जिस व्यक्ति ने भारत के लोकतंत्र और जनता की उम्मीदों के साथ खिलवाड़ किया, उस पर राजद्रोह का मुकदमा चलना चाहिए और उसे सलाखों के पीछे होना चाहिए।
#ArrestGyaneshKumar
इस देश में होता वही है जो भाजपा चाहती हैं
आज मन थोड़ा मायूस हैं
धनबल बाहुबल और सत्ता के प्रभाव के सामने एक गरीब किसान का बेटा एक मजदूर का बेटा चुनाव हार गया. 💔😥
विजय शंकर मीणा दिल्ली विश्वविद्यालय
#DUSU#NSUI
सोशल मीडिया पर एक चिरकुट आदरणीय बहन मायावती जी पर आरोप लगा रहा है कि
CM रहते हुए बहनजी IAS IPS और अन्य अधिकारियों को सस्पेंड करती थीं. सस्पेंड करना उनकी आदत में है इस कारण पार्टी से सबको निकाल रही हैं.
आदरणीय बहन मायावती जी उन्ही आईपीएस आईएएस अधिकारियों को सस्पेंड करती थीं जो अपना काम ठीक से नही करते थे.
उत्तरप्रदेश की ब्यूरोक्रेसी में बहनजी का खौफ रहता है, इसी कारण बहनजी के शासन में प्रदेश की कानून व्यवस्था चुस्त दुरुस्त थी.
आदरणीय बहन मायावती जी ने जिस बाहुबली विधायक पर POTA लगाकर जेल में बंद कराया था. उसी विधायक को बाद मुलायम सिंह यादव ने रिहा कर के जेल मंत्री बनाया.
अखिलेश यादव जब मुख्यमंत्री बने तो उसी बाहुबली विधायक के साथ क्रिकेट खेलकर उसका महिमा मंडन किया. जब बारी राज्यसभा में वोट करने की आयी तब उस बाहुबली विधायक ने अपनी जाति के मुख्यमंत्री की बात मानकर बीजेपी के उम्मीदवार को जीताया.
आकाश आनंद के बाद अब बहन जी ने ईशान आनंद को भी पार्टी से निकाल दिया। यह एक मात्र पार्टी है जहां ज्वाइनिंग से ज्यादा निष्कर्षण होता है। आज मान्यवर कांशीराम जी जीवित होते तो बहन जी उन्हें भी पार्टी से निकाल देती।
तत्काल निलंबन हो, बर्ख़ास्तगी हो और ऐसा दंड मिले कि कोई दूसरा अधिकारी फिर कभी ऐसी हिम्मत और दुस्साहस न कर सके।
‘नारी वंदन’ का ढोंग करनेवाली भाजपा सरकार है भी या नहीं।
और कुछ नहीं कहना है।
"मिश्रा नहीं, आकाश चाहिए।"
1) आकाश आनंद को रास्ते से हटाने का सबसे बड़ा फायदा किसे मिला? सतीश मिश्रा को।
2) मीडिया की जिम्मेदारी कौन देखेगा? सतीश मिश्रा।
3) बहन जी के बाद स्टार प्रचारक कौन बनेगा? सतीश मिश्रा।
4) पूरे प्रदेश के लोगों से कौन मिलेगा? सतीश मिश्रा।
5) आकाश आनंद की जगह कौन लेगा? कपिल मिश्रा।
एक तरफ सतीश मिश्रा एंड कंपनी बहन मायावती जी को गुमराह करके आकाश आनंद को साइडलाइन कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सतीश मिश्रा का बेटा, बेटी और दामाद पूरे लखनऊ में पार्टी को प्राइवेट कंपनी की तरह चला रहे हैं।
