एक लड़के को गोद लेना था। वे एक सुन्दर लड़के की तलाश में इस आश्रम में आए। उन्हें एक लड़का नहीं मिला, लेकिन सू की नज़र लैला पर पड़ी और लड़की की चमकीली भूरी आँखों और मासूम चेहरे को देखकर उसे उससे प्यार हो गया।
कानूनी कार्रवाई करने के बाद, लड़की को गोद ले लिया गया, सू ने उसका नाम लैला से बदलकर 'लिज' कर लिया, वे वापस अमेरिका चले गए, लेकिन कुछ वर्षों के बाद वे सिडनी में स्थायी रूप से बस गए।
पिता ने बेटी को क्रिकेट खेलना सिखाया, घर के पार्क से शुरू होकर गली के लड़के के साथ खेलने तक का यह सफर चला। क्रिकेट के प्रति उसका जुनून अपार था, लेकिन उसने अपनी पढ़ाई भी पूरी की। उसे एक अच्छा मौका मिला, उसने अपनी पढ़ाई पूरी की और आगे बढ़ गई।
पहले वो बोलती थीं, फिर उनका बल्ला बोलने लगा और फिर उनके रिकॉर्ड पूरी दुनियां से बात करने लगे ।
1997- न्यू-साउथ वेल्स द्वारा पहला मैच
2001- ऑस्ट्रेलिया का पहला ODI
2003- ऑस्ट्रेलिया द्वारा पहला टेस्ट
2005- ऑस्ट्रेलिया द्वारा पहला टी20
आठ टेस्ट मैच, 416 रन, 23 विकेट
125 वनडे, 2728 रन, 146 विकेट
54 टी-20, 769 रन, 60 विकेट
वनडे में 1000 रन और 100 विकेट लेने वाली पूरे विश्व की पहली महिला क्रिकेटर बनी ।
जब आईसीसी की रैंकिंग प्रणाली शुरू हुई तो वह दुनिया की नंबर एक ऑलराउंडर थी।
ऑस्ट्रेलियाई कप्तान! बहुत खूब!
ODI और T-20 - चार विश्व कप में भाग लिया।
2013 में उनकी टीम ने क्रिकेट विश्व कप जीता, उसके अगले दिन इस खिलाड़ी ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया।
इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) ने लीजा स्टालगर को अपने हॉल ऑफ फेम में शामिल किया है।
लिज जब बल्ला लेकर मैदान पर उतरती थी तो दिग्गज बोलरों के पसीने छूट जाते थे, मैदान के चारों तरफ शॉट खेलने में उसे महारथ हांसिल थी। विपक्षी टीम अक्सर यही बोलती थी कि बिना लिज को आउट किये हम ऑस्ट्रेलिया को सपने में भी नही हरा सकते ।
महिला क्रिकेट की भगवान जब मैदान में खेल रही होती थी तो ऐसा लगता था कि इसे आउट करना असंभव है। अनाथालय से आई इस लड़की ने महिला क्रिकेट जगत में इतनी बड़ी लकीर खींच दी है की उससे बड़ी लकीर खींच पाना असम्भव नजर आता है।
अभी 2022 में इसी ऑस्ट्रेलिया की दिग्गज महिला क्रिकेटर लिसा स्टालेकर ने फिर से इतिहास रच दिया है। वह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर्स महासंघ (फिका) की पहली महिला अध्यक्ष बन गई हैं।
इसलिए कहा जाता है कि हर इंसान अपनी किस्मत लेकर आता है, माता-पिता ने लड़की को एक अनाथालय में छोड़ दिया, लेकिन नियति उसे पहले अमेरिका ले गई और फिर उसे ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम का कप्तान बना दिया और उसे दुनिया के महान क्रिकेटरों में से एक बना दिया।
#BetiBachao 🙏❤️
FIFA अध्यक्ष जियानी इनफेंटिनो ने संकेत दिया है 2030 में FIFA World Cup को 48 से बढ़ाकर 64 टीमों का करने पर विचार कीट जाएगा.
अगर यह प्रस्ताव मजदूर हुआ तो कई देशों की टीमों को विश्व कप खेलने का मौका मिलेगा. सबसे ज्यादा लाभ एशिया के देशों को मिल सकता है.
