अधिक जानकारी के लिए अवश्य पढ़ें पवित्र सद्ग्रंथों पर आधारित संत रामपाल जी महाराज द्वारा लिखित पुस्तक *ज्ञान गंगा*।
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#निज_स्वरूप_में_जाग
भाषा व्यवहार विचार और संवेदनाओं के संप्रेषण का प्रथम स्वर मातृभाषा का ही है। अतः मातृभाषा हमारे मानसिक व बौद्धिक विकास की दृष्टि से अधिक उपयोगी है।घर, कार्यालय,प्रतिष्ठान और सर्वत्र गर्व से अपनी भाषा का प्रयोग करें !
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