बसपा में सतीश चंद्र मिश्रा वर्षों से बहन जी के बाद सबसे प्रभावशाली लोगों में रहे हैं। लेकिन आज सवाल यह है कि पार्टी का विस्तार कहां हो रहा है? नए कार्यकर्ता कहां जुड़ रहे हैं? युवा नेतृत्व कहां तैयार हो रहा है? और हां, सबसे महत्वपूर्ण सवाल.. बहन जी और जमीनी बहुजन कार्यकर्ताओं के बीच दूरी क्यों बढ़ती जा रही है? इस खेल में सतीश मिश्रा अकेले नहीं हैं, लेकिन इस पूरी कांस्पीरेसी के आलाकमान वही हैं।
बसपा के लिए मीडिया मैनेज करने के नाम पर उन्होंने सिर्फ लखनऊ के अपने सजातीय सवर्ण यूट्यूबर्स को पैसा परोसा है, जो बस उन्ही की ब्रांडिंग करते रहते हैं, जबकि पार्टी और मूवमेंट को समर्पित दलित-बहुजन यूट्यूबर्स को कोई भाव नहीं देते। उन्हें दुत्कारकर भगा दिया जाता है।
आकाश आनंद के सक्रिय राजनीति में आने के बाद पहली बार बड़ी संख्या में युवाओं के बीच बसपा की चर्चा और उम्मीद दिखाई देने लगी थी। वह पूरे देश में घूम रहे थे, युवाओं से संवाद कर रहे थे और पार्टी को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे थे। ऐसे युवा नेतृत्व को मजबूत करने के बजाय अगर उन्हें ही बार-बार अपमानित करके बाहर किया जाता है, तो इसका सबसे बड़ा फायदा किसे मिलेगा?
एक तरफ सतीश मिश्रा पार्टी को पारिवारिक कलह में उलझाने के आरोपों से घिरे हैं, दूसरी तरफ उनका पूरा परिवार मेवा-मिश्री चाट रहा है। उनका क्या है, बसपा पार्टी तो उनके लिए पूंजी देने वाली फैक्ट्री है। जब तक यहां से पूंजी लूट सकते हैं, लूट लें। उसके बाद अपने बेटे और दामाद को तो लाइन में खड़ा किए ही हैं। लेकिन अगर बसपा खत्म हुई, तो उन करोड़ों बहुजनों का राजनीतिक भविष्य रसातल में चला जाएगा, जिन्होंने अपने वोट, समर्थन और संघर्षों से बसपा को यहां तक पहुंचाया है और आज भी उसके लिए दिन-रात परिश्रम कर रहे हैं।
बहुजन आंदोलन किसी एक पदाधिकारी या नेता की जागीर नहीं है। यह करोड़ों लोगों के संघर्ष और उम्मीदों से बना आंदोलन है। इसलिए फैसला भी किसी की साजिश के प्रभाव में नहीं, बल्कि बहुजन आंदोलन के भविष्य को ध्यान में रखकर होना चाहिए। पार्टी के करोड़ों समर्थकों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ अच्छी बात नहीं है।
दिमाग लगाइए और सोचिए कि आखिर आकाश को हटाने से वास्तव में फायदा किसे हो रहा है? क्योंकि बहुजन समाज को सत्ता के गलियारों में अपना मजबूत, युवा और जमीन से जुड़ा नेतृत्व चाहिए। अतः हमारा संदेश साफ है कि हमें सतीश मिश्रा नहीं, आकाश आनंद चाहिए।
@Mayawati@AnandAkash_BSP
आकाश आनंद के साथ आज यही हुआ, पीठ में खंजर घुसा दिया गया।
वादे मुताबिक़ अशोक सिद्धार्थ ने सन्यास ले लिया तो आकाश को पार्टी से बाहर कर दिया!
