बिहार के DGP श्री गोल्डन दास ज��� हाल ही में MP का प्रोटोकॉल समझते पाए गए। DGP गोल्डन भाई ने सारे प्रोटोकॉल पढ़ रखे हैं, और इनके सारे लॉजिक गेट खुले हुए हैं।
और तो और, ये हाइपर टेक्स्ट ट्रांसफर प्रोटोकॉल भी जानते हैं और आगे के पॉ��कास्ट में संभवतः यह बता सकते हैं कि एक MP का पावर इतना होता है कि वो पूरे नगर में बिजली सप्लाई कर सकता है, बस एक लाल रंग की तार उसके कान में और एक काले रंग की तार उसके कान में…
अजीत जी दोनों कान ही बोल दिए, एक तो कान का राइमिंग वर्ड होता तो मज़ा आ जाता! और तुम्हारे राइमिंग के चक्कर में एक और मोदी एक्ट की 7 धाराएँ हम झेलते रहते! खैर, इस डकैत गोल्डन दास ने… अजीत जी, DGP से सीधा डकैत? अरे नहीं, यार इस पर एक अहीर भाई ने खुलासा किया है।
आजकल देश में लॉजिक, कानून, संस्था, न्याय आदि काम नहीं करते, आपको बस दो-चार सौ की भीड़ ले आनी है, मोदी जी दो मंत्री तुरंत भेज देते हैं।
केदारे साहब ने सोचा कि मोदी जी अब कहाँ दिल्ली से मुंबई ��ंत्रियों को भेजेंगे, मैं पहले ही रिज़ाइन कर देता हूँ, तेल भी बचेगा उनक��� क्योंकि बनारस से वडनगर, और वडनगर से बनारस की हजार बाइकों के लिए तेल तो दो महीने से बचाया जा रहा था।
यह सब देखते हुए और सरकार की बकलोली को ध्यान में रख कर डायरेक्टर साहब ने रविवार को बच्चों के बीच बैठ कर 18 माँगों पर बिना विचार किए हस्ताक्षर कर दिया क्योंकि वो नहीं करते तो नड्डा जी कर ही देते।
सरकार को इतने अच्छे से समझने वाला व्यक्ति कोई विद्वान ही हो सकता है। मोदी जी के एक्ट का IIT पर यह पहला आक्रमण नहीं है, 2018 में भी चार प्रोफेसरों पर एक दलित प्रोफेसर ने दुर्भावना रखने का आरोप लगाते हुए SC-ST एक्ट लगवाया था और वो सोच रहे थे कि विदेशों से इतने ऑफर हैं, चले ही जाते हैं।
यहाँ पर मैं मोदी जी से एक और संशोधन करवाना चाहूँगा कि यदि किसी फैकल्टी मेम्बर पर मोदी एक्ट चिपक जाए, तो ��नका पासपोर्ट तत्काल जब्त हो और उन्हें विदेश तो क्या, पूरे भारत में कहीं नौकरी न मिले।
सूर्यनारायण को तो बायीं करवट लिटा कर, कान में सीसा पिघला कर न डाला जाए, तो माँ भारती के खोए लाल को न्याय नहीं मिल पाएगा मोदी जी! प्लीज कुछ नया कानून बना दीजिए सर, हम लोग पलक पाँवड़े बिछाए, प्रतीक्षारत हैं।
किस मुँह से आप हमें डरा रहे हैं? जब योगी जी 91% reservation के लिए लड़ रहे हैं, Supreme Court जा रहे हैं। मोहन यादव 73% reservation के लिए Supreme Court में appeal कर रहे हैं। Odisha Government ने SC/ST का reservation disproportionately बढ़ाकर SC के लिए 8% से 16.25% और ST के लिए 12% से 22.50% कर दिया।
तो ब्रो, आरक्षण तो BJP हर जगह बढ़ा ही रही है। Who are you trying to fool? OBC Act तुम already ला चुके हो। Flying Equity Squads क्या था वो? And still you want us to believe that other guys will do it?
आपको क्या लगता है कि सारा data साला चटुआ सेल के ही पास है? तुमने जो पैसा-कौड़ी देकर के बिठाया हुआ है, इन सारी companies को, तुम्हें लगता है उन्हें ही search करना आता है? हम लोग search नहीं कर सकते हैं कि क्या चल रहा है?
