लोकसभा चुनाव बीत गया, विधानसभा चुनाव हो गए, 𝟐 मुख्यमंत्री और 𝟒 उपमुख्यमंत्री बदल गए। समूचा मंत्रिमंडल बदला। 𝐍𝐃𝐀 नेताओं के शहजादों को बिना चुनाव लड़े डायरेक्ट मंत्री पद बांट दिए गए। नई सरकार के गठन के 𝟔 महीने बीत गए, लेकिन अब तक 𝐓𝐑𝐄-𝟒 की वैकेंसी नहीं आई?
एनडीए ने चुनाव पूर्व 𝟏 करोड़ नौकरी का वादा किया था। क्या हुआ उस दावे और वादे का?
मुख्यमंत्री @NitishKumar जी- आपने पटना की बड़ी कुर्सी छोड़ने से पहले, दिल्ली की कुर्सी हासिल कर ली है, आपको बहुत बधाई!!
लेकिन बिहार के ये नौजवान अभी भी धूप में बैठे हैं, बस एक सवाल के जवाब के लिए... सरकार, अपने वादे कब पूरे करेगी? बहाली कब निकालेगी?
नीतीश जी, आपने तो खुद पिछले साल वादा किया था, कहा था- टीचर बहाली के लिए BPSC TRE 4.0 का आयोजन जल्द किया जाएगा
BPSC कैलेंडर में अगर ये एग्जाम 2024 में हो जाना था, तो कम से कम अप्रैल 2026 में तो डेट फाइनल करा दीजिए... और लाखों लोगों की दुआ के साथ दिल्ली जाइए....
𝟏𝟕 महीनों की महागठबंधन सरकार में मेरी विशेष पहल पर शिक्षा विभाग को राजद कोटे में लेकर सर्वप्रथम युद्ध स्तर पर शिक्षा विभाग में 𝐓𝐑𝐄-𝟏 और 𝐓𝐑𝐄-𝟐 के अंतर्गत निर्धारित समय सीमा के अंदर बिना किसी पेपरलीक, संपूर्ण पारदर्शिता के साथ रिकॉर्ड 𝟐,𝟐𝟎,𝟎𝟎𝟎 से अधिक अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र देकर ज्वाइनिंग कराई। हमने 𝐓𝐑𝐄-𝟑 की भी नियुक्ति प्रक्रियाधीन कराई लेकिन जनवरी 𝟐𝟎𝟐𝟒 में हमारे सरकार से हटते ही पेपरलीक के कारण 𝐓𝐑𝐄-𝟑 को रद्द किया गया और फिर यह परीक्षा भी विलंब से हुई।
फिर चुनावी साल 𝟐𝟎𝟐𝟓 में वर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी ने लिखा-लिखाया ट्वीट चिपका कर युवाओं से वादा किया था कि बिहार में सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की रिक्तियों की गणना कर जल्द ही टीआरई-𝟒 परीक्षा आयोजित की जाएगी। आज उस घोषणा को लगभग एक वर्ष बीत चुका हैं लेकिन अब तक 𝐓𝐑𝐄-𝟒 की वैकेंसी तक जारी नहीं हुई है।
𝐁𝐏𝐒𝐂 कैलेंडर के अनुसार यह परीक्षा अगस्त 𝟐𝟎𝟐𝟒 में ही हो जानी चाहिए थी, लेकिन चुनाव आयोग, तंत्र और 𝟏𝟎 हज़ारिया की बदौलत सत्ता हड़पने वाली कुर्सीबाज भाजपा-जदयू सरकार युवाओं की जरूरत को कभी समझ ही नहीं पाई। फिर साल 𝟐𝟎𝟐𝟓 के अक्टूबर में परीक्षा कराने की बात कही गई, ताकि चुनावी आचार संहिता लागू होते ही परीक्षा टल जाए, ऐसा ही हुआ। चुनाव हो गए, सरकार बन गई, महीनों बीत गए लेकिन आज भी शिक्षक अभ्यर्थी इंतजार ही कर रहे हैं।
दूसरी ओर, उपमुख्यमंत्री रहते हुए 𝟏𝟕 महीने में मैंने 𝟓 लाख युवाओं को नौकरियां दी और 𝟑,𝟓𝟎,𝟎𝟎𝟎 से अधिक नौकरियों की प्रक्रिया शुरू करवाई। लेकिन आज की डबल इंजन सरकार बार-बार अकारण परीक्षा टालकर बहाना बनाकर युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ कर रही है। अभ्यर्थियों की आयु सीमा पार हो रही है, उनका धैर्य जवाब दे रहा है। हर युवा नौकरी पाकर अपने परिवार की जिम्मेदारी उठाना चाहता है, अपने परिजनों के सपनों को पूरा करना चाहता है।
भले ही चुनाव जीतने के लिए भाजपा-जदयू ने बड़े-बड़े झूठे आसमानी वादे किए हों लेकिन ये युवाओं के हित से जुड़ा मामला है। मेरी एनडीए सरकार से अपील है कि टीआरई-𝟒 की वैकेंसी अविलंब जारी की जाए। क्योंकि यह लाखों युवाओं के भविष्य और उनके परिवार की उम्मीदों का मामला है। मेरी अपील है कि कुर्सी की अदला-बदली में भाजपा-जदयू सरकार बिहार के लाखों युवाओं के हक-अधिकार, मांगों, आकांक्षाओं, उम्मीदों और सपनों का क़त्ल ना करे। #TejashwiYadav #BPSC_TRE4
बिहार में बहार है, बाहर नीतीश कुमार हैं
नीतीश कुमार ने अपने जीवन में कितने लोगों को विधायक, सांसद और राज्य सभा का सदस्य बनाया होगा। मंत्री बनाया होगा और चेयरमैन बनाया होगा। आज कितने लोग नीतीश के लिए बोल सके। दो शब्द नीतीश के कार्यकाल पर ही बोलते और इस पर भी कि क्या नीतीश कुमार की इस तरह से विदाई होनी चाहिए थी? जो लोग नीतीश कुमार के सेहतमंद रहते हुए उनके सामने बिना हाथ जोड़े खड़े नहीं हो पाते होंगे, वो लोग आज चुप क्यों हो गए? क्या अब नीतीश उनके लिए कुछ नहीं हैं? आज क्यों नहीं उनकी पार्टी के नेता मीडिया के सामने आ सके औऱ बयान देते रहे। क्या वे नीतीश कुमार के काम की तारीफ भी नहीं कर सकते थे? इतना भय है?