साज़िश रचने वाले आपका सम्मान नहीं करते ऐसे ही अपशब्द बोलते हैं।
भल्लालों ने व्यूह रचकर @AnandAkash_BSP को निगल लिया।
अशोक सिद्धार्थ का गुनाह था कि उन्होंने समर राज की एक पोस्ट को RT कर दिया। अतः राजनीति से संन्यास लो।
आकाश आनंद का गुनाह है कि उन्होंने बहन जी की एक पोस्ट को RT नहीं किया। अतः पार्टी से बाहर हो जाओ।
लेकिन बहन जी, सतीश मिश्रा पर कार्रवाई कब होगी, जो न तो आपके हर पोस्ट को रीट्वीट करते हैं और न ही पार्टी को मजबूत करने के लिए कोई काम करते हैं। ऊपर से सतीश मिश्रा ने BSP में अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके अपने बेटे, बेटियों और दामाद... सबको सेटल कर दिया है।
बहन जी उन धूर्त पदाधिकारियों की बिल्कुल समीक्षा नहीं कर रही हैं, जो कई-कई राज्यों के प्रभारी बनकर डमी कैंडिडेट खड़ा करने अथवा टिकट दिलाने के नाम पर करोड़ों का धन लुटाने और पार्टी को रसातल में धकेलने के काम किए हैं।
आखिर सतीश मिश्रा से सवाल कब होगा, जो लंबे समय से पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव हैं, कई बार पार्टी के सांसद भी रहे हैं और विगत कई वर्षों से मीडिया की जिम्मेदारी भी संभालते हैं? लेकिन पार्टी का नैरेटिव गढ़ने के नाम पर उन्होंने बहन जी को केवल गुमराह किया है कि इस बार पूरा ब्राह्मण आपके साथ खड़ा है लेकिन हकीकत इससे उलट है।सच कहूं तो उनके कहने से कोई भी ब्राह्मण बसपा से नहीं जुड़ता है। साथ ही, आए दिन पार्टी के खिलाफ फेक न्यूज और झूठा नैरेटिव चलता रहा, लेकिन न तो उन पर कोई कार्रवाई हुई और न ही मीडिया IT सेल खड़ा करने का कोई प्रयास दिखाई दिया। हाँ, लखनऊ के अपने सजातीय YouTubers पर अकूत पैसा लुटाकर अपना माहौल बनवा लेते हैं। दलित-बहुजन YouTubers को तो कोई पूछता भी नहीं।
ऊपर से आगामी यूपी विधानसभा का चुनाव सिर पर है। ऐसे में बहन जी को इन जैसे पदाधिकारियों एवं प्रभारियों से सवाल करने की बजाय सारी चिंता इस बात की है कि ट्विटर पर उन्हें आकाश आनंद ने रीट्वीट क्यों नहीं किया। ऊपर से बहन जी ने आदेश दिया कि बसपा के सभी पदाधिकारी आकाश आनंद को अनफॉलो कर दें। इतने बड़े समाज और इतने बड़े राष्ट्र की इतनी बड़ी नेता का ध्यान इस बात पर हो कि उन्हें किसी ने रीट्वीट क्यों नहीं किया... यह सोचकर भी पीड़ा हो रही है।
आपने कहा कि अगर अशोक सिद्धार्थ राजनीति से संन्यास ले लें, तो आकाश आनंद की वापसी का रास्ता खुल जाएगा। जबकि ऐसी मांग भी अपने आप में अनैतिक और असंवेदनशील है, फिर भी अशोक सिद्धार्थ ने समाजहित को ध्यान में रखते हुए राजनीति से संन्यास ले लिया और कहा कि बहन जी, आपके लिए तो जान भी हाजिर है।
अब अपने वादे पर कायम रहने की बजाय आप कह रही हैं कि अशोक सिद्धार्थ ने तुरंत संन्यास क्यों नहीं लिया? संन्यास लेने में कुछ घंटे की देरी क्यों हुई? हद है। भला इस बात का भी कोई तुक है? संवेदना और सदमा भी कोई चीज होती है।
माननीया बहन जी को चाहिए कि जो लोग उन्हें गुमराह कर रहे हैं और जिनकी वजह से किसी के राजनीतिक जीवन का फैसला कुछ घंटों की देरी और सोशल मीडिया पर रीट्वीट करने या न करने से तय होने लगे, तो यह गंभीर चिंता का विषय है।
इसलिए समय आ गया है कि सतीश मिश्रा समेत तमाम राष्ट्रीय महासचिवों, प्रभारियों और वरिष्ठ पदाधिकारियों के कामकाज की निष्पक्ष समीक्षा हो। पार्टी में जवाबदेही तय हो और यह देखा जाए कि कौन वास्तव में BSP को मजबूत करने के लिए काम कर रहा है और कौन केवल पद और प्रभाव का लाभ उठा रहा है। क्योंकि चुनाव सोशल मीडिया के रीट्वीट से नहीं, बल्कि संगठन, कार्यकर्ताओं, रणनीति और जमीन पर किए गए काम से लड़ा जाता है।
- सूरज कुमार बौद्ध
@Mayawati@AnandAkash_BSP
परम आदरणीय बहन जी सादर चरण स्पर्श!