हमारे पास अभी data का जो cache है ना, गेंद फट जाई तौहार। इतना data हम flood करने वाले हैं, तुम देखते जाओ अभी। तुम्हें idea नहीं है कि हम तुम्हें कहाँ-कहाँ से पेलेंगे।
इसीलिए बार-बार कहता हूँ, सुधर जाओ, संभल जाओ। यदि तुम्हें अपना future भारत में दिख रहा है, सत्ता में लंबे समय तक रहना है, ये बकैतियाँ जो हैं, बंद करो भाई।
साथ ही मृतक परिवार के सभी सदस्यों को प्रोफेसर की सरकारी नौकरी 1000 करोड़ की आर्थिक सहायता 2 हेलीकाप्टर 15 चार्टेड प्लेन कुवैत मे 10 पेट्रोल के कुवै ईरान मे डीजल के तालाब रसिया मे गैस के गौदाम 786 भाड़े के भज्जपिले बॉउंसर. मृतक की लंदन की संसद मे सोने की मूर्ति सविधान के साथ 💙
किसके दबाव में ये सब किया जा रहा है। ये अब साफ़ साफ़ दिख रहा है। हर चीज़ का राजनीतिकरण इस सत्ता का स्वभाव बन चुका है। सरकार नदारद है और चुनावी गणित पर्दे के पीछे से हावी है।
IIT Bombay जैसी संस्था को भी अगर सरकार की नीतियों की वजह से भीड़तंत्र के आगे झुकना पड़े, तो सवाल सिर्फ एक Director के इस्तीफे का नहीं है।
अगर यही मॉडल चाहिए, तो Professors भी क्यों रहें?
पूरी IIT सरकार को सौंप दीजिए।
Director की जगह मंत्री बैठाइए, Professors की जगह इनके निकम्मे IT-celliyo को रखिए, और Academic Council भीम आर्मी को दे दीजिए।
देश की institutions को मजाक बना दिया है BJP ने।
पुनः मैं श्री नरेंद्र मोदी जी से और भाजपा से यही अनुरोध करना चाहूँगा ��ि जितने IITs हैं, 23 में से 12 आप दलितों को दे दीजिए। अगर SC, ST, OBC एक जगह पर हैं।
यदि केवल SC, ST को देना चाहते हैं, OBC को आप अलग करना चाहते हैं, तो भी ठीक है, OBC को आप अलग कर दीजिए।
SC, ST 22% हैं, तो 23 में से 5-7 IIT इन लोगों को दे दीजिए। 7 IIT जो नई वाली, चमचमाती, बढ़िया वाली IITs हैं, ये इन लोगों को दे दो। वहाँ पर जितने भी faculty member इन जाति समूहों से आते हैं, उनको इंप्लॉय कर दो।
चंद्रशेखर रावण जैसे लोगों को भी प्रोफेसर बनाया जा सकता है। भीम आर्मी से mass recruit कर लीजिए। Humanities जो पढ़ाई जा रही है, ऐसे लोगों को भी contract दे दीजिए। मोदी जी, आप ही के तो लोग हैं वो। गोल्डन दास वहाँ Quantum Physics, Propellant Technology पढ़ाएँगे, राजकुमार कुशवाहा जी Energy Sciences या Metallurgy पढ़ा सकते हैं और चंद्रशेखर रावण जी को डीन बनाया जा सकता है।
ऐसे जितने बहुत बढ़िया लोग, उत्कृष्ट योगदान समाज में दे रहे हैं, उन सारे लोगों को इकट्ठा इन 7 IITs में दे दीजिए। AIIMS भी जितने बने हैं, उसमें से 'एक चौथाई +1' करके इनको दे दीजिए।
इनको देकर बोलिए कि हमें कोई discrimination नहीं चाहिए। हम चाहते हैं कि आप फलो-फूलो, मनुवादियों से आप अलग रहो।
मैं कह रहा हूँ, इन ब्राह्मणवादियों को, मनुवादियों को जातिवाद करने का अवसर ही क्यों देना? इनको अवसर मत दो।
ऐसा कर देने से वहाँ पर केवल और केवल उन्हीं जातियों के लोग होंगे। इससे क्या हो जाएगा? कोई जातिवाद नहीं रहेगा।
अपना बढ़िया वहाँ Humanities भी पढ़ाओ, YouTube पर वीडियो कैसे बनाएँ, Applied Thermodynamics वो पढ़ाओ। Aeroelasticity, Flight Mechanics, और Aircraft Instrumentation पढ़ाओ।
Jet Propulsion Laboratory जो MIT में है, उसका एक version इनको भी दे दो। Jet विमान ना सही, कुछ तो यहाँ पर बनाएं। इन लोगों को पूरा ecosystem create करने दीजिये, फिर बढ़िया एकदम innovation होगा।
