कल रात मैं सो नहीं पाया। विचारों के उधेरबुन ने मुझे उलझाए रखा। कुछ पन्ने उपन्यास के पलटे और पुनः रख दिया। फिर कुछ लिखने बैठा तो कोई शब्द नहीं जोड़ पाया। सोचा किसी को टेलीफोन करूँ, पर किसे? मैं सहसा सहम गया और फोन बिस्तर पर रख दिया। मेरे पास ऐसा एक भी कांटेक्ट नही जिसे अकेलापन में याद कर सकूँ। जिसे अपने सच को, अपने मन मे पल रहे कठिनाईयों पर चर्चा कर सकूँ। हालाँकि कुछ कॉन्टेक्ट हैं जिनसे मैं कुछ सतही बातें कर सकता हूँ परंतु दिल के उलझनों को मुझे अपने तक ही सीमित रखना पड़ता है।
आँखों के सामने समय ढल रहा है, जवानी ढल रही है, किस्मत बुरे होते चले जा रहे हैं, मैं अवसादों के गोते लगा रहा हूँ। ऐसा नहीं है कि मैं उठना नहीं चाहता परन्तु मस्तिष्क में कुछ ऐसा जकड़न फैल चुका है जो मुझे बांध रखा है। मेरे भीतर ऊर्जा है और मैं कदम उठा सकता हूँ लेकिन शायद हौसले बुलंद नहीं हैं या इरादे कमजोर हो गए हैं क्योंकि हर साल दर साल मैं बेहतर होने के बजाए और भयावह एवम असुरक्षित होता जा रहा हूँ।
मेरी नज़र में मेरी भावनाओ का कोई मोल नहीं रहा। मैं बिल्कुल शिला बन चुका हूं एवम मुझे एहसास होने बन्द हो चुके हैं। मैं पिछले वर्ष तक संघर्ष के दौर में था परन्तु अब मैं ये दौर हार चुका हूं। मुझे पता है मैं यदि चाहू तो सब कुछ वश में कर सकता हूँ परन्तु स्वयं को भरम में रखने से बेहतर है, अपने आप को आइना दिखाओ एवम व्यावहारिक तौर पर जीवन के साथ उचित सलूक करो। मत जागो। सोये रहो। कुछ भी अच्छा नहीं होगा और पछतावे के आग में झुलसते रहोगे। स्वयं से डर लगने चाहिए कि कैसी जिंदगी का मालिक हो तुम। बदलाव मत लाओ, खुद को बदलो। मैं अब नष्ट हो गया, तुम मत होना।
मैं जीवन के उसे पड़ाव पर हूं यहां से अगर मेरी सरकारी नौकरी नहीं लगी तो मेरी जिंदगी बेकार हो जाएगी।। मेरे माता-पिता की सारी उम्मीदें, मेरे सारे सपने मिट्टी में मिल जाएंगे। मध्यम वर्ग के लड़कों की जिंदगी बड़ा ही कष्टकारी होता है। उन्हें हर छोटी से छोटी चीजों के लिए बड़ा मसक्त करना पड़ता है। हम मध्यम वर्ग के लड़कों में सबसे बड़ी क्वालिटी यह होती है कि हम खुद से ज्यादा अपने माता-पिता के बारे में, अपनों के बारे में ज्यादा सोचते हैं।
एक टक पंखे को निहार रहा हूं, सोच रहा हूं कि कैसे एक पल में जीवन उथल पुथल हो गया दोस्त यार प्यार सब छोड़ गए सब बदल गए, महीनों हो गए ना किसी से कोई बातचीत, ना किसी के साथ खुल के हंसना, ना ही किसी के साथ रोना, समझ ही नहीं आ रहा है कि चल क्या रहा है ज़िंदगी में बस ज़िंदा हैं.....
