सामाजिक जिम्मेदारी और सेवा
सच्ची मानवता हमें समाज की सेवा में अपना जीवन समर्पित करते हैं। हमारे बहुजन महानायकों का मानना था कि व्यक्तिगत सफलता तब तक अधूरी है, जब तक हम समाज के पिछड़े, शोषित और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए नहीं जुटते।
महात्मा ज्योतिबा फुले जी ने समाज सुधार को अपना मिशन बनाया। उन्होंने स्त्री शिक्षा और आत्मसम्मान के लिए संघर्ष किया। उनका संदेश था:
“बिना शिक्षा के बुद्धि नष्ट हो जाती है, बिना बुद्धि के नैतिकता नष्ट हो जाती है, बिना नैतिकता के विकास नष्ट हो जाता है, बिना विकास के धन नष्ट हो जाता है, बिना धन के शूद्र नष्ट हो जाते हैं।”
“शिक्षा ही आत्मसम्मान और गरिमा पाने का एकमात्र साधन है।”
सावित्रीबाई के साथ उन्होंने पहला लड़कियों का स्कूल खोला — यही तो असली सामाजिक जिम्मेदारी और सेवा थी।
डॉ. बी.आर. आंबेडकर जी ने स्पष्ट कहा:
“एक महान व्यक्ति और एक प्रतिष्ठित व्यक्ति में यही अंतर है कि महान व्यक्ति समाज का सेवक बनने को तैयार होता है।”
“शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो।”
“सामाजिक स्वतंत्रता के बिना राजनीतिक स्वतंत्रता व्यर्थ है।”
बाबासाहेब ने न सिर्फ संविधान रचा, बल्कि पूरे जीवन समाज की सेवा को अपना धर्म बनाया।
छत्रपति शाहूजी महाराज ने 1902 में ही 50% आरक्षण देकर पिछड़ों को शिक्षा और नौकरियों में अवसर दिए। उन्होंने मुफ्त प्राथमिक शिक्षा अनिवार्य की और कहा कि “शिक्षा ही पिछड़े वर्गों को पिछले बोझ से मुक्त करने का एकमात्र उपाय है।”उनका पूरा शासन समाज के कमजोर वर्गों की सेवा और उत्थान में समर्पित था।
मान्यवर कांशीराम जी ने बहुजन समाज को राजनीतिक जागरूकता दी। उन्होंने कहा:
“जो राजनीति में हिस्सा नहीं लेते, उनका हिस्सा राजनीति वाले ले लेते हैं।”
“हम सामाजिक न्याय नहीं, सामाजिक परिवर्तन चाहते हैं।”
“समाज की सेवा के लिए हमें अपनी ताकत पर खड़े होकर लड़ना होगा।”
उन्होंने सिखाया कि सच्ची सेवा राजनीतिक शक्ति के माध्यम से समाज की आर्थिक और सामाजिक दशा बदलने में है।आइए इन महानायकों के आदर्शों पर चलें —
अपने आस-पास के गरीबों, दलितों, महिलाओं और पिछड़ों की मदद करें।
शिक्षा फैलाएं, एकता बनाएं और समाज की सेवा को अपना जीवन-लक्ष्य बनाएं।
सेवा ही सच्चा धर्म है। सेवा ही सच्ची क्रांति है।
जय भीम! जय फुले! जय शाहू! जय कांशीराम!
#SocialResponsibility #SamajSeva #DrAmbedkar #JyotibaPhule #ShahuMaharaj #KanshiRam #BahujanHitay #JaiBhim
स्व-गणना - 7 मई से 21 मई 2026
इस दौरान आप स्व-गणना पोर्टल के माध्यम से अपनी जानकारी जनगणना फॉर्म में स्वयं भर सकते है ।
स्व-गणना हेतु https://t.co/kJGkxOiZHp
शायद यह वीडियो वायरल नहीं होता, तो राष्ट्रीय मानव का दर्जा प्राप्त बैगा आदिवासी के साथ एक माह पूर्व हुई बर्बरता मोदी जी के विकसित भारत की यात्रा में कहीं गुम हो जाती।
यह वीडियो मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिले के निगाही परियोजना क्षेत्र का है। एक माह पहले बैगा आदिवासी अपनी पत्नी के साथ जंगल में जड़ी-बूटी व लकड़ी लेने के लिए गया हुआ था। उक्त परियोजना क्षेत्र में सरकार द्वारा नियुक्त प्राइवेट सिक्योरिटी एजेंसी के सुरक्षाकर्मियों ने नजदीकी जंगल में अपनी आजीविका के लिए घूम रहे बैगा आदिवासी को बुरी तरह से पीटकर अधमरा कर दिया।
बैगा आदिवासी के साथ हुई बर्बरता की न तो किसी ने पीड़ा सुनी और न ही कोई कार्यवाही हुई। जब यह एक माह बाद वीडियो वायरल हुआ, तो पुलिस हरकत में आई और प्रकरण दर्ज कर कार्यवाही की खानापूर्ति की।
अब सवाल यह है कि क्या अगर वीडियो वायरल नहीं होता, तो इस राष्ट्रीय मानव बैगा आदिवासी के साथ बर्बरता करने वाले कायर सुरक्षाकर्मियों पर मुकदमा दर्ज होता ?
