Hello @AshutoshRanka@abhijeet_dipke@SauravDassss. Please tell us who these people are:
• Ajay Agarwal
• Rishi Makhija
• Divjot Singh
• Siddharth Chowdhary
Waiting for your answer.
Seven years ago, on this day, Articles 370 and 35(A) became history, marking a decisive new chapter in the journey of Jammu and Kashmir as well as Ladakh.
Since then, the lives of the people of J&K and Ladakh have witnessed wide-ranging transformation. Infrastructure has expanded, opportunities in areas such as education, healthcare, entrepreneurship and sports have grown. Be it the women or the marginalised communities, those who were denied their basic constitutional rights for decades have been empowered thanks to the full application of the Constitution of India.
5th August this year assumes even greater significance as this is the year our nation commemorates the 125th birth anniversary of Dr. Syama Prasad Mookerjee. His lifelong commitment to national unity continues to inspire generations. What he envisioned decades ago found historic fulfilment on 5th August 2019.
We reaffirm our commitment to the progress of Jammu and Kashmir as well as Ladakh and to ensure that every citizen has the opportunity to dream big, achieve and contribute to the making of a Viksit Bharat.
#Article370Abrogation
நேற்று வைகை ஆற்றை சுத்தம் செய்தபோது, "இதைவிட மோசமான மாசு இருக்க முடியுமா?" என்று தோன்றியது.
பிறகு திரு. உதயநிதி ஸ்டாலின் அவர்களின் பேச்சைக் கேட்டேன்...
Congratulations to every student in India on the passage of the Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026 in Lok Sabha today.
The bill shields the dreams and aspirations of our youth by laying down iron-clad provisions imposing the harshest punishment on those who dare to breach the sanctity of public examinations.
The Modi govt will spare no one who attempts to imperil the future of our students and will leave no stone unturned to ensure that they face the full wrath of the law.
ठीक 15 साल पहले…
सुबह का सूरज भी नहीं निकला था, लेकिन कानपुर और लखनऊ में एक इंजीनियरिंग परीक्षा का प्रश्नपत्र खुलेआम बिक रहा था — कीमत थी ₹6 लाख।
उस समय देश के शिक्षा मंत्री कपिल सिब्बल थे और सीबीएसई के चेयरमैन विनीत जोशी। AIEEE परीक्षा सीबीएसई ही कराती थी।
उधर देशभर में लाखों छात्र परीक्षा केंद्रों पर बैठ चुके थे। इधर उत्तर प्रदेश पुलिस ने पेपर लीक का खुलासा किया और इसकी जानकारी दिल्ली तक पहुंची। सवाल उठे, लेकिन किसी बड़े स्तर पर जवा��देही तय नहीं हुई। नया प्रश्नपत्र भेजकर दोबारा परीक्षा करा दी गई और मामला ठंडा पड़ गया, जैसे कभी कुछ हुआ ही नहीं।
ऐसी घटनाओं ने समय के साथ पेपर लीक की समस्या को और गंभीर बना दिया।
आज तस्वीर अलग है। पेपर लीक के मामलों में गिरफ्तारियां होती हैं, सख्त कानूनों के तहत कार्रवाई होती है, जांच तेज होती है, अधिकारियों पर जवाबदेही तय होती है और सरकार पर लगातार दबाव बना रहता है। सोशल मीडिया ने भी हर माम��े को राष्ट्रीय बहस का विषय बना दिया है।
बस यही सबसे बड़ा फर्क है।
2011 में बहुत कम लोगों ने पूछा था कि जिम्मेदारी कौन लेगा, जांच कहां तक पहुंची और किस पर कार्रवाई हुई। आज जनता सवाल भी पूछती है और जवाब भी मांगती है।
