Shri Ratan Tata Ji was a visionary business leader, a compassionate soul and an extraordinary human being. He provided stable leadership to one of India’s oldest and most prestigious business houses. At the same time, his contribution went far beyond the boardroom. He endeared himself to several people thanks to his humility, kindness and an unwavering commitment to making our society better.
देवठान के कहानी
- शशि रंजन मिश्र
कार्तिक के महिना में हमार आजी रोज भिनसारे दुआर पर शिवाला के इनार पे नहास... ओहिजे तुलसी जी के दीया बारस...
जगा द राम तुलसी के भईले बिहान हो...
जे मोरा तुलसी से नेह लगयिहें रामा
जनम जनम अहिवात मिलि जयिहें हो राम...
जगा द राम तुलसी के..
हमरा बड़ा जबुन बुझाए कि हेतना फजिराहे इ पूजा कईला के क��� काम बा ? बाकी एतना मालुम रहे कि एही दिनवें ऊख चुसे के भी बरत आवेला ।
आजी पूजा करिहें... तुलसी महारानी के... बियाह करायिहें शालिग्राम से... ऊख के माड़ो गड़ाई... तुलसी के गाछ के औरतन जईसन सजावल जाई । चूड़ी टिकुली सेनुर सभे टिकाई ... लाल चुनरी ओढा के नवकि कन्या बना देहल जाई । मजगर खेल रहे हमरा खातिर... फेर घर भर के लोग गीत गाई-
कवना घरे तुलसी जी लिहली जनमवा
कवना घरे भयिली अहवात...
जगा द राम तुलसी के... भईले बिहान
ओही घरी हमनी के उ माड़ो के ऊख पे आपन हक जतायिब जा .... हई जरी (जड़) देने से चार पोर ऊख हमार... हई ऊख में सियार पदले बा... हम ना खायिब ।
( ऊख जब पाक जाला त कवनो कवनो पोर से फाट जाला, ओही जगह पे सब रस इकठ्ठा हो के , सुख के लाल हो जाला... हमनी के उहे कहीं जा कि इ सियार के पादल ह,एही से फाट गईल बा ) होत बिहान, हमनी के ओह माड़ो में से ऊख निकाल निकाल चूस जायिब जा ।
हमा�� बाबा, बड़हन कर्मकांडी... उनके श्रीमुख से सुनल कथा के एहिजा अपना से मगज से लबरत बानी –
इ कथा ब्रह्मा जी कहले... देवता लोग के कहला पे...ए हो देवता लोग, जानते बाड़... बुढा गईनी... दोसरकन के जिनगी के रूप गथे में थाक गईल रहीं त अन्घी लाग गईल । एह सुतला में हमार मुंह खुला रह गईल । ओह घरी एग�� राक्षस ... नांव ओकर शंखासुर ... बड़ा बदेल रहे... भयंकर उत्पाती । हमार मुंह त खुला रहले रहे... उ हमार मुंह में खेलत सभे वेद लोग के उठा ले गईल... वेद लोग हमार लईका... अब हम बुढा से उ राकस धराये के मान के रहे !!?? उ त लेके समुन्दर के तली में समा गईल । हमरा कुछो बुझाईल ना त बिसनु भगवान भी गईनी । अब रउरे आसरा बा... सब वेदन के हमरा के लौटाईं ।
तब बिसनु भगवान मछली बन के समुन्दर में गईले... बड़ा घनघोर लड़ाई भईल... शंखासुर के ���ार के वेद के अपना साथे लईले । बाकी एह लड़ाई में बिसनु भगवान थाक गईले । सुस्ताये खातिर शेषनाग के शैया पे लेटले त नींद लाग गईल । नींद अस कि टूटे ना... अब सभके चिंता भईल कि भगवाने सुत जयिहें त संसार के पालन के करी ?
बिसनु भगवान के तुलसी से बड़ा प्रेम... सभे देवता कहले कि जब ले भगवान नईखन जागत तब ले तुलसी माई संसार में कल्याण करिहें । तुलसी जी बैकुंठ से धरती पे आ गईली ... करीब चार महीना बाद बिसनु भगवान के देह हिलल... देवता लोग लगले मंगल गावे -
उत्तिष्ठोत्तिष्ठगोविन्द त्यजनिद्रांजगत्पते।
त्वयिसुप्तेजगन्नाथ जगत् सुप्तमिदंभवेत्॥
उत्तिष्ठोत्तिष्ठवाराह दंष्ट्रोद्धृतवसुन्धरे।
हिरण्याक्षप्राणघातिन्त्रैलोक्येमङ्गलम्कुरु॥
अब बिसनु भगवान के नींद टूटल त तुलसी के खोजले....
सभे कहल उ त राउरे कार करत बाड़ी संसार में, अब ज��� रउरा जाग गईनी त उनका के ले आयीं । बिसनु भगवान उनका के लावे एह संसार में अयिले । त तुलसी नवका दुलहिन बनके उनका भा गईली । दुनो जाना के बिरह दूर भईल आ फेर तुलसी बैकुंठ पधरली । आ बिसनु भगवान आपन डिउटी... अरे संसार के पालनकरता वाला.... संभलन ।
अब एह दिन के संसार के लोगन तुलसी आ बिसनु के बियाह के रूप में मनावेला । आ एही दिन बिसनु भगवान नींद से उठले त एकरा के देवठान (देव- उठान) कहल जाला ।
नवका पौधा ऊख के... मीठ – रसदार ... आ पानिफल सिंघाड़ा इहे कुल्ही पूजा में चढ़ावल जाला । कहे के त बिसनु भगवान के जागे के परब ह , बाकी देखल जाओ त इ अपना भीतर के देवत्व जगावे के परब ह । त परेम पूर्वक बिसनु-तुलसी के गीत गाईं, मीठ- मीठ ऊख चूसीं आ दुनिया में अपना के मीठ बनायीं ।
तुलसी लहरिया लाल, ए रामा मोरे अंगनवा
मोरे अंगनवा तुलसी जी के गछिया
ब्याह ले जयिहें शालिग्राम , ए राम�� मोरे अंगनवा....
[ नोट - पावन पर्व देवठान प इ लेख शशि रंजन मिश्र जी 2014 में लिखले रहनी आ ओहि साल आखर प लागल रहे । ]
1st National awarded #maithili film
#MithilaMakhaan streaming on https://t.co/jbypJkXn0T directed by @nitinchandra25
on 2nd oct. at 11am
❤
https://t.co/5cfO34nhGT
Jadav Payeng planted a forest singlehandedly, without any monetary support from anyone.
But world only knows @GretaThunberg whose only contribution is these 3 words: "How dare you?".
World needs to recognize it's true heroes, and not 5 Star activists.
Remote areas come with daunting challenges. To bridge the knowledge gap & to inculcate habit of reading among students & public we are trying to establish a Library at Pungro Nagaland.
Help us build it ! By sending books for our Library
@MinOfCultureGoI@abhish18@IASassociation
@Swamy39 The question that is being raised is not about an act of self defence,question is was it really an act of self defence? Encounter on grounds of self defence is understandable, staging an encounter is not! Hope UP govt and Police comes with sound evidence to prove their point.