दीपावली के नाम पर करोड़ों दीये जलाते हैं, लेकिन इस बच्ची के चेहरे पर फैले अंधेरे को देखने की हिम्मत नहीं रखते। जब तक ऐसे दृश्य मौजूद हैं, तब तक हमारे उत्सव झूठे हैं, हमारी सभ्यता अधूरी है, और हमारी रोशनी सिर्फ दिखावे की धुंध है जो असमानता के अंधेरे को और गहरा करती है।
हर दीये तले मिटे अंधेरा और हर ओर ख़ुशियों का उजाला हो, इसी कामना के साथ दीपावली की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ!
दिवाली यादों को भी रोशन कर जाती है… आज घर के लिए खील ख़रीदी तो बचपन याद आ गया।
जब हम सब मिलकर सबके हर छोटे-बड़े काम-कारोबार को प्रोत्साहन देंगे तो सबकी दिवाली मनती रहेगी।