और बाकी जो हैं, उनको छोड़ दो अपने हाल पर। जाओ पढ़ो, जाके ब्राह्मण से। OBC और अनारक्षित बच्चों को बाकी 17 IITs दे दीजिये। ये अपना यहाँ अलग पढेंगे।
IIT बॉम्बे की टॉपर प्रिया मिश्रा का बयान चर्चा में है।
तीसरे साल की छात्रा प्रिया मिश्रा ने कहा —
“छात्र के परिवार के लिए दुख है। लेकिन सूर्यनारायण सर को सजा क���यों मिल रही है? अगर ��कल नहीं होती, तो सर कोई कार्रवाई नहीं करते।
30-40 पर्सेंटाइल लेकर IIT में आ जाते हो, और फिर परीक्षा में मोबाइल से नकल करना चाहते हो क्योंकि दबाव नहीं झेल सकते। मैं 90 प्रतिशत ला सकती हूँ, लेकिन मेरे पास आईफोन खरीदने के पैसे नहीं हैं।
विशेषाधिकार मुझे मिलना चाहिए, ऐसे बच्चों को नहीं।
केस उनके माता-पिता पर होना चाहिए। केस उस सिस्टम पर होना चाहिए जिसने एक कमजोर और अनपढ़ बच्चे को इतने बड़े संस्थान मे��� भेज दिया, जहाँ दिमाग, IQ और दबाव झेलने की हिम्मत चाहिए।
अगर दबाव नहीं झेल सकते तो घर बैठो। सीट बर्बाद मत करो। सूर्यनारायण सर का इस्तीफा इस देश के हर ईमानदार शिक्षक का अंत है, और अब नकल शर्मनाक काम भी नहीं रहेगी।”
यही वह दृश्य है जहाँ योग्यता, @narendramodi के भीड़तंत्र के समक्ष झुक कर बिछ जाने के सामने, कलम निकाल कर अपनी अंतिम यात्रा का आरंभ कर रही है।
डायरेक्टर केदारे साहब शांत हैं, 18 माँगें हों या 180, वो स्वीकार कर लेंगे क्योंकि @PMOIndia से कारण बताओ नोटिस आ जाएगा कि आपसे एक छोटा सा प्रोटेस्ट नहीं सँभलता, जबकि हमने तिलचट्टों के प्रोटेस्ट में पूरे देश को बताया है कि करना क्या है।
भीड़ ही ‘लोकतंत्र’ का ‘लोक’ है, अतः वह जो भी कहे, वह जाँच से पहले ही कर दीजिए। मुझे थूकने की इच्छा हो रही है किसी के मुँह पर!
यूपीआई चार्ज आम नागरिक के लिए नहीं है, व्यापारी के लिए है
तो भाई व्यापारी क्या आम नागरिक नहीं है? वो कोई क्रिमिनल है? व्यापार करके जुर्म कर रहा है?
कितनी मूर्खतापूर्ण बात है कि टैक्स व्यापारी भरेगा, व्यापारी उस टैक्स को जनता से ही लेगा, ये समझने के लिए अलग से कोर्स नहीं लगता।
EWS एक राजनैतिक चाल है जिसे अब तक जनरल केटेगरी ने नहीं समझा है। सिलसिलेवार तरीके से समझाता हूँ।
बालाजी केस 1963 में सुप्रीम कोर्ट ने एक तरह से कह दिया था कि आरक्षण 50% से ज़्यादा नहीं होना चाहिए। मुंगेरीलाल आयोग जो 1971 में बिहार में बिठाया गया उसने लगभग 26% ओबीसी आरक्षण की बात की, पर जब कर्पूरी ठाकुर सरकार ने इसे 1978 में ���ागू किया तो 26% कोटे में ही महिला और अगड़ी जातियों में आर्थिक रूप से पिछड़े को आरक्षण दिया गया। कर्पूरी फार्मूला था:
OBC - 12%
EBC - 8%
Women - 3%
EWs - 3%
यानी ��बीसी आरक्षण को कम करके EWS आरक्षण दिया ताकि 50% की सीमा पार न हो।
राष्ट्रीय स्तर पर सवर्णों की भी माँग रही थी कि उन्हें भी इस आरक्षण के घेरे में लिया जाये और EWS के तहत लाभ मिले। वी पी सिंह और नरसिंहराव दोनों ने इस पर मंशा जताई और राव ने OM 1991 के तहत 10% आरक्षण दे भी दिया लेकिन ये 50% के पार चला गया, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने इंदिरा साहनी केस 1992 में निरस्त कर दिया।
