मिट्टी है वरदान
मिट्टी से ही किसान की पहचान
मिट्टी जीवन का आधार है। इसी प��वन मिट्टी से अन्न उपजता है, किसान समृद्ध होता है और हमारा राष्ट्र मजबूत बनता है।
ट्रांसफर के मुद्दे को अब चुनाव तक विराम दीजिए और केंद्रीय वेतनमान की मांग कीजिए। बिहार में शिक्षकों को अन्य राज्य के शिक्षकों के मुकाबले लगभग 50% कम वेतन मिल रहा है। लेकिन इसके लिए लड़ाई कानूनी आधार पर नहीं बल्कि जमीनी आधार पर लड़नी होगी।
कानूनी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने पहले की कह दिया है कि वेतन निर्धारित करने का अधिकार नियोक्ता को है। Employer has the right to fix salary and benefits as per its resources until it violates any individual's fundamental rights. ये सुप्रीम कोर्ट पहले ही कह चुका है। इसलिए बिहार, यूपी, बंगाल और छत्तीसगढ़ सभी जगह वेतन अलग-अलग है शिक्षकों का।
मेरी राय स्पष्ट है कि केस के चक्कर में धन, समय और ऊर्जा बर्बाद करने से बेहतर है संगठित होकर सड़क पर संघर्ष करना। आज तक बिहार में शिक्षकों को जो भी मिला है सड़क पर संघर्ष करने से मिला है। मैंने 2013 में जॉइन किया था तो कुल वेतन मात्र ₹6000 था और आज प्रधान शिक्षकों का वेतन ₹50000 ��े लगभग है।
ये हमने किसी केस-मुकदमे से हासिल नहीं किया है। बल्कि सड़क पर संघर्ष से हासिल किया है। 12 साल में 8 गुना वेतन वृद्धि! ये सब हुआ सुनियोजित तरीके से सड़क पर संघर्ष करने से। इसलिए जो भी साथी केंद्रीय वेतनमान की लड़ाई लड़ना चाहते हैं वो एकजुट हों।
विशेष जानकारी के लिए आप मुझे 8809821470 पर व्हाट्सएप कर सकते हैं।