48 देशों के नियम में एशिया का फिलहाल कोटा 8 है, 64 होने पर कोटा 12 हो जाएगा. भारत भी World Cup में क्वालीफाई कर सकता है.
यह तभी संभव है जब सभी फुटबॉल खिलाड़ी जमकर मटन मछली और चिकन खाएंगे. यूरोपीन्स और अमेरिकन लोगों की कद काठी देखो, उनके सामने भारतीय तो.....
आमरण अनशन ब्लैकमेलिंग करने का हथियार है.
आमरण अनशन से 1932 में SC-ST समाज का अधिकार छीन लिया गया.
आमरण अनशन एक ही मतलब है, तुम मेरी बात मानो नही तो मैं मर जाउंगा ?
आमरण अनशन लोकतांत्रिक व्यवस्था में एक तरह की तानाशाही पद्धति है.
आमरण अनशन को क़ानून अपराध बनाना चाहिए.
क्या पता कल को कोई आमरण अनशन करे, बोलो OBC SC ST आरक्षण खत्म करो, या संविधान बदलो ?
गांधी जी के आमरण अनशन से ब्रिटिश हुकूमत नही डरी. केवल यहीं के लोग डर गए.
IIM की फी सामान्य वर्ग को उठाने की क्या जरूरत है सभी संस्थाओं में Sc ST OBC को जनसंख्या प्रतिशत अनुसार प्रतिनिधित्व दो, सारे संसाधनों को इक्वली बँटवारा करो जो आजादी के समय से ही पेंडिंग है।
हम अपना खर्चा ख़ुद उठायेंगे।
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सौरभ जोशी ने एथोनॉल पर अपना वीडियो डिलीट कर दिया, अब घर लोग सौरभ जोशी की आलोचना कर रहे हैं.
सौरभ जोशी का वीडियो वायरल हो गया, जिसमें उन्होंने कहा उनकी मर्सेडीज़ गाड़ी का माइलेज एथोनॉल के कारण 17 से गिरकर 5 पर आ गया है.
सौरभ जोशी का वीडियो शेयर कर खूब वाहवाही की गयी. अब यह वीडियो उन्होंने डिलीट कर दिया है. सौरभ जोशी को डरपोक बताया जा रहा है.
दोस्तों, यहां विपक्ष के किसी नेता की आलोचना कर दो तो भक्त गाली गलौज पर उतर आ आते हैं. सौरभ जोशी का मामला तो सीधे सरकार से लड़ने का है.
भारत का इको सिस्टम आलोचना हज़म करने लायक नही बना है. सिस्टम से लड़ने के लिए विपक्षी नेता हैं, कल को इन्हीं में से कोई CM या PM बनेंगे. सौरभ जोशी लड़ेगा तो FIR और कोर्ट कचहरी के अलावा कुछ नही मिलेगा. सोशल मीडिया पर भी कुछ लोग घर बैठे दूसरों को भगत सिंह बनाना चाहते हैं.
जंतर मंतर पर सोनम वांगचुक को भूख हड़ताल करते हुए 15 दिन हो गए हैं.
उनकी मांगों पर अभी तक सरकार टस से मस नही हुई है.
भूख हड़ताल या आमरण अनशन एक प्रकार की ब्लैकमेलिंग है. 1932 में गांधी जी ने आमरण अनशन कर डॉ आंबेडकर को ब्लैकमेल किया.
डॉ आंबेडकर ने मजबूर होकर पूना पैक्ट पर साइन किया. इस तरह SC-ST समाज को जबर्दस्ती आरक्षण दिया गया. अंग्रेजों ने तो अलग निर्वाचन क्षेत्र और डबल वोट का अधिकार दिया था.
डॉ आंबेडकर ने गांधी ने आमरण अनशन को राजनीतिक दबाव माना. रजनीश ओशो ने तो आमरण अनशन को मोरल ब्लैकमेलिंग और psychological Violence कहा. ये कैसा आंदोलन है, तुम मेरी बात मानो नही तो मैं मर जाऊंगा ?
खुद को 100% सही मानकर, भूख हड़ताल के सहारे ब्लैकमेलिंग कर जबर्दस्ती बात मनवाना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है.