नीतीश आर्काइव की पहली यात्रा आज मुज़फ्फरपुर की ओर निकल चुकी है...
यात्राएँ किसी की प्रतीक्षा नहीं करतीं।
यात्राएँ किसी की मोहताज नहीं होतीं।
यात्राएँ न थकती हैं, न रुकती हैं, न किसी सहारे के इंतज़ार में ठहरती हैं।
और जब किसी यात्रा में जुनून, समर्पण और इतिहास को सहेजने का संकल्प शामिल हो जाए, तब वह सिर्फ एक सफर नहीं रहती — वह एक आंदोलन बन जाती है।
आज नीतीश आर्काइव की टीम अपनी पहली यात्रा पर मुज़फ्फरपुर के लिए रवाना हुई है। यह यात्रा सिर्फ एक शहर तक पहुँचने की यात्रा नहीं है, बल्कि उन यादों, कहानियों, दस्तावेज़ों, तस्वीरों और जनभावनाओं तक पहुँचने की यात्रा है जो, शहर, गाँव,खेत, खलिहानों, से होते हुए उम्र के आखरी पड़ाव में पहुंच चुके चाचा चाची के दरवाज़े तक दस्तक देगा,
यह यात्रा उन दरवाज़ों पर दस्तक देगी जहाँ समय की धूल ने अनगिनत यादों को अपने भीतर सहेज रखा है। यह यात्रा पुराने साथियों तक पहुँचेगी, जिनकी आँखों में आज भी बीते संघर्षों, आंदोलनों और राजनीतिक यात्राओं की तस्वीरें जीवित हैं।
हम मानते हैं कि इतिहास सिर्फ सरकारी अभिलेखों में नहीं बसता। इतिहास लोगों की यादों में बसता है, पुराने संदूकों में रखी तस्वीरों में बसता है, पीली पड़ चुकी अखबार की कतरनों में बसता है, और उन कहानियों में बसता है जिन्हें आज तक किसी ने लिखा नहीं।
यदि आप मुज़फ्फरपुर में हैं और आपके पास नीतीश कुमार जी से जुड़ी कोई स्मृति, कोई तस्वीर, कोई दस्तावेज़, कोई अखबार की कटिंग, या कोई ऐसी कहानी है जिसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचना चाहिए, तो हम आपसे मिलने आना चाहेंगे।
क्योंकि यह आर्काइव किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि बिहार की सामूहिक स्मृति का निर्माण है।
आज मुज़फ्फरपुर में जितने भी साथी नीतीश आर्काइव टीम से मिलना चाहते हैं, या अपने पास सुरक्षित किसी महत्वपूर्ण सामग्री को साझा करना चाहते हैं, वे हमसे संपर्क करें।
📞 Nitish Archive – 7261068964
📞 श्रुति धर (Project Manager) – 8789114960
आइए, मिलकर इतिहास को सिर्फ याद न करें, उसे सुरक्षित भी रखें।
समता पार्टी का सदस्यता पर्ची. नीतीश कुमार का हस्ताक्षर देखिये और 2026 राज्यसभा नामांकन पत्र में नीतीश कुमार के नामांकन पत्र पर उनके हस्ताक्षर से मिलान कीजिये फिर पता चलेगा कि उनका हस्ताक्षर कितना बदला है. राज्यसभा नामांकन के समय नीतीश कुमार के नकली हस्ताक्षर का मुद्दा खूब चला था मीडिया में.
यह पर्ची वर्ष 2000 का है जब जॉर्ज फर्नांडिस के साथ काम करने वाली जाया जेटली समता पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष थी.
स्त्रोत: प्रजापति रोहन (फेसबुक)
नीतीश कुमार की पार्टी का भूंजा पार्टी तो फेमस था ही लेकिन भुट्टा (मकई) पार्टी भी कोई कम नहीं हुआ करता था. यह चित्र कब और कहाँ का है यह पता लगाने में नीतीश आर्काइव की मदद कीजिये. यह चित्र उपलब्ध करवाने के लिए सुरजगढ़ा(लखीसराय) के सिंटू जी का बहुत बहुत धन्यवाद्.
नीतीश कुमार का यह चित्र किस वर्ष का होगा, कोई बता सकता है क्या ?
