@BJP4India@narendramodi तुम लोगो का भीमांडगिरी और भडवागिरी का अंत 27 से शुरू और 2029 मे खत्म होगा। फिर भागना एथेनाल भ्रष्टाचार, हाइवे भ्रष्टाचार, दूसरे राज्य के मंत्रीयो के बच्चो को दूसरे राज्य मे एसडीएम और डिप्टी एसपी बनाने का भ्रष्टाचार, राफेल घूसखोरी।
तुम लोगो की लंका सवर्ण ही जलायेगा
@BJP4India@narendramodi#UGC_काला_कानून_वापस_लो
बीजेपी के काले कारनामे।। सीगुफा, सबका साथ स्वर्ण समाज का विनाश, एक रहोगे तो सेफ रहोगे। एक ही घर में दो कानून नहीं चलेगा जी। लाना था यूसीसी लेकर आए यूजीसी। गद्दार बीजेपी धोखेबाज मोदी।
मोदी एक्ट पर कुछ तथ्य और आँकड़े
एक पार्टी चाटुकार का वीडियो देखा जिसमें उक्त व्यक्ति, पत्रकार @23pradeepsingh जी को ज्ञान दे रहा है कि उन्होंने जो 'मोदी एक्ट' के बारे में दलित नागरिकों द्वारा पैसों की उगाही की योजना पर टिप्पणी की, वह ग़लत है।
बिल्कुल नहीं! प्रदीप जी ने जो कहा वह तथ्यात्मक रूप में उचित है क्योंकि न तो 1989 के मूल क़ानून में, न ही 2018 के मोदी संशोधन में इस बवासीर एक्ट में किसी भी तरह की '75% दिए पैसों की रिकवरी' का कोई भी प्रावधान है ही नहीं।
हाँ, कभी-कभी कोर्ट को लगता है कि ये कुछ ज़्यादा ही हो गया तो वह आदेश दे सकती है, परंतु लाखों ऐसे केस के 99% मामलों में कोर्ट सरकार द्वारा चार्जशीट फाइल होने तक दी गई धनराशि की कोई रिकवरी नहीं करवाती। उसके लिए आरोपित को बाद में केस फाइल करना होता है, और अधिकांश समय लोग कोर्ट के झंझट में नहीं पड़ना चाहते।
यह केस मोदी एक्ट के सेक्शंस के तहत नहीं होता, वह अन्य IPC/BNS के माध्यम से होगा। यानी एक्ट में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। 3(1)(p), 3(1)(q) या 3(2)(i)–(ii) में स्पष्ट रूप से 'फ़र्ज़ी केस, फ़र्ज़ी साक्ष्य, फ़र्ज़ी सूचना' देने पर आप पर केस बनेगा, लेकिन यह प्रावधान केवल SC/ST लोगों के लिए है, ना कि अन्य भुक्तभोगियों के लिए। और यह मोदी जी ने ही 2015 में संशोधन करके डाला है। यानी, SC/ST पर केस करने के लिए यदि आपने ग़लत सूचना, प्रमाण का प्रयोग किया तो उसे सुरक्षा है, आपको नहीं।
उक्त चटुआ महोदय से आग्रह है कि हमें पुनः वीडियो में जन-गण-मन की धुन बजा कर समझाएँ कि नियम 12(4), 12(7) अथवा किसी अन्य एनेक्सर में 'ऑटोमैटिक रिकवरी' की बात है क्या? साथ ही, यह भी बताएँ कर्नाटक, इलाहाबाद एवं एकाध अन्य हाई कोर्ट के अलावा कुल कितने ऐसे केस हैं जिसमे कोर्ट्स ने ऐसे स्टार्ट-अप योजना के लाभार्थियों से अठन्नी भी वसूली है? आज तक कुल ऐसी रिकवरी 10-20 करोड़ भी नहीं होगी।
आपकी सूचना हेतु बता दूँ कि 8-10% कन्विक्शन रेट वाले इस कानून ने 2018 के बाद से 2024 तक 5.7 लाख लोगों के लिए ₹3650 करोड़ रुपए बाँटे हैं। 2.88 लाख केस पेंडिंग हैं कोर्ट्स में लेकिन पैसे 75% तक दे दिए जाते हैं।
₹3650 करोड़ का आँकड़ा केवल कन्विक्शन के बाद का नहीं है, यह आँकड़ा FIR, चार्जशीट के स्तर तक दी गई 75% धनराशि के साथ है। तो आप स्वयं कैलकुलेट कीजिए कि इसमें कितने हज़ार करोड़ झूठे केस करने वालों को दे दिए गए।
This is what one must fear. Judiciary conveniently looks at just one video, ignoring the video of the father boasting about his masculinity, and that of his friends’ attempt to lynch Swatantra.
Why are BJP leaders so anti Hindu ? 🚨
#Watch how BJPs national general sec Dushyant Gautam and incharge of Uttrakhand wiped of his Tilak ..as if it’s dirt !!
Just like how xtans or Mslms do
He is BJPs SC leader & the same one whose name keeps appearing in the infamous Ankita Bhandari murder case .
BJP is now taken over by all anti Hindus . It’s truly a party of blue and green now.
Nothing for Hindus in there ..
कैमरा ऑन है, गलत काम करता पकड़ा गया @narendramodi को कोर वोटर और 2:18 पर अचानक से ‘आपने मुझे गाली दी है, इतने लोग गवाह हैं’ बोल कर ‘मोदी एक्ट’ की धमकी दे रहा है।
और दुर्भाग्य है कि केस करेगा तो यही व्यक्ति अपना काम करने के कारण कोर्ट के चक्कर लगाएगा। एक ही डैश है मोदी जी, कितनी बार…
CRITICS ASK AMRUTA FADNAVIS "WHO IS SHE TO CERTIFY HOW INCLUSIVE HINDUS SHOULD OR SHOULDN'T BE?"
Critics have a right to ask. Sure. But forget Amrita Fadnavis SANATAN DHARMA itself has provided the answer in a proverb which defines its essence.
VASUDHAIVA KUTUMBAKAM
The world is one family.
Bharat is Secular BECAUSE Hindus are pluralists. We welcome all. But yes, don't take advantage of Hindu openness.