सितंबर महीना आ चुका है। इस वर्ष के आठ महत्वपूर्ण महीने बीत चुके हैं। देखो दोस्त वक्त ऐसे ही तेज़ी से निकलता रहेगा और तुम बिस्तर पर लेटे लेटे सबकुछ गँवा दोगे। शरीर और मन को एक सीध में लाना होगा और कम्फर्ट ज़ोन से बाहर निकलना होगा वरना जो हस्र होगा भविष्य में इसकी कभी भरपाई नही हो पाएगी। हम केवल बदलता हुआ दिन, सप्ताह, महीना, वर्ष देखते रहते हैं और कुछ कर नही पाते। क्योंकि हमें खुद पर भरोसा नहीं रहा, हमें उस ब्रह्मांड के मालिक से कोई उम्मीद नहीं रही। हमने कुछ वर्ष बिना कुछ सोचे और किये बीता दिए जिसका परिणाम यह निकला कि आज हमें खुद की काबिलियत पर भी शक है। हम जीवन मे बड़ा से बड़ा करना चाहते हैं, हम कुछ बड़ा प्राप्त करना चाहते हैं पंरतु केवल चाहते हैं...उसके लिए हम शत प्रतिशत दे नहीं पाते और जब उम्र निकल चुकी होती है, समाज, परिवार, दुनिया, रिश्तेदारों के दवाब को झेल नहीं पाते और फिर जन्म लेता है अवसाद, चुभन, पछतावा और न जाने कितनी तकलीफें जो कोई समझ ही नहीं सकता। आज मौका है, दस्तूर है, मन को पकड़ो और जीवन का जो भी लक्ष्य हो उसके प्रति समर्पित हो जाओ। शुरुआत धीमी होगी कोई बात नहीं। धीमी शुरुआत बिस्तर पर पड़े रहने और फोन चलाने से कहीं बेहतर होती है। हमे प्लान बनाना है, साप्ताहिक, मासिक, वार्षिक और उस को पूरा करने में ही खुद को झोंक देना ह। देखो ऐसा है आपको मस्ती करते देख लोग खुश होते हैं क्योंकि उन्हें पता है बाद में तुम पर हँसने में उन्हें मजा आएगा। कुछ लोग चाहते हैं कि आप कोई काम न करें केवल घूमो फ़िरो और समय बर्बाद करो। आपको कभी कोई मुफ्त में दिशा नहीं दिखायेगा। आपको कभी कोई मोटिवेट नहीं करेगा। आपको कभी कोई ये नहीं बतायेगा की आगे कैसे बढ़ा जाता है। वो केवल आप हैं जो खुद को राह दिखा पाएंगे और केवल आप हैं जो जीवन में कुछ कर पाएंगे। हमारी झूठी उम्मीदे भी नष्ट हो जाती है जब हमारे घरवाले हमारी नक्कारी पर थूकते हैं। हर बात में ताने नज़र आती है।
मैं केवल यह बताना चाहता हूं कि समय का दुरुपयोग मत करो। सबकुछ आँखों के सामने है। कितने उदाहरण हैं जहाँ लोग बेरोजगारी में आमहत्या कर रहे, सपने पूरे नही होते तो ज़हर खा लेते हैं और न जाने कितने कष्ट स्वयं को देते हैं। इसलिए ऐसी नौबत न आये इसके लिए अभी इस जवानी को सही दिशा में लगाओ। सही ज्ञान और उसका क्रियान्वयन से ही सब कुछ प्राप्त होता है। हम सभी को रास्ते पता है, परन्तु हम अपनी मन की सुस्ती और कम्फर्ट ज़ोन के कारण कुछ नहीं कर सकते। प्रेमिका, फोन, बिस्तर, आराम, बाहर का खाना, सुस्ती, नशा इत्यादि ये दुश्मन हैं हमारे नक्कारी का। इसीलिए ठान लो जब तक सफ़ल न हो जाये तब तक हम एक सीध में बढ़ते चलेंगे और निखरते रहेंगे। विश्वास मजबूत हो तो चाँद पर भी पहुचा जा सकता है फिर भी हमारा लक्ष्य तो पृथ्वी पर ही स्थित है।
उम्मीद है जीवन सबका सुखद होगा। अपने प्रयासों के बल पर और सुस्ती, और टालमटोल को त्याग कर सभी अपने लक्ष्य को प्राप्त कर लेंगे।
अब जब साफ़ हो गया है कि मुस्लिम बच्चे के परिवार वाले ने ही उसे पिटवाया, क्या @RahulGandhi और @priyankagandhi माफ़ी माँगेंगे?
अब जब सामने आ गया है कि वीडियो बनाने वाला और वीडियो में हँस रहा व्यक्ति उस बच्चे का बड़ा भाई ही है, क्या @zoo_bear और @_sayema पर इस मुद्दे पर गलतबयानी करने के लिए मुकदमा दर्ज होगा?
अब जब पता चल गया है कि शिक्षिका ने मुस्लिमों को लेकर कोई आपत्तिजनक बात कही ही नहीं थी, क्या @ajitanjum और @vinodkapri ताज़ा अपडेट्स के बारे में अपने फॉलोवर्स को बताएँगे?
