Nothing is impossible.
Limit sirf wahi hoti hai jo hum apni soch mein bana lete hain.
Agar iraade strong hón aur vision clear ho,
toh har mushkil sirf ek step ban jaati hai success ki taraf.
Believe in yourself. Rise. Shine
#Motivation#BelieveInYourself#PositiveVibes
क्या दिल्ली में विधानसभा ख़त्म कर जनता द्वार चुनी हुई सरकार की व्यवस्था समाप्त कर दी जानी चाहिए?
हम तीन इंसानी ज़िंदगियों को किसी आपदा की वज़ह से नहीं बल्कि एक अव्यवस्था की वज़ह से खो चुके हैं..
इस अव्यवस्था के एक तरफ़ है दिल्ली सरकार अर्थात उपराज्यपाल जिनके पास पॉवर है पर जवाबदेही नहीं और दूसरी तरफ़ जनता द्वारा चुनी हुई सरकार जिसके पास ज़िम्मेदारी है पर पॉवर नहीं।
और अब आलम ये है कि जहाँ एक तरफ़ घोर बेशर्मी है वहीं दूसरी तरफ़ कोरी लाचारी।
आख़िर कब तक दिल्ली वाले इतनी बेशर्मी और लाचारी के बीच रहेंगे?
लिहाज़ा सुप्रीम कोर्ट से विनम्र् निवेदन हैं कि वो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) विधेयक, 2023 को चुनौती देने वाली याचिका को ठंडे बस्ते से निकालकर सुनवाई कर उस पर जल्द से जल्द फ़ैसला दे।
अगर सुप्रीम कोर्ट, संविधान द्वारा चिन्हित तीन विषयों को छोड़कर, दिल्ली की विधानसभा, दिल्ली के विधायक, दिल्ली के मुख्यमंत्री और मंत्री को वही अधिकार नहीं बहाल करती है जो देश के अन्य भाग में इसी नाम से पुकारे जाने वाले लोगों को प्राप्त है, तो वर्तमान व्यवस्था को हटाकर 1991 के पहले वाली व्यवस्था ही लागू कर दी जानी चाहिए।
जानकारी के लिए बता दें की 1991 के पहले दिल्ली सिर्फ़ केंद्र शासित प्रदेश थी। यहाँ केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त उपराज्यपाल, प्रशासक थे।
उस वक़्त देश के ज़िम्मेदार लोगों को लगा कि दिल्ली में तब रह रहे लगभग एक करोड़ लोगों के द्वारा उनके प्रति ज़िम्मेदार और जवाबदेह सरकार होनी चाहिए।
लिहाज़ा, संविधान संशोधन के द्वारा तीन विषयों- पुलिस, लॉ एंड ऑर्डर और लैंड, को छोड़कर सभी विषयों पर जनता द्वारा चुनी गईं सरकार को दिल्ली की सत्ता चलाने की बागडोर सौंपी गई।
अब त्रासदी ये है कि, 1991 में हुए इस बदलाव के बारे में किसी ने उपराज्यपाल महोदय को बताया ही नहीं। लिहाज़ा वो हमेशा किसी भी मामले में जब तब अपनी टांग अड़ाते रहे।
पर 2015 से हालात और बिगड़ गए।
देश में प्राप्त विशाल जनादेश के नशे में मदहोश केंद्र सरकार को ये क़तई मंज़ूर न था कि उनकी नाक के नीचे एक ऐसी सरकार काम करे जिसे देश में तो नहीं पर दिल्ली में उनसे भी विशाल जनादेश मिला हो।
लिहाज़ा, मात्र एक आदेश के ज़रिये 2015 में केंद्र सरकार ने दिल्ली के सर्विसेज़ विभाग, जोकि अधिकारियों और कर्मचारियों को कंट्रोल करता है, उसे अपने कंट्रोल में ले लिया।
आठ साल की लंबी क़ानूनी लड़ाई के बाद मई 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के आदेश को निरस्त करते हुए फिर से सर्विसेज़ को दिल्ली की चुनी हुई सरकार के हवाले कर दिया।
पर मात्र कुछ ही दिनों में केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) विधेयक, 2023 के द्वारा सुप्रीम कोर्ट के डिसिजन को पलटते हुए सर्विसेज़ फिर से अपने क़ब्ज़े में ले लिया।
अब मुद्दा बस इतना सा है कि जब संविधान ने सिर्फ़ तीन विषयों को दिल्ली की चुनी हुई सरकार के दायरे से बाहर रखा है तो बिना संविधान संशोधन के चौथा विषय कैसे दिल्ली सरकार से छीना गया है?
