मुंह पर कपड़े बांधकर पत्थर फेंकने वाले लड़कों को कुछ पढ़ने वाले छात्र रोक रहे हैं
मगर जो रुक नहीं रहे, जो सटीक निशाने पर पत्थर फेंक रहे हैं..वो कौन हैं?
इन सवालों पर जंतर मंतर मौन है!
दिल्ली पुलिस के सीसीटीवी कैमरे चुराने तोड़ने आंतक उपद्रव कर सरकारी प्राईवेट संपत्ति को नुक्सान पहुंचाने वाले पत्थरबाज
गाड़ी नं - DL8SDL5112 गाड़ी से इनकी जानकारी आसानी से निकाली जा सकती है।
@DelhiPolice Please look into this.
#Jantarmantar#trending
Mp #जबलपुर अगर आप रोज़ #चर्च जाते हैं और #ईसाई धर्म अपनाते हैं, तो हम आपको नौकरी से नहीं निकालेंगे” — #सेंट एलॉयसियस स्कूल, जबलपुर, MP।
#दलित हिंदू कर्मचारियों का आरोप है कि #फादर#जैकब और #जॉनी ने उन पर धर्म बदलने का दबाव डाला।
जिन्होंने इसका विरोध किया, उन्हें धमकाया गया और नौकरी से निकाल दिया गया।
जब उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो #हिंदू संगठनों ने स्कूल के साथ वही किया जो उन्हें करना चाहिए था
डॉक्टर कफील खान एक मासूम डॉक्टर की कहानी कहें या फिर मासूमों का क़ातिल ?
सच पढ़ने की हिम्मत है तो पढ़िए – पूरा थ्रेड्स 🤡
डॉक्टर कफील खान – नाम तो सुना ही होगा?
सुनते ही मुल्लों की आंखों में एक “मसीहा” की छवि उभर आती है, एक ऐसा डॉक्टर जिसने गोरखपुर के BRD मेडिकल कॉलेज में बच्चों की जान बचाने के लिए “सरकारी सिस्टम” से लड़ाई लड़ी थी??
मीडिया ने तो उसे हीरो ही बना दिया,
अवार्ड-वाले इकोसिस्टम ने उसे ‘विक्टिम’ बना दिया, और वामपंथी गैंग ने उसे भगवान बना दिया था 😡
लेकिन…अब ज़रा सच्चाई को X-ray वाली मशीन में रखता हूँ और आपको दिखता हूँ असली रिपोर्ट 🔥
लठैत, गुंडे, JNU में- "तिलक-तराजू और तलवार का नारा" लगा रहे हैं। खुलेआम-सरेआम अभद्र आपत्तिजनक घिनौनी टिप्पणी कर रहे हैं।
आप बस सोचिए गे गुंडे-गुंडी गरीब पीड़ित ब्राह्मणों/ठाकुरों/बनियों पर कितना अत्याचार करते होंगे। उनके साथ कितनी ज्यादती करते होंगे? इन गुंडों को खुली छूट मिल चुकी है? इन गुंडों पर कार्रवाई कब होगी?
हिन्दू ही नहीं दंगाइयों और उपद्रवियों के निशाने पर पुलिस भी थी
दो होम गार्ड जवानों की मौत, SHO के पेट में गोली मारना, दर्जनों घायल पुलिस कर्मियों पर हमले ये दर्शाता है कि धार्मिक यात्रा के समय पुलिस भी इन Gहादी दंगाइयों के निशाने पर थी..!!
#MewatTerrorAttack#MewatViolence #NuhConspiracy #HindusUnderAttack
एक ओर बापू आशारामजी को 10 साल में 1 बार भी जमानत नही दी गई
दूसरी ओर गुजरात दंगों में साजिश रचने वाली तीस्ता सीतलवाड़ को जमानत देने के लिए रात में सुप्रीम कोर्ट दो बार बैठी
निर्दोष को फसाने वालो को जमानत और निर्दोष को जेल ये कैसा न्याय है ?
पूरी पोस्ट👇
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अजमेर फाइल्स
अजमेर दरगाह के मौलाना नें आचार्य अंकुर आर्य के यह कहने पर FIR दर्ज करा दी है कि 1992 में 250 लड़कियों का रेप किया गया था ख़ादिमों द्वारा
जिसमें 6 लड़कियों नें आत्महत्या करली थी ।
पूरा मामला यह था ..
एक-एक कर फार्महाउस पर बुलाया गया सेकड़ो लड़कियों का रेप किया
अजमेर. आज से तकरीबन 25 साल पहले.
आदमियों का एक गैंग अजमेर के गर्ल्स स्कूल सोफ़िया में पढ़ने वाली लड़कियों को फार्म हाउसों पर बुला-बुला कर रेप करता रहा और घरवालों को भनक तक नहीं लगी. रेप की गई लड़कियों में आईएएस, आईपीएस की बेटियां भी थीं. ये सब किया गया अश्लील फोटो खींच कर. पहले एक लड़की, फिर दूसरी और ऐसे करके सौ से ऊपर लड़कियों के साथ हुई ये हरकत. ये लड़कियां किसी गरीब या मिडिल क्लास बेबस घरों से नहीं, बल्कि अजमेर के जाने-माने घरों से आने वाली बच्चियां थीं. सोफ़िया अजमेर के जाने-माने प्राइवेट स्कूलों में से एक है.
अधिकारी बोल देते हैं कि पता तो पहले से था. लेकिन कम्युनल टेंशन ना हो जाये कोई कदम नहीं उठाया गया.