अब जब बच्चे का अब्बा ही कह रहा है कि ये हिन्दू-मुस्लिम का मामला नहीं है और ये भी सच्चाई सामने आ गई है कि शिक्षिका दिव्यांग है इसीलिए खुद पीटने की जगह बच्चे से पिटवाया, क्या @asadowaisi और @ShyamMeeraSingh इसे सांप्रदायिक बताना बंद करेंगे?
रे जलनखोर की औलाद, 2013 में अंतरिक्ष सेक्टर को ₹3545 करोड़ रुपए दिए गए थे, जबकि 2023 में ये आँकड़ा ₹12,543 हो जाता है, सीधा साढ़े 3 गुना बढ़ जाता है। ये संभव बनाया उस नेता ने, तो क्या तस्वीर उसकी छपेगी जिसके मूत्र का पान तू प्रतिदिन सोने समय करता है?
जब तेरा पूरा गिरोह विदेशी वैक्सीन के लिए लॉबिंग कर रहा था, तब हैदराबाद से लेकर पुणे तक दौरा कर के स्वदेशी कोरोना टीके के निर्माण कार्य की निगरानी कर रहा था वो नेता, तो फिर तस्वीर पप्पू की छपेगी? जब तू और तेरे बाप लोग स्वदेशी वैक्सीन को गाली दे रहे थे, उस समय केंद्र सरकार ने ₹19,675 खर्च किए उस वैक्सीन के निर्माण पर और आज दुनिया के 101 देशों ने भारत से वैक्सीन मँगवाई है, खासकर गरीब देशों को त्वरित मदद की गई। ये सब किया उस नेता तो, तो तस्वीर एंटोनिया माइनो की छपेगी?
तू तो रोज यूट्यूब-ट्विटर पर गाली देता है उसी नेता को, पैसे कमा रहा उसे ही गाली देकर, फिर ये बता कि अगर तानाशाही है तो क्यों तेरे सोशल मीडिया हैंडल्स भारत में चल रहे? उस नेता के एक इशारे पर भारत में किसी भी सोशल मीडिया हैंडल पर तुझे कोई देख-सुन नहीं पाएगा, फिर भी रोज गाली देने के बावजूद सालों से तू बना हुआ है। कहाँ है तानाशाही?
अब मन के भाव लिखना बन्द कर दिया है। जीवन में दुःख है, बेरोजगारी है, तड़प है, मायूसी है एवं चारों ओर बिखराव है। न कुछ समझ आता है, न कोई राह दिखाने वाला है...ऐसा लगता है मैं उन अनन्त अंधेरों में विचरण कर रहा हूं जहां कभी सुबह नहीं होती सिर्फ़ अन्धकार और भटकाव शेष है...!!!
प्रायः मैं दिन में सिफॆ दो तीन बार चाय पीता हूँ । लेकिन ना जाने क्यों , कल शाम की चाय के बाद , सोचने लगा , और फिर ख्याल आया कि?
यूपी से सपा सरकार चले जाने के बाद , अखिलेश यादव ने “सैफई महोत्सव” क्यों नहीं मनाया?
बसपा सरकार के जाने के बाद , मायावती के जन्मदिन पर , उन्हें हीरे, ताज, नोटों से क्यों नहीं तौला गया?
यूपी में योगी जी के सीएम बनने के बाद , अब , अतीक अहमद, आजम खान, मुख्तार अंसारी जैसा बाहुबली , क्यों नहीं पैदा हुआ है ?
मोदी जी के आने के बाद , पी चिदंबरम अपने बंगले के गमलों में , 6 करोड़ की गोभी क्यों नहीं उगा पा रहा है ?
आजकल , सुप्रिया सुले अपनी दस एकड़ जमीन में , 670 करोड़ की फसल क्यों नहीं उगा पाती हैं ?
हरियाणा में कांग्रेस की सरकार चले जाने के बाद , रोबर्ट वाड्रा ने वहाँ कोई जमीन क्यों नहीं खरीदी ?
कांग्रेस सरकार जाने के बाद , मुंबई में , फिर कोई हाजी़ मस्तान, करीम लाला, दाऊद इब्राहिम पैदा क्यों नहीं हुआ ?