सम्भावना है कि यह जेपी आन्दोलन के दौरान का होगा या फिर जेपी आन्दोलन के बाद का क्यूंकि जेपी आन्दोलन से पहले तक नीतीश कुमार दाढ़ी नहीं रखते थे.
पूर्व केन्द्रीय मंत्री डॉ. संजय पासवान जी की नीतीश आर्काइव के साथ लम्बी चर्चा I नीतीश कुमार से सम्बंधित कई रोचक यादों को हमारे साथ साझा करने के लिए डॉ. संजय पासवान जी का सहृदय धन्यवाद् I
@sanjaypaswanbjp
22 दिसंबर 1999 को समाजवादी पार्टी नेता मुलायम सिंह यादव के इशारे पर देवेन्द्र सिंह यादव एवं अन्य सहयोगी सांसदों ने नीतीश कुमार के ऊपर हमला करने का प्रयास किया था क्यूंकि लोकसभा के सभापति ने नीतीश कुमार के जवाब देने से पहले ही दूसरा सवाल पूछने की इजाजत दे दी. मुलायम सिंह यादव उस समय कृषि मंत्री नीतीश कुमार से जवाब चाह रहे थे कि उत्तर प्रदेश में बाढ़ राहत के लिए क्या प्रयास किये जा रहे हैं.
उस समय लोकसभा में प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपयी, रामविलास पासवान जैसे नेता भी मौजूद थे.
लखीसराय के मानिकपुर गाँव में 29 मई 1995 को गाँव की पुलिस चौकी में पुलिस की गोली से दिवाकर महतो की हत्या हो गयी थी. उसके बाद पुलिस के डर से गाँव लगभग आधे घरों में ताला लग गया था क्यूंकि झड़प में एक पुलिस वाले की भी मृत्यु हो गई थी. गाँव वालों का आरोप है कि अपना बचाव करने के लिए दरोगा ने ही अपने पुलिस को गोली मार दिया था क्यूंकि जिस हथियार से दिवाकर महतो की हत्या हुई थी उसी हथियार से पुलिस को भी गोली लगी थी. दिवाकर महतो पहले कम्युनिस्ट थे लेकिन बाद में वो समता पार्टी के सदस्य बन गए थे.
1995 में बिहार विधानसभा चुनाव जितने के बाद लालू सरकार के ऊपर नीतीश कुमार संसद तक ये आरोप लगाते रहे कि जिस जाति समाज के लोगों ने लालू यादव को वोट नहीं दिया है उन्हें बिहार सरकार और बिहार पुलिस टारगेट करके परेशान कर रही है. इस मामले को नीतीश कुमार ने संसद में भी उठाया जिसमे उन्होंने कुर्मी जाति का तो नाम नहीं लिया लेकिन इशारा कुर्मी जाति के लोगों की तरफ ही था. संसद का वह विडियो भी नीतीश आर्काइव ने आपके साथ साझा किया है. (https://t.co/q34sn5CB0E)
चित्र: आज अख़बार, 12 जून 1995
चित्र आभार: नीतीश आर्काइव को यह चित्र उपलब्ध करवाने के लिए लखीसराय के डॉ सुनील कुमार सिंह जी का आभार।
1995 में नीतीश कुमार ने संसद में लालू सरकार पर आरोप लगाया कि बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान जब कुर्मी जाति के लोगों ने लालू यादव को वोट नहीं किया तो बिहार सरकार ने चुन चुनकर कुर्मी बहुल गाँव में पुलिस भेजकर एक विशेष जाति के लोगों को परेशान किया, मारपीट किया और उन्हें गिरफ्तार किया. शरद यादव भी इस बहस के दौरान नीतीश कुमार का साथ दिए थे, हालाँकि रामविलास पासवान ने अपहरण करने वाले के खिलाफ भी कड़ी करवाई की मांग की थी.
दरअसल मामला यह हुआ था कि एक कुर्मी अतुल सिंह द्वारा एक बच्चे का अपहरण किया गया था और उसी अपहरण मामले में जाँच के नाम पर पुलिस ने कई कुर्मी बहुल गाँव में छापेमारी कर कुर्मी जाति के कई सम्मानित लोगों को गिरफ्तार कर लिया था.
