SSC अब भगवान भरोसे भी नहीं रहा। यक़ीनन रील्स चलाने वाले ज़ाहिलों ने पेपर सेट किया होगा।
सच कहूँ तो हज़ार जूते मारने चाहिए ऐसा पेपर बनाने को। स्तरहीन हो चुका है सिस्टम।
#Justiceforschoolschildren
उत्तर प्रदेश में प्राथमिक विद्यालयों के मर्जर से शिक्षा और ग्रामीण परिवेश पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है। मर्जर से स्कूलों की संख्या कम होने पर बच्चों को दूरस्थ स्कूलों में जाना पड़ेगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूलों तक पहुंच मुश्किल होगी, गर्मी- सर्दी- बरसात के मौसमों को अगर ध्यान में रखा जाए तो बच्चों की उपस्थिति प्रभावित हो सकती है और उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती हैं। खासकर गरीब परिवारों की बालिकाओं और छोटे बच्चों के लिए 3-5 किमी की दूरी तय करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, जिससे "ड्रॉपआउट दर" बढ़ सकती है। इससे शिक्षा की गुणवत्ता पर भी असर पड़ सकता है, क्योंकि बड़े स्कूलों में शिक्षक-छात्र अनुपात बिगड़ सकता है, जिससे व्यक्तिगत ध्यान कम होगा।
बच्चे थके हुए और परेशान दिखाई दे सकते हैं।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, जैसे अत्यंत छोटे दुकानदार जो किताबें-कापी अन्य पाठ्य सामग्री रखते हैं उनकी आय प्रभावित हो सकती है।
युवाओं की नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं।
शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009 के अनुसार, 6-14 वर्ष के बच्चों को 1 किमी के दायरे में स्कूल उपलब्ध होना चाहिए। मर्जर इस प्रावधान का उल्लंघन करता है, क्योंकि कई बच्चों को लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी। धारा 4 में यह स्पष्ट है कि स्कूलों की पहुंच सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। बिना RTE में संशोधन के मर्जर कानूनी रूप से चुनौतीपूर्ण है।
स्कूल मर्जर/विलय के खिलाफ़ उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के बैनर तले आज के ट्वीटर महाअभियान का हैशटैग👇👇
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भारतीयों के लिए विद्यालय सिर्फ़ शिक्षा के केंद्र नहीं बल्कि यह मंदिर हैं, जहां मां सरस्वती का वास होता है और मंदिर बंद नहीं किए जाते बल्कि उनका जीर्णोद्धार किया जाता है!
- विपिन बिहारी
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