सवाल यह भी है कि इस तरह देश में कितने आदिवासियों और दलितों के साथ प्रतिदिन बर्बरता होती होगी ? लेकिन शायद उनके वीडियो वायरल नहीं होते होंग
मुख्यमंत्री @DrMohanYadav51 भाषणों व होर्डिंग्स में ही आदिवासी और दलितों के विकास व न्याय की बात करने से काम नहीं चलेगा। जिन जंगलों को उद्योगपतियों के हवाले कर आदिवासियों को विस्थापित करने का काम किया जा रहा है, उन जंगलों को आदिवासियों ने अपना घर समझकर संभाला है।
गृह मंत्री @AmitShah जी, शायद आपने नक्सलवाद मुक्त होने का दावा नहीं किया होता, तो ये प्राइवेट गुंडे इस आदिवासी को भी मारकर नक्सलवादी घोषित कर देते ?
प्रधानमंत्री @narendramodi जी, उक्त घटना के साथ-साथ पूरे देश में आदिवासियों को जंगलों में इस तरह प्रताड़ित किया जाता है, उन सभी पर अंकुश लगाया जाए।
महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी, बैगा आदिवासी को राष्ट्रीय मानव का दर्जा प्राप्त है। आप एक सर्वोच्च पद पर होने के साथ ही आदिवासी समुदाय से आती हैं। आदिवासी क्षेत्रों में असंवैधानिक रूप से आने वाली समस्त परियोजनाओं पर रोक लगाकर आदिवासियों को संरक्षण प्रदान करें।
@rashtrapatibhvn@Bap12MP@MlaDKamleshwar@komal_dhopiya@ndtv@TheQuint@TOIIndiaNews@News18MP@mpbreakingnews@patrika_mp@MpDainik
@tarunjatav50 भारत में मानसिक स्वास्थ्य के लिए अभी जितने प्रचार प्रसार और संस्थागत ढांचे की जरूरत है उतना हमारे पास उपलब्ध नहीं है। मानसिक स्वास्थ्य को छात्र जीवन से ही बेहतर करने के लिए भारत में विशेष प्रकार के प्रावधानों की आवश्यकता है। हमें इस तरफ ज्यादा प्रचार करना चाहिए ।
@tarunjatav50 आत्मकथा करना अपने आप में अपराध है। और यह मानसिक कमजोरी का उदाहरण है। ऐसे तमाम उदाहरण है जहां शारीरिक शोषण , मानसिक और आर्थिक हर तरह का शोषण सहकर भी बहादुर लोग संघर्ष का रास्ता चुनते हैं और कामयाब होकर अपने संघर्ष को एक उदाहरण की तरह पेश करते हैं।
जनमत बदलना एक बात है और सत्ता में बैठे लोगों के व्यवहार में बदलाव लाना दूसरी बात। जब किसी व्यक्ति का मत स्वार्थ से जुड़ा नहीं होता, तो वाद-विवाद, चर्चा या आलोचना आदि के माध्यम से उसके विचारों में बदलाव लाना आसान होता है।
लेकिन जब इस मत में निहित स्वार्थ शामिल होते हैं, तो केवल समझाने-बुझाने या लुभाने से उसका व्यवहार नहीं बदला जा सकता। इसके लिए उसके स्वार्थों पर प्रहार करना आवश्यक है। यह मानवीय व्यवहार का एक सामान्य नियम है। हर कोई इसका सामना करता है।
इस नियम/रणनीति को विचारशील (निष्क्रिय) लोगों पर लागू किया जाना चाहिए।
#democracy #PublicAwareness #justice #equality
Changing the public opinion is one thing and bringing the change in the behavior of people in power is another thing. When the opinion of the human is not entangled with Self interests, then bringing change in their thoughts will be easier with debates, discussions or criticism etc. But when this opinion has vested interests, then their behavior cannot be changed only by convincing or luring. There is a need to attack their self interests. This is a common law of human behavior. Everyone encounters it. This law (tactic) should be applied while dealing with thoughtful (but actionless).
