@askshivanisahu लड़की/लड़का को लगा होगा कि सब कुछ planned तरीके से हो जाएगा लेकिन रहीम कवी बहुत पहले ही कह गए हैं.... "खैर, खून, खाँसी, खुशी, बैर, प्रीति, मदपान।
रहिमन दाबे न दबै, जानत सकल जहान॥"
मुझे नहीं पता आप इसे कैसे देखेंगे
आपके नज़रिये को तय करने का इरादा भी नहीं
लेकिन कुछ बात समझें तो बेहतर है
1. इस 9th में पढ़ने वाले लड़के को यह तमीज़ है कि सार्वजनिक पटल पर बात कैसे रखी जाती है
2. पोलिटिकली करेक्ट होना किसे कहते हैं
3. शब्द चयन और जो सही है उसे स्वीकार करते हुए अपना पक्ष रखना
4. अपनी बात कहना बिना किसी दूसरे पर ज्यादा जाये..
5. सबसे बड़ी बात अपनी पहचान के प्रति स्पष्ट होना (अब या तो ये बाकई उसकी ईमानदारी है या उसकी समझ बड़े बड़े मुस्लिम नेताओं से ऊपर दर्ज़े की है)
खैर इस लड़के की बात ने प्रभावित किया...
सीधा कहूँ तो हमारे पक्ष और ख़ास कर विपक्ष के नेता थोड़ा सीख लें इससे तो बेहतर होगा
हाँ ये मुस्लिम है....
बिलकुल में भी जो सामाजिक वर्ग संघर्ष का दौर है उससे अलग नहीं...
पर कई बार सामने के खेमे से भी कोई प्रभावित कर सकता है अपनी बात से....
में स्वीकार कर लेता हूँ ऐसा हो तो... हिचक नहीं!