Delhi police can say it didn't use Shock-batons. But Shock batons were used by RAF gear, which was working alongside Delhi Police and deployed in and around Jantar Mantar.
सोचो एक बंदे के इस्तीफे से ये सब रुक सकता है -
1- अराजकता
2- आंदोलन
3- सरकार का खर्च
4- सरकारी संपत्ति का नुकसान
5- पार्टी की गिरती इमेज
6- छात्रों का नुकसान
लेकिन अहंकार सर में चढ़ गया है, अब पतन होकर ही रहेगा।
जो लोग प्रधानमंत्री मोदी के निवास के बाहर विपक्ष के प्रदर्शन को खतरा मानते हैं,मैं उनसे क़तई सहमत नहीं हूँ।मोदी जी खुद कहते हैं कि मेरी देश की 140 करोड़ जनता के प्रति जवाबदेही है और जो लोग विरोध कर रहे हैं,उन्हें भी तो जनता ने ही चुना है।फिर अपने लोगों से कैसा खतरा ?
इतनी मासूम शिकायत. चैनलों पर दलाल एंकरों के साथ मिलकर जो बेशर्म जुगाली आप लोग करते है उसकी क़ीमत ये रिपोर्टर चुका रहे हैं. व्हाट्सएप पर सरकारी निर्देश लेकर हर असहमति को विदेशी साज़िश, हिंदू विरोध, राष्ट्र विरोध घोषित करने वाले. जनद्रोही स्टुडियोजीवी इसके लिए ज़िम्मेदार हैं.
मूल बात क्या है? मूल बात है कि गोदी मीडिया लोकतंत्र का हत्यारा है।
आप अगर-मगर के सहारे इससे नहीं बच सकते। कुछ अच्छे लोग हमेशा हैं, रहेंगे।उन्हें निशाना मत बनाइये, हिंसा और हुड़दंग नहीं होनी चाहिए। तब भी गोदी मीडिया की सच्चाई नहीं बदल जाएगी। जनता को हर दिन जागना होगा। आज इस मीडिया पर आप गर्व नहीं कर सकते. इसके न्यूज़ रूम के लोग भी शर्म से सहमे रहते हैं। अभी भी ज़रूरत है कि देश की हर पंचायत में पोस्टर लगना चाहिए कि गोदी मीडिया लोकतंत्र का हत्यारा है।हर पार्टी के दफ्तर के बाहर यह पोस्टर लगा होना चाहिए। एयर पोर्ट पर स्पेस ख़रीद कर यह नारा लिखा जाना चाहिए। लोगों को अपनी कार के पीछे लिखना चाहिए। इस गोदी मीडिया ने लोकतंत्र के हर कोने में सड़न पैदा कर दी है। इसके कारण कुर्सी पर बैठा हर शख़्स ख़ुद को ख़ुदा समझ बैठा है। सांसद तक लूटे जा रहे हैं। विपक्षी पार्टियाँ लूट ली जा रही हैं। वोट का अधिकार छीना गया है। इसी मीडिया के सामने। इसलिए मूल बात है कि गोदी मीडिया लोकतंत्र का हत्यारा है।
हिन्दू अख़बार की रिपोर्ट कहती है कि,दिल्ली में छात्रों पर पेलेट गन का इस्तेमाल किया गया।इससे पहले 2024 में हरियाणा में किसानों पर,2023 में मणिपुर में और 2016 में कश्मीर में पेलेट गन का इस्तेमाल किया गया था।
हैरानी नहींहोती। पहले भाषा ख़राब होती है फिर काम, इस केस में काम ख़राब हुआ फिर भाषा ख़राब हुई। यह बेपरवाही इसीलिए है कि इनके पास ज्ञानेश का प्रिंटर है। सब कुछ छपा छपाया आ जाता है, वरना जनता का लिहाज़ हर सरकार करती है।