‘यस बैंक’ के मालिक राणा कपूर को , ढाई करोड़ की पेंटिंग बेचने के बाद , प्रियंका गांधी ने फिर कोई पेंटिंग क्यों नहीं बेचा ?
ए. के. एंटनी ने , अपनी पत्नी के हाथ की पेंटिंग , सरकार को 28 करोड़ में बेचने के बाद , अपनी पत्नी से , फिर कोई पेंटिंग क्यों नहीं बनवाया?
कांग्रेस के 10 वर्षीय (2004-14) शासनकाल में , सोनिया अपनी "अज्ञात" बीमारी के इलाज के लिये , प्रत्येक छ: माह के अन्तराल पर , "अज्ञात" देश को नियमित रुप से जाती थी?
2014 में , सत्ता परिवत्तॆन के बाद , आश्चयॆजनक रुप से सोनिया की "अज्ञात" बीमारी उड़न छू कैसे हो गई ?
कल फिर कडक चाय पिऊंगा , और फिर सोंचूँगा, आप भी , एक बार इस बारे में जरूर सोचना ! प्रश्न वाकई गंभीर है।
ऐसे और अनगिनत सवाल हैं, जिनके बारे में , हम सबको सोचना ही चाहिए?
मास रिपोर्टिंग के लिए निशाना बनाया जा रहा है। कृपया मुझे ज़्यादा से ज़्यादा मेंशन करें ताकि इनकी पोल खोलता रहूँ, एकाउंट बचा रहेगा।
मेरे ट्वीट में लिखे तथ्यों पर क्यों नहीं बात कर रहे ये लोग। क्या बिहारी होना पाप है?
इसीलिए कहा जाता है - "भैंस के आगे बीन बजावे, भैंस रही पगुराई''। अरे ओ दलितों के फर्जी ठेकेदार, प्रोपेगंडा के चक्कर में ऐसे वन लाइनर मार कर अपने मूर्ख समर्थकों से RT तो कमा लोगे लेकिन इससे तुम्हारी शैक्षिक योग्यता का स्तर भी पता चलता है।
नींबू-मिर्ची क्यों टाँगा जाता है दरवाजे पर, अब ये भी जान लो। नींबू और मिर्ची कीट-पतंगों से बचने के लिए सामान्यतः घर के दरवाजे पर टाँगे जाते हैं। कई होटल भी ये तरीका अपनाते हैं । वो टेबल पर नींबू-मिर्ची रख देते हैं, ताकि भोजन के आसपास कीड़े न उड़ें। नींबू-मिर्ची को कॉटन के धागे से बाँधा जाता है एक साथ। इसकी खासियत ये होती है कि ये नींबू का जूस और मिर्ची का कैप्साइसिन अब्सॉर्ब करता है और आसपास के वातावरण में से दुर्गंध को मिटाता है।
ये परंपरा कैसे शुरू हुई? प्राचीन काल में लोगों को लंबी दूरी की यात्राएँ पैदल ही करनी होती थीं और जंगलों की तरफ से भी गुजरना पड़ता था। ऐसे में वो अपने साथ नींबू और मिर्ची ज़रूर रखते थे। कारण ये कि नींबू की एकाध बूँद भी पानी में डाल दी जाती थी तो उसे पीने के बाद वो ज़्यादा समय तक हाइड्रेटेड रहते थे। नींबू में विटामिन सी होती है, ऊर्जा मिलती है। मिर्ची का यहाँ बड़ा ही महत्वपूर्ण इस्तेमाल था। अगर रास्ते मे साँप वगैरह ने काट लिया तो तुरंत मिर्ची में से हल्का सा चख कर ये पता लगाया जाता था कि साँप ज़हरीला था या नहीं। अगर मिर्ची का टेस्ट नहीं आ रहा, इसका सीधा अर्थ है कि ज़हर ने Nerves को जाम कर दिया है। फिर तुरंत इसका उपाय किया जाता था या वैद्य के पास भागते थे।
तो 'लिख लोढ़ा पढ़ पत्थर' की औलाद, नींबू-मिर्ची के 3 बड़े फायदे जान ले - Natural Frangrance, Natural Pesticide & Useful in Travel. लेकिन, तुम तो ठहरे नीलचट्टा। विदेशी रेस्टॉरेंट में खाना खाने के बाद पानी में नींबू गाड़ कर देते हैं तो तुरंत हाथ धो लेते हो और 'कूल' बनते हो, भारत के ऋषियों-मनीषियों ने यही बात हजारों साल पहले बता दी तो उस पर हँसते हो और मजाक बनाते हो। नींबू-मिर्ची टाँगने के आध्यात्मिक लाभ और जो मान्यताएँ हैं, वो तुम्हें बताऊँगा तो भी समझ नहीं आएगा। इसीलिए, फिलहाल इतनी ही जानकारी अपनी गाँ%$# में डाल लो और अगले प्रोपेगंडा की तरफ लग जाओ।
तथाकथित ‘महात्मा’ गाँधी जिनके बाप हैं, वो उन्हें अपना पिता मानें।