इतना ही नहीं, ओबीसी 27% से खुश नहीं थे, वो लोहियावादी झंडा लिए ये माँग कर रहे थे कि जाति जनगणना करवा लीजिए और जिसकी जितनी संख्या है उसे उतनी भागीदारी दे दीजिए। नीतीश जी का 1994 वाला संसदीय भाषण याद कीजिए जिसमे वो ये माँग रखते हैं।
लेकिन इस लोहियावाद के घोड़े को सुप्रीम कोर्ट ने रोक लिया और एक संवैधानिक लकीर खींच दी कि आरक्षण 50% से आगे नहीं जाएगा।
इसके बाद ये मामला अगड़ों और पिछड़ों ने छोड़ दिया और 50% के दायरे को परम सत्य मान कर लोगों ने कंसेंसस बना लिया।
पर 26 साल बाद एक पार्टी अपने आप को सत्ता में बनाए रखने के लिए ये कंसेंसस तोड़ देती है। याद कीजिए 2018 - दलित वोटों को साधने के चक्कर में एससी एसटी एक्ट विवाद और इनका मध्य प्रदेश और राजस्थान हारना। बस इसके बाद सवर्णों को खुश करने के लिए बिना किसी माँग के इन्होंने EWS दे दिया। इसके लिए संवैधानिक दायरा पार कर लिया, कंसेंसस तोड़ दिया। पर इस बदलाव ने ओबीसी को भी संकेत दे दिया कि 50% की सीमा तोड़ी जा सकती है, लोहियावाद को पुनः स्थापित किया जा सकता है।
बस इसके बाद ही जाति जनगणना की मांग तेज हो गई। एक तरफ़ ये हल्के इशारे में सवर्णों को जता रहे थे कि “मैं हूँ न”, और दूसरी तरफ़ ओबीसी की माँग को 2025 में मान लिया। अब डेटा कैसे भी अपना स्वरूप बदल कर आए, अगला पड़ाव आरक्षण बढ़ाना ही है।
इसलिए ये कहना कि EWS कोई तोहफ़ा है, बिल्कुल ग़लत है। ये हवा मिठाई है, लेकि�� इसने 26 साल के प��राने कंसेंसस को तोड़ कर फिर से आरक्षण की राजनीति को पैदा कर दिया। ये है विकसित भारत का सपना!!
प्रधानमंत्री मोदी के जन्म दिवस पर दीपक ना जलायें , बंशी बजाएँ नीरो की तरह ,और धुन यूजीसी रोल बैक का बजाएँ मोदी जी आज के नीरो ही हैं , देश जातीय हिंसा में जल रहा है और नीरो बंशी बजा रहा है ।
घर नहीं है, गाड़ी नहीं है, कर्ज में डूबे हो, खेत नहीं है तो चिंता की कोई बात नही ...
तुरंत किसी भी ब्रह्माण, ठाकुर, यादव आदि पे SC/ST लगाइये और इस नमो स्टार्टअप योजना का लाभ लीजिए मोदी जी की कृपा से......!
क्यों @samrat4bjp कुशवाहा जी, सजातीय है तो क्या ब्राह्मणों पर ऐसे आक्षेप सुनते रहोगे? @bihar_police के प्रिंटर में य���ि इंक समाप्त हो गया हो, और उनके अधिकारी निर्वीर्य हो गए हों, तो बता दें। आपको जातिगत संघर्�� चाहिए तो नब्बे का दशक याद कर लीजिए।
ऐसे जातिवादी गुंडे खुले समाज में कैसे विचरण कर रहे हैं, सम्राट चौधरी? ये मोदी जी के लाडले हैं, इनको कोई छू नहीं सकता। पर याद रहे मोदी जी, जो आपके उत्थान के सहायक हैं, वही हट जाएँगे तो आपके पास बहुत विकल्प नहीं होंगे।
ब्रेकिंग प्वाइंट पर आने से पूर्व इन बकचोदियों को बंद करवाइए। https://t.co/yRLvDddfO4
मेरा सरकार से स्पष्ट आग्रह है-SC/ST कानून सामाजिक न्याय और सुरक्षा का मजबूत माध्यम है, किसी को झूठे मुकदमे में फँसाने का हथियार नहीं।
जो कोई भी जानबूझकर इस कानून का दुरुपयोग कर निर्दोष व्यक्ति को फँसाता है, उसके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई और सख्त सजा का प्रावधान होना चाहिए।
कानून का सम्मान तभी होगा,जब उसका दुरुपयोग भी बर्दाश्त न किया जाए।
@narendramodi@AmitShah@NitinNabin@blsanthosh
मेरे ऊपर SC/ST एक्ट में FIR पर कुछ बातें सवर्ण समाज से
कोई मेरी माँ या बहन पर सीधे बलात्कारी मानसिकता के साथ यह कहे कि उसका विवाह मैं चंद्रशेखर के साथ करा दूँ, और मैं चुप रह जाऊँ तो आप बताइए कि मैं कैसा पुत्र या भाई हूँ?