नीतीश का ट्वीटर पोस्ट हैरान करने वाला है। लगता नहीं कि उनका लिखा हुआ ट्वीट है।अगर नीतीश कुमार इतना लंबा ट्वीट कर सकते हैं तो आज के दिन पटना के प्रेस से बात भी कर सकते थे। इसी से संदेह होता है कि नीतीश कुमार का ट्वीट किसी और का लिखा हुआ है।उस ट्वीट की भाषा ने नीतीश कुमार को और छोटा कर दिया। क्या सही में नीतीश कुमार इतनी छोटी सी चाहत के लिए राज्य सभा जा रहे हैं कि कभी राज्य सभा में नहीं रहे? विधान सभा और विधान मंडल के सदस्य रहे। लोकसभा के सदस्य रहे। राज्य सभा के नहीं रहे, क्या नीतीश कुमार ने कभी ऐसी कोई राजनैतिक महत्वकांक्षा अपने किसी साथी के सामने व्यक्त की थी? क्या नीतीश कुमार चारों सदनों से पेंशन लेना चाहते हैं? उन्हें पेंशन की दिक्कत हो गई?
अगर नीतीश ने ख़ुद ट्वीट किया है या उनके बदले किसी और ने किया है तब भी, यह सवाल बनता है कि नीतीश एक लाइन अपने स्वास्थ्य के बारे में भी लिख सकते थे कि वे इस वजह से पद छोड़ रहे हैं। वे चाहते हैं कि बिहार का नेतृत्व कोई स्वस्थ्य व्यक्ति करे। उस ट्वीट में यह भी नहीं था जबकि बात उनकी सेहत को लेकर ही हो रही है। क्या इसलिए कि उनके साथ सम्मान के साथ जो किया जा रहा है, उसमें अपमान भी झलकता रहे?
पूरे चुनाव में नीतीश ही मुख्यमंत्री थे, नीतीश ही मुख्यमंत्री हैं, नीतीश ही मुख्यमंत्री रहेंगे, यह नारा किस किस ने लगाया है। क्या वे एक योजना के तहत नारा लगा रहे थे या उन्हें वाकई यकीन था कि नीतीश ही मुख्यमंत्री रहेंगे? राजीव प्रताप रुडी, संजय कुमार झा और उपेंद्र कुशवाहा का बयान तो आता है कि उन्होंने ऐसा कहा था। क्या इन लोगों को नहीं बताना चाहिए कि बिहार में क्या हुआ? अगर नीतीश की सेहत सीएम बनने लायक नहीं है तो यह बात कह देने से क्या हो जाएगा।
रही बात बिहार में तख़्तापलट या भीतरघात की, नीतीश कुमार के समर्थक या वोटर इतने अनजान तो नहीं रहें होंगे कि उन्हें पता ही नहीं होगा कि चुनाव के बाद क्या होने वाला है? क्या नीतीश के कारण जो लोग विधायक बनते रहे हैं, वाकई उन्हें कभी नहीं लगा कि चुनाव के बाद नीतीश कुमार के साथ क्या होने वाला है? ये लोग धोखे में थे या धोखा नीतीश के साथ हुआ है?
