#कबीर-माँस खांय ते ढेड़ सब, मद पीवैं सो नीच।
कुलकी दुरमति पर हरै, राम कहै सो ऊंच।।
जो माँस आहार तथा मदिरा पान त्यागकर प्रभु भक्ति नहीं करता वह तो ढेड (नीच) व्यक्ति है, चाहे किसी जाति या धर्म का हो। भावार्थ है कि उच्च कर्म करने वाला उच्च है तथा नीच कर्म करने वाला नीच है।
@GarimaGeetaKi#StoryOfLordShiva
🔱माया काली नागिनी, अपने जाये खात।
कुण्डली में छोड़ै नहीं, सौ बातों की बात।।
स्वयं ब्रह्मा, विष्णु, महेश, आदि माया शेराँवाली भी निरंजन की कुण्डली में है। ये अवतार धर कर आते हैं और जन्म-मृत्यु का चक्कर काटते रहते हैं।
#StoryOfLordShiva🔱 तीन देव की जो करते भक्ति। उनकी कबहु न होवै मुक्ति।।
परमेश्वर कबीर जी ने कहा है कि जो साधक भूलवश तीनों देवताओं रजगुण ब्रह्मा, सतगुण विष्णु, तमगुण शिव की भक्ति करते हैं, उनकी कभी मुक्ति नहीं हो सकती।
@RealSachinJi#StoryOfLordShiva
🔱 शिव जी अविनाशी व पूर्ण परमात्मा नहीं हैं।
कबीर परमात्मा ही अविनाशी हैं जो सतलोक के मालिक हैं। ब्रह्मा-विष्णु-शिव जी नाशवान परमा��्मा हैं। महाप्रलय ��ें ये सब तथा इनके लोक समाप्त हो जाएंगे।