लोकतंत्र में यही जागरूकता व्यवस्था को बेह���र बनाने की सबसे बड़ी ताकत है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की सरकार लगातार इस व्यवस्था को और सुदृढ़ करने के लिए प्रयासरत है।
1-मिस काल पर गैस सिलेण्डर।
2-आनलाइन बिलों का भुगतान।
3-यू पी आई पेमेन्ट।
4-डीजी लाॅकर।
5-जन औषधि केन्द्र।
6-आयुष्मान कार्ड।
7-नयी संसद भवन।
8-फ्री वैक्सीनेशन।
9-जन धन योजना।
10-सर्जिकल स्ट्राईक।
11-ऑपरेशन सिन्दूर।
12-तीन तलाक़ बिल।
13-आधार लिंक।
14-फास्ट टैग।
15-चिनाब ब्रिज।
16-जम्बू की सुरंग।
17-गंगा एक्सप्रेस-वे।
18-काशी कोरीडोर।
19-विश्वनाथ कोरीडोर। 20-केदारनाथ पुनर्निर्माण।
21-श्री राम मन्दिर निर्माणह
22-सुकन्या समृद्धि योजना।
23-शौचालयों का निर्माण।
24-रेलवे पटरियों का दोहरीकरण।
25-रेलवे स्टेशनों का विस्तार।
26-टिकट बुकिंग में दिन कम।
27-टिकट कैंसिलेशन सुविधा।
28-स्वर्णिम चतुर्भुज योजना।
29-भारत माला प्रोजेक्ट।
30-18 एम्स का निर्माणह
31-S I R
32-महात्मा गाँधी सेतु पुनर्निर्माण।
33-भूपेन हजारिका सेतु।
34-सेना का आधुनिकीकरणह।
35-मेक इन इण्डिया।
36-ड्रोन क्रान्ति।
37-किसानों के खाते में सीधे पैसे। 38-राशन डिजिटलाईजेशन।
39-फ्री राशन।
40-कन्या सुमंगला योजनाह
41-G S T लागू करना।
42-G S T में भारी कटौती।
43-सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्ष।
44-तालाबों का निर्माण।
45-हर घर नल से जल।
46-22 घण्टे बिजली।
47-इनकम टैक्स में अभूतपूर्व छूट।
48-धारा 370 का हटाना। 49-553 नये रेलवे स्टेशन। 50-1500 नये ओवर ब्रिज। 51-200 से अधिक बेकार कानून हटाना।
52-E D के रिकार्ड तोड भ्रष्टाचारियों पर छापे।
53-3000 रु में फास्ट टैग की वर्षभर की छूट।
54-E V M में VVPAT लागू करना।
55-कर्तव्य पथ मार्ग।
56-नोटों में सांस्कृतिक धरोहरों के चित्र।
57-नांलदा यूनिवर्सिटी का पुनर्निमाण।
58-तेजस का घरेलू उ��्पादन।
59-सेल फोन निर्माण में आत्मनिर्भरता।
60-मुद्रा योजना।
61-उज्ज्वला योजना।
62-सुरक्षा बीमा।
63-390 नये विश्वविद्यालय
64-7 नये ीत
65-7 नये IIM
66-16 नये IIIT
67-300 नये मेडिकल कालेज।
68-पम्बन ब्रिज का निर्माण।
69-ऋषिकेश -कर्णप्रयाग रेलवे प्रोजेक्ट।
70-उत्तराखंड चारधाम सड़क निर्माण।
71-ब्रह्मोस उत्पादन फैक्ट्री।
72-असाल्ट रायफल निर्माण अमेठी।
73-वन्दे भारत आधुनिक ट्रेनें।
74-वक्फ बोर्ड प्रापर्टी पर कानून।
75-रेलवे में बायोट्वायलेट।
76-श्रम हित के श्रम कानूनों को लागू करना।
77-G RAM जी योजना लागू करना।
78-सड़कों के निर्माण में भारत चीन को पीछे छोड़ चुका है।
79-12 लाख युवाओं को सरकारी नौकरियाँ।
80-8 लाख से अधिक कार्मिशियल लाइसेंस आवन्टन।
81-80,000 नये पैट्रोल पम्प।
82-शौर्य स्थल का निर्माण।
83-रेल बजट का आम बजट में विलय।
84-9000 से अधिक नये स्कूल। 85-अवैध निर्माणों पर बुल्डोजर। 86-बार्डर पर फैन्सिंग।
87-आर्मी को आतंक के विरुद्ध खुली छूट।
88-विकास कौशल योजना।
89-विमुद्रीकरण।
90-टोल नाके समाप्त करके फास्ट टैग सुविधा।
91-चन्द्रयान।
92-मंगल मिशन।
93-मल्टी सैटेलाईट स्टैबिलाइजेशन।
94-बिहार में बाढ प्रभा��ित क्षेत्रों को कम करना।
95-लाईनें ख़त्म।
96-स्मार्ट सिटी विस्तार।
97-किसानों को यूरिया कोटिंग।
98-P F निकालना सुविधाजनक हुआ।
99-निजी और घरेलू क्षेत्रों में 5 करोड़ से अधिक नये रोज़गार का सृजन।
100-कृर्षि कानून पारित हुये होते तो दलाली भी ख़त्म होती और मण्डियों पर बहुत से बांग्लादेशियों के अवैध कब्ज़े भी ख़त्म हुये होते।
इसलिये भाजपा और मोदी जी के साथ डटकर खड़े रहिये, और विपक्ष की साज़िशों को समझिये।