1994 में जब नीतीश कुमार और जॉर्ज फर्नांडिस ने अपने आप को जनता दल से अलग करके जनता दल जॉर्ज बनाने का फैसला किया और मुज़फरपुर का दौरा किया था तब उनके ऊपर मुजफ्फरपुर में लालू यादव के समर्थकों के द्वारा हमला किया गया था तब कांग्रेस नेता राजेश पायलट ने हस्तक्षेप किया था.
बिहार में पंचायती राज अधिनियम वर्ष 1993 में ही पारित हो गया था लेकिन उसके बाद अगले आठ वर्षों तक चुनाव नहीं हुआ. वर्ष 2001 में चुनाव हुआ भी तो बिना आरक्षण प्रावधान के. बिहार में पहली बार आरक्षण के साथ पंचायती चुनाव वर्ष 2006 में हुआ था जब नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बन चुके थे.
इस सम्बन्ध में नीतीश कुमार संसद में कई बार बिहार में पंचायत चुनाव में हो रहे विलम्ब का सवाल लोकसभा में उठाये लेकिन कोई हल नहीं निकला था.
नीतीश कुमार के प्रिय मित्रों में से एक सुरेश कुमार गुप्ता जी, मुजफ्फरपुर में रहते हैं, नीतीश कुमार के जीवन से संबंधित स्मृतियों का पिटारा है इनके पास, बात में बेबाक भी है जो बिना ईमानदारी के किसी में आ नहीं सकती। नीतीश आर्काइव के साथ फोन पर कई बार मुलाकात हो चुकी है, कैमरे पर पुरानी स्मृतियों के दौर में आपको बहुत जल्दी लाने का प्रयास है।
यह चित्र 2008 का है पटना एयरपोर्ट पर टर्मिनल 2 का निर्माण हुआ था।
नीतीश आर्काइव को यह तस्वीर उपलब्ध करवाने के लिए अंकित जी को धन्यवाद।
1994 में बिहार में कई नए जिले जब बनाए गए तब कुछ जिलों का जिला कार्यालय दलितों के लिए बने कल्याण छात्रावास में ही बनवा दिया. नीतीश कुमार का यह भी आरोप था कि लालू सरकार के दौरान इन दलित छात्रावासों में दलित को छोड़कर बाकी सभी जातियां रहती है लेकिन दलित को इन छात्रावासों में कोई जगह नहीं मिलती है.
नीतीश कुमार भी कभी कभी संसद मेंअंग्रेजी बोलते थे.
हो ये रहा था कि 25 अगस्त 1994 को नीतीश कुमार कांग्रेस सरकार द्वारा चीनी के निर्यात में भ्रष्टाचार पर चर्चा का रहे थे, नीतीश कुमार का भाषण इतना जबरदस्त था कि कभी अटल बिहारी तो कभी शरद यादव बीच में उठ उठकर बोलने लगते थे नीतीश कुमार के समर्थन में...
ओंकार सिंह जी काफी दिलचस्प इन्सान हैं, 1978 से राजनीती में हैं, 1989 में नीतीश कुमार जी और जॉर्ज फर्नांडिस के साथ हैं, समता पार्टी और जदयू के उत्तर प्रदेश में यूवा प्रदेश अध्यक्ष भी रहे, राजस्थान तक नीतीश कुमार के साथ चुनावी रैली में साथ दिए. नीतीश आर्काइव इनके साथ एक लम्बा संवाद आपके लिए रिकॉर्ड करेगा तसल्ली से. फ़िलहाल 15 मिनट की यह छोटी मुलाकात सुन सकते हैं आप हमारे YouTube चैनल पर पर लम्बी मुलाकात में कहानियों का पिटारा है इनके पास. उदाहरण के लिए:
१) नीतीश कुमार ने इनको फ्री रेल पास कब, कैसे और क्यूँ दिया था.
२) लखनऊ से दिल्ली की इनकी पदयात्रा की शुरुआत नीतीश कुमार खुद किये थे.
३) उत्तर प्रदेश की राजनीती में नीतीश कुमार की रूचि.
इंतजार कीजिये, नीतीश आर्काइव सभी दबी हुई कहानियों को बाहर निकालेगा.