और बात सिर्फ़ अधिकारों की नहीं है।
अगर प्रैक्टिकली देखें तो आख़िर बिना अधिकारियों और कर्मचारियों पर नियंत्रण के कोई कैसे प्रशासन चला सकता है?
जवाबदेही और ज़िम्मेदारी में स्पष्टता न होने का ताज़ा एग्जाम्पल आप इन तीन छात्रों की मौत के मामले में ही देखिए।
हुक्मरानों ने उस रास्ते से अपनी कार ड्राइव करने वाले व्यक्ति को भी मौत का ज़िम्मेदार मानते हुए गिरफ़्तार कर लिया।
पर जो वाक़ई ज़िम्मेदार हैं जैसे दिल्ली नगर निगम, दिल्ली जल बोर्ड और लोकल थाने के अफ़सर, उनकी कोई जवाबदेही ही नहीं है। इन लोगों के ख़िलाफ़ तो शायद हत्या का मुक़दमा ही दर्ज न होगा।
तो इसलिए अब ये तय हो जाना चाहिए कि दिल्ली में जनता की सरकार होगी या 1991 के पहले कि उपराज्यपाल वाली सरकार?
ये दो नावों का सफ़र ठीक नहीं है, ज़िम्मेदारी और जवाबदेही एक साथ, एक जगह होनी चाहिए।
इंसानों की ज़िंदगियों का सवाल है…
Celebrations at the Aam Aadmi Party Chandigarh Office after winning the Jalandhar bye-election. Finance Minister Harpal Cheema said, “In 2027, we will make a century and form the government again. From 92 MLAs, our party will get 100 MLAs. Cabinet Minister Harbhajan ETO said, “We will win another four bye-elections as well. @HarpalCheemaMLA@AAPHarbhajan@Laljitbhullar@NeelGarg2@bubbybadal
मोदी सरकार की गुंडागर्दी देखिए अभी ट्रायल कोर्ट का आदेश ही नही आया आदेश की कॉपी भी नही मिली तो मोदी की ED हाईकोर्ट में किस आदेश को चुनौती देने पहुँच गई?
क्या हो रहा है इस देश में?
न्यायव्यवस्था का मज़ाक़ क्यों बना रहे हो मोदी जी पूरा देश आपको देख रहा है?
Truth always wins 💯
@BJP4India's conspiracies have FAILED today and @ArvindKejriwal Ji has been granted bail
Sharing the video of celebrations at AAP Punjab office in Chandigarh👇
#arvind_kejriwal
#WATCH | Punjab: AAP workers and supporters celebrated in Chandigarh after AAP National convener and Delhi CM Arvind Kejriwal received bail in Excise Policy case
कंगना जी, देश के लिए मर मिटने को तैयार पंजाब के सपूतों के लिए आपकी अभद्र भाषा निंदनीय तो है ही, परंतु सोचने वाली बात यह है कि समाज को बांटने वाली इस सोच को देश की जनता ने अभी-अभी नकारा है, फिर भी आपको सबक नहीं मिला?
प्रधानमंत्री जी खुलकर दिल्ली की महिलाओं को मिल रही मुफ़्त बस यात्रा का विरोध कर रहे हैं। पूरे देश की महिलाएँ चाहती हैं कि फ़्री बस सेवा तो देश भर में लागू होनी चाहिए, मगर मोदी जी तो इसे ख़त्म करना चाहते हैं।
अगर देश के प्रधानमंत्री और मंत्रियों को फ़्री हवाई सफ़र मिल सकता है तो देश की महिलाओं को भी फ़्री बस सफ़र मिल सकता है।