राज्यसभा मै आप नेता संजय सिंह का बड़ा बयान उन्होंने कहा
कांशीराम जी का नारा था, 'जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी भागीदारी'। आज मैं बड़ी विनम्रतापूर्वक आपसे पूछना चाहता हूँ, सुप्रीम कोर्ट के जजों में कितने पिछड़े समाज से हैं? कितने दलित समाज से हैं? कितने आदिवासी समाज से हैं? कितने समाज के वंचित तबके से आते हैं? नगण्य, उनकी
भागीदारी बिल्कुल शून्य है।
इसलिए न्याय अगर आप करना चाहते हैं, आज न्यायपालिका हो, कार्यपालिका हो, विधायिका हो, पत्रकारिता हो—सब में बराबर का प्रतिनिधित्व समाज के वंचित, शोषित, पिछड़े, दलित, आदिवासी तबके को देना होगा।
इसके साथ-साथ मैं अनुरोध यह भी सरकार से करना चाहता हूँ, न्याय की स्थापना तब होती है जब ऊपर से लेकर नीचे तक न्याय करता हुआ दिखे। लेकिन बड़े अफ़सोस की बात है, 15 साल की बच्ची से प्रधानमंत्री लड़ेंगे तो कैसे न्याय होगा?"
@SanjayAzadSln
राम मंदिर संचालन में केवल 350 करोड़ से ज्यादा का खर्च आया है।
मुझे नहीं समझ आ रहा है कि, खड़ाऊँ पहनकर पैदल चलने वाले संत 350 करोड़ कैसे खर्च कर दिए,
कोई गाड़ी भी नहीं है।
हालाँकि देश भर के पुरुष व महिला मज़दूरों व श्रमिक समाज की हालत में कोई अपेक्षित सुधार लाख कोशिशों के बावजूद अब तक देखने को नहीं मिलता है, और इसीलिये ’मज़दूर दिवस’ के महत्व को आज भी नकारा नहीं जा सकता है और इस मौके़ पर नित्य दिन जीवन संघर्षों में लगे मेहनतकश तबके़ के सभी लोगों को आज ’मई दिवस’ की बधाई तथा उन सबके थोड़े ’अच्छे दिन’ की फिर से शुभकामनायें।
वैसे तो देश निर्माण में मज़दूरों एवं सभी मेहनतकश समाज के लोगों का ज़बरदस्त योगदान रहता है और उनके इस महत्वपूर्ण योगदान को देखते हुये परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर ने देश की आज़ादी से पहले और फिर आज़ादी के बाद भी इन सबके लिये ख़ुश व ख़ुशहाल जीवन की गारण्टी सुनिश्चित करने का प्रयास किया था, किन्तु अब तो आउटसोर्सिंग, दैनिक वेतन भोगी तथा हायर एड फायर की प्रथा ने जीवन के हर पहलू में प्रचलित हो जाने से देश के मेहनतकश तबक़ों/समाज को नई मुसीबतों व रोज़गार अनिश्चितताओं का ज़बरदस्त सामना है, जिससे उसके परिवार को पालन-पोषण ही नहीं बल्कि उसकी शिक्षा-दीक्षा, स्वास्थ्य आदि पर भी बुरा प्रभाव पड़ता हुआ साफ दिखाई पड़ता है अर्थात् विकास की चाह में मज़दूरों का भविष्य ही नहीं बल्कि उनका व उनके परिवार का जीवन दाव पर लगा हुआ दिखता है, जो उचित नहीं प्रतीत होता है।
साथ ही, महिलाओं को इसके लिये वास्तव में सुरक्षित वातावरण नहीं मिल पाना भी भारत में चिन्ता का विषय बना हुआ है।
कुल मिलाकर, देश के विकास में मज़दूर/श्रमिक वर्ग की उचित भागीदारी सुनिश्चित हो, ऐसी आज मई दिवस पर सभी सरकारों से अपील है। वैसे भी बी.एस.पी. का संघर्ष उन्हीं मेहनतकश बहुजनों के हक़ के लिये समर्पित है और रहेगा।
सत्य, अहिंसा व मानवता के आदर्श ज्योति को दुनिया में फैलाकर भारत को जगदगुरु की विश्व ख्याति व सम्मान दिलाने वाले तथागत (भगवान) गौतम बुद्ध को आज उनकी जयन्ती पर शत्-शत् नमन व उनके अनुयाइयों को बुद्ध पूर्णिमा की हार्दिक बधाई एवं सुख, शान्ति व सौहार्द भरे जीवन की शुभकामनाएं।
तथागत गौतम बुद्ध के बताए रास्ते पर सही से चलकर लोगों के जीवन को सुखी व सम्पन्न बनाना ही सच्चा राजधर्म है, इससे भला कौन इंकार कर सकता है। लेकिन इसकी सार्थकता तभी संभव है जब सभी सरकारें अपनी कथनी व करनी में अन्तर ना आने दें और वही करें जो कहें एवं वही कहें जो कर पायें, तभी इससे सभी को प्रेरणा मिलेगी।
साथ ही, सरकारें ख़ासकर सभी धर्मों के मानने वालों के जान, माल व मज़हब की सुरक्षा सुनिश्चित करें तो यह तथागत गौतम बुद्ध को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
इतना ही नहीं बल्कि ’अप्प दीपो भवः’ अर्थात शिक्षित बनो, ख़ुद ऊपर उठो व अपना प्रकाश स्वयं बनो के सिद्धान्त से ही देश आत्मनिर्भर एवं महान बनेगा।
21 वी सदी में हमारा भारत बहुत तेजी से पाखंड वाद कि तरफ बढ़ रहा है। विश्व की निगाहें हमारे देश की तरफ है कि न जाने कब भारत विश्वगुरु बन जाएगा।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण को भारत अब बहुत तेजी से नकार रहा है क्योंकि ऐसे पाखंड फैलाने वालों को महामानव जी अपना भाई बताते हैं खुलेआम मंच से ,तो देश में उनके जबरदस्त समर्थक हैं जो इस पाखंडवाद का खुला समर्थन करते हैं वैसे भारत की कल्पना हमारे देश के लिए जान की कुर्बानी देने वाले वीर क्रांतिकारी सपूतों ने भी नहीं की होगी कि जहां विश्व AI से आगे की सोच रहा है वहां हम पाखंड को बढ़ावा दे कर विश्व गुरु बनने की सपना देख रहें हैं।
भारी सुरक्षा के बीच प्रयागराज के सारे भूत धीरेंद्र शास्त्री के दरबार में पहुँच चुके हैं
जिस देश में इस तरह के पाखंड को सुरक्षा के साथ मान्यता दी जाएगी वहाँ विज्ञान कभी जन्म नहीं ले सकता
बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष बहन मायावती जी के नेतृत्व में विश्वास रखने वाली ये भीड़ बता रही है कि 2027 में बहुजन समाज पार्टी की पूर्ण बहुमत की सरकार बनने जा रही है
देख रहे है 2390 करोड़ के मंदिर का ऐलान हो गया पिछड़े राज्य बिहार मेंलेकिन किसी हॉस्पिटल, यूनिवर्सिटी, फैक्ट्री, कारखाना का ऐलान नहीं हुआ, रोज़ी रोटी बाहर ही कमाओ बिहारियों, बस दर्शन करने बिहार में आना