न तो सरकार ने, न ही संविधान ने इस व्यक्ति को कभी भी ‘राष्ट्रपिता’ कहा है, न ही भारत जैसे राष्ट्र का पिता कोई गाँधी जैसे चरित्र का व्यक्ति हो सकता है।
भारत 1947 में राष्ट्र नहीं बना, भारत सनातन है। गाँधी भारत का एक राजनैतिक व्यक्तित्व हो सकता है, जिसके अपने विवादों का पूरा इतिहास है। ऐसे व्यक्ति को राष्ट्रपिता मानना या तो अनभिज्ञता है, या प्रपंच।
मैं नहीं मानता इसे भारत का राष्ट्रपिता। संविधान नहीं मानता इसे भारत का राष्ट्रपिता। इनके समकालीन नेता नहीं मानते इसे राष्ट्रपिता। काहे का राष्ट्रपिता?
मेरे जैसे फक्कड़ का कोई अतीत वर्तमान भविष्य नहीं होता निश्चित ही पीड़ा है और सदैव रहेगी,क्योंकि पढ़ाई के समय बहाने बनाना, कभी करोड़ों रुपए कमाने की सोचना, कभी हिमालय पर्वत पर जाके सन्यासी बनने की सोचना, जीवन में बहुत दुःख है.....
वेदों ने शूद्र बनाये। मनुस्मृति ने शूद्र बनाये। पुराणों ने शूद्र बनाये। बस नहीं बनाये तो भारत के संविधान ने शूद्र नहीं बनाये।
एक से एक मुट्ठी भर सेकुलर जाहिल हिन्दुओं से पाला पड़ता है, जिन्हे यह नहीं मालूम होगा कि किस वेद में कितने अध्याय हैं, लेकिन मुल्लों के हाथ की (1/20)
इसका नाम है स्वाति मालीवाल। 'दिल्ली महिला आयोग' की अध्यक्ष है, जिसने अपने पिता को मृत्यु के बाद यौन शोषक साबित कर दिया दुनिया की नजर में। इसके लिए इसके 'पूर्व पति' ने भी नाराज़गी जताई थी। मणिपुर से एक वीडियो सामने आने के बाद ये वहाँ पहुँच गई है। दिल्ली से ढाई हजार किलोमीटर दूर की एक घटना ने इसे काफी 'विचलित' कर दिया है, जबकि जिम्मेदारी इसे दिल्ली की दी गई है।
अब देखिए। हाल ही में दिल्ली के मेहरौली में एक लड़की की आत्महत्या के 1 साल बाद खुलासा हुआ कि जावेद उस पर इस्लामी धर्मांतरण का दबाव बना रहा था और यही उसकी मौत का कारण बना। जावेद कहता था - "हमारे लिए अल्लाह ही सब कुछ हैं। मरने के बाद केवल मुस्लिम ही जन्नत में जाते हैं।" इसी तरह दिल्ली की ही एक युवती का 2 साल तक बलात्कार होता रहा। अलवर के जुनैद ने नाम बदल इंस्टाग्राम से दोस्ती की और मंदिर में शादी की। रेप भी किया, लाखों रुपए भी हड़प लिए। ऐसी कई घटनाएँ हैं। मेरे से ज़्यादा तो इसे पता होना चाहिए था, क्योंकि ये 'दिल्ली महिला आयोग' की अध्यक्ष है। लेकिन नहीं, इसने एक भी पीड़िता के घर जाना उचित नही समझा और न ही उनके परिजनों से मुलाकात करना। जब साक्षी वाला मामला खूब वायरल हुआ, तब इसने पहुँच कर माता-पिता से मुलाकात की।
मेरा कहना ये है कि मणिपुर में पहले से वहाँ का महिला आयोग MSCW है, फिर इसकी वहाँ क्या ज़रूरत है? अरविंद केजरीवाल की पार्टी कोरोना से भी खतरनाक संक्रमण है और उसी पार्टी के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए इस महिला को तैनात किया गया है। इसे दिल्ली की घटनाएँ नहीं दिखती हैं, लेकिन मणिपुर में भाजपा का शासन है तो वहाँ ये पहुँच जाती है ताकि इसे मीडिया फुटेज मिलती रहे। हो सकता है इस ट्वीट के बाद मुझे समन कर लिया जाए DCW द्वारा।
राजस्थान, पश्चिम बंगाल और बिहार तो अपेक्षाकृत नजदीक ही है दिल्ली से, वहाँ की घटनाओं पर @SwatiJaiHind क्यों नहीं गई? बिहार में दलित नाबालिग को नग्न कर पीटा, पश्चिम बंगाल में जनजातीय समाज की 2 महिलाओं को नग्न कर पीटा, राजस्थान महिला अपराध में नंबर-1 बना ही दिया गया है - इन सब पर इसका मुँह क्यों नहीं खुलता?