माननीया बहन जी आपको अवगत कराना है कि, मेरे लिए आपका आदेश दुनिया की किसी भी चीज़ से बढ़ कर है। आपके आदेश के आगे मेरे रिश्ते नाते, परिवार सभी बेहद छोटे हैं। आपके मार्गदर्शन में, मैं बीते पैंतीस वर्षों से बीएसपी और मान्यवार साहेब श्री कांशीराम जी और बाबा साहेब डॉ भीमराव अंबेडकर के मिशन के लिए समर्पित रहा हूं। आपने आज तक जो भी जिम्मेदारी दी है उसे अपने पूरे सामर्थ्य के साथ निभाने की कोशिश की है। आप मेरी राजनैतिक गुरू हैं, मेरी बड़ी बहन हैं, आपने मुझ जैसे अदने से व्यक्ति को क्या कुछ नहीं दिया, आपकी वजह से ही मैं विधान परिषद और राज्य सभा तक का सदस्य रहा हूँ । आपने मुझे इस लायक समझा कि आपने मुझ जैसे मामूली से कार्यकर्ता को अपने परिवार का सदस्य बनाया। ये आपका ऋण है, जो मैं इस जीवन में चुका भी नहीं सकता।
परमपूज्य आदरणीय बहन जी, मेरे आराध्य तथागत भगवान गौतम बुद्ध और मेरे राजनीतिक आदर्श मान्यवर साहेब श्री कांशीराम जी की क़सम खाता हूँ , कि मैंने कभी भी पार्टी के हित के खिलाफ कोई काम नहीं किया और आपके खिलाफ कुछ भी करने का तो मैं सपने में भी सोच नहीं सकता हूं। मेरा और मेरे परिवार का ये पूरा जीवन आपका ऋणी है। आदरणीय बहन जी, आपकी एक-एक नसीहत और आदेश मेरे लिए अंतिम शब्द हैं।
आदरणीय बहन जी, माननीय आकाश जी को सलाह देना तो दूर बीते कई महीनों से मेरी उनसे मुलाकात भी कुछ एक अवसर पर तब हुई जब उनके कार्यक्रम उन राज्यों में लगे जिनकी जिम्मेदारी आपने मुझे दी हुई थी।
मान० बहन जी हमारी पार्टी के ही कुछ साथी मुझे आपसे मिले सम्मान के कारण मुझ पर ये आरोप लगाते हैं कि मैं पार्टी पर कब्जा करना चाहता हूं, मैं माननीय आकाश आनंद जी को गुमराह करने की कोशिश कर रहा हूं...इसमें लेशमात्र भी सच्चायी नहीं है! आदरणीय बहन जी मैं आपसे विनम्र निवेदन के साथ कहा रहा हूं कि ये मेरे राजनैतिक विरोधियों की साजिश है ,जो पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त हैं, जिसकी सच्चाई एक न एक दिन आपके सामने ज़रूर आ जाएगी।
आदरणीय बहन जी, मेरी आपसे हाथ जोड़ कर विनती है कि मेरे सन्यास लेने को आप आकाश जी की वापसी से मत जोड़िए, माननीय आकाश आनंद जी मेरे दामाद से पहले आपके भतीजे हैं, और आदरणीय आनंद भाईसाहब के बेटे हैं। उनके अंदर आपका खून बहता है, उन्होने जीवन के दो दशक आपकी छत्र छाया और देख-रेख में बिताए हैं, मेरे जैसा मामूली सा कार्यकर्ता भला उनको क्या ही गुमराह कर पाएगा। उनका अच्छा-बुरा आप किसी और से ज्यादा बेहतर समझती हैं, उनको वापस जिम्मेदारी देना या ना देना ये आपका फैसला है !🙏 इसे मेरे सन्यास लेने से जोड़ कर आप मुझ जैसे मामूली कार्यकर्ता को उसकी हैसियत से ज्यादा महत्त्व दे रही हैं।
