@arungovil12 चुप्पी से बेहतर है समझदारी से कुछ बोलना।UGC के मुद्दे पर भी इंसानियत से गुजरते हुए ईमानदारी की सरहद से होते हुए दिल के दरवाजे तक पहुंचने की सलाह दीजिए। दिल तो वही है लेकिन नाराजगी में कहीं दरवाजे से ही न लौटना पड़ जाए।
@SrBachchan ये शब्द सुनकर पता नहीं क्यूं मै ये गीत सुनकर आगया..
आज को जुनली रात मा,
धरती पर है आसमां,
कोई तो बनके चांदनी,
उतरा मन के आंगना ।
. लता जी, रफी जी..
@RajatSharmaLive अकाट्य सत्य है। इतिहास भरा पड़ा है शूर वीर योद्धाओं का भले आज शांत चित्त सहयोगी बने हैं । आज उनके साथ भेदभाव गलत होगा तो वही होगा जो सच आपने कहा।
@RajatSharmaLive आप ��ो भी गणेश चतुर्थी की शुभकामनाएं,
आप अनेकता में एकता को बेबाकी से प्रस्तुत करें। भटके राजनेताओं से उनके भटकने का कारण अवश्य पूछ लें।
@SrBachchan इससे अच्छा तो यही था कुछ भी न बोलते लेकिन बोलना भी जरूरी था। इस पर ये शायरी याद आगई ...
कभी दिल करता है इधर देखूं
कभी दिल करता है उधर देखूं,
बड़ी मुश्किल में हूं यारों,
इधर देखूं, उधर देखूं, किधर देखूं?
@RajatSharmaLive भाव नहीं जिसके सीने में
लाखों लाश बिछा डाली,
आप कह र��े उनके ऊपर
उपवासों ने घाव किया?
शत शत प्रणाम उन वीरों को,
जो बस पन्नों तक सीमित हैं,
उन्हें भुलाना दुख की बात,
जो बापू को आराध्य किया।।
@SrBachchan सिर पर था, मां, पिता का साया
बिल्कुल था स्वछंद,
न था मन में कोई संशय,
न भविष्य का द्वंद्व,
अब जब दायित्वों में उलझा,
सुनने को बस चंद,
ऑफिस, घर अब बॉस कई हैं,
हुई बोलती बंद।
अपुन का चलेगाइच नई....dash dash..!