फार्म हाउसों में बुला कर किया गया रेप
फारूक चिश्तीनाम के आदमी ने पहले सोफ़िया स्कूल की एक लड़की को फंसाया. लड़की की अश्लील फोटो खींच ली. बाद में इस फोटो के जरिये ब्लैकमेल करके और लड़कियां बुलाई गईं. डर कर लड़की अपनी दोस्तों को भी फार्म हाउस ले जाने लगी. उसकी दोस्त अपनी और दोस्तों को. एक के बाद दूसरी, दूसरी के बाद तीसरी. ऐसे करके एक ही स्कूल की करीब सौ से ज्यादा लड़कियों के साथ रेप हुआ. घर वालों की नज़रों के सामने से ये लकड़ियां फार्म हाउसों पर जातीं. कहते हैं कि बाकायदा गाड़ियां लेने आती थीं. और घरों पर छोड़ कर भी जातीं. लड़कियों की रेप के वक्त फोटोज खींच ली जातीं. फिर डरा-धमका कर और लड़कियों को बुलाया जाता. ये भी कहा जाता है कि स्कूल की इन लड़कियों के साथ रेप करने में नेता, सरकारी अधिकारी भी शामिल थे.
मास्टरमाइंड थे कांग्रेस यूथ लीडर
इस स्कैंडल के मास्टरमाइंड थे फारूक चिस्ती, नफीस चिस्ती और अनवर चिस्ती. तीनों ही यूथ कांग्रेस के लीडर थे. फारूक प्रेसिडेंट की पोस्ट पर था. इन लोगों की पहुंच दरगाह के खादिमों (केयरटेकर्स) तक भी थी. खादिमों तक पहुंच होने के कारण रेप करने वालों के पास राजनैतिक और धार्मिक, दोनों ही पॉवर थी. रेप की शिकार लड़कियां ज्यादतर हिंदू परिवारों से थीं. अधिकारियों को लगा कि केस का खुलासा होने से इसे ‘हिन्दू-मुस्लिम’ नाम देकर दंगे हो सकते हैं.
आगे चलकर ब्लैकमैलिंग में और भी लोग जुड़ते गये. आखिरी में कुल 18 ब्लैकमेलर्स हो गये. इन लोगों में लैब के मालिक के साथ-साथ नेगटिव से फोटोज डेवेलप करने वाला टेकनिशियन भी था.
मुंह खोलने वालों को मिली जान से मारने की धमकियां
इंडिया के सबसे बड़े सेक्स स्कैंडल में आने वाले इस केस ने बड़ी-बड़ी कोंट्रोवर्सीज की आग को हवा दी. जो भी लड़ने के लिए आगे आता, उसे धमका कर बैठा दिया जाता. इंडिया प्रेस ने यह दावा भी किया कि इस केस में उन्हीं लोगों को पकड़ा गया जिनका BJP से कोई कनेक्शन नहीं था. कहा गया कि सिर्फ कांग्रेसी लोगों को ही टारगेट बनाया गया है. अजमेर मुहल्ला समूह NGO ने जब केस के लिए लड़ाई शुरू की तो जान से मारने की धमकी की वजह से एक्टिविस्ट्स ने हाथ पीछे खींच लिए. कहते हैं वकील पारसम शर्मा को भी केस बंद करने की धमकियां मिलीं. लड़कियों के घरवालों ने तो सामने आने से ही मना कर दिया था.
एक के बाद एक, मरती गई लड़कियां
जिन लड़कियों की फोटोज खींची गई थीं, उनमें से कईयों ने सुसाइड कर लिया. एक ही साथ 6-7 लड़कियां मर गईं. न सोसाइटी आगे आ रही थी, न उनके परिवार वाले. डिप्रेस्ड होकर इन लड़कियों ने ये कदम उठाया. एक ही स्कूल की लड़कियों का एक साथ सुसाइड करना अजीब सा था. ये बात आगे चलकर केस को एक्सपोज करने में मददगार रही.
स्कैंडल का राज खोलने वाली दो लड़कियां
पुलिस और महिला संगठनों की कोशिशों के बावजूद लड़कियों के परिवार आगे नहीं आ रहे थे. इस गैंग में शामिल लोगों के नेताओं से कनेक्शन्स की वजह से लोगों ने मुंह नहीं खोला. बाद में किसी NGO ने पड़ताल की. फोटोज और वीडियोज के जरिए तीस लड़कियों की शक्लें पहचानी गईं. इनसे जाकर बात की गई. केस फाइल करने को कहा गया. लेकिन सोसाइटी में बदनामी के नाम से बहुत परिवारों ने मना कर दिया. बारह लड़कियां ही केस फाइल करने को तैयार हुई. बाद में धमकियां मिलने से दस लड़कियां भी पीछे हट गई. बाकी बची दो लड़कियों ने ही केस आगे बढ़ाया. इन लड़कियों ने सोलह आदमियों को पहचाना. ग्यारह लोगों को पुलिस ने अरेस्ट किया.
1992 से अब तक क्या हुआ केस में
केस से रिलेटेड कुछ बातें हैं जिनसे जाना जा सकता है कि क्या-क्या हुआ आरोपियों के साथ.
लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट..
सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रहे 22 साल के आशीष पर केस दर्ज किया गया
केस से नाम निकालने के लिए पुलिसकर्मियों ने 50 हज़ार रुपये मांगे, न देने पर प्रताड़ित किया
आखिर में आज आशीष ने आत्महत्या कर ली..
सुसाइड नोट में लिखा...
'राजमणि पाल, मोहित शर्मा और लल्लन प्रसाद (पुलिसकर्मी) ने मिलकर फर्जी FIR दर्ज की..!!
मैं सुसाइड करने जा रहा हूं... रहीमाबाद पूरा था भ्रष्ट है..!!'