आदरणीय बहन जी, आप खुद में त्याग और दया की मूर्ती हैं, जब बात समाज के हित की आई तो आपने मुख्य मंत्री की कुर्सी और राज्यसभा के सदस्य पद को भी ठोकर मार दी, आदरणीय बहन जी, आप हमारी मार्गदर्शक ही नही हमारी आदर्श भी हैं, और अगर आज आपको लगता है कि मेरे राजनीतिक और सामाजिक जीवन में रहने से हमारे संतो , गुरुओं और महापुर्षों के बनाए हुए बहुजन मिशन को नुकसान पहुंच रहा है तो मैं अभी इसी वक्त राजनैतिक और सामाजिक जीवन से सन्यास ले रहा हूं। आदरणीय बहन जी, मेरा ये जीवन आपका ऋणी है, ऐसे में सन्यास तो बहुत छोटी चीज है आपके लिए अगर मुझे कभी अपनी जान भी देनी पड़े तो वो भी मेरे लिए फक्र की बात होगी।
ससम्मान , जय भीम!! जय भारत!!!
जय बहुजन समाज!
आपका कार्य कर्ता
अशोक सिद्धार्थ
नोट- देरी के लिए क्षमा प्रार्थी!!!
BSP अकेले लड़ेगी तो 1-2सीट
छोटे दलों से गठबंधन तो 10+सीट
कांग्रेस से गठबंधन तो 30+सीट
मीडिया नैरेटिव प्रबंधन तो 60+सीट
सपा से गठबंधन तो 100+सीट
BJP से गठबंधन तो 100+सीट
चापलूसों सा प्रिडिक्शन तो 150+सीट
असंभव, ड्रीम नंबर 200+सीट
@Mayawati@AnandAkash_BSP
जनपद बलिया के रसड़ा विधान सभा क्षेत्र से माननीय विधायक श्री उमाशंकर सिंह जी का निधन अत्यंत दु:खद है। विनम्र श्रद्धांजलि।
प्रभु श्री राम से प्रार्थना है कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्री चरणों में स्थान तथा शोकाकुल परिजनों को यह अथाह दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करें।
ॐ शांति।
बलिया की रसड़ा विधानसभा से बसपा के विधायक श्री उमाशंकर सिंह जी का निधन, अत्यंत दुखद !
ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे।
शोक संतप्त परिजनों के प्रति गहरी संवेदनाएं।
भावभीनी श्रद्धांजलि !
बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी.) के कर्मठ, ईमानदार व पूरी तरह से वफादार बलिया की रसड़ा सीट से लोकप्रिय विधायक श्री उमाशंकर सिंह की आज शाम लम्बी बीमारी की वजह से इलाज के दौरान देहान्त हो जाने की ख़बर अति-दुखद। उनके परिवार तथा उनके सभी चाहने वालों के प्रति मेरी गहरी शोक संवेदना। पार्टी के प्रति उनकी निष्ठा की जितनी भी तारीफ की जाये वह कम है। उनका पूरा परिवार बी.एस.पी. परिवार की तरह है तथा उनके परिवार के सभी लोग मुझे बड़ी बहन की तरह ही पूरा आदर-सम्मान देते हैं।
उनके पुत्र से लगातार सम्पर्क बने रहने के दौरान ही आज शाम उनके देहान्त की ख़बर उनके पुत्र से ही मिली। इस दुख की घड़ी में मैं व पूरी पार्टी उनके व उनके परिवार के साथ है तथा उन्हें किसी भी प्रकार से हिम्मत नहीं हारना है बल्कि इस परिस्थिति का सामना करते हुये आगे बढ़ना है। कुदरत उन सभी लोगों को इस दुख को सहन करने की शक्ति दे।