मस्जिद अपने आप गिरी, जीडीपी अपने आप गिर रही, विपक्ष के नेता कैमरा देख कर गिर रहे। ऊपर तो बस एक प्रधान-सेवक उठे हैं, जिन्होंने अपने उड़ने के लिए 8 हज़ार करोड़ के विमान का इंतज़ाम किया है।
हाथरस मामले में देश जानना चाहता है कि
सही धाराओं में FIR क्यूँ नहीं दर्ज की गई?कार्रवाई में देरी क्यूँ की गई? पीड़िता का पार्थिव शरीर परिवार को अंतिम संस्कार के लिए क्यूँ नहीं दिया गया? परिवार और प्रशासन के बयान आपस में विरोधी क्यूँ है?
क्या इसके पीछे राजनीतिक दबाव काम कर रहा है?
UP का BJP MLA कुलदीप सेंगर याद है? सत्ता ने बलात्कार और हत्या के इस आरोपी को बचाने का भरपूर प्रयास किया था। इससे ही बलात्कारियों का मनोबल बढ़ता है। हाथरस की दर्दनाक घटना में भी यही देखने को मिला है। बलात्कारी बेख़ौफ होकर हमारी निर्भयाओं को बलात्कार के बाद मौत के घाट उतार रहे हैं।
ख़बरदाता ख़रीदे जा चुके हैं।
इसलिए ही देश के प्रधान का आम खाना, मोर को दाना देना, मॉर्निंग वॉक पर योगा करना भी ख़बर है।
मज़दूरों का दाने-दाने के लिए मोहताज होना, हज़ारों किलोमीटर पैदल चलना, अन्नदाता का दिन-रात सड़कों पर विरोध करना भी ख़बर नहीं है।
आज पूरे देश में अन्नदाता काले क़ानूनों के ख़िलाफ़ शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन न सरकार को कोई परवाह है न “राष्ट्र” के नाम पर फ़र्ज़ी बहस करने वाले एंकरों को। दरअसल इनके राष्ट्र की परिकल्पना में किसान-मज़दूर शामिल ही नहीं हैं।
@yuvahallabol
@MPYBSANGH0522
बेरोजगारों द्वारा रोजगार मांगने पर
( 4 सितंबर भोपाल) लाठीचार्ज
🤔🤔🤔🤔🤔
और नेताओं की अनुशासनहीन रैली
पर (21सितंबर रायसेन आदि)
पर सब कुछ माफ ....?
@CMMadhyaPradesh
अरे कुछ तो शर्म करो शिवराज !
#पदवृध्दिशिक्षकभर्तीmptet