रावण के साथ अब कॉकरोचों के पुतले जल रहे हैं,
अजब तमाशे हैं जो इस पावन धरा पर चल रहे हैं।
जो पूछे सवाल हक़ का, उसे गद्दार कह दिया,
हर उठती हुई आवाज़ को 'देशविरोधी' करार दे दिया।
खोलो ज़रा संविधान का वो पवित्र पन्ना,
जहाँ लिखा है हर नागरिक का निडर होकर जीना
नाना पाटेकर भी ऐसे ही एक अद्भुत कलाकार थे—
जिनकी आवाज़ में दर्द था,
संवादों में सच्चाई थी
और अभिनय में ऐसी गहराई, जिसे भूल पाना आसान नहीं।
“ज़िंदगी का हर पल आख़िरी समझकर जीना चाहिए…”
— नाना पाटेकर
🙏 भावपूर्ण श्रद्धांजलि 🙏
नमन उस महान कलाकार को