नीतीश कुमार के साथ किसी को सहानुभूति हो या न हो लेकिन जिस राजनीतिक प्लान के तहत उनकी इतनी ख़राब विदाई हुई है, उस राजनीति को समझने का चश्मा कैसे उतारा जा सकता है। बिहार के लोग पोलिटिक्स में बहुत स्मार्ट होते हैं। कहने वाले क्या आज भी बिहार के बारे में वही कहेंगे? पोलिटिक्स में स्मार्ट तब कहे जाते जब इतनी बार से कोशिश कर रही बीजेपी को चुन लेते। बिहार ने कभी बीजेपी को नहीं चुना, दाद देनी चाहिए कि बीजेपी ने अपने समय से और हिसाब से बिहार को चुन लिया है। राजनीति में स्मार्टनेस बिहार से कब की विदा हो चुकी है। वो किसी और स्थान पर निवास करती है। क्या बिहार की जनता के साथ धोखा हुआ है? अगर इस सवाल का जवाब हाँ है, तो इसका समाधान आसान है। हर किसी के खाते में दस हज़ार भेज देना चाहिए। बिहार की बस इतनी सी राजनैतिक महत्वकांक्षा है। लोग खुशी के मारे नारे लगाने लगेंगे, बिहार में बहार है, बाहर नीतीश कुमार हैं।
TRE-4 अपडेट
▶️सभी 38 जिलों से रोस्टर विभाग को प्राप्त हो चुका है।
▶️विज्ञापन अब भी 15 फरवरी तक देने की बात कही जा रही है।
▶️सचिवालय गए साथी के अनुसार रिक्तियों की संख्या 48 हजार से अधिक होगी।
🚫नोट : ये सूचना सचिवालय स्तर की है जिसे सच मानना मान सकते हैं नहीं मानना तो आराम करिए।
सुनो लालूजी ने तुम्हारे लिए क्या किया था। जब सिस्टम पे 100 परसेंट सामंतवादियों का कब्ज़ा था , जब सामंतवादी तुम्हे वोट नहीं देने देते थे, जब मनुवादी तुम्हारे बूथ लूट लिया करते थे तब सिर्फ लालू यादव तुम्हारे लिए लड़े थे। नहीं तो आज नेता तो दूर की बात, बाल झाड़कर रोड पे निकलना मुश्किल था।
#BiharElection2025 #SocialJustice #RuralArea
अभी तो BJP गठबंधन ने विधानसभा चुनावों में 80-85% सीट जीतना ही शुरू किया है
India गठबंधन ने कुछ जरूरी चीजों पर काम न किया तो आगामी विधानसभा चुनावों में Non-NDA पार्टियों का खाता खुल पाना भी नामुमकिन हो जाएगा
कुंदरकी, मीरापुर और मिल्कीपुर वाला घटनाक्रम दोहराकर
BJP पूरे उत्तर प्रदेश की 403 में 403 सीट भी जीत जाए तो कोई हैरानी नहीं होगी
#पहला -
चुनाव आयोग का Chief Election Commissioner पहले की तरह Chief Justice of India के पैनल द्वारा ही चुना जाए
भाजपा ने जो 2023 में संशोधन करके CJI को हटाकर PM और उसके कैबिनेट मंत्री को जोडा़ गया है ये गलत है
इसी का परिणाम ये हुआ कि देश को Gyanesh Kumar जैसा Chief Election Commissioner मिला
#दूसरा-
भाजपा ने EC से जो Voting के 45 दिन बाद Polling Booth के CCTV Footage Delete करने का कानून पास करवाया है
ये भी संविधान-विरोधी कानून है
इसे रद्द किया जाए
क्योंकि Polling Booth का CCTV Footage होगा तभी तो लोग ये देख पाएंगे
कि एक पोलिंग बूथ के अंदर कितने लोग गये थे और कितना वोट पड़ा था
#तीसरा -
कम से कम
अगला एक विधानसभा चुनाव तो बैलेट पेपर से जरूर हो
जिससे ये पता चला
कि जैसे EVM पर वोट होने से 80-85% सीट मोदी गठबंधन को जाती है
क्या वो बैलेट पेपर से भी संभव है?
क्योंकि महाराष्ट्र के शोलापुर गांव के मरकाडवाडी गांव के लोगों ने जब ये चेक करने के लिए अपने गांव में बैलेट पेपर से Mock Poll कराने की कोशिश की थी
कि उनके गांव के लोग वाकई में Bjp को वोट देते हैं या नहीं
तो BJP ने प्रशासन भेजकर उनका Mock poll रुकवा दिया था
कोई भी Google पर जाकर Markadwadi गांव की घटना के बारे में पढ़ सकता है
।
BJP ने बहुत चालाकी करके एक पार्टी को 5 सीट गिफ्ट कर दी है
जिससे उस पार्टी के चीफ हर चैनल पर जाकर ये कहें
कि चुनाव बिल्कुल इमानदारी से हुए हैं
वो तो महागठबंधन ने जमीन पर कोइ मेहनत नहीं की थी
और ये काम शुरू भी हो गया है
"Despite daily complaints, there has been no improvement in the Danapur Division. Sir, it is respectfully requested that this local passenger train be permanently discontinued to prevent further disrepute to the division."
@GM_ECRly@drmdnr@ECRlyHJP@narendramodi@PMOIndia
Danapur division has such efficient officers that a local train runs from Patna every day at 6:30 am and then a passenger train at 8:00 am. But from Ara station, both passenger trains run at an interval of just 10 minutes.
@GM_ECRly@drmdnr@ECRlyHJP@AshwiniVaishnaw@PMOIndia