@BeASatwikSathi@RTIExpress@praveenrpal82@ThePSFront@NimSahab
@rajkumarbhatisp विद्वता केवल कुछ जानकारी को रट लेने में नहीं है। बल्कि उन सिद्धांतों को समझने में और चरितार्थ करने में है जिसे समाज में वास्तविक समता स्थापित की जा सकती है। परंतु समाजवाद का चोला ओढ़ने वाले अधिकांश तो पाखंडी हैं ढोंगी है। #casteinequlity#genderinequlity
@rajkumarbhatisp आप तो बड़े समतावादी विचारधारा के लगते हैं जब मंचों से भाषण देते हैं। बहादुरी पुरुषों की जागीर समझने वाली कहावत आप कह रहे हैं।
यह ऐसे ही कहावत है जैसी जातिगत मानसिकता के कारण लोग यदा कदा कहते रहते हैं।
#genderinequality#casteinequlity
@jitu_rajoriya ऐसे ही प्रक्रिया हमारे राष्ट्रीय संगठन में चल रही है। सब एक दूसरे का नंबर आने पर खुश होते हैं परंतु वास्तविकता यह है जो आज खुश हैं वह कल दुखी होंगे। और यह क्रिया अनवरत चलती रहेगी जब तक लोग सिंडिकेट को पहचान नहीं लेते और उसके खिलाफ कोई सामाजिक कार्रवाई नहीं करते है।*
@jitu_rajoriya प्रभारी हर जगह हर राज्य में राज्य को मनमानी ढंग से चलाते हैं परंतु किसके इशारे पर चलाते हैं ?
*एक ऐसी फिल्म चल रही है जिसमें कोई सिंडिकेट (पर्दे के पीछे छुपे असली विलन) लोगों को चुन चुन कर अपना मकसद हल करवाते हैं और फिर उन्हें आपस में लड़ा कर मरवा देते हैं।
पत्थर तोड़ने वाली गरीब महादलित महिला भगवती देवी ने लोकसभा में खड़े होकर चेतावनी दी थी ।🚨
“महिला आरक्षण में कोटा के भीतर कोटा नहीं होगा तो सदन में सिर्फ रानियाँ आएंगी…
घास काटने वाली, पत्थर तोड़ने वाली हमारी बहनें नहीं आएंगी!”
तीन दशक बाद 2023 में जब बीजेपी ने महिला आरक्षण बिल पास कराया, तो पूरा क्रेडिट खुद ले लिया।
पर कोटा के भीतर कोटा (OBC/SC/ST महिलाओं के लिए सब-आरक्षण) को जानबूझकर छोड़ दिया।
जिस बात की माँग भगवती देवी जैसे गरीब की बेटी ने दशकों पहले की थी, उसे आज भी ठंडे बस्ते में रख दिया गया।
क्योंकि सच्ची सामाजिक न्याय की बात आती है तो BJP सिर्फ फोटो खिंचवाना पसंद करती हैं, लड़ाई लड़ना नहीं।
सम्मान उन असली आवाजों को, जिन्होंने पत्थर फोड़कर भी हक की लड़ाई नहीं छोड़ी।
महिला आरक्षण लागू होने वाला है, इस पर बहुजन वर्ग के नेताओं और जनता को पुरजोर आवाज़ उठाना चाहिए, महिला आरक्षण के अंदर SC ST OBC आरक्षण होना चाहिए, अन्यथा इलीट वर्ग की महिलाएं ही संसद पहुंचेगी,
जब इलीट वर्ग की महिलाएं ही संसद पहुंचेगी तो वो आपके हितों की बात कभी नहीं उठाएगी, एक वर्ग विशेष की महिलाओं का दबदबा बढ़ जाएगा, लोकतंत्र के मायने ख़त्म हो जाएंगे,
एक गरीब की बेटी कभी सांसद नहीं बन पाएगी, सुदामा कोटे की तरह इसमें ढिलाई मत बरतिए अन्यथा बहुजन वर्ग पुनः गुलाम हो जाएगा ।
🚨 ब्रेकिंग - ये आंकड़े तो एकदम चौंकाने वाले हैं।
Dainik Bhaskar की रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम बंगाल में बड़ी संख्या में वोट डिलीट किए गए हैं जिसमें,
हिंदू - 63.4 %
मुस्लिम - 34.3 %
BJP और उसका IT Cell खुद को “प्रो-हिंदू” बताता है लेकिन पश्चिम बंगाल में सबसे ज़्यादा वोट कटे तो हिंदुओं के ही कटे और इसका सबसे ज्यादा असर मातुआ हिंदुओं पर हुआ है।
अब वक्त है कि वोटर अपनी ताकत दिखाएं क्योंकि लोकतंत्र में सबसे बड़ी ताकत जनता की ही होती है।
मरहूम शरद यादव जी ने संसद में एक बहुत साफ और ईमानदार बात कही थी "हम महिला आरक्षण के विरोधी नहीं हैं, आप चाहें तो इसे और बढ़ा दीजिए, लेकिन इसमें “कोटा में कोटा” क्यों नहीं?" यह सवाल आज भी उतना ही अहम है, क्योंकि मुद्दा सिर्फ महिलाओं की संख्या बढ़ाने का नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय को सही मायनों में लागू करने का है। अगर आरक्षण के भीतर ही बराबरी का ध्यान नहीं रखा जाएगा, तो क्या सचमुच दलित, पिछड़ी और वंचित समाज की महिलाओं को उसका पूरा लाभ मिल पाएगा?
