#WATCH | On his name not being included in the names nominated by the Congress party for delegations to be sent abroad to explain India's stand on terrorism, Congress MP Shashi Tharoor says, "The party is completely entitled to its opinion. Clearly, this being a government delegation, the government had its own opinion as to who they felt was appropriate. I must say, unaware of any further contacts between the government and my party and I think you should ask those concerned. As far as I'm concerned, I was asked both in my capacity as a chairman of a Parliamentary Standing Committee dealing with these issues and my personal experience over the years in international affairs and the need for that experience and such knowledge as I may possess to be put to the service of the nation at this time..."
Why are Indian Stars silent? Think about it: Aamir Khan met Turkey's President Recep Tayyip Erdoğan & his wife Emine, yet not a word against Turkey’s support for Pakistan’s aggression! Why do our global stars not stand up for #India? #BoycottTurkey #IndiaFirst #OperationSindoor
अमेरिका आतंकवाद के खिलाफ़ लड़ाई लड़ रहा है या आतंक का राजनयिक पुनर्वास कर रहा है?
सामरिक मामलों के विशेषज्ञ @Chellaney जी की अमेरिका की नीतिगत झुकाव को लेकर तीखी टिप्पणी पढ़िए.
◉ हाल ही में ट्रंप ने आतंकी इस्लामी नेटवर्क के निर्यातक पाकिस्तान को IMF बेलआउट दिलवाया.
◉ अब अमेरिका के समर्थन से बांग्लादेश को भी 1.3 बिलियन डॉलर का लोन मिल रहा है, जबकि वहां इस्लामी कट्टरता तेजी से बढ़ रही है.
◉ और अब ट्रंप ने सीरिया के जिहादी शासक से भी मुलाकात की है-जो खुद UN और US द्वारा वांटेड आतंकवादी है.
अमेरिकी धौंस और सीज़फायर के सबक!
मुझे लगता है भारत को लेकर दुनिया की समझ अभी भी बहुत कम है। वो अभी भी भारत को एक ग़रीब, chaotic और अराजक देश मानते हैं। एक ऐसा देश जहां का पढ़ा-लिखा आदमी वहां रुकना नहीं चाहता। ये बात काफ़ी हद तक ठीक भी है। लेकिन इसी भारत के अंदर एक ऐसा भारत भी है जिसे जब मौक़ा मिलता है तो वो पूरी दुनिया को चौंका देता है।
तभी तो जब भारत का मंगल मिशन कामयाब होता है तो वो न्यूयॉर्क टाइम्स जैसा अख़बार हाथ में गाय लिए आदमी को एलीट क्लब में दाख़िल होता दिखाता है। हाथ में गाय लिया आदमी उनकी नज़र में भारत की हक़ीक़त थी लेकिन उस आदमी का मंगल मिशन पूरा कर लेना, एक ऐसी हक़ीक़त थी जो भारत को लेकर उनकी सोच से मैच नहीं खाती थी। इसलिए न्यूयॉर्क टाइम्स उसे भारत का Slumdog Moment मानकर एक तरह से उसका मज़ाक उड़ाता है।
ये कहने में मुझे कोई हर्ज़ नहीं है कि ऑपरेशन सिंदूर के ज़रिए भारत ने पिछले एक हफ़्ते में जो किया है, उससे बाक़ी दुनिया के ईगो को ऐसी ही चोट लगी है। 60 के दशक तक अमेरिका से अनाज तक उधार माँगने वाला मुल्क, 90-दो हज़ार के दशक में हर आतंकी हमले के बाद शिकायती बच्चे की तरह अमेरिका के पास रोने वाला भारत आज अमेरिका और इज़राइली आर्मी की सटीकता और साहस के साथ दुश्मन को उसके घर में घुसकर मार रहा है, ये उसे बर्दाश्त नहीं हो रहा। न उससे भारत का ये आत्मसम्मान बर्दाश्त हो रहा है और न ही भारत की ये सैन्य क़ाबिलियत।
तभी आप देखेंगे कि ज़्यादातर अमेरिकी और वेस्टर्न मीडिया भारत के ऑपरेशन सिंदूर में भारत की सैन्य ताक़त को acknowledge करने में बहुत हिचकिचा रहा है। भारत-पाक के सीज़फायर पर ट्रंप जैसा शख़्स बहुत बदतमीज़ीपूर्ण ट्वीट करता है। वो भारत और पाकिस्तान को समझाइश देते हुए उस टोन में बोलता है जैसे दोनों देशों की हैसियत एक जैसी हो।
अमेरिका भी जानता है ऐसा नहीं है। लेकिन ऐसा करके वो भारत को उसकी जगह दिखाना चाहता है। उसे ये बर्दाश्त नहीं कि रूस-यूक्रेन युद्ध में वो भारत को सस्ता रूसी तेल ख़रीदने से रोक नहीं पाया, उसे बर्दाश्त नहीं कि भारत ने राफेल के बजाय उसके एफ-35 विमान क्यों नहीं ख़रीदे, उसे ये बर्दाश्त नहीं कि भारत पाकिस्तान की तरह कभी उसका पिछलग्गू नहीं बना।
