आज कोर्ट में मेरे केस पर सुनवाई हुई। न्यायाधीश महोदय ने अगली सुनवाई तक केस पर पुलिस जाँच के लिए मुझे बुलाने से पूर्व जाँच अधिकारी को मुझे नोटिस देने कहा। यही नोटिस कोर्ट को भी दी जाएगी ताकि कोर्ट यह तय करेगा कि इसमें कोई तर्क है या नहीं।
कोर्ट ने यह भी नोट किया कि हमारे अधिवक्ता @jai_a_dehadrai ने हमारा पक्ष रखा कि उक्त व्यक्ति पर न तो कोई जातिगत टिप्पणी हुई, न ही उसका इस विषय में जातिसूचक शब्दों से कोई अपमान हुआ। अतः, कोई केस ही नहीं बनता।
जय अनंत जी समेत श्री सिंह एवम् प्रत्युष भाई आदि अधिवक्ताओं को मेरा ससम्मान आभार जिन्होंने मेरा पूर्ण पक्ष रखा। अगली सुनाई सप्ताह भर बाद है।
जो वकील अपने चैंबर में जज बनाने के लिए कुख्यात है, वो भोंसड़ीवाला भी मर्यादा पर ज्ञान चोद रहा है। लाल जंघिए में आर्गुमेंट करने वाले लोग, जिनके इनकम टैक्स के पेपर दीमक चर जाते हैं, वो साले मोरेलिटी का हमें ज्ञान देंगे?
साले सही पैसे दूँ तो रिरियाता हुआ ‘जी सर’ बोल कर तू मुझे डिफेंड करने आ जाएगा।
पुनः कहूँगा, जिन हराम के पिल्लों को लगता है कि मेरी (या किसी भी व्यक्ति की) माँ-बहन किसी अनपढ़-गँवार-जातिवादी कीड़े के डिजिटल भोग की विषयवस्तु है, मैं उनकी पिछवाड़े में बाँस डाल कर खड़ा कर दूँगा।
मेरे लिए मेरे परिजनों का सम्मान सर्वोपरि है, और उस पर कोई कॉम्प्रोमाइज नहीं। चाहे वो भारत का प्रधानमंत्री हो या अमेरिका का राष्ट्रपति, मुझे झाँट भर फर्क नहीं पड़ता तुम्हारी पहचान क्या है।
मैं अपने प्रत्युत्तर में तीक्ष्ण, तीव्र और डिस्प्रपॉर्शनेट ही रहूँगा।
डॉक्टर @DrAMSinghvi जी, भोजपुरी में एक गीत है: AI है कि, कहीं दे आई है। बहुत कर्णप्रिय गीत है। आपको एक खल्वाट वकील महोदय की याद दिलाएगी।
और हाँ, इतने अच्छे वकील हो कर, जो अनपढ़ों वाली हरकत आपने अपने ट्वीट में की है, वही अब आपके नए अपमान का कारण बनेगा। हालाँकि, आपके जैसे लोगों को सम्मान तो कितना है, वो सब जानते ही हैं।
चाहे लाख योगी आदित्यनाथ को ‘बुल्डोजर बाबा’ की ही छवि में बाँधने का प्रयत्न करो, परंतु सत्य यह है कि नोएडा से ग्रेटर नोएडा तक, यदि MNCs और भारतीय टेक कंपनियों, सामान्य उद्योगों के लिए सहज बनता जा रहा है, तो उसका कारण अच्छी विधि-व्यवस्था है।
‘माफिया मिट्टी मिलाओ योजना’ का लाभ यह मिल रहा है कि यूपी एक आकर्षक निवेश भूमि में परिवर्तित हो रहा है और हजारों करोड़ की भूमि मुक्त हो रही है। यही भूमि अब व्यवसाय के लिए उपलब्ध है।
और बाकी राज्य तो बुल्डोजर अपना ही रहे हैं। गुंडों में भय का भाव और जनता में जय का भाव, पीले बुल्डोजर को देखते ही प्रबल हो जाता है।
आम आदमी तत्काल टिकट बुक कर ही नहीं सकता, क्योंकि @IRCTCofficial ऐप और वेबसाइट दोनों महा घटिया है।
मेरा डेढ़ मिनट में पेमेंट हो गया और जब स्टेटस रिफ्रेश हुआ तो नॉट बुक। कुछ लाज शर्म है नहीं क्योंकि कोई अकाउंटेबिलिटी नहीं है।
दलाल पे तुम कंट्रोल कर नहीं सकते। @AshwiniVaishnaw 🙏
क्या हुआ IT सेलिया कुक्कुरों, टास्क नहीं हुआ अब तक?