भारत का सामाजिक ढांचा पहले से ही असमान रहा है। ऐसे में यह मान लेना कि महिला आरक्षण का लाभ अपने आप सभी वर्गों की महिलाओं तक बराबर पहुंच जाएगा, हकीकत से आंखें मूंदना है। समाजवादी धारा शुरू से कहती रही है कि महिला आरक्षण ज़रूरी है, लेकिन उसके भीतर भी प्रतिनिधित्व का संतुलन सुनिश्चित होना चाहिए, ताकि राजनीतिक हिस्सेदारी कुछ चुनिंदा वर्गों तक सीमित न रह जाए।
आज जब महिला आरक्षण लागू करने की बात हो रही है, तो यह जरूरी है कि उस मूल सवाल को नजरअंदाज न किया जाए जिसे शरद यादव ने उठाया था। लोकतंत्र की मजबूती तभी संभव है जब भागीदारी केवल प्रतीकात्मक न होकर वास्तव में समावेशी हो। महिला आरक्षण के साथ “कोटा में कोटा” की मांग इसी समावेशी सोच का हिस्सा है।
#Quota_Within_Quota
#WomenReservationBill
Dear International Media, Indian 🇮🇳 brothers and sisters,
Before posting about Nepal’s new leadership, I kindly request you to do proper research on Hon. Balendra Shah (Balen) @ShahBalen -the newly sworn-in Prime Minister of Nepal 🇳🇵.
Born on April 27, 1990 in Kathmandu, Balen Shah rose from the streets to the highest office through sheer talent, courage, and vision.
He first gained fame as a powerful rapper whose music fearlessly spoke about corruption, inequality, and the struggles of Nepali youth. His debut track “Sadak Balak” (Street Child) in 2012 and his explosive performances in Raw Barz helped spark Nepal’s underground hip-hop scene.
A qualified structural engineer with a Bachelor’s in Civil Engineering from Kathmandu and a Master’s in Structural Engineering from Nitte Meenakshi Institute of Technology in Bengaluru, India 🇮🇳, he later served as Mayor of Kathmandu (2022–2026), where he challenged the old political establishment with bold reforms.
After the historic 2025 Gen Z protests displaced traditional elites, Balen emerged as a symbol of a new Nepal - dynamic, youthful, and uncompromising against systemic failures. Today, at just 35, he leads the nation as its Prime Minister.
Respect the journey. Understand the man. Report responsibly.
Have a look at his inspiring bio before forming opinions.
Jai Nepal 🇳🇵 | Respect to our Indian friends 🇮🇳
@VictorPaudelx
राहुल गांधी ने कांशीराम जी के लिए भारत रत्न की मांग करते हुए पत्र लिखा है।
2008 में, जब मायावती ने कांशीराम के लिए भारत रत्न की मांग की थी, तब सत्ता में रही कांग्रेस ने यह कहते हुए मांग को ठुकरा दिया था कि भारत रत्न राष्ट्रीय व्यक्तित्वों को दिया जाता है। काशीराम इतने बड़े व्यक्तित्व नहीं है कि उन्हें भारत रत्न दिया जाए
वीरप्पा मोइली ने कहा था कि भारत रत्न के लिए किसी को भी 'लॉबी' नहीं करनी चाहिए।
कांशीराम ने बसपा बनाई और अपना पूरा जीवन दलित विरोधी कांग्रेस की आलोचना में बिताया, जबकि कांग्रेस नेता उन पर लगातार हमले करते रहे।
उत्तर प्रदेश चुनावों से पहले राहुल गांधी की यह मांग केवल राजनीति के लिए है, बसपा के दलित वोट हासिल करने की कोशिश है।