@ShyamMeeraSingh भाजपा के केंद्रीय मंत्री भी एयरपोर्ट पर लाइन में लग कर फ्लाइट की इकॉनमी क्लास से यात्रा करते हैं। जबकि इन छोटे-छोटे विपक्षी दलों के नेता रोज कहीं न कहीं प्राइवेट जेट से उड़ान भरते हैं।
सवाल हुआ तो प्रवक्ता बन कर क्यों आ गए भड़क कर? वीडियो फ्लॉप हो गया तो गुस्सा यहाँ निकालोगे?
आपको पता है कि ये तस्वीर किसकी है?
ये वो युवा पत्रकार थे जो 'अजमेर सेक्स स्कैंडल' पर अपने अख़बार 'लहरों की बरखा' में 76 किस्तें प्रकाशित कर चुके थे। कई सफेदपोशों की पोल खोली थी। नतीजा क्या हुआ, वो तस्वीर में दिख रहा है। रात के समय उनपर गोलियाँ बरसाई गईं। किसी तरह नाले में बच कर जान बचाई। अस्पताल में भर्ती हुए। कई दिनों तक इलाज चला। एक दिन अचानक कुछ हत्यारे आए और अस्पताल में ही गोलियों से भून डाला। निकम्मा पुलिस-प्रशासन, निकम्मी सरकार! माँ की आँखों के सामने उसके चिराग को बुझा दिया गया।
हत्यारों में एक कॉन्ग्रेस का विधायक था, जो आज भी मजे में घूम रहा है। सभी आरोपितों को कोर्ट ने बरी कर दिया। हमारी न्याय व्यवस्था थूकने लायक भी नहीं बची है। जजों ने कहा कि माँ झूठ बोल रही हैं, बयान बदल रही हैं, उनके बयानों में विरोधाभास है...
एक भरा-पूरा परिवार उजड़ गया। आज भी इनकी पत्नी कहती हैं कि उनके पति को बेबस लड़कियों की दास्ताँ दुनिया के सामने लाने की सज़ा मिली, इनका नाम है मदन सिंह। क्या आप जानते हैं कि उस समय राजस्थान की पुलिस ने इस मामले को किस तरह रफा-दफा किया था? कहा गया था कि मदन सिंह अपराधी था, इनका पूरा परिवार अपराधी था। उस समय के SP ने इसे गैंगवॉर बता कर इतिश्री कर ली। पहले हमले के बाद इन्होंने अस्पताल में ही बिस्तर से बयान दिया था जिसमें कॉन्ग्रेस के पूर्व विधायक का नाम लिया था। कोई कार्रवाई नहीं हुई। जानते हैं पुलिस ने क्या कहा? पुलिस ने कहा कि ये आदमी एक नेता को फँसा रहा है प्रतिद्वंद्विता के कारण। आखिरकार अस्पताल में ही भून डाला गया इन्हें। आपने अगर #Ajmer92 का ट्रेलर देखा है तो उसमें अस्पताल में जिस व्यक्ति को गोली मारे जाते हुए दिखाया गया है वो इन से ही प्रेरित है। #Ajmer92 फिल्म के बहाने ही सही, इस सच्चाई को हमें हर एक देशवासी को बताना चाहिए कि जब खादिमों ने 250 हिन्दू लड़कियों का बलात्कार किया तो इन हैवानों को बचाने के लिए कॉन्ग्रेस नेताओं की छत्रछाया मौजूद थी।