इतने पर भी चंद्रशेखर को ले कर मैंने कोई जातिसूचक शब्द नहीं बोला, जो उक्त वीडियो में है। जब स्टेज से ब्राह्मणों की बेटियों को खींचने की बातें होती हैं और किसी SC नेता का चेला सोच-समझ कर उकसाने के लिए ऐसी बात करेगा, तो मैं चुप कैसे रहूँगा?
आज व्यक्ति अपने मौलिक अधिकारों को समझे या न समझे, वह यह अवश्य जानता है कि SC/ST एक्ट क्या है। तो मैं जब बोलता हूँ तो मुझे अपनी सीमाएँ (चाहे वह कितनी ही अनुचित क्यों न हों) पता हैं कि क्या बोलना है, क्या नहीं।
मैं जानता हूँ कि दिल्ली पुलिस के नॉर्थ अवेन्यू स्टेशन में आजाद समाज पार्टी वालों ने कितना दवाब दे कर रात के बारह बजे यह FIR लिखवाया है जो कोर्ट में दो मिनट नहीं टिकेगा। एक ��ी धारा ऐसी नहीं है जो होल्ड करेगी।
मैं सैनिक स्कूल का छात्र हूँ और इतनी रैगिंग झेल चुका हूँ कि मेरा मनोबल तोड़ने के लिए दिल्ली पुलिस को कस्टडी में मेरी हत्या करनी पड़ेगी, दो-चार डंडों से मेरा मनोबल नहीं टूटने वाला। और यदि मैं जीवित बच गया तो इसी स्थिति में जंतर मंतर जाऊँगा और अपने समाज से कहूँगा कि बताओ, तुम्हारी बहन और माँ को ले कर कोई ऐसी ��िप्पणी करे तो क्या करोगे?
यदि ऐसा कमेंट फिर मेरे वीडियो पर आया तो मैं पुनः उसी तरीके से उत्तर दूँगा जो मैंने दिया। कानून जब तक है, संशोधन नहीं होता, मैं उसका सम्मान करूँगा और दिल्ली पुलिस के साथ पूर्ण सहयोग करूँगा। 92% ऐसे केस केवल प्रताड़ित करने के लिए होते हैं।
अंत में, सवर्ण समाज से यह पूछना चाहता हूँ कि क्या इस तरह की टिप्पणी पर मुझे सह लेनी चाहिए थी क्योंकि किसी पार्टी के लोग नाराज हो जाएँगे? क्या ब्राह्मणों की माँ और बहनें इन रेप मैंटिलिटी से संचालित गुंडों के शाब्दिक बलात्कार के लिए जन्म लेती हैं?
दरोगा अनु का जो वीडियो वायरल किया गया था, वह महज 3 सेकंड का काटकर किया गया था।
अनु ने जो QR लगाया था वह कोई पेमेंट वाला नहीं बल्कि उनके इंस्टाग्राम अकाउंट का था।
अमित किलोर ने वीडियो बनाया और फिर वायरल किया। बाद में अमित ने वीडियो डिलीट किया और अनु के भाई से माफ़ी मांगी।
https://t.co/fN8PZSkQjs
मुझे लगता है मोदी जी चौतरफा घिर चुके हैं क्योंकि इनका कोर वोटर बट चुका है यूजीसी मुद्दे पर it cell वालो ने सवर्णों को जी भर कर गाली दिया सवर्ण उसको नहीं भुला है और जिनके लिए SCST में संशोधन करवाया यूजीसी लाया वो अब इनका कट्टर विरोधी है आने वाला समय थोड़ा रोमांचक ह��गा...!