इसलिए भारत-पाकिस्तान युद्ध में जब ऐसी स्थिति आई कि पाकिस्तान बर्बादी की कगार के बहुत नज़दीक था, तो उसने बीच-बचाव करके पाक को बचा लिया। वैसे भी पाकिस्तान उसकी नज़र में वो बेग़ैरत गुंडा है जिसे थोड़े-बहुत पैसे देकर वो चालीस सालों से अपने फायदे के लिए गुंडई करवाता रहा है, तो उसको तो वो वैसे भी बचाएगा ही। इसलिए कोई कितना भी इंकार करे लेकिन ये सच है कि अमेरिका की जो हैसियत है वो भारत पर युद्ध रोकने का दबाव बना सकता है। ये हुआ भी है और ये हर भारतीय की पीड़ा भी है।
दोस्तों, एक बात आम तौर पर कही जाती है कि आज़ादी का मतलब होता है आर्थिक आज़ादी। क्योंकि जब तक आपके पास पैसा नहीं है तब तक आपकी उस आज़ादी के भी कोई मायने नहीं हैं। ठीक यही बात मुल्कों पर भी लागू होती है। आपकी हर तरह की हैसियत, ताक़त, आपकी राष्ट्रीय सुरक्षा इस चीज़ से तय होती है कि आप कितनी बड़ी आर्थिक ताक़त हैं। और जब मैं आर्थिक ताकत की बात करता हूं तो किसी मुल्क की Purchasing Economy की बात नहीं कर रहा। उसके बड़े बाज़ार की ताकत नहीं, उसके बेचने की ताकत।
और आप जब उतनी बड़ी ताक़त हो जाते हैं तो दुनिया इस बात की परवाह नहीं करती कि हांगकांग में लोकतंत्र के लिए किस तरह के आंदोलन हो रहे हैं, ताइवान के लोग क्या चाहते हैं, सऊदी में औरतों को कैसे अधिकार हासिल हैं या इज़राइल अपने बदले की कार्रवाई में ग़ाज़ा में कहाँ तक चला गया है।
और जब आप नहीं होते हैं तो एक ताक़तवर मुल्क का राष्ट्रपति आपसे पहले दुनिया को ये बता देता है कि उसने आपकी war रुकवा दी है। वो एक सांस में आपके देश की तुलना एक आतंकी देश से कर देता है। इस सबसे सबक यही है कि हमें अपनी आर्थिक हैसियत बढ़ानी होगी। वो हैसियत बिना विज्ञान और तकनीक में निवेश किए नहीं बन सकती। वो हैसियत मुफ़्तख़ोरी की राजनीति रोके बिना नहीं बन सकती। वो हैसियत असल मुद्दों पर राजनीति किए बिना नहीं बन सकती। और सबसे बड़ी बात वो हैसियत बिना लोगों की quality of life पर ध्यान दिए नहीं बन सकती।
वरना एक वक़्त के बाद न आपका मध्यवर्ग यहाँ रुकेगा और न ही बाक़ी दुनिया के लोग यहाँ बसने या रहने आएँगे। और जब तक दुनिया के लोग बड़ी तादाद में आपके यहां घूमने, रहने, काम करने नहीं आएँगे तब तक वो दूर-दूर से आपको लेकर एक हवाई छवि ही बनाते रहेंगे। और जब तक वो दूर दूर से आपके बारे में छवि बनाएंगे तब तक मंगल मिशन पर गाय और एलिट क्लब जैसे भद्दे कार्टून बनते रहेंगे।
इसलिए देश पर ध्यान दीजिए, उसकी तरक़्क़ी और तेज़ करने पर ध्यान दीजिए, क्वालिटी ऑफ लाइफ पर ध्यान दीजिए, innovation पर ध्यान दीजिए। इन सब चीज़ों पर ध्यान दिया भी जा रहा है लेकिन अपने विकास को उस हद तक ले जाने की ज़रूरत है जहां हमारी संप्रभुता और लड़ाइयां किसी और की रज़ामंदी की मोहताज न हो।
-Neeraj Badhwar
Operation Sindoor had a team of over 1.4 billion rising in unison. Strong resolve and measured restraint, Team India!
Remarkable teamwork across all levels led by tireless efforts of Hon. PM @narendramodi ji and his team and the three defence forces.
A special mention to the brave rakshaks and our citizens living in border towns and villages.
Jai Hind! 🇮🇳
@adgpi@IndiannavyMedia@IAF_MCC@PMOIndia@HMOIndia@SpokespersonMoD@MEAIndia
#OperationSindoor
भारत के आसमान की रक्षा एक-दो नहीं, मल्टीपल डिफेंस सिस्टम कर रहे थे. मल्टीलेयर्ड डिफेंस ग्रिड बनाया गया था.
इसका मतलब है कि हर लेयर पर अलग-अलग वेपन सिस्टम तैनात थे. बाहर से आई कोई चीज़ पहली लेयर से बच गई तो दूसरा उसे किल कर देता, दूसरी से बच गई तो तीसरा. और सभी से बच गई तो सबसे पीछे लगा सबसे अत्याधुनिक सिस्टम (संभवत: S-400) उसका ख़ात्मा कर देता.
पुराने-नए सिस्टम मिलाकर ये बाड़ेबंदी की गई थी.
इसका डायग्राम पेश करते हुए DGMO ले. जन. राजीव घई को एक क़िस्सा याद आ गया— “70 के दशक में जब मैं स्कूल में था, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया का मैच चल रहा था. ऑस्ट्रेलिया के घातक गेंदबाज़ जेफ थॉमसन और डेनिस लिली अंग्रेज़ बल्लेबाज़ी क्रम की बखिया उधेड़ रहे थे. तब ऑस्ट्रेलिया की ओर से एक कहावत कही गई- “ashes to ashes, dust to dust, if Thommo don't get ya, Lillee must.”
थॉमसन तुम्हें ख़लास नहीं करेगा तो लिली कर देगा.
भारतीय जनरल्स का जवाब नहीं.