रुचि तिवारी का कुछ कॉन्ग्रेस, SP, AAP कनेक्शन निकालो फटाफट। नहीं तो सोरोस फंडिंग टाइप ही कुछ पेल दो। कुछ न मिले तो 2016 का कोई फेसबुक पोस्ट ले आना जिसमें तुम्हारे यशस्वी जी का मेमे शेयर किया हो।
फिर तो कपड़े फाड़ना बनता ही है।
आइटी सेलियों का दर्द अभी तक गया नहीं है। कुछ अभी भी बिलबिला रहे हैं। अभी भी पर्सनल टार्गेटिंग चल रही हैं। अभी कुछ नहीं हुआ है, बारह दिनों से थोड़ा व्यस्त था, अब और पेलूँगा। बंद करो या फिर रेडी रहो।
चबूतरा बना दूँगा।
DU में जो रुचि तिवारी के साथ हुआ, वह वामपंथी-अम्बेडकरवादी छात्र पार्टियों के कारण हुआ, ऐसा मानना मूर्खता है। घटना का सतही कारण तो अवश्य ही ऐसी पार्टियों के छात्र नेता हैं, पर जड़ में क्या है?
जड़ में जातिवादी तुष्टिकरण और ब्राह्मण घृणा के नारों का सामान्यीकरण है। मोदी सरकार की उपलब्धि यही है कि अब भीमवादी खुल्ला घूम रहे हैं। कल तक जो दीवारों पर ‘ब्राह्मण बनिया कैम्पस छोड़ो’, ‘देयर विल बी ब्लड’, ‘ब्राह्मणों भारत छोड़ो’ लिखा करते थे, अब वह ‘ब्राह्मणों की कब्र खुदेगी’ के नारों से होते हुए, अब एक लड़की के कपड़े फाड़ने पर आ चुकी है क्योंकि उसका नाम ‘तिवारी’ है।
वामपंथी पार्टियों को अब हम नहीं कोसते क्योंकि हम जानते हैं उन्हें सशक्त करने वाले लोग सत्ता में हैं, जो ‘बँटेंगे तो कटेंगे’ का नकली नारा रैलियों में लगा कर एकता का स्वांग रचते हैं।
जेएनयू में हाल ही में कुछ छात्रों को रस्टिकेट किया गया, जो एक अच्छा उदाहरण है, पर आगे क्या? कैम्पस में एक छात्रा के कपड़े फाड़ने के प्रयास करने वाले को जेल होनी चाहिए।
आज रुचि तिवारी के पास कौन से विधिक विकल्प हैं? क्या वह कोर्ट में ‘जातिवादी घृणा’ का आधार बना सकती है? नहीं, क्योंकि वो जिस समाज से आती है, उसके पास ऐसा कोई विकल्प नहीं। उसे कोर्ट में यह बताना होगा कि उस पर हुए अपराध की जड़ में जातिवादी घृणा है, पर प्रतिवादी वकील कहेगा कि ब्राह्मणों के साथ कैसा जातिवाद?
यह विषाक्त वातावरण नरेन्द्र मोदी और भाजपा की ही देन है। नाम उसी का लिया जाएगा जो ई-रिक्शा से वंदे भारत तक हर उपलब्धि का क्रेडिट लेता है। यह क्रेडिट भी मोदी जी का ही है।
अब तो बंट गए...
बस कटना बाकि है...
शुक्रिया @dpradhanbjp 🙏
देश का सामान्य वर्ग, मध्यम वर्ग, ईमानदारी से टैक्स देने वाला वर्ग, बिना आरक्षण पढ़ाई करने और नौकरी पाने वाला वर्ग... इसी लायक है कि उसके साथ अभी और नाइंसाफी हो...उसका और शोषण हो...उसको गाली मिले..उसको सड़क पर पीटा जाए...उसे झूठे मामलों में फंसाया जाए...जेल में डाला जाए...और कोई कानून उसका बचाव न कर पाए...इसी लायक है ये वर्ग... बढ़िया काम कर रहे हैं आप 🙏
#ugc
जातिवाद के नाम पर शिक्षा के मंदिर को हमने क्या बना दिया ?
एक लड़की को लड़कों ने घेर रखा है, सरेआम उसके साथ हाथापाई की जा रही है.
इनका नाम रूचि तिवारी है, पेशे से यूट्यूबर है. जरा सोचिये किसी भी और जाति धर्म से जुड़ी कोई दूसरी लड़की होती तो देश में क्या हो रहा होता. जाति के नाम पर सामान्य वर्ग के बच्चों के साथ घिनौना व्यवहार हो रहा है. उनके साथ जातिवादी टिप्पणी की जा रही है. ये सब हो रहा है देश की राजधानी दिल्ली में.
बेहद शर्मनाक, घृणा से भरा हुआ .
हम कहाँ थे और कहां जा रहे हैं?
मुझे लगा था ‘जाति’ और ‘अम्बेडकर’ इस जीवंत राष्ट्र के प्राण वायु हैं! आप ट्रैक बदल रहे हैं मोदी जी। तुष्टिकरण ही आपका संकल्प है। कर्तव्य केवल ‘दलित, वंचित, पीड़ित, शोषित’ वर्ग के लिए है। बाकी सब बाय-प्रोडक्ट है। आपकी सरकार का वश चले तो आप सड़